16/05/2026
"कोई चिराग जलाता नहीं सलीके से, सभी को शिकायत हवा से होती है" | PanchTatvaAshram
शान्तुनु शुक्ल, लखनऊ, उत्तरप्रदेश।
"ये कशमकश है हिमायते दिल में, सुनाऊं तुमको कहाँ से पहले,
हर एक कतरा कह रहा है, यहाँ से पहले, यहाँ से पहले।"
ईश्वर की कृपा ही थी की मैं लखनऊ से 17 घंटे की यात्रा करते हुए यहाँ तक पहुंचा। यहाँ आने के बाद जो पांच दिन की सेवापैथी साधना की यात्रा की, इसमें ना जाने कितने गहरे अनुभव हुए हैं जिनको शब्दों में कहना बहुत कठिन है। इन पांच दिनों के अनुभवों को यदि कागज पर उतारा जाये तो कई कहानियाँ लिखी जा सकती हैं।
यह बड़े सौभाग्य की बात है कि सेवापैथी साधना के माध्यम से आपको जीवन को सरल रूप से जीने का अवसर प्राप्त हुआ।
हम आपके उज्जवल भविष्य और उत्तम स्वास्थ्य की कामना करते हैं।
धन्यवाद। पंच तत्व आश्रम परिवार, जयपुर।
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