Vatsayan Foundation

Vatsayan Foundation Motive of this page is to spread correct information abt kamasutra globally to make happy life of peoples those are not aware with the basics of kamasutra.

काम यानी सेक्स भारतीय मान्यता के अनुसार चार पुरुषार्थों में से एक है, काम को प्राचीन भारतीय मनीषियों ने देवता के रूप में स्वीकार किया है, दैत्य या शैतान नहीं।

काम का ज्ञान सदैव अनिवार्य रहा है, एवं रहेगा। अल्प अथवा विकृत यौन ज्ञान जीवन सुख से वंचित करने के साथ साथ जीवन विनाश का भी कारण बनता है।

यौन विज्ञान के विषय में प्राचीन भारत का दृष्टिकोण महर्षि वात्स्यायन कृत "कामसूत्र" से स्पष्ट होत

ा है। शिष्ट एवं सरल भाषा में "कामसूत्र" का ज्ञान उपलब्ध कराना ही, वात्स्यायन फाउंडेशन का एकमात्र लक्ष्य है।

भारतीय विद्वानों ने "कामसूत्र" के रचयिता "वात्स्यायन मुनि" का जीवन काल ईसा की पहली शताब्दी से पांचवी शताब्दी तक माना है। वात्स्यायन ने स्पष्ट शब्दों में यह स्वीकार किया है, कि उक्त ग्रन्थ "कामसूत्र" की रचना "बाभ्रवीय" सिद्धांतों के अनुसार हुयी है।

😟यौन इच्छा और पुरुष चरित्र: स्टीफन हॉकिंग के जीवन से एक गहरा विश्लेषणयह स्टीफन हॉकिंग हैं, जिनका जन्म 8 जनवरी 1942 को ऑक...
04/02/2026

