S.K. INDIA

S.K. INDIA Contact information, map and directions, contact form, opening hours, services, ratings, photos, videos and announcements from S.K. INDIA, Jaipur.

More info.-7733910982
14/04/2026

More info.-7733910982

Big   Mr.   Verma Sir ❤️**Only 1 Month   - 47000/-**खुलकर* 😊जीना है *तो* 💫*दुनिया* क्या *सोचेगी* 🤔ये कभी मत *सोचना* 💭💖*स...
27/03/2026

Big Mr. Verma Sir ❤️*

*Only 1 Month - 47000/-*

*खुलकर* 😊
जीना है *तो* 💫
*दुनिया* क्या *सोचेगी* 🤔
ये कभी मत
*सोचना* 💭💖

*सही #प्लेटफॉर्म मिलने के बाद #मेहनत का फल जरुर मिलता है*

Thanks Ashvini Ji Sir ❤️ 🙏
Thanks Aakash Ji Sir ❤️ 🙏
Thanks Jaynarayan sir ❤️🙏
Power Of Team ❤️ 🙏

Kumar
Team TGC Call 🤙 7733910982


साथियों नमस्कार 🙏मेरा नाम सुनील कुमार है मैं पिछले कई सालों से नेटवर्क मार्केटिंग कंपनी में वर्क कर रहा था लेकिन वहां से...
25/03/2026

साथियों नमस्कार 🙏
मेरा नाम सुनील कुमार है मैं पिछले कई सालों से नेटवर्क मार्केटिंग कंपनी में वर्क कर रहा था लेकिन वहां से दूर दूर कोई अचीवमेंट नहीं मिल रहा था मैं बिल्कुल हताश हो चुका था
लेकिन कहा जाता है
मेहनत का फल
आज नहीं तो कल
ज़रूर मिलता है
और साथियों बताते हुए बहुत खुशी हो रही है कि आज से 4 महीने पहले मैने
🌹 TGC 🌹
के साथ एक नई शुरुआत की और सिर्फ़ 3 महीने में मेरी टोटल इनकम
2,50,000 हज़ार 1 महीने की इनकम की बात करे तो 83,333/-

🔥 POWER OF TGC 🔥

Thanks Ashwini Chaudhari sir 🔥🙏🙏
Thanks Akash Rao Sir 🔥🙏🙏
Thanks Jaynarayan sir 🔥🙏🙏

More info-7733910982

23/03/2026

अगर आप भी अपने काम के साथ या घर बैठे सिर्फ फोन चला कर रोज कुछ पैसा कमाना चाहते है तो संपर्क कर सकते है

7733910982

"मैंने उसे 9 महीने पेट में रखा था। आज — मैं ख़ुद कह रही हूं — उसे जान से मार दो।"एक मां को — यह कभी नहीं कहना चाहिए। लेक...
20/03/2026

"मैंने उसे 9 महीने पेट में रखा था। आज — मैं ख़ुद कह रही हूं — उसे जान से मार दो।"
एक मां को — यह कभी नहीं कहना चाहिए। लेकिन निर्मला राणा ने कहा और सुप्रीम कोर्ट ने इजाजत भी दे दी।

आज 11 मार्च 2026
भारत के इतिहास में पहली बार इच्छामृत्यु की इजाजत
सबसे दर्दनाक और सबसे मानवीय फैसला।

कहानी शुरू होती है-20 अगस्त 2013। राखी का दिन। चंडीगढ़।
एक लड़का। 19 साल का। पंजाब यूनिवर्सिटी का छात्र।
बी टेक सिविल इंजीनियरिंग। टॉपर। होनहार। सपनों से भरा।

सुबह —बहन से राखी बंधवाई थी।
और शाम को -पीजी के चौथी मंजिल की बालकनी से — गिर गया।
धड़ाम। खून। फटा हुआ सिर।
एमरजेंसी सर्जरी। आईसीयू। वेटिंलेटर।

