तमिलों की सिद्ध चिकित्सा

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तमिलों की सिद्ध चिकित्सा अस्थमा,सोरायसिस,चर्म रोग,फैटी लिवर सिरोसिस,बांझपन,सायटिका,अर्थराइटिस,पथरी थायराइड,पौरष शक्ति�

10/09/2026

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07/09/2026

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07/09/2026

आप सभी को तमिलों की सिद्ध चिकित्सा पेज को सपोर्ट करने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद🙏

07/09/2026
02/09/2026

#जलोदर
यकृत रोग, एब्डॉमिनल टीबी या किडनी रोग के कारण पेट और निचले हिस्से में अत्यधिक मात्रा में तरल पदार्थ जमा हो जाता है जिसे जलोदर (असाईट्स) कहते है।
• लक्षणों में मुख्यतः पेट में सूजन के साथ भारीपन, भूख कम या खत्म हो जाना, थोड़ी मात्रा में भोजन के सेवन से ही पेट भरा हुआ लगना, गैस, अपच, पैरों में सूजन, थकान और कमजोरी लगना, वजन बढ़ जाना और उल्टी महसूस होना इत्यादि है।
• जलोदर की स्थिति में लिवर की कार्य प्रणाली सुधारने और शरीर से अतिरिक्त तरल पदार्थ बाहर निकालने वाली जड़ी-बूटियों का उपयोग किया जाता है।
• प्रमुख रूप से
~पुनर्नवा- एक मूत्रवर्धक औषधि है जो शरीर की सूजन और पेट में जमे अतिरिक्त जल को पेशाब के रास्ते बाहर निकालने में मदद करती है।~आरोग्यवर्धिनी वटी- इसे लिवर के स्वास्थ्य और मेटाबॉलिज्म को सुधारने में प्रयोग होता है।
~पुनर्नवासव- यह भी यकृत (लिवर) के रोगों और शरीर की सूजन को कम करने में उपयोगी है।
~कुटकी और गिलोय- ये भी पाचन तंत्र को ठीक करती हैं और शरीर से विषैले तत्वों को बाहर निकालती हैं।~हरीतकी- इसे गोमूत्र के साथ दिया जाता है, जो पाचन में सुधार करती है और मल निष्कासन में मदद करती है।
और साथ में कालमेघ, भुईँ आंवला का संयोग भी अच्छा कार्य करता है।
+ अजवाइन को बछड़े के मूत्र में भिगोकर सुखा लें, छोटा आधा चम्मच रोगी को सुबह शाम सेवन कराएं।
+ करेले का पत्तों का स्वरस जलोदर रोगी को सेवन कराएं, इससे यूरीन की मात्रा बढ़ जाती है और पेट साफ होने लगता है।
+ तालमखाने की 30gm जड़ को 500ml पानी में उबालकर आधा शेष रहने पर इसे पूरे दिन थोड़ी मात्रा में सेवन कराएं
• ताजे मौसमी फल, हरी पत्तेदार सब्जियाँ और हल्का सुपाच्य भोजन लें। ओट्स, ब्राउन राइस, ज्वार और बाजरा का सेवन करें।
• शराब, तला-भुना और अत्यधिक मसालेदार भोजन, जंक फूड, ज्यादा चीनी वाले पेय, कोल्ड ड्रिंक्स इत्यादि पूरी तरह से बंद कर दें।
जलोदर आमतौर पर लिवर सिरोसिस या किडनी के विकारों से जुड़ी होती है। कृपया किसी भी दवा का सेवन करने से पहले योग्य चिकित्सक से सलाह अवश्य लें।
Rajiv kumar Singh
9936007511
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26/08/2026

दंत विकार
+ दांतों में कीड़े लग जाने पर वहां के मसूड़े खोखले हो जाते है तो इन छेदों में अकरकरा का महीन चूर्ण भर देने से कीड़े नष्ट हो जाते है।
+ दांतों में टीस आती हो, मसूढ़ों से रक्तस्राव, दांत हिलते हों, दुर्गंध आती हो या पायरिया की शुरूआत हो
तब अपामार्ग - चिड़चिड़ा के लकड़ी से दातुन करें।
+ आम के पत्तों को जलाकर राख कर लें या आम की गुठली को सुखाकर महीन पाउडर कर लें। इन दोनों में से किसी का भी मंजन की तरह उपयोग करें, इससे दांत के विकार दूर होते है।
+ जिस दाढ़ के तरफ के दांत में दर्द हो उसके विपरीत कान में पीले भांगरे के स्वरस की 5 बूंदे डाल दें, दांत दर्द में आराम मिल जाता है।
+ नमक और कालीमिर्च पाउडर कर इसमें सरसों का तेल मिलाकर मंजन के रूप में प्रयोग करने पर पायरिया, दंतशूल में आराम मिलता है।
Rajiv kumar Singh
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24/08/2026