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यौन इच्छा और पुरुष चरित्र: स्टीफन हॉकिंग के जीवन से एक गहरा विश्लेषण
यह स्टीफन हॉकिंग हैं, जिनका जन्म 8 जनवरी 1942 को ऑक्सफोर्ड, इंग्लैंड में हुआ था। उन्हें आधुनिक दुनिया का सबसे बड़ा वैज्ञानिक माना जाता है। वे एक अंग्रेज़ सैद्धांतिक भौतिक विज्ञानी, ब्रह्मांड विज्ञानी, लेखक और विचारक थे, जिन्होंने ब्रह्मांड की उत्पत्ति, ब्लैक होल और समय की प्रकृति पर क्रांतिकारी काम किया। उन्होंने ईश्वर के पारंपरिक रूप को नकारा और स्पष्ट कहा था कि वे ईश्वर में विश्वास नहीं करते। अपनी पुस्तक 'The Grand Design' (2010) में उन्होंने लिखा कि ब्रह्मांड की उत्पत्ति के लिए ईश्वर की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि गुरुत्वाकर्षण (Gravity) और प्राकृतिक नियमों के कारण ब्रह्मांड स्वतः बन सकता है। उन्होंने 'हॉकिंग रेडिएशन' की खोज की और 'A Brief History of Time' लिखी, जो दुनिया भर में करोड़ों की संख्या में बिकी।
बीमारी और शारीरिक अक्षमता का संघर्ष
स्टीफन हॉकिंग जब मात्र 21 वर्ष के थे, तभी उन्हें 'मोटर न्यूरॉन डिजीज' (ALS) नामक गंभीर बीमारी हो गई, जो धीरे-धीरे शरीर को लकवाग्रस्त (Paralyze) कर देती है। इस बीमारी ने उनकी सभी स्वैच्छिक मांसपेशियों (Voluntary Muscles) को प्रभावित किया और 1980 के बाद वे लगभग 100% पैरालाइज्ड हो गए थे। उनके केवल एक हाथ की कुछ उंगलियाँ काम करती थीं, और बाद में जब उन्होंने भी काम करना बंद कर दिया, तब वे चेहरे की मांसपेशियों और आँखों की हल्की हरकत (Movement) से कंप्यूटर नियंत्रित करते थे। उनकी आवाज़ एक स्पीच सिंथेसाइजर से आती थी और अंततः वे पूरी तरह एक अत्याधुनिक व्हीलचेयर पर ही जीवन व्यतीत करते थे।
मस्तिष्क का विज्ञान: जहाँ इच्छाएं कभी नहीं मरतीं
कहने का तात्पर्य यह है कि पूर्णतः (100%) पैरालाइज होने के बाद, जब केवल आँखों की पुतलियाँ और चेहरे की कुछ नसें ही हिल पा रही हों, ऐसी स्थिति में आने के 26 वर्ष बाद भी उनकी यौन इच्छा जीवित थी। यही मर्द का असली जैविक चरित्र है। आधुनिक न्यूरोसाइंस (Neuroscience) के अनुसार, यौन इच्छा का मुख्य केंद्र जननांग नहीं, बल्कि मस्तिष्क का 'हाइपोथैलेमस' (Hypothalamus) हिस्सा होता है। हॉकिंग का उदाहरण यह सिद्ध करता है कि भले ही बीमारी ने शरीर का संपर्क मस्तिष्क से काट दिया था, लेकिन उनके मस्तिष्क के 'प्लेजर सेंटर्स' (Pleasure Centers) पूरी तरह सक्रिय थे। यह स्पष्ट करता है कि पुरुष का आकर्षण शारीरिक क्षमता पर नहीं, बल्कि उसकी मानसिक चेतना और दृश्य संवेदना (Visual Stimulation) पर निर्भर करता है। पुरुष मस्तिष्क 'देखकर' उत्तेजित होने के प्रति जैविक रूप से अधिक संवेदनशील होता है।
यह चित्र मार्च 2006 का है, जो जेफरी एपस्टीन के प्राइवेट कैरिबियन आइलैंड पर लिया गया था, जब स्टीफन हॉकिंग वहां एक साइंस कॉन्फ्रेंस के लिए गए थे। यौन विकृत मानसिकता इंसान के मस्तिष्क में होती है। उसका कोई भी अंग भले ही काम न करे, यदि मस्तिष्क स्वस्थ है, तो उसके भीतर यौन इच्छा जीवित रहती है, जिसे वह आँखों से देखकर, कल्पना करके और किसी स्त्री को अपने समीप महसूस करके संतुष्ट करता है।
धार्मिक व्यवस्था: एक अनिवार्य सामाजिक सुरक्षा कवच
इसी व्यापक पुरुष चरित्र को समझकर हर धर्म में महिलाओं के पहनावे और समाज में व्यवहार की व्यवस्था बनाई गई है। एथिस्ट (नास्तिक) लोगों की धर्म से समस्या इन्हीं निर्धारित व्यवस्थाओं के कारण है। जैसे इस्लाम में शराब पीना हराम है, तो जावेद अख्तर ने इस्लाम को नकार दिया; वैसे ही हिंदू नास्तिक उस धर्म की व्यवस्था से असहज हुए तो उसे नकार दिया। लेकिन ये नियम केवल पाबंदियां नहीं, बल्कि पुरुष की उस 'दृश्य-उत्तेजना' को नियंत्रित करने के वैज्ञानिक तरीके थे।
हिंदू धर्म में भी गैर-पुरुषों से दूरी की बात कही गई है। ऋग्वेद (8.33.19) के एक मंत्र में भी लज्जाशीलता और वस्त्र से शरीर ढकने का स्पष्ट उल्लेख है:
> अ॒धः प॑श्यस्व॒ मोपरि॑ संत॒रां पा॒दकौ॑ ह॑र। मा ते॑ कशप्ल॒कौ दृ॑श॒न्त्स्त्री हि ब्र॒ह्मा ब॒भूवि॑थ ॥
> अर्थात: "नीचे देखो, ऊपर मत देखो। लज्जाशील रहो और आँखें न उठाओ। पैरों को निकट रखो और चाल-ढाल संयत रखो। तुम्हारे शरीर का निचला भाग किसी को न दिखे।" यह उपदेश स्त्री की गरिमा और पुरुष की विचलित होने वाली दृष्टि, दोनों को नियंत्रित करने के लिए है। आज भी कोई कितना भी आधुनिक क्यों न हो, महिलाएँ गैर-पुरुषों के साथ अकेले जाने से बचती हैं, जो इसी प्राचीन सुरक्षा बोध का प्रमाण है।
>
इस्लाम और मनोवैज्ञानिक मर्यादा
पैगंबर हज़रत मुहम्मद ﷺ ने फरमाया है: "जब कोई औरत और मर्द अकेले होते हैं, तो वहां तीसरा शैतान होता है।" (सहीह बुखारी)। यहाँ 'शैतान' का अर्थ उस अनियंत्रित जैविक उत्तेजना से है जो एकांत में सक्रिय हो जाती है। पुरुष की इसी मानसिकता के कारण इस्लाम में 'गैर-महरम' से दूरी और हिजाब की सख्त व्यवस्था है। कुरान (सूरह नूर 24:30-31) में मोमिन मर्दों और औरतों, दोनों को अपनी निगाहें नीची रखने का हुक्म दिया गया है।
गैर-महरम पुरुष के साथ हंसी-मजाक, फ्लर्टिंग या एकांत (जैसे घर, कमरा या कार) में रहना वर्जित है, क्योंकि पुरुष का मस्तिष्क अपनी इंद्रियों से कहीं न कहीं यौन ऊर्जा प्राप्त करता रहता है। मनोवैज्ञानिक शोध बताते हैं कि स्त्री के जिस्म की सुगंध या उसकी आवाज़ का उतार-चढ़ाव भी पुरुष के अवचेतन मन में उत्तेजना पैदा करने के लिए पर्याप्त होता है। इसीलिए आवाज़ को लुभावना बनाने के बजाय सामान्य रखने का निर्देश दिया गया है।
निष्कर्ष: आधुनिकता बनाम जैविक वास्तविकता
आज का तथाकथित 'प्रगतिशील' समाज इन नियमों को 'दकियानूसी' कह सकता है, लेकिन स्टीफन हॉकिंग का यह चित्र सिद्ध करता है कि पुरुष का मूल जैविक चरित्र कभी नहीं बदलता। जब तक मस्तिष्क सक्रिय है, यौन इच्छा जीवित रहती है। जिसे लोग पाबंदी समझते हैं, वह असल में समाज को 'मानसिक विकृति' और 'नैतिक पतन' से बचाने का एक सुरक्षा तंत्र (Safety Mechanism) है।
इतिहास गवाह है कि जिन सभ्यताओं ने इन सीमाओं को तोड़ा, वहां यौन अपराधों और सामाजिक बिखराव की दर सबसे अधिक रही। विज्ञान हमें यह बताता है कि हम 'क्या' हैं (Biological creatures), लेकिन धर्म और परंपराएं हमें यह सिखाती हैं कि उस वास्तविकता को मर्यादित कर एक सभ्य समाज 'कैसे' बनाया जाए। हॉकिंग की व्हीलचेयर पर बैठी वह तस्वीर किसी की व्यक्तिगत पसंद का मामला नहीं, बल्कि पूरे पुरुष मनोविज्ञान का एक अकाट्य प्रमाण है।
नोट: गैर-महरम अर्थात सगा बाप, भाई, दादा-नाना, बेटा, चाचा और मामा के अतिरिक्त सभी पुरुष।
उपरोक्त लेख का उद्देश्य किसी भी महापुरुष या वैज्ञानिक की उपलब्धियों को कमतर दिखाना या उनका अपमान करना कतई नहीं है। स्टीफन हॉकिंग आधुनिक विज्ञान के शिखर पुरुष हैं और उनका योगदान अतुलनीय है। यहाँ उनके जीवन के एक विशेष संदर्भ का उपयोग केवल मानव मनोविज्ञान (Human Psychology) और जैविक प्रवृत्तियों (Biological Instincts) के विश्लेषण के लिए किया गया है। यह विश्लेषण इस बात पर केंद्रित है कि मानवीय स्वभाव और इंद्रियों की इच्छाएं बौद्धिक स्तर या शारीरिक स्थिति से परे कैसे कार्य करती हैं। लेख का उद्देश्य सामाजिक मर्यादाओं के वैज्ञानिक और धार्मिक महत्व को तार्किक रूप से स्पष्ट करना है।"
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सेक्स की लत कैसे इंसान को कमजोर बनाती है — यह विषय केवल नैतिक या सामाजिक नहीं, बल्कि गहरे शारीरिक, मानसिक और आयुर्वेदिक ...
15/01/2026

