02/06/2026
🔱 चैतन्य कुंडलिनी यात्रा • भाग ५ 🔱
स्थिर बैठना इतना कठिन क्यों है?
क्या आपने कभी प्रयास किया है —
केवल 5 मिनट
शांत बैठने का?
अचानक यादें आने लगती हैं।
अधूरे काम याद आते हैं।
मन इधर-उधर भागने लगता है।
तब समझ आता है —
समस्या बाहर के शोर की नहीं,
भीतर की गति की है।
अधिकांश लोग सोचते हैं कि
ध्यान का अर्थ है मन को रोक देना।
किन्तु ध्यान की शुरुआत
मन को देखने से होती है।
जब आप बैठते हैं,
तो पहली बार दिखाई देता है —
भीतर कितना कुछ निरंतर चल रहा है।
और यही देखना
जागरण का प्रथम चरण है।
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भागना सरल है।
देखना साधना है।
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अगले भाग में — विचारों के बीच का मौन।
क्या वह वास्तव में मौजूद है?
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आत्मबोधः सर्वप्रश्नानां परान्तः।
— चैतन्य स्वामी
SHREEM CHAITANYAA YOGA 🇮🇳