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आयुर्वेदिक दृष्टि से शरीर शुद्धि (Detoxification)सप्त द्रव्य प्रयोग – शास्त्रसम्मत अमृत योगश्लोकघृतमधुनवनीतं पिप्पलीशृङ्...
02/01/2026

आयुर्वेदिक दृष्टि से शरीर शुद्धि (Detoxification)
सप्त द्रव्य प्रयोग – शास्त्रसम्मत अमृत योग
श्लोक
घृतमधुनवनीतं पिप्पलीशृङ्गबेरं
मरिचमपि च दद्यात् सप्तमं सैन्धवं च॥
यह श्लोक आयुर्वेद की उस गूढ़ अवधारणा को प्रकट करता है, जहाँ भोजन ही औषधि है और नियमित शुद्धिकरण ही स्वास्थ्य की कुंजी।
आयुर्वेद के अनुसार शरीर में रोग का मूल कारण है — आम (Ama)।
आम का अर्थ केवल विष नहीं, बल्कि
अपचित भोजन,मंद अग्नि,गलत दिनचर्या
दूषित वायु–जल,मानसिक तनाव
से उत्पन्न विषाक्तता है।
“रोगाः सर्वेऽपि मन्दाग्नौ”
(चरक संहिता, चिकित्सा स्थान)
👉 सभी रोगों का मूल कारण मंद अग्नि है।
सप्त द्रव्य – शरीर शोधन का शास्त्रीय रहस्य
इन सात द्रव्यों का संयोजन अथवा अलग अलग प्रयोग अग्नि दीपक, आमपाचक, स्रोतःशोधक और रसायन है।
1. घृत (देशी घी)
गुण: स्निग्ध, गुरु, मधुर
कर्म:अग्नि को स्थिर करता है
विष को बांधकर बाहर निकालता है
ओज वर्धक
“घृतं स्मृतिविवर्धनम्”(चरक संहिता)
घी शरीर में घुलनशील विषों (fat soluble toxins) को बाहर निकालने में सहायक है।
2. मधु (शहद)
गुण: रूक्ष, लेखन
कर्म:आम का शोषण,स्रोतों की सफाई
कफहर,“मधु लेखनं श्रेष्ठम्”(सुश्रुत संहिता)
⚠️ शहद को कभी गर्म न करें ( विष बन जाता है)।
3. नवनीत (ताजा मक्खन)
कर्म:पित्त शमन,आँतों की कोमल सफाई
दुर्बलता में बल्य विशेषतः क्षीण, वात–पित्त प्रकृति में उपयोगी।
4. पिप्पली (Long Pepper)
गुण: उष्ण, स्निग्ध
कर्म:अग्नि दीपन
विषघ्न,रसायन
“पिप्पली रसायनानां श्रेष्ठा”
(चरक संहिता)
यह गहरी धातुओं तक पहुंचकर विषहरण करती है।
5. शुण्ठी (सोंठ / अदरक)
कर्म:आम पाचन,वात–कफ शमन
सूजन नाशक
“आमवातहराणां शुण्ठी श्रेष्ठा”
6. मरिच (काली मिर्च)
कर्म:सूक्ष्म स्रोतों की सफाई,रक्त शोधन
चयापचय वृद्धि,मरिच शरीर की कोशिकाओं तक जमे विष को हटाने में सहायक है।
7. सैन्धव लवण (सेंधा नमक)
गुण: सौम्य, त्रिदोषघ्न
कर्म:पाचन सुधार,स्रोत खोलना
विषहर“सैन्धवं लवणानां श्रेष्ठम्”
(चरक संहिता)
आयुर्वेदिक सिद्धांत के नियमित अपनी प्रकृति एवं ऋतु अनुसार यह द्रव्य
* जठराग्नि को प्रदीप्त करते है
* आम को पचाते है (Ama Pachana)
* स्रोतसों की सफाई करते हैं
* यकृत (Liver) और आँतों को शुद्ध करते हैं
* प्रतिरक्षा (Immunity) बढ़ाते हैं
सेवन विधि (सामान्य मार्गदर्शन)
सभी द्रव्यों को सूक्ष्म मात्रा में
नियमित, ऋतु व प्रकृति अनुसार प्रयोग करना चाहिए।
आयुर्वेद का सिद्धांत है —
“नित्यं शुद्धे शरीरे रोगाः न जायन्ते”
यदि शरीर को प्रतिदिन भीतर से स्वच्छ रखा जाए, तो गलत भोजन, दूषित वातावरण और तनाव से उत्पन्न विष
स्वतः बाहर निकलने लगता है।
यह सप्त द्रव्य योग
केवल औषधि नहीं,
एक जीवनशैली है — निरोगी जीवन की।
इन्हें प्रयोग करें और स्वस्थ जीवन व्यतीत करें ।
"सर्वे भवन्तु: सुखिन:।
सर्वे संतु निरामया।

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आपका
डॉ विकेश महाजन




02/01/2026

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