सेक्स की लत कैसे इंसान को कमजोर बनाती है — यह विषय केवल नैतिक या सामाजिक नहीं, बल्कि गहरे शारीरिक, मानसिक और आयुर्वेदिक संतुलन से जुड़ा हुआ है। आयुर्वेद में मनुष्य को केवल मांस-हड्डी का पुतला नहीं माना गया, बल्कि शरीर, मन, इंद्रियाँ और आत्मा—इन चारों का संयुक्त रूप माना गया है। जब इनमें से किसी एक पर भी असंयम हावी होता है, तो पूरा जीवन असंतुलित हो जाता है।

आयुर्वेद के अनुसार काम (सेक्स) जीवन का एक स्वाभाविक अंग है, लेकिन उसकी सीमा और मर्यादा तय है। चरक संहिता में स्पष्ट कहा गया है कि जो व्यक्ति विषय-भोग में अति करता है, वह धीरे-धीरे ओज का क्षय कर बैठता है। ओज शरीर की वह सूक्ष्म शक्ति है जो रोग प्रतिरोधक क्षमता, तेज, आत्मबल और मानसिक स्थिरता का आधार होती है। सेक्स की लत ओज को सबसे पहले और सबसे गहराई से नुकसान पहुँचाती है।

लगातार काम-विचार, अश्लील दृश्य, बार-बार वीर्यस्राव या मानसिक उत्तेजना से शरीर की धातु-निर्माण प्रक्रिया बिगड़ जाती है। आयुर्वेद के अनुसार भोजन से रस बनता है, रस से रक्त, फिर मांस, मेद, अस्थि, मज्जा और अंत में वीर्य। वीर्य सबसे परिष्कृत धातु है। जब इसे बार-बार नष्ट किया जाता है, तो शरीर को इसे फिर से बनाने में अत्यधिक ऊर्जा लगानी पड़ती है। परिणामस्वरूप व्यक्ति भीतर से कमजोर होने लगता है, भले ही बाहर से वह सामान्य दिखे।

सेक्स की लत केवल शारीरिक कमजोरी नहीं लाती, बल्कि मानसिक गुलामी पैदा करती है। मन हर समय उत्तेजना की तलाश में भटकता रहता है। एकाग्रता घटती है, स्मरण शक्ति कमजोर होती है, निर्णय लेने की क्षमता कम हो जाती है। आयुर्वेद इसे रजोगुण की अधिकता मानता है। रजोगुण बढ़ने से चंचलता, बेचैनी, क्रोध और असंतोष बढ़ता है, जबकि सत्त्वगुण घटने लगता है, जो शांति, विवेक और संतुलन का गुण है।

लंबे समय तक सेक्स की लत में फँसा व्यक्ति धीरे-धीरे आत्मविश्वास खो देता है। उसे अपने ऊपर नियंत्रण नहीं रहता। यही कारण है कि ऐसे लोग थकान, कमर दर्द, घुटनों की कमजोरी, आंखों की चमक कम होना, चेहरे पर निस्तेजता, जल्दी चिड़चिड़ापन और अवसाद जैसे लक्षण अनुभव करते हैं। आयुर्वेद में इसे वात-पित्त विकृति का परिणाम माना गया है। अधिक उत्तेजना से पित्त बढ़ता है और बार-बार क्षय से वात बिगड़ता है, जो शरीर और मन दोनों को खोखला करता है।

सेक्स की लत रिश्तों को भी कमजोर करती है। व्यक्ति सामने वाले इंसान को भावना या साथी नहीं, बल्कि भोग की वस्तु की तरह देखने लगता है। इससे प्रेम, सम्मान और विश्वास खत्म होने लगता है। आयुर्वेदिक दृष्टि में यह प्रज्ञापराध है—अर्थात बुद्धि का अपराध। जब मनुष्य जानते-समझते हुए भी असंतुलित आचरण करता है, तो रोग केवल शरीर में नहीं, जीवन में फैल जाता है।

आयुर्वेद संयम को दमन नहीं, बल्कि शक्ति का संरक्षण मानता है। ब्रह्मचर्य का अर्थ केवल त्याग नहीं, बल्कि ऊर्जा का सही दिशा में प्रवाह है। वही ऊर्जा जब विचार, कर्म, साधना और रचनात्मकता में लगती है, तो व्यक्ति तेजस्वी, आत्मनिर्भर और मानसिक रूप से सुदृढ़ बनता है। इतिहास में महान ऋषि, वैज्ञानिक, योद्धा और विचारक इसी ऊर्जा-संरक्षण के उदाहरण हैं।

इस प्रकार आयुर्वेद स्पष्ट करता है कि सेक्स स्वयं कमजोरी नहीं है, बल्कि उसकी लत इंसान को अंदर से तोड़ देती है। यह लत शरीर की धातुओं को, मन की स्थिरता को और जीवन की दिशा को धीरे-धीरे नष्ट कर देती है। संयम, संतुलन और जागरूकता ही वह मार्ग है जिससे मनुष्य अपनी शक्ति को क्षय नहीं, बल्कि विकास की ओर ले जा सकता है।
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कामसूत्रप्राचीन भारतीय ग्रंथ कामसूत्र के संदर्भ में विवाह से पूर्व पुरुषों (विशेषकर राजकुमारों और कुलीन वर्ग के युवाओं) ...
15/01/2026

कामसूत्र

प्राचीन भारतीय ग्रंथ कामसूत्र के संदर्भ में विवाह से पूर्व पुरुषों (विशेषकर राजकुमारों और कुलीन वर्ग के युवाओं) का गणिकाओं के पास जाना केवल मनोरंजन के लिए नहीं था....

