02/09/2026
#जलोदर
यकृत रोग, एब्डॉमिनल टीबी या किडनी रोग के कारण पेट और निचले हिस्से में अत्यधिक मात्रा में तरल पदार्थ जमा हो जाता है जिसे जलोदर (असाईट्स) कहते है।
• लक्षणों में मुख्यतः पेट में सूजन के साथ भारीपन, भूख कम या खत्म हो जाना, थोड़ी मात्रा में भोजन के सेवन से ही पेट भरा हुआ लगना, गैस, अपच, पैरों में सूजन, थकान और कमजोरी लगना, वजन बढ़ जाना और उल्टी महसूस होना इत्यादि है।
• जलोदर की स्थिति में लिवर की कार्य प्रणाली सुधारने और शरीर से अतिरिक्त तरल पदार्थ बाहर निकालने वाली जड़ी-बूटियों का उपयोग किया जाता है।
• प्रमुख रूप से
~पुनर्नवा- एक मूत्रवर्धक औषधि है जो शरीर की सूजन और पेट में जमे अतिरिक्त जल को पेशाब के रास्ते बाहर निकालने में मदद करती है।~आरोग्यवर्धिनी वटी- इसे लिवर के स्वास्थ्य और मेटाबॉलिज्म को सुधारने में प्रयोग होता है।
~पुनर्नवासव- यह भी यकृत (लिवर) के रोगों और शरीर की सूजन को कम करने में उपयोगी है।
~कुटकी और गिलोय- ये भी पाचन तंत्र को ठीक करती हैं और शरीर से विषैले तत्वों को बाहर निकालती हैं।~हरीतकी- इसे गोमूत्र के साथ दिया जाता है, जो पाचन में सुधार करती है और मल निष्कासन में मदद करती है।
और साथ में कालमेघ, भुईँ आंवला का संयोग भी अच्छा कार्य करता है।
+ अजवाइन को बछड़े के मूत्र में भिगोकर सुखा लें, छोटा आधा चम्मच रोगी को सुबह शाम सेवन कराएं।
+ करेले का पत्तों का स्वरस जलोदर रोगी को सेवन कराएं, इससे यूरीन की मात्रा बढ़ जाती है और पेट साफ होने लगता है।
+ तालमखाने की 30gm जड़ को 500ml पानी में उबालकर आधा शेष रहने पर इसे पूरे दिन थोड़ी मात्रा में सेवन कराएं
• ताजे मौसमी फल, हरी पत्तेदार सब्जियाँ और हल्का सुपाच्य भोजन लें। ओट्स, ब्राउन राइस, ज्वार और बाजरा का सेवन करें।
• शराब, तला-भुना और अत्यधिक मसालेदार भोजन, जंक फूड, ज्यादा चीनी वाले पेय, कोल्ड ड्रिंक्स इत्यादि पूरी तरह से बंद कर दें।
जलोदर आमतौर पर लिवर सिरोसिस या किडनी के विकारों से जुड़ी होती है। कृपया किसी भी दवा का सेवन करने से पहले योग्य चिकित्सक से सलाह अवश्य लें।
Rajiv kumar Singh
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