कंटकारी - भटकटैया - कटेरी
मित्रों इस पौधे से सभी लोग परिचित होंगे, यह प्रायः हर जगह दिख जाता है। इसकी पत्तियां कटान दार व नुकीले कांटों युक्त होती है। इसके फूल बैंगनी होते है।
लोक-परंपरा/आयुर्वेद अनुसार
@ टॉन्सिल रोग में कटेली के पौधे का काढ़ा बनाकर गरारा करने रोग के साथ साथ बुखार में भी आराम मिल जाता है, अगर दांत दर्द है तो इसके काढ़े का कुल्ला करने पर दांत दर्द में बहुत आराम मिलता है।
@ बिच्छू के डंक के स्थान पर इसकी जड़ को एलोवेरा और नींबू के साथ घिस कर लगाने से विष उतर जाता है।
@ आयुर्वेद के अनुसार दमा रोगों में कटेली के 1 माशा बीज और 6 माशा शहद के साथ सेवन करना बताया गया है।
कुछ वैद्य इसके फल एवं अनार के छिलके को तिल के तेल में पकाकर यौनांग स्थूलीकरण में प्रयोग करते है।
कटेली के पौधे को शुभ मुहूर्त में उत्तर मुख होकर रस्सी के सहारे जड़ सहित उखड़ा जाता है।
कमेंट में इस पौधे की फोटो डाल दिया गया है।
आयुर्वेदिक औषधि का सेवन योग्य आयुर्वेद चिकित्सक की सलाह से ही करें।
Rajiv kumar Singh
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20/08/2026

नेत्र सुदर्शन अर्क (पलाशान्जन)
इस अर्क की 2 बूंदे दिन में 3 बार आंखों में डालने से आंखों के सब प्रकार के रोग जैसे लालिमा, दाह, रतौंधी, दृष्टि का कमजोर हो जाना, तिमिर अर्थात धुंधला दिखना दूर होता है। अगर मोतियाबिंद भी प्रारम्भ हुआ हो तो 4 - 6 माह में इसमें भी आराम मिल जाता है। दृष्टिशक्ति बढ़ाने में अति उत्तम है अनेक लोगों के चश्मे इसके प्रयोग से छूट गए हैं।
विधि :- पलाश की ताजी जड़ लाकर साफ कर लें, इसे जल से नहीं धोवें। इसके टुकड़े कर नलिकायंत्र से अर्क निकाल लें। जिस दिन जड़ लायें उसी दिन अर्क निकाल लें अन्यथा दूसरे दिन अर्क बहुत कम निकलता है।
नोट:- अर्क निकालने की व्यवस्था सभी के पास उपलब्ध नहीं होती है, और स्वयं निकालने में अर्क अशुद्ध होने का डर भी रहता है।
इसलिए इसे स्वयं बनाने से बचे।
नेत्र सुदर्शन अर्क आयुर्वेदिक दुकान से लेकर प्रयोग करें।
यह अर्क कृष्ण गोपाल आयुर्वेद भवन अजमेर वाले बनाते है।
इसकी फोटो कमेंट में जाकर देख सकते हैं।
Rajiv kumar Singh
099360 06511
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सितोपलादि चूर्ण (Sitopaladi Churna)आयुर्वेद में सितोपलादि चूर्ण का प्रयोग मुख्यतः खाँसी, कफ, गले में खराश/जलन, सर्दी-जुक...
18/08/2026

सितोपलादि चूर्ण (Sitopaladi Churna)
आयुर्वेद में सितोपलादि चूर्ण का प्रयोग मुख्यतः खाँसी, कफ, गले में खराश/जलन, सर्दी-जुकाम और आवाज बैठने जैसी समस्याओं में किया जाता है। कुछ स्थितियों में यह भूख एवं पाचन में भी सहायक माना जाता है।
मुख्य घटक:
सितोपल (मिश्री), वंशलोचन, पिप्पली, इलायची और दालचीनी।
सामान्य सेवन:
वयस्कों में सामान्यतः 1–3 ग्राम, दिन में 1–2 बार, शहद आदि के साथ लेने का उल्लेख मिलता है। सही मात्रा व्यक्ति की स्थिति और चिकित्सकीय सलाह के अनुसार होनी चाहिए।
Rajiv kumar Singh
मो.- 099360 06511 / 8299097154

16/08/2026

🌸 महिला निःसंतानता के संबंध में जानकारी 🌸

आजकल गर्भधारण में कठिनाई के मामले बढ़ते दिखाई दे रहे हैं। इसके पीछे उम्र, हार्मोन संबंधी समस्याएँ, बिगड़ी हुई जीवनशैली, जंक फूड का अधिक सेवन, समय पर गर्भधारण की योजना न बन पाना, PCOS, फैलोपियन ट्यूब से जुड़ी समस्या, एंडोमेट्रियोसिस तथा अन्य कई कारण हो सकते हैं।

💐 प्रेगनेंसी की खुशी उस महिला से अधिक कोई नहीं समझ सकता, जो लंबे समय से इसका बेसब्री से इंतज़ार कर रही हो।
जो महिलाएँ गर्भधारण में कठिनाई से परेशान हैं, वे नीचे दिए गए नंबर पर संपर्क कर #निःशुल्क औषधि मंगा सकती हैं।

➡️ केवल पैकिंग एवं मार्ग व्यय देय होगा।

⚠️ यदि गर्भधारण में समस्या पुरुष पक्ष से संबंधित है, तो पुरुष की उचित जाँच एवं चिकित्सकीय सलाह आवश्यक है तथा उसके लिए अलग उपचार की आवश्यकता हो सकती है।

👨‍⚕️ Dr. Rajiv Kumar Singh

📲 WhatsApp: 9936006511
📞 Call: 8299097154

नोट:- निःशुल्क वाली औषधियां सप्ताह में केवल एक बार ही भेजी जाती है। अतः आपके पास औषधि पहुंचने में समय लग सकता है

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