इसे एक प्रकार की सामाजिक और व्यवहारिक शिक्षा के रूप में देखा जाता था....
वात्स्यायन के अनुसार गणिकाओं के पास पुरुषों को निम्नलिखित मुख्य बातें सीखने के लिए भेजा जाता था....

1. 64 कलाओं (Chausath Kalas) में निपुणता
गणिकाएं केवल सौंदर्य के लिए नहीं बल्कि अपनी विद्वता के लिए जानी जाती थीं वे 64 कलाओं में पारंगत होती थीं पुरुषों को उनके पास भेजा जाता था ताकि वे...

संगीत नृत्य और गायन की बारीकियां समझ सकें....

चित्रकला साहित्य और काव्य चर्चा (shashtrarth) में निपुण हो सकें....

वाक्पटुता और शिष्टाचार (Etiquette) सीख सकें....

2. स्त्री मनोविज्ञान (Understanding Female Psychology)
विवाह से पूर्व पुरुष को यह सिखाया जाता था कि एक स्त्री के मन को कैसे समझा जाए गणिकाएं पुरुषों को यह अनुभव देती थीं कि

स्त्री की भावनाओं और इच्छाओं का सम्मान कैसे करें...
संवैधानिक और प्रेमपूर्ण व्यवहार कैसे विकसित करें...
दांपत्य जीवन में आने वाली भावनात्मक जटिलताओं को कैसे सुलझाएं....

3. रति कला और दांपत्य सुख
कामसूत्र के अनुसार एक सुखी वैवाहिक जीवन के लिए शारीरिक और मानसिक तालमेल आवश्यक है गणिकाओं के माध्यम से पुरुषों को
प्रेम की अभिव्यक्ति के तरीके सिखाए जाते थे....

यौन स्वास्थ्य और रति क्रियाओं का सही ज्ञान दिया जाता था ताकि विवाह के बाद वे अपनी पत्नी को संतुष्ट और सुखी रख सकें....

4. नागरिक शास्त्र (Social Conduct)
उस समय के समाज में एक आदर्श पुरुष को 'नागरिक' (A cultured urban man) कहा जाता था...

गणिकाओं के साथ समय बिताने से पुरुषों को समाज में बैठने बातचीत करने और सुरुचिपूर्ण जीवन जीने की कला आती थी...

निष्कर्ष
कामसूत्र के अनुसार यह व्यवस्था पुरुष को एक संवेदनशील कलाप्रेमी और सभ्य जीवनसाथी बनाने के उद्देश्य से की गई थी इसका लक्ष्य केवल कामुकता नहीं बल्कि एक पूर्ण और शिक्षित व्यक्तित्व का निर्माण करना था.....

#सभ्यतासंस्कृतिकीरक्षा
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सीमा आनंद दीदी नमस्कार! आप एक सेंसेशन बनना चाहती हैं आप उन बातों को लेकर मुखर हैं जिन बातों पर हर थोड़े दिनों में कोई मुख...
15/01/2026

सीमा आनंद दीदी नमस्कार!

आप एक सेंसेशन बनना चाहती हैं
आप उन बातों को लेकर मुखर हैं
जिन बातों पर हर थोड़े दिनों में कोई मुखर हो ही जाता है

इन बातों पर मुखर होना
हमेशा से एक धंधा रहा है
इससे बहुत कमाई होती है
और बरकत में कभी घाटा नहीं होता

हम ऐसे धंधेबाज़ों से अक्सर
अपनी पतंग बचाते रहे हैं

कभी आचार्य रजनीश
कभी फ्रायड
कभी किसी सीमा आनंद ने काटनी चाही हमारी पतंग

लेकिन हम पति लोगों ने
ढील के पेंच चलने दिए
और हमारी पत्नियों ने खींच मार के
काट दिए घर फोड़ू विदूषकों के पेंच!
#साभार
#सभ्यतासंस्कृतिकीरक्षा #कामवासनानहींसाधनाहै #भारतीय_कामशास्त्र #वात्सायनफाउंडेशनखजुराहो #कामसूत्र_और_सुगंध #आलिंगन

"सम्भोग के बाद का पल"सम्भोग केवल शारीरिक क्रिया नहीं, बल्कि ऊर्जा, मन और इंद्रियों का जटिल समन्वय है। उसके बाद का क्षण भ...
15/01/2026

"सम्भोग के बाद का पल"

सम्भोग केवल शारीरिक क्रिया नहीं, बल्कि ऊर्जा, मन और इंद्रियों का जटिल समन्वय है। उसके बाद का क्षण भी उतना ही गहन और संवेदनशील होता है। पुरुष और स्त्री दोनों का अनुभव अलग होता है, और उसे समझना आत्म-जागरूकता और आपसी सामंजस्य के लिए आवश्यक है।

1. पुरुष का अनुभव

सम्भोग के बाद पुरुष का शरीर और मन अचानक शिथिल और आराम की ओर झुकता है।

शारीरिक अनुभव:

लिंग ढीला पड़ता है, मांसपेशियों में थकान।

हृदय गति धीरे-धीरे सामान्य हो जाती है।

साँसें लंबी, धीमी और गहरी हो जाती हैं।

शरीर भारीपन और ऊर्जा के बहाव की कमी महसूस करता है।

मानसिक स्थिति:

