31/05/2026
#विश्व_तंबाकू_निषेध_दिवस_2026 |
#तंबाकू_नशा_मुक्त_भारत
"एक जीवन, एक अवसर, तंबाकू-मुक्त हो हर घर!"
आज 'विश्व तंबाकू निषेध दिवस' है। एक न्यूरो एवं मानसिक रोग विशेषज्ञ होने के नाते, मेरा यह कर्तव्य है कि मैं आपको तंबाकू के उस जाल के बारे में जागरूक करूँ, जो न सिर्फ आपके शरीर को बल्कि आपके मस्तिष्क और खुशहाल परिवार को भी धीरे-धीरे खत्म कर रहा है।
आइए आज इस गंभीर मुद्दे को गहराई से समझें:
📊 तंबाकू का ग्लोबल और नेशनल तांडव (क्रूर आंकड़े)
वैश्विक यूज़र्स: पूरी दुनिया में 120 करोड़ (1.2 बिलियन) से अधिक लोग तंबाकू के जाल में फंसे हैं।
दुनिया भर में मौतें: हर साल तंबाकू के कारण 80 लाख से ज्यादा लोग अपनी जान गंवाते हैं। इसमें 13 लाख वो बेकसूर हैं जो खुद नशा नहीं करते (पैसिव स्मोकिंग)।
भारत की स्थिति: भारत में लगभग 27 करोड़ लोग किसी न किसी रूप में तंबाकू का सेवन कर रहे हैं, और यहाँ हर साल 13 लाख से अधिक मौतें सिर्फ तंबाकू की वजह से होती हैं।
🧠 न्यूरो-साइकियाट्रिक सच: आप नशे में लिप्त क्यों होते हैं?
टोबैको यूज़ डिसऑर्डर (To***co Use Disorder): मेडिकल साइंस (DSM-5) के अनुसार तंबाकू का नशा कोई शौक नहीं, बल्कि एक गंभीर मानसिक बीमारी है।
न्यूरोलॉजिकल हैकिंग: निकोटीन मात्र 7 सेकंड में दिमाग के 'रिवॉर्ड पाथवे' पर कब्जा कर लेता है और डोपामाइन (खुशी देने वाला न्यूरोकेमिकल) का नकली चक्र चलाता है।
दिमाग की मजबूरी: धीरे-धीरे दिमाग के रिसेप्टर्स इस जहर के आदी हो जाते हैं। जब तंबाकू नहीं मिलता, तो दिमाग में तीव्र छटपटाहट, एंग्जायटी और चिड़चिड़ापन शुरू हो जाता है, जिसे निकोटीन विड्रॉल (Withdrawal) कहते हैं।
⚠️ पूरा सिस्टम तबाह: मानसिक और शारीरिक बीमारियां
1. मानसिक और न्यूरोलॉजिकल बीमारियां (Mental & Neuro Problems):
ब्रेन स्ट्रोक: खून को गाढ़ा और नसों को सिकोड़कर यह दिमाग में थक्के जमाता है, जिससे पैरालिसिस (लकवा) या स्ट्रोक होता है।
डिमेंशिया (भूलने की बीमारी): लंबे समय तक सेवन से सोचने-समझने की क्षमता खत्म होती है और अल्जाइमर का खतरा 40% तक बढ़ जाता है।
गंभीर डिप्रेशन: यह दिमाग के नेचुरल सेरोटोनिन और डोपामाइन को सुखा देता है, जिससे इंसान क्लिनिकल डिप्रेशन का शिकार हो जाता है।
2. शारीरिक बीमारियां (Physical Problems):
मल्टी-ऑर्गन कैंसर: मुँह, जीभ, गले, भोजन नली और फेफड़ों का जानलेवा कैंसर।
साइलेंट हार्ट अटैक: धमनियों को ब्लॉक कर बेहद कम उम्र में दिल का दौरा।
नपुंसकता और बांझपन: पुरुषों में स्पर्म काउंट कम होना और महिलाओं में इनफर्टिलिटी।
🩺 डॉक्टर की सलाह: इलाज संभव है!
चूंकि यह एक दिमागी बीमारी है, इसलिए इसे सिर्फ 'कसम खाने' से छोड़ना मुश्किल होता है। इसके लिए वैज्ञानिक इलाज उपलब्ध है:
निकोटीन रिप्लेसमेंट थेरेपी (NRT): पैच या गम के जरिए वैज्ञानिक तरीके से लत छुड़ाना।
एंटी-क्रैविंग दवाएं: न्यूरो-साइकियाट्री में ऐसी दवाएं हैं जो तंबाकू की तीव्र इच्छा (तलब) को दिमाग के स्तर पर ही ब्लॉक कर देती हैं।
बिहेवियरल थेरेपी (CBT): काउंसिलिंग द्वारा मरीज को मानसिक रूप से मजबूत बनाना।
"तंबाकू छोड़ना मुश्किल हो सकता है, लेकिन किसी विशेषज्ञ की देखरेख में यह पूरी तरह मुमकिन है। आज ही इस मानसिक गुलामी से खुद को आजाद करें।"
सादर,
डॉ. हरिनाथ यादव
एम.बी.बी.एस., एम.डी. (न्यूरोसाइकियाट्री) बी.एच.यू.
पूर्व सीनियर रेजिडेंट, एस.एम.सी. उन्नाव
पूर्व रेजिडेंट इमरजेंसी मेडिसिन (एम्स नई दिल्ली), एफ.आई.पी.एस.
न्यूरो एवं मानसिक रोग विशेषज्ञ
🏥 श्री कृष्णा न्यूरो एवं मानसिक रोग चिकित्सालय
📍 नईगंज तिराहा, जौनपुर
📞 संपर्क: 7991380815, 7991480816
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