08/06/2026
होम्योपैथी और पंजीकृत होम्योपैथिक चिकित्सकों के विरुद्ध अपमानजनक, भ्रामक और निराधार बयान रोकने के संबंध में।
आयोग ने कहा है कि:
1. होम्योपैथी भारत में कानूनी रूप से मान्यता प्राप्त चिकित्सा पद्धति है। National Commission for Homoeopathy Act, 2020 के अंतर्गत पंजीकृत होम्योपैथिक चिकित्सकों को विधिवत चिकित्सा अभ्यास करने का अधिकार प्राप्त है।
2. आयोग के संज्ञान में आया है कि प्रिंट मीडिया, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया, डिजिटल प्लेटफॉर्म और सोशल मीडिया पर होम्योपैथी एवं उसके चिकित्सकों के खिलाफ कई बार भ्रामक, अपमानजनक और निराधार टिप्पणियां की जा रही हैं।
3. किसी भी पंजीकृत होम्योपैथिक चिकित्सक को "Quack" (झोलाछाप) कहना या ऐसा प्रचार करना उनकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने वाला और कानून के विरुद्ध माना जा सकता है।
4. सभी संस्थानों, चिकित्सकों और संबंधित पक्षों को सलाह दी गई है कि वे होम्योपैथी के संबंध में कोई भी सार्वजनिक बयान देते समय सावधानी बरतें और अपमानजनक, भ्रामक या पूर्वाग्रहपूर्ण भाषा का प्रयोग न करें।
5. यदि किसी चिकित्सक के आचरण को लेकर शिकायत हो, तो उसे कानूनी, नियामक या अनुशासनात्मक प्रक्रिया के माध्यम से उठाया जाए, न कि पूरी होम्योपैथी चिकित्सा पद्धति या सभी चिकित्सकों को बदनाम करके।
6. आयोग ने स्पष्ट किया है कि होम्योपैथी पेशे और उसके पंजीकृत चिकित्सकों की गरिमा, प्रतिष्ठा और वैधानिक अधिकारों की रक्षा की जाएगी।
NCH ने साफ कहा है कि होम्योपैथी एक मान्यता प्राप्त चिकित्सा पद्धति है और पंजीकृत होम्योपैथिक चिकित्सकों को "झोलाछाप" कहना या बिना प्रमाण के बदनाम करना स्वीकार्य नहीं है। ऐसे मामलों में कानून के अनुसार कार्रवाई की जा सकती है।