पुरुष आत्मनिरीक्षण की ओर झुकता है।

अनुभव को पचाने और ऊर्जा को स्थिर करने की आवश्यकता होती है।

संवेदनाओं पर ध्यान कम हो जाता है; मन अंदर की ओर केंद्रित होता है।

इंद्रिय अनुभव:

स्पर्श और नज़दीकी की तीव्रता कम।

आंखें आधी बंद, शरीर शिथिल और आराम की स्थिति में।

पुरुष इस समय अनुभव को अंदर की दुनिया में संजोता है। यह समय उसके लिए एकांत और मानसिक स्थिरता का है।

2. स्त्री का अनुभव

स्त्री का शरीर सम्भोग के बाद भी ऊर्जावान और संवेदनशील बना रहता है। उसका अनुभव अभी भी तीव्र और विस्तृत होता है।

शारीरिक अनुभव:

त्वचा पर हल्की गर्माहट, हर स्पर्श में संवेदना।

स्तन, योन और हाथ-पैर में हल्की हलचल, ऊर्जा पूरे शरीर में फैलती है।

श्वास गहरी और नियमित, कभी-कभी हृदय की धड़कन तेज़।

मानसिक स्थिति:

साझा अनुभव की चाह, भावनाओं और संवेदनाओं के केंद्र में बनी रहती है।

मानसिक रूप से अभी भी जुड़ी हुई और जागरूक।

इंद्रिय अनुभव:

हर हल्का स्पर्श, हर साँस, हर हृदय की धड़कन उसे भीतर से खिला हुआ और आनंदित महसूस कराती है।

संवेदनाएं गहरी और जीवंत बनी रहती हैं।

स्त्री इस समय अनुभव को बाहरी और साझा रूप में जीती है। यह पल उसके लिए खिलने और जुड़ने का समय है।

3. ऊर्जा का प्रवाह और सामंजस्य

सम्भोग के बाद यह अंतर केवल शारीरिक नहीं, बल्कि ऊर्जा का प्रवाह है।

पुरुष ऊर्जा को बाहर छोड़ देता है और थकान अनुभव करता है।

स्त्री वह ऊर्जा ग्रहण करती है और उसे अपने भीतर फैलती हुई स्फूर्ति और आनंद के रूप में अनुभव करती है।

यही अंतर उनके भावनात्मक और मानसिक व्यवहार में दिखाई देता है।

यदि दोनों इस अंतर को समझें और स्वीकार करें, तो यह क्षण केवल शारीरिक संतोष का नहीं बल्कि भावनात्मक, मानसिक और आध्यात्मिक जुड़ाव का भी स्रोत बन सकता है।

4. पल की सूक्ष्मता: स्पर्श, साँस और हृदय की धड़कन

कल्पना कीजिए इस पल को:

पुरुष की आँखें आधी बंद, शरीर शिथिल, और प्रत्येक साँस धीरे-धीरे बाहर निकलती है।

स्त्री की आँखें चमक रही हैं, हाथ और त्वचा संवेदनाओं को महसूस कर रहे हैं।

उसका हृदय तेज़ धड़क रहा है, उसकी ऊर्जा अभी भी बह रही है।

पुरुष के शरीर से ऊर्जा बाहर बह चुकी है, स्त्री के शरीर में वही ऊर्जा खिल रही है।

यह पल दो अलग दृष्टिकोणों के बीच सामंजस्य का है: पुरुष अपने अंदर, स्त्री बाहर की ओर फिर भी अनुभव जुड़ा हुआ।

सम्भोग के बाद का क्षण सिर्फ शारीरिक क्रिया का नहीं, बल्कि ऊर्जा, मन और इंद्रियों का गहन अनुभव है।

पुरुष: थकान और एकांत में अनुभव को आत्मनिरीक्षण में पचा रहा।

स्त्री: ऊर्जा में खिलना और साझा अनुभव की चाह।

यदि यह अंतर समझा जाए और स्वीकार किया जाए, तो यह पल दोनों के बीच गहरा, संतुलित और सूक्ष्म जुड़ाव बन सकता है।

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S€X की इच्छा तो हर किसी की होती है...🔥S€X की चाहत हर इंसान के दिल में होती है, चाहे वो स्त्री हो या पुरुष, युवा हो या बु...
14/01/2026

S€X की इच्छा तो हर किसी की होती है...🔥

S€X की चाहत हर इंसान के दिल में होती है, चाहे वो स्त्री हो या पुरुष, युवा हो या बुजुर्ग। ये एक ऐसी प्राकृतिक भावना है जो हमें जीवंत बनाती है, हमें एक-दूसरे से जोड़ती है।

कामुक बातें, वो मीठी-मीठी फुसफुसाहटें या कल्पनाएं, हर किसी को भाती हैं। वे हमारे मन को उत्तेजित करती हैं, एक तरह का रोमांच पैदा करती हैं जो जीवन को और भी रंगीन बना देता है।

कामवासना में डूबना भी हर किसी की फितरत में शुमार है। ये कोई छुपी हुई बात नहीं, बल्कि वो आग है जो हमारे अंदर सुलगती रहती है, हमें आगे बढ़ने की ऊर्जा देती है।

और क्यों न हो? ये तो प्रकृति का दिया हुआ वरदान है, एक स्वाभाविक प्रक्रिया जो जीवन चक्र का हिस्सा है। बिना इसके दुनिया कैसे चलती? ये वो पुल है जो दो आत्माओं को एकाकार करता है।

सहमति से किया गया S€X कभी गलत नहीं हो सकता। मैं तो इसे रोजमर्रा की क्रियाओं की तरह ही देखती हूं, जैसे सांस लेना, हंसना या रोना। ये कोई पाप नहीं, बल्कि एक सुंदर अनुभव है जो रिश्तों को गहराई देता है।

जो चीज जीवन को आनंद से भर दे, आत्मा को सुकून दे, वो कैसे खराब हो सकती है? ये तो वो अमृत है जो हमें जीने का असली मजा चखाता है, हमें अपनी बॉडी और भावनाओं से जुड़ने का मौका देता है।

और फिर, जब महर्षि वात्स्यायन जैसे महान दार्शनिक ने'कामसूत्र' जैसी अमर रचना लिखी हो, जहां S€X को विस्तार से, वैज्ञानिक और कलात्मक ढंग से समझाया गया हो.

