30/06/2026
साधना या सिर्फ इंस्टाग्राम का एल्गोरिदम? "साधना ज़ीरो, रील पाँच... मंत्र नहीं आता, पर हैशटैग सब आते हैं।" 🤦♂️📸
आजकल सोशल मीडिया पर कामाख्या से लौटने वाले दो तरह के लोग दिखते हैं। एक वो जो सच में रूपांतरित होकर लौटते हैं, और दूसरे वो 'कैमरा-जीवी सिद्ध पुरुष' जो सिर्फ 2 लाख व्यूज और 'चुना हुआ हूँ मैं' वाले रील्स बनाने के लिए कामाख्या जाते हैं।
चेहरे पर भस्म घिस लेने से, आंखों में काजल लगा लेने से या ₹500 का नोट थमाकर किसी भी अनजान व्यक्ति के साथ स्लो-मोशन वीडियो बना लेने से दीक्षा नहीं होती! अध्यात्म कोई सोशल मीडिया का चटक या ड्रामा नहीं है।
कामाख्या आपको बदलने की भूमि है, उसे अपनी रील्स का बैकग्राउंड (Background) मत बनाइए। असली साधक की पहचान यही है कि वो कभी ढिंढोरा नहीं पीटता।
सोच लो तुम किस तरफ़ हो—दिखावे की तरफ या सच्ची साधना की तरफ?
👇 इस पाखंड का पूरा चेहरा देखने के लिए वीडियो को अंत तक देखें और सनातन की पवित्रता के लिए इसे ज़्यादा से ज़्यादा शेयर करें!
**raSadhana