डॉक्टर बाहर निकले-
अशोक राणा — हरीश के पिता — खड़े हो गए।
निर्मला — हाथ जोड़े — आगे बढ़ी।
डॉक्टर ने कहा —
"बेटा बच गया है।"
एक पल के लिए — दोनों की साँस रुक गई।
फिर — राहत की सांस ली।
लेकिन डॉक्टर ने आगे कहा —
"...लेकिन ट्राउमैटिक ब्रेन इंजरी है।
क्वाड्रीप्लेजिया है। 100% अपंगता।
परसिस्टेंट वेजिटेटिव स्टेट में है
मतलब —जिंदा तो है —
लेकिन — कभी होश में नहीं आएगा।"

उस पल —
निर्मला के हाथ से —
दीवार का सहारा छूट गया।

और वो —
ज़मीन पर —
बैठ गई।

क्योंकि —
वो समझ गई थी —
कि जिस बेटे को उसने खोया —
वो कभी वापस नहीं आएगा।

अब ज़रा समझिए —परसिस्टेंट वेजिटेटिव स्टेट क्या होता है
कल्पना कीजिए —
आपका बेटा — आपके सामने लेटा है।
आंखें खुली हैं। कभी-कभी पलकें झपकती हैं।

लेकिन —
वो आपको देख नहीं सकता।
आपकी आवाज़ सुन नहीं सकता।
आपको पहचान नहीं सकता।
उसका दिमाग — काम नहीं कर रहा।
उसका शरीर — सिर्फ़ सांस ले रहा है।

वो — ज़िंदा लाश है।

और सबसे दर्दनाक —
वो न ज़िंदा है — न मुर्दा।
वो — एक ऐसी जगह में फंसा है —
जहां से —
न वापस आ सकता है — न आगे जा सकता है।

---
13 साल। 4,745 दिन। 1,13,880 घंटे।

कल्पना कीजिए —
आप रोज़ सुबह उठते हो।
और अपने बेटे के पास जाते हो।
वो — बिस्तर पर लेटा है।
फीडिंग ट्यूब नाक में लगी है। ट्रैकियोस्टॉमी ट्यूब गले में है।

शरीर पर —बेडसोर्स — गहरे घाव — जो कभी ठीक नहीं होते।

---
आप — उसके शरीर को पलटते हो। ताकि और घाव न बनें।
आप — उसे साफ़ करते हो। डायपर बदलते हो।
आप — फीडिंग ट्यूब से खाना डालते हो।

एक या दो दिन नहीं। महीना-2 महीना नहीं, साल-2 साल भी नहीं।

13 साल, 4,745 दिन। 1,13,880 घंटे।

और वो —
कुछ नहीं बोलता।
कुछ नहीं महसूस करता।
कुछ नहीं समझता।

और आप —
हर रोज़ —
यही सोचते हो —

"क्या मेरा बेटा — कहीं अंदर — फंसा हुआ है?
क्या वो — मुझे पुकार रहा है?
क्या वो — कह रहा है — मुझे छोड़ दो?"

लेकिन —
आपको कोई जवाब नहीं मिलता।
---
अब ज़रा — माँ के दर्द को समझिए

निर्मला राणा —
13 साल से —
रोज़ — अपने बेटे को मरते हुए देख रही है।

वो रोज़ सुबह —
हरीश के कमरे में जाती है।
पहले — खिड़की खोलती है। ताकि रोशनी आए।
फिर — हरीश के चेहरे को देखती है।

कभी-कभी — उसकी पलकें झपकती हैं।

और निर्मला को — एक पल के लिए — लगता है —

"शायद आज — वो आँख खोल दे।"

लेकिन —

वो कभी नहीं खोलता।

---
फिर — निर्मला उससे बातें करती है।
मौसम के बारे में। परिवार के बारे में। आने वाले मेहमानों के बारे में।
---
कभी-कभी —गुस्सा होकर डांटती भी है —

"तुमने खाना ठीक से नहीं खाया।"

ताकि एक पल के लिए — वो भूल सके — कि बेटा सुन नहीं सकता।

निर्मला कहती हैं —

"मैंने उसे 9 महीने पेट में रखा था।
हर किक पर — मैं ख़ुश होती थी।
जब वो पैदा हुआ — मैंने उसे गोद में लिया था।
वह जीवन का सबसे सुखद दिन था

मुझे याद है —जब बड़ा हुआ, वो शीशे के सामने खड़ा होकर — अपनी बाजुओं को मोड़ कर दिखाता था।