कैसे उसके विभिन्न आसन, भावनाएं और महत्व को बारीकी से वर्णित किया गया हो, तो वो विषय चर्चा लायक क्यों नहीं? वो कैसे दूषित या वर्जित हो सकता है? ये तो ज्ञान का खजाना है जो सदियों से हमें मार्गदर्शन देता आ रहा है।

अगर S€X को सही तरीके से, प्यार और समझ से किया जाए, तो ये दुनिया की सबसे ज्यादा आनंद देने वाली क्रिया बन जाती है। ये न सिर्फ शारीरिक सुख देती है, बल्कि मानसिक शांति और भावनात्मक जुड़ाव भी पैदा करती है, जैसे कोई जादू जो हमें नई ऊर्जा से भर दे।

लेकिन कुछ लोग बाहर से ऐसे दिखावा करते हैं मानो सारे संस्कार और मर्यादाएं सिर्फ उन्हीं में ठुंसी हुई हों। वे खुद को इतना पवित्र दिखाते हैं कि लगता है जैसे वे कभी इस दुनिया के सुखों से वाकिफ ही न हों।

जब कोई S€X की बात छेड़े, तो ये तुरंत संस्कारी बन जाते हैं, नाक-भौं सिकोड़ते हैं, जैसे S€X उनके लिए कोई अनजान या निषिद्ध शब्द हो। लेकिन सच्चाई तो ये है कि ऐसे ढोंगी लोग ही सबसे ज्यादा कामवासना में डूबे रहते हैं। ये वही हैं जो अकेले में हर रात पोर्न वीडियो देखते हैं, अपनी कल्पनाओं में

खोए रहते हैं, लेकिन समाज के सामने बड़े-बड़े नैतिकता के लेक्चर देते फिरते हैं। इनकी दोहरी जिंदगी ही इनकी हकीकत बयां करती है।

S€X बस एक क्रिया है, जैसे महान दार्शनिक रजनीश ओशो ने कहा है, नहाना-धोना, खाना-पीना, सोना-जागना, सब कुछ जीवन की सामान्य प्रक्रियाएं हैं।

ठीक वैसे ही S€X भी एक क्रिया है, फर्क सिर्फ इतना कि ये स्त्री और पुरुष द्वारा एकांत में की जाती है, जहां गोपनीयता और सम्मान का ख्याल रखा जाता है। ये कोई असाधारण या पापपूर्ण काम नहीं, बल्कि जीवन का एक हिस्सा है।

फिर S€X से जुड़ी जरूरी जानकारियां, जैसे सुरक्षित S€X, स्वास्थ्य, भावनात्मक पहलू पर खुलकर बात करने में क्या बुराई है? ये तो समाज को जागरूक बनाती है, मिथकों को तोड़ती है और स्वस्थ रिश्तों को बढ़ावा देती है।

इसलिए मैं तो सिर्फ S€X पर ही नहीं, किसी भी विषय पर लिखती हूं तो खुलकर लिखती हूं, बिना किसी झिझक या डर के। अगर S€X पर लिखूंगी तो कोई बुराई ही करेगा, इससे ज्यादा क्या कर सकता है? और बुराई तो वैसे भी हर जगह मिल जाती है.

अच्छे कामों में भी, नेक इरादों में भी। तो फिर डर किस बात का? जीवन छोटा है, इसे खुलकर जियो, खुलकर
बोलो।
#सभ्यतासंस्कृतिकीरक्षा #कामवासनानहींसाधनाहै #भारतीय_कामशास्त्र #कामसूत्र_और_सुगंध #खजुराहोबोलरहाहूं #वात्सायनफाउंडेशनखजुराहो #आलिंगन #

स्त्री कभी संतुष्ट नहीं होती !स्त्री से प्रेम में अगर आप ये उम्मीद करते हैं कि वो आपसे पूरी तरह खुश है तो आप नादानी में ...
14/01/2026

स्त्री कभी संतुष्ट नहीं होती !

स्त्री से प्रेम में अगर आप ये उम्मीद करते हैं
कि वो आपसे पूरी तरह खुश है तो
आप नादानी में हैं...???

ये स्त्री के मूल में ही नहीं है...
अगर आप बहुत ज्यादा केयर करते है तो
उससे भी ऊब जाएगी,
अगर आप बहुत उग्र हैं तो वो
उससे भी बिदक जाएगी,
अगर आप बहुत ज्यादा विनम्र हैं तो वो
उससे भी चिढ जाएगी,
अगर आप उससे बहुत ज्यादा बात करते हैं तो वो आपको टेक इट फौर ग्रांटड लेने लगेगी,
अगर आप उससे बहुत कम बात करते हैं तो वो
मान लेगी कि आपका चक्कर कहीं और चल रहा है...

यानी आप कुछ भी कर लीजिए वो
संतुष्ट नहीं हो सकती...
ये उसका स्वभाव है वो
एक ऐसा डेडली काॅम्बीनेशन खोजती है जो
बना ही न हो बन ही न सकता हो....

ठीक वैसे ही जैसे कपड़ा खरीदने जाती है तो
कहती कि इसी कलर में कोई दूसरा डिजाइन दिखाओ, इसी डिजाइन में कोई दूसरा कलर दिखाओ
कपड़े का गट्ठर लगा देती है...
बहुत परिश्रम के बाद एक पसंद आ भी गया,
तो भी संतुष्ट नहीं हो सकती...
आखिरी तक सोचती है कि इसमे ये
डिजाइन ऐसे होता तो परफैक्ट होता...

