19/11/2025
बथुआ: पौष्टिक सब्ज़ी ही नहीं, एक असरदार आयुर्वेदिक औषधि भी
बथुआ हर सब्ज़ी मंडी में आसानी से मिल जाता है और देश भर में लोग इसका सेवन करते हैं। अधिकतर लोग इसे सिर्फ़ साग की तरह खाते हैं, लेकिन बहुत कम लोगों को पता है कि बथुआ एक प्रभावशाली औषधि भी है। आयुर्वेद में बथुआ को कई रोगों में लाभकारी माना गया है और इसका प्रयोग विभिन्न उपचारों में किया जाता है।
यह साधारण दिखने वाला हरा पौधा शरीर के लिए कितना उपयोगी है, आइए इसे विस्तार से समझते हैं।
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बथुआ क्या है?
बथुआ एक महत्त्वपूर्ण और स्वास्थ्यवर्धक शाक है। इसकी पत्तियाँ
शीतादरोधी (Antiscorbutic) और पूयरोधी (Antidiuretic) मानी जाती हैं।
इसमें पाए जाने वाले विभिन्न लवण व क्षार इसे पेट से जुड़ी समस्याओं तथा अन्य कई रोगों में लाभकारी बनाते हैं।
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बथुआ के नाम विभिन्न भाषाओं में
बथुआ का वानस्पतिक नाम Chenopodium album Linn. है।
देशभर में इसे अलग-अलग नामों से जाना जाता है, जैसे—
हिंदी: बथुआ, बथुया, चिल्लीशाक, बथुआ साग
अंग्रेज़ी: Allgood, Bacon w**d, Frost-bite, Wild spinach, Wild goose foot, Lamb’s Quarters
संस्कृत: वास्तूक, क्षारपत्र, चक्रवर्ति, चिल्लिका, क्षारदला
कन्नड़: विलिय चिल्लीके, चक्रवत्ति
गुजराती: टांको, बथर्वो
तमिल: परुपकिराई
तेलुगु: पप्पुकुरा
बंगाली: बेतुया, चंदन बेथू
पंजाबी: बाथु, लुनाक
मराठी: चाकवत, चकवत
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बथुआ के फायदे — औषधीय उपयोग और तरीके
अब जानते हैं कि बथुआ किन रोगों में कैसे लाभ देता है और इसका प्रयोग कैसे किया जाता है।
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1. रक्तपित्त (नाक-कान से खून बहना)
नाक या कान से खून बहने की समस्या में—
1–2 ग्राम बथुआ बीज का चूर्ण,
इसे शहद के साथ मिलाकर देने से लाभ होता है।
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2. दांत दर्द और मसूड़ों की सूजन
बथुआ बीज का चूर्ण दांतों पर रगड़ने से
दांत का दर्द कम होता है और मसूड़ों की सूजन भी घटती है।
उबले हुए बथुआ पत्तों को पीसकर सूजन वाले हिस्से पर लगाने से
सूजन में आराम मिलता है।
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3. पेट के कीड़े खत्म करना
5 ml बथुआ रस में थोड़ा नमक मिलाकर पिएँ—
इससे पेट के कीड़े नष्ट होते हैं।
बथुआ में मौजूद केरिडोल भी आंतों के कीड़े और केंचुओं को खत्म करने में मददगार है।
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4. ल्यूकोरिया (सफेद पानी) में लाभ
ल्यूकोरिया से पीड़ित महिलाओं के लिए—
1–2 ग्राम बथुआ की जड़,
इसे पानी या दूध में पकाकर 3 दिन तक पिएँ।
इससे राहत मिलती है।
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निष्कर्ष
बथुआ सिर्फ़ एक सब्ज़ी नहीं, बल्कि कई औषधीय गुणों वाला पौधा है।
यह रक्तपित्त, दांत दर्द, सूजन, पेट के कीड़े और ल्यूकोरिया जैसे विभिन्न समस्याओं में लाभ देता है।
इसके पोषक तत्व शरीर को ताकत देते हैं और इसे सर्दियों में विशेष रूप से खाना चाहिए।