पंजाब यूनिवर्सिटी में था। आईआईटी जाना चाहता था।

और आज —
वो बिस्तर पर — पत्थर की तरह — पड़ा है।

मैं ही कह रही हूं —
उसे मुक्त कर दो।
और जब निर्मला यह कहती है —
तो —
आपकी रूह कांप जाती है।
क्योंकि —
एक माँ — कभी अपने बेटे की मौत नहीं मांगती।
लेकिन —
जब ज़िंदगी — मौत से भी बदतर हो जाए —
तो मौत — राहत बन जाती है।

अशोक राणा —
हरीश के पिता।
हर रोज़ —
वो हरीश के पास बैठते हैं।
उसके हाथ पकड़ते हैं।

और धीरे से कहते हैं —
'तुम बहुत बहादुर बच्चा है'

और हरीश —कभी कभी पलकें भी झपकाता है।
लेकिन — वो सुनता है या नहीं — कोई नहीं जानता।

अशोक ने कहा —
उसके सपने थे। योजनाएं थीं।
वो आईआईटी जाना चाहता था। आईएएस बनना चाहता था।

और आज —
वो बिस्तर पर पड़ा है।
13 साल से।
हमने सब कुछ किया।
घर गिरवी रखा। जमीन बेची। ज़ेवर बेचे।
लाखों रुपये ख़र्च किए।

लेकिन —
कुछ नहीं हुआ।

और अब —
हम अदालत में गए —
हम छोड़ना नहीं चाहते थे —
लेकिन — हम संभाल भी नहीं पा रहे थे।"

और यह वाक्य —
"We were forced into court not because we wanted to let go, but because we could no longer hold on।"

यह — सिर्फ़ एक वाक्य नहीं है।
यह — एक पिता की चीख़ है।

आशीष — हरीश का छोटा भाई।
जब हरीश का हादसा हुआ — आशीष 14 साल का था।
आज — वो 27 साल का है।
लेकिन — उसकी अपनी ज़िंदगी — पॉज पर है।
हर 2 घंटे — भाई को पलटना। ताकि और घाव न बनें।
हर दिन — साफ़ करना। डायपर बदलना। ट्यूब से खाना डालना।

जुलाई 2024 — जब पिता ने वो किया — जो कोई नहीं करना चाहता
अशोक राणा — दिल्ली हाईकोर्ट गए।
याचिका दायर की।
"हमारे बेटे को — निष्क्रिय इच्छामृत्यु (पैसिव यूथेनेसिया) की अनुमति दी जाए।"
कोर्ट ने कहा — "नहीं। फीडिंग ट्यूब लाइफ सपोर्ट नहीं है। यह हटाना — एक्टिव यूथेनेसिया होगा — जो अवैध है।"

निर्मला — कोर्ट के बाहर — रोती रही।
अगस्त 2024 — सुप्रीम कोर्ट का पहला दरवाज़ा
सीजेआई डी वाई चंद्रचूड़ की बेंच। उन्होंने भी — मना कर दिया।
लेकिन — कहा — "यूपी सरकार— इस परिवार की मदद करो।"
फिजियोथेरेपी। नर्सिंग केयर। मुफ्त दवा की व्यवस्था करे।
लेकिन — हरीश ठीक नहीं हुआ।
क्योंकि — जो ठीक हो ही नहीं सकता — उसे मदद से कैसे ठीक करोगे?
नवंबर 2024 —सीजेआई चंद्रचूड़ का आख़िरी दिन
रिटायरमेंट का दिन।
और उन्होंने — एक ख़ास निर्देश दिया —
"यूपी सरकार— हरीश के सारे मेडिकल खर्च वहन करो। यह परिवार टूट चुका है।"

दिसंबर 2025 - जनवरी 2026 — अब न्यायाधीश इस मामले को दिल से सुनने लगे
जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस केवी विश्वनाथन की बेंच।
11 दिसंबर — "प्राइमरी मेडिकल बोर्ड बनाओ।"
18 दिसंबर — "एम्स से सेकेंडरी बोर्ड चाहिए।"
एम्स की रिपोर्ट आई।
जजों ने पढ़ी।
और जस्टिस पारदीवाला ने कहा —
'हम इस बच्चे को इस हाल में नहीं रख सकते।'