इन सबके बावजूद एक बहुत बड़ी खूबी भी है
स्त्री के अंदर ...
एक बार उसे कुछ पसंद आ गया तो उसे
आखिरी दम तक सजो के रखती है वो
चाहे रिश्ते हो या चूड़ी...

रंग उतर जाएगा चमक खत्म हो जाएगी
पर खुद से जुदा नहीं करेगी...
बस यही खूबी स्त्री को विशिष्ट बनाती है...

स्त्री से प्रेम में अगर आप ये उम्मीद करते हैं कि
वो आपसे पूरी तरह खुश है तो
आप नादानी में हैं...
ये स्त्री के मूल में ही नहीं है !
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Sextortion क्या है...???Sextortion एक डिजिटल अपराध है, जिसमें अपराधी किसी व्यक्ति की न्यूड/प्राइवेट फोटो या वीडियो के ज़...
14/01/2026

Sextortion क्या है...???

Sextortion एक डिजिटल अपराध है, जिसमें अपराधी किसी व्यक्ति की न्यूड/प्राइवेट फोटो या वीडियो के ज़रिये उसे डराकर पैसे या कोई और फायदा वसूलते हैं।

Sextortion फ्रॉड कैसे होता है..???

अक्सर ये तरीके अपनाए जाते हैं..???
1. फेक प्रोफाइल से दोस्ती
• Facebook, Instagram, Telegram, WhatsApp पर सुंदर लड़की/लड़के की फेक ID
• कुछ दिनों में भरोसा जीत लिया जाता है
2. वीडियो कॉल या चैट
• सामने वाला पहले से रिकॉर्डेड न्यूड वीडियो दिखाता है
• सामने वाला सोचता है कि कॉल लाइव है
3. रिकॉर्डिंग
• आपकी वीडियो कॉल या फोटो चुपचाप रिकॉर्ड कर ली जाती है
4. ब्लैकमेल
• कहा जाता है:
👉 “पैसे भेजो, वरना वीडियो वायरल कर देंगे”
👉 “परिवार/दोस्तों को भेज देंगे”
5. बार-बार पैसे की मांग
• एक बार पैसे दे दिए तो मांग कभी खत्म नहीं होती

🚨 Sextortion के शिकार कौन होते हैं..???
• ज़्यादातर युवा लड़के और लड़कियाँ...
• भावनाओं में बहने वाले लोग...
• अकेलापन महसूस करने वाले लोग...

👉 इसमें शर्म की कोई बात नहीं, ये अपराधी की गलती है।

Sextortion से कैसे बचें..???

✔ किसी अनजान व्यक्ति से न्यूड वीडियो कॉल न करें..
✔ सोशल मीडिया पर प्राइवेट अकाउंट रखें..
✔ कैमरा परमिशन और फ्रेंड लिस्ट चेक रखें..
✔ जल्दी भरोसा न करें..
✔ किसी भी धमकी से डरें नहीं..

🆘 अगर Sextortion हो जाए तो क्या करें..???
1. पैसे बिल्कुल न दें..
2. चैट, कॉल, स्क्रीनशॉट सबूत के तौर पर सेव करें..
3. तुरंत ब्लॉक और रिपोर्ट करें..
4. Cyber Crime Helpline 1930 पर कॉल करें..
5. या वेबसाइट पर शिकायत करें..
👉 cybercrime.gov.in

पोस्ट को ज्यादा से ज्यादा शेयर जरूर कीजिएगा।
जनहित में जारी..
जय हिन्द जय भारत।
#सभ्यतासंस्कृतिकीरक्षा #कामवासनानहींसाधनाहै #भारतीय_कामशास्त्र #कामसूत्र_और_सुगंध #खजुराहोबोलरहाहूं #वात्सायनफाउंडेशनखजुराहो #आलिंगन

बडी उम्र की कुँवारी लड़कियाँ घर बैठी हैं। अगर अभी भी माँ-बाप नहीं जागे तो स्थितियाँ और विस्फोटक हो सकती हैं...???हमारा स...
13/01/2026

बडी उम्र की कुँवारी लड़कियाँ घर बैठी हैं। अगर अभी भी माँ-बाप नहीं जागे तो स्थितियाँ और विस्फोटक हो सकती हैं...???

हमारा समाज आज बच्चों के विवाह को लेकर इतना सजग हो गया है कि आपस में रिश्ते ही नहीं हो पा रहे हैं..???

समाज में आज 27-28-32 उम्र तक की बहुत सी कुँवारी लडकियाँ घर बैठी हैं क्योंकि इनके सपने हैसियत से भी बहुत ज्यादा हैं ! इस प्रकार के कई उदाहरण हैं।

ऐसे लोगों के कारण समाज की छवि बहुत खराब हो रही है।

सबसे बडा मानव सुख, सुखी वैवाहिक जीवन होता है। पैसा भी आवश्यक है, लेकिन कुछ हद तक।

पैसे की वजह से अच्छे रिश्ते ठुकराना गलत है। पहली प्राथमिकता सुखी संसार व अच्छा घर-परिवार होना चाहिये।

ज्यादा धन के चक्कर में अच्छे रिश्तों को नजर-अंदाज करना गलत है। "संपति खरीदी जा सकती है लेकिन गुण नहीं।

मेरा मानना है कि घर-परिवार और लडका अच्छा देखें लेकिन ज्यादा के चक्कर में अच्छे रिश्ते हाथ से नहीं जाने दें।

सुखी वैवाहिक जीवन जियें...
30 की उम्र के बाद विवाह नहीं होता समझौता होता है और मेडिकल स्थिति से भी देखा जाए तो उसमें बहुत सी समस्याएँ उत्पन्न होती हैं।
आज उससे भी बुरी स्थिति कुंडली मिलान के कारण हो गई है।

