29/07/2026
बवासीर (Piles) के मुख्य कारण – जानिए क्यों होती है यह समस्या?
आज के समय में बवासीर (Piles/Hemorrhoids) एक बहुत ही सामान्य लेकिन परेशानी पैदा करने वाली समस्या बन चुकी है। पहले इसे केवल अधिक उम्र के लोगों की बीमारी माना जाता था, लेकिन आजकल युवा वर्ग भी बड़ी संख्या में इस समस्या से प्रभावित हो रहा है। इसका सबसे बड़ा कारण बदलती जीवनशैली, गलत खान-पान, लंबे समय तक बैठे रहना और कब्ज की समस्या है।
बवासीर में गुदा (A**l Canal) और मलाशय (Re**um) के आसपास की नसों में सूजन आ जाती है, जिससे दर्द, जलन, खुजली, शौच के समय खून आना या मस्से जैसी समस्या हो सकती है। यदि समय रहते इसके कारणों को समझ लिया जाए और जीवनशैली में सुधार कर लिया जाए, तो काफी हद तक इस समस्या से बचा जा सकता है।
1. लंबे समय तक कब्ज रहना
बवासीर का सबसे प्रमुख कारण कब्ज है। जब मल लंबे समय तक आंतों में रुका रहता है तो वह कठोर हो जाता है। कठोर मल को बाहर निकालने के लिए व्यक्ति को अधिक जोर लगाना पड़ता है, जिससे गुदा की नसों पर दबाव बढ़ता है और धीरे-धीरे वे सूजकर बवासीर का रूप ले सकती हैं।
2. शौच के समय अधिक जोर लगाना
बहुत से लोग शौच करते समय आवश्यकता से अधिक जोर लगाते हैं। ऐसा बार-बार करने से गुदा की रक्त वाहिकाओं पर अत्यधिक दबाव पड़ता है और वे फैलने लगती हैं। यही स्थिति आगे चलकर बवासीर का कारण बन सकती है।
3. लंबे समय तक बैठे रहना
ऑफिस में घंटों कंप्यूटर के सामने बैठकर काम करना, लगातार वाहन चलाना या पूरे दिन बैठकर काम करने की आदत भी बवासीर का जोखिम बढ़ा सकती है। लगातार बैठने से पेल्विक क्षेत्र की नसों पर दबाव बना रहता है।
4. फाइबर युक्त भोजन की कमी
यदि भोजन में फल, हरी सब्जियां, सलाद, साबुत अनाज और दालों की मात्रा कम है, तो कब्ज की संभावना बढ़ जाती है। फाइबर मल को नरम रखने में मदद करता है और आसानी से शौच होने देता है।
5. पर्याप्त पानी न पीना
दिनभर कम पानी पीने से शरीर में पानी की कमी हो सकती है, जिससे मल कठोर होने लगता है। यह कब्ज और फिर बवासीर का कारण बन सकता है।
6. मोटापा
अधिक वजन होने से पेट और पेल्विक क्षेत्र पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। यही दबाव गुदा की नसों को प्रभावित कर सकता है और बवासीर होने की संभावना बढ़ा सकता है।
7. गर्भावस्था
गर्भावस्था के दौरान बढ़ता हुआ गर्भाशय पेल्विक नसों पर दबाव डालता है। साथ ही हार्मोनल परिवर्तन और कब्ज की समस्या भी आम होती है। इसलिए गर्भवती महिलाओं में बवासीर अपेक्षाकृत अधिक देखी जाती है।
8. बार-बार दस्त होना
सिर्फ कब्ज ही नहीं, बल्कि लंबे समय तक दस्त (Chronic Diarrhea) रहना भी गुदा क्षेत्र में बार-बार जलन और दबाव पैदा करता है, जिससे बवासीर विकसित हो सकती है।
9. भारी वजन उठाना
जो लोग नियमित रूप से बहुत भारी वजन उठाते हैं या बिना सही तकनीक के भार उठाते हैं, उनमें पेट के अंदर दबाव बढ़ जाता है। यह भी बवासीर का एक जोखिम कारक माना जाता है।
10. बढ़ती उम्र
उम्र बढ़ने के साथ गुदा और मलाशय की नसों एवं सहायक ऊतकों की मजबूती कम होने लगती है। यही कारण है कि अधिक उम्र के लोगों में बवासीर अपेक्षाकृत अधिक देखी जाती है।
11. आनुवंशिक कारण
यदि परिवार में माता-पिता या भाई-बहनों को बवासीर की समस्या रही है, तो कुछ लोगों में इसका जोखिम सामान्य से अधिक हो सकता है। हालांकि सही जीवनशैली अपनाकर इस जोखिम को कम किया जा सकता है।
12. शौच की गलत आदतें
कई लोग शौचालय में लंबे समय तक बैठे रहते हैं और मोबाइल फोन का उपयोग करते रहते हैं। इससे गुदा की नसों पर अनावश्यक दबाव बना रहता है। शौच के लिए केवल आवश्यक समय ही दें।
बवासीर के शुरुआती लक्षण
- शौच के समय खून आना
- गुदा के आसपास खुजली या जलन
- दर्द या असुविधा
- गुदा के पास मस्सा या सूजन महसूस होना
- शौच के बाद भी पेट पूरी तरह साफ न होने का एहसास
इन लक्षणों को कभी भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए, क्योंकि हर बार मलद्वार से खून आने का कारण केवल बवासीर नहीं होता। कुछ अन्य गंभीर बीमारियां भी ऐसे लक्षण पैदा कर सकती हैं, इसलिए उचित जांच आवश्यक हो सकती है।
बचाव कैसे करें?
- प्रतिदिन 2–3 लीटर पानी पिएं।
- भोजन में फाइबर की मात्रा बढ़ाएं।
- नियमित व्यायाम करें।
- कब्ज होने पर समय रहते उपचार कराएं।
- शौच के समय अधिक जोर न लगाएं।
- लंबे समय तक लगातार बैठने से बचें।
- वजन को नियंत्रित रखें।
- शौच की इच्छा को कभी न रोकें।
- शौचालय में मोबाइल का उपयोग कम करें और अनावश्यक देर तक न बैठें।
निष्कर्ष
बवासीर कोई ऐसी बीमारी नहीं है जिससे घबराया जाए, लेकिन इसे हल्के में लेना भी सही नहीं है। अधिकांश मामलों में इसके पीछे जीवनशैली और खान-पान की गलत आदतें होती हैं। यदि समय रहते कारणों को समझकर सुधार किया जाए, तो इस समस्या से बचाव संभव है। यदि खून आना, तेज दर्द, बार-बार समस्या होना या मस्से बाहर आना जैसी शिकायत हो, तो योग्य चिकित्सक से परामर्श अवश्य लें। सही समय पर उपचार और स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर अधिकांश लोग सामान्य जीवन जी सकते हैं।
स्वस्थ रहें, संतुलित आहार लें और अपने पाचन तंत्र का विशेष ध्यान रखें।
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