13 जनवरी 2026।
जजों ने — खुद — मां बाप से मिलना चाहा।
उनसे पूछा — "आप सच में यह चाहते हो?"
और निर्मला — रोते हुए — बोली —
"हां। मैं चाहती हूं — मेरा बेटा मुक्त हो।"
जजों की आंखों में — नमी आ गई।
क्योंकि — वो सिर्फ़ जज नहीं थे। वो — पिता थे। इंसान थे।
15 जनवरी। अंतिम सुनवाई बहस हुई और फैसला सुरक्षित रखा गया।
और फिर — लगभग 2 महीने का इंतज़ार।
11 मार्च 2026। सुबह 10:30 बजे। जब इतिहास बना।
सुप्रीम कोर्ट। खचाखच भरा कोर्ट रूम।
जस्टिस पारदीवाला ने फैसला पढ़ना शुरू किया।

शेक्सपीयर ने कहा था—
"To be, or not to be — that is the question।"

फिर —हेनरी वार्ड बीचर का वह कोट—
"ईश्वर मनुष्य से यह नहीं पूछते कि वह जीवन स्वीकार करता है या नहीं।
लेकिन — जब जीवन — जीवन नहीं रहता — तो क्या — मृत्यु का अधिकार नहीं होना चाहिए?"

और जस्टिस ने कहा —
"हरीश राणा को — निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी जाती है।"

कोर्ट रूम में — सन्नाटा।
अशोक और निर्मला — एक-दूसरे को देखा। और — रो पड़े।

कोर्ट ने क्या लिखा — जो हर मां-बाप के दिल में उतर गया
जस्टिस ने लिखा —
"हरीश राणा, जिसकी उम्र 32 साल है, जो एक युवा था, तेजस्वी बच्चा था।
उसके परिवार ने कभी उसका साथ नहीं छोड़ा।
किसी को प्यार करना, उसका ख्याल रखना है— बहुत से बहुत बुरे वक्त में भी।"

यह वाक्य — हर मां-बाप की कहानी है।
क्योंकि — प्यार — सिर्फ़ ख़ुशियों में नहीं होता।
प्यार — अंधेरे में भी होता है।
निर्मला और अशोक ने — 13 साल — बिना किसी उम्मीद के — अपने बेटे को संभाला।
यही है — असली प्यार।
अब — क्या होगा?

कोर्ट ने निर्देश दिया —
✅ एम्स पैलियाटिव केयर यूनिट में भर्ती करो
✅ धीरे-धीरे— खाना खिलाने वाला ट्यूब हटाओ
✅ क्लिनिकली एडमिनिस्टर्ड न्यूट्रिशन बंद करो
✅ सम्मान से — प्राकृतिक मौत आने दो
✅ 30-दिन की पुनर्विचार अवधि — माफ
मतलब — बिना देरी के — यह प्रक्रिया शुरू हो सकती है।

यह पहला केस क्यों है?
2011 — अरुणा शानबाग मामला — पैसिव यूथेनेशिया को कानूनी बनाया।
2018 — कॉमन कॉज मामला — विस्तृत दिशानिर्देश बनाए।
लेकिन — आज — पहली बार — इन दिशानिर्देशों को लागू किया गया।
यह — भारत का पहला स्वीकृत पैसिव यूथेनेशिया मामला है।
हरीश की मौत — कत्ल नहीं।
हरीश की मौत — मुक्ति है।
अब — दर्शनशास्त्र की बात
संविधान के अनुच्छेद 21 में — "गरिमा के साथ जीने का अधिकार" है।
और कोर्ट ने कहा —
"अगर जीवन में सम्मान है — तो मृत्यु में भी सम्मान होना चाहिए।"
विक्टर फ्रैंकल — नाजी कैंप से बचे — उन्होंने लिखा था —
"मनुष्य से सब कुछ छीना जा सकता है सिवाय एक चीज़ के:
मानवीय स्वतंत्रता का अंतिम अधिकार — अपनी मनोवृत्ति चुनने का।"
और हरीश के मामले में — उसके माँ-बाप ने — उसकी तरफ़ से — यह आज़ादी चुनी।
अब — आपसे सवाल
कल्पना कीजिए — यह आपके साथ हो।
आपका बेटा। आपकी बेटी।
13 साल — बिस्तर पर। न होश। न हलचल। न उम्मीद।
आप क्या करते?
13 साल इंतजार करते?
या — यह फैसला ले पाते — कि — उसे मुक्त कर दो?
यह — सबसे कठिन फ़ैसला है।
क्योंकि — एक तरफ़ — ज़िंदगी की उम्मीद है।
दूसरी तरफ — मौत की राहत है।
और बीच में — एक इंसान — फँसा हुआ है।

