29/04/2026
पिछले दिनों एक हृदय विदारक घटना हुई, एक जवान बेटे ने छत से कूदकर कर आत्महत्या कर ली . लिखा कि पिता उसके शरीर को छूने भी ना पायें . सोचिए किस हद तक नफ़रत पाल बैठा था अपने ही जनक से. यह बेवजह नहीं था. पिता अपने सपने बेटा के कंधे पर बैठकर पूरा करना चाहता था. अधिकतर मध्यमवर्गीय ख़ासकर सरकारी नौकरी पेशा वाले पिता इस बीमारी से पीड़ित हैं व अपने बेटों का जीवन जहन्नुम बनाये हुए हैं. कोटा इसका एक परफ़ेक्ट उदाहरण है जहाँ जवान होते बच्चे अपने पिता के सपनों को पूरा करने के लिए मौत को गले लगा ले रहे हैं.
कई लोगों की पोस्ट पढ़ी इस पर . लोगों ने बोला की लड़का बुझदिल था, माँ बाप भगवान होते हैं. लेकिन सोचिए १५ साल पूराने घटना को बच्चे ने आधार बनाया आत्महत्या के लिए. १५ साल में भगवान रूपी पिता ने उसे ऐसा कुछ भी महसूस नहीं करा पाया जिससे वो इस घटना को भूल सके.
Parental care प्रकृति प्रदत्त गुण है जो पशु पक्षियों में भी होता है और वे बखूबी इसका पालन करते हैं. पहले चित्र में गौरैया का घोंसला है मेरी खिड़की पर . रोज देखता हूँ नर और मादा गौरैया को दिन भर अपने बच्चों के लिए मेहनत करते . जब कि उसे पता है कि मनुष्यों की तरह ये बुढ़ापे में कोई सेवा नहीं करने वाले . इन्हें देखकर लगता है कि मानव माँ पिता के रूप में इनसे निम्नतर हो है .
ख़लील जिब्रान अपने एक कविता में कहते हैं कि बच्चे तुम्हारी संपत्ति नहीं हैं . तुम बस एक ज़रिया हो उन्हें दुनिया में लाने का . मालिक मत बनो . सहयोगी बनो नहीं तो एेसे ही घटनाओं में युवाओं की जान जाती रहेगी.
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