01/08/2026
थोरेसिक आउटलेट सिंड्रोम (TOS) एक ऐसी मेडिकल कंडीशन है जिसमें कॉलरबोन (हसली की हड्डी) और पहली पसली (first rib) के बीच की जगह में मौजूद नसें (nerves) या खून की नसें (blood vessels) दब जाती हैं।
इसके मुख्य लक्षण ये हैं:
गर्दन, कंधे और बांह में दर्द होना।
हाथों और उंगलियों में सुन्नपन (numbness) या झुनझुनी महसूस होना।
ग्रिप कमजोर होना या हाथ ठंडे पड़ना।
यह दर्द वाकई बहुत तकलीफदेह होता है। लेकिन सही वक्त पर मेडिसिन और फिजियोथेरेपी से इसमें बहुत बेहतरीन रिकवरी हो जाती है।
1. मेडिसिन (Medicines)
Pain Relievers & NSAIDs: दर्द और सूजन को कम करने के लिए दी जाती हैं।
Muscle Relaxants: गर्दन और कंधे की खिंची हुई मांसपेशियों (spasms) को रिलैक्स करने के लिए।
Blood Thinners: अगर खून की नसों में थक्का बनने का रिस्क (Vascular TOS) हो, तो एंटी-कोआगुलेंट्स दी जाती हैं।
2. फिजियोथेरेपी (Physiotherapy)
Posture Correction: झुके हुए कंधों की पोजीशन सही करना ताकि थोरेसिक आउटलेट का स्पेस बढ़े और नसों पर दबाव कम हो।
Stretching Exercises: गर्दन (Scalenes) और सीने (Pectoralis) की जकड़ी हुई मसल्स की स्ट्रेचिंग।
Scapular Strengthening: पीठ के ऊपरी हिस्से और शोल्डर ब्लेड की मांसपेशियों को मजबूत करना।
Nerve Gliding Exercises: दबी हुई नसों की मोबिलिटी (flexibility) सुधारना ताकि हाथ की झुनझुनी और सुन्नपन दूर हो सके।
नोट: लगभग 90% से ज्यादा मामलों में सिर्फ फिजियोथेरेपी और सही पोस्चर से ही मरीज बिना सर्जरी के पूरी तरह ठीक हो जाते हैं।
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