निर्मला का आख़िरी संदेश
"मैं चाहती हूँ — कि कोई और माँ — यह दर्द न झेले।
13 साल अदालत में नहीं लड़ना चाहिए।
क्योंकि — हर दिन — एक सज़ा है। हर रात — एक यातना है।
और जब आप जानते हो — कि कोई उम्मीद नहीं —
तो — क्यों न — उसे शांति से जाने दो?"
सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से कहा
"पैसिव यूथेनेसिया पर — ठोस क़ानून बनाओ।
हर परिवार — 13 साल नहीं लड़ सकता।"

अंत में
यह सिर्फ एक लिगल केस नहीं है।
यह — एक परिवार का 13 साल का दर्द है।
यह — एक मां की चीख है।
यह — एक बेटे की मुक्ति है।

"ओम शांति। हरीश को मुक्ति मिले।" 🙏

यह पोस्ट हर वो इंसान — जो सोचता है कि "सम्मान से मरने का अधिकार" एक बहस है —उन तक पहुंचे।
🙏💔🕊️

कौनसी चेन टूटने से पत्थर नीचे गिरेगा........see more
28/01/2026

कौनसी चेन टूटने से पत्थर नीचे गिरेगा........see more

साथियों नमस्कार 🙏मेरा नाम आकाश रॉव है मैं कई सालों से नेटवर्क मार्केटिंग कंपनी में वर्क कर रहा था लेकिन वहां से दूर दूर ...
26/12/2025

साथियों नमस्कार 🙏
मेरा नाम आकाश रॉव है मैं कई सालों से नेटवर्क मार्केटिंग कंपनी में वर्क कर रहा था लेकिन वहां से दूर दूर तक मेरे कोई सपने पूरे नहीं हो रहे थे मैं बिल्कुल हताश हो चुका था
लेकिन कहा जाता है
मेहनत का फल
आज नहीं तो कल
ज़रूर मिलता है
और साथियों बताते हुए बहुत खुशी हो रही है कि आज से 5 महीने पहले मैने TEAM GAME CHANGER के साथ एक नई शुरुआत की और सिर्फ़ 5 महीने में आज Indian Brand TATA SIERRA CAR BOOKING हो चुकी हैं साथियों और बहुत जल्दी आने वाली है

💪Power Of Team Game Changer 🔥

23/12/2025

राष्ट्रीय किसान दिवस 23 dec 2025

゚viralfbreelsfypシ゚viral ゚ #

 #भयंकर 😱  #कोहरा 🌁 हमारे  #गांव🚨 में   #आपके कैसा है  #कमेंट 📥में जरूर  #बताए । ゚viralfbreelsfypシ゚viral    ゚           ...
21/12/2025

#भयंकर 😱 #कोहरा 🌁 हमारे #गांव🚨 में
#आपके कैसा है #कमेंट 📥में जरूर #बताए ।

゚viralfbreelsfypシ゚viral ゚

Good morning friends 🌅    ゚viralfbreelsfypシ゚viral  ゚
20/12/2025

Good morning friends 🌅

゚viralfbreelsfypシ゚viral ゚

Good morning 🌄🌅   ゚viralfbreelsfypシ゚viral  ゚
19/12/2025

Good morning 🌄🌅

゚viralfbreelsfypシ゚viral ゚

Good Evening friend..जय श्री श्याम..🙏🙏🙏   ゚viralfbreelsfypシ゚viral  ゚
18/12/2025

Good Evening friend..
जय श्री श्याम..🙏🙏🙏 ゚viralfbreelsfypシ゚viral ゚

Address

Jaipur
302029

Alerts

Be the first to know and let us send you an email when S.K. INDIA posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.

Share