आप सोचिए जिनके साथ कुंडली मिलती है लेकिन घर और लड़का अच्छा नहीं और जहाँ लड़के में सभी गुण हैं वहां कुण्डली नहीं मिलती और हम सब कुछ अच्छा होने के कारण भी कुण्डली की वजह से रिश्ता छोड़ देते हैं।

आप सोच के देखें जिन लोगो के 36 में से 20 या फिर 36/36 गुण भी मिल गए फिर भी उनके जीवन में तकलीफें हो रही हैं, क्योंकि हमने लडके के गुण नहीं देखे।

पंडितों ने पढे लिखे आधुनिक समाज को एक सदी और पीछे धकेल दिया, कुंडली मिलान के चक्कर में अच्छे रिश्ते नहीं हो पा रहे हैं।

आजकल समाज में लोग बेटी के रिश्ते के लिए (लड़के में) चौबीस टंच का सोना खरीदने जाते हैं, देखते-देखते चार पांच साल व्यतीत हो जाते हैं।

उच्च "शिक्षा" या "जॉब" के नाम पर भी समय व्यतीत कर देते हैं। लड़के देखने का अंदाज भी समय व्यतीत का अनोखा उदाहरण हो गया है..???

खुद का मकान है कि नहीं...??
अगर है तो फर्नीचर कैसा है..???
घर में कमरे कितने हैं..???
गाडी है कि नहीं..???
है तो कौनसी है..??
रहन-सहन, खान-पान कैसा है...???
कितने भाई-बहन हैं...??
बंटवारे में माँ-बाप किनके गले पड़े हैं..??
बहन कितनी हैं, उनकी शादी हुई है कि नहीं..??
माँ-बाप का स्वभाव कैसा है..???
घर वाले, नाते-रिश्तेदार आधुनिक ख्यालात के हैं कि नहीं..???

बच्चे का कद क्या है..???
रंग-रूप कैसा है..??
शिक्षा, कमाई, बैंक बैलेंस कितना है..??
लड़का-लड़की सोशल मीडिया पर एक्टिव है कि नहीं..??
उसके कितने दोस्त हैं..???
सब बातों पर पूछताछ पूरी होने के बाद भी कुछ प्रश्न पूछने में और सोशल मीडिया पर वार्तालाप करने में और समय व्यतीत हो जाता है। हालात को क्या कहें माँ-बाप की नींद ही खुलती है 30 की उम्र पर। फिर चार-पाँच साल की यह दौड़-धूप बच्चों की जवानी को बर्बाद करने के लिए काफी है। इस वजह से अच्छे रिश्ते हाथ से निकल जाते हैं और माँ-बाप अपने ही बच्चों के सपनों को चूर चूर-चूर कर देते हैं।

एक समय था जब खानदान देख कर रिश्ते होते थे। वो लम्बे भी निभते थे समधी-समधन में मान मनुहार थी। सुख-दु:ख में साथ था। रिश्ते-नाते की अहमियत का अहसास था।

चाहे धन-माया कम थी मगर खुशियाँ घर-आँगन में झलकती थी। कभी कोई ऊँची-नीची बात हो जाती थी तो आपस में बड़े-बुजुर्ग संभाल लेते थे। तलाक शब्द रिश्तों में था ही नहीं, दाम्पत्य जीवन खट्टे-मीठे अनुभव में बीत जाया करता था। दोनों एक-दूसरे के बुढ़ापे की लाठी बनते थे और पोते-पोतियों में संस्कारों के बीज भरते थे। अब कहां हैं वो संस्कार? आँख की शर्म तो इतिहास हो गई। नौबत आ जाती है रिश्तों में समझौता करने की।

लड़का-लड़की अपने समाज के नही होंगे तो भी चलेगा, ऐसी बातें भी सामने आ रही हैं।

आज समाज की लडकियाँ और लड़के खुले आम दूसरी जाति की तरफ जा रहे हैं और दोष दे रहे हैं कि समाज में अच्छे लड़के या लड़कियाँ मेरे लायक नहीं हैं। कारण लडकियाँ आधुनिकता की पराकाष्ठा पार कर गई है। जब ये लड़के-लड़कियाँ मन से मैरिज करते हैं तब ये कुंडली मिलान का क्या होता है ? तब तो कुंडली की कोई बात नहीं होती‌ | यही माँ बाप सब कुछ मान लेते हैं। तब कोई कुण्डली, स्टेटस, पैसा, इनकम बीच में कुछ भी नहीं आता।

अगर अभी भी माँ-बाप नहीं जागेंगे तो स्थितियाँ और विस्फोटक हो जाएंगी। समाज के लोगों को समझना होगा कि लड़कियों की शादी 22-23-24 में हो जाये और लड़का 25-26 का हो। सब में सब गुण नहीं मिलते।"

घर, गाड़ी, बंगला से पहले व्यवहार तोलो। माँ बाप भी आर्थिक चकाचोंध में बह रहे है। पैसे की भागम-भाग में मीलों पीछे छूट गए हैं, रिश्ते-नातेदार।

टूट रहे हैं घर परिवार सूख रहा है प्रेम और प्यार। परिवारों का इस पीढ़ी ने ऐसा तमाशा किया है कि आने वाली पीढ़ियां सिर्फ किताबों में पढ़ेंगी "संस्कार"समाज को अब जागना जरूरी है अन्यथा रिश्ते ढूंढते रह जाएंगे।

आपकी क्या प्रतिक्रिया है..??अपने अनमोल विचार कमेंट्स में जरूर दीजियेगा।
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“सेक्स को तुम्हारे आध्यात्मिक जीवन का हिस्सा होना चाहिए; उसे पवित्र होना चाहिए।सेक्स अश्लील नहीं है, न ही पोर्नोग्राफ़िक...
13/01/2026

“सेक्स को तुम्हारे आध्यात्मिक जीवन का हिस्सा होना चाहिए; उसे पवित्र होना चाहिए।
सेक्स अश्लील नहीं है, न ही पोर्नोग्राफ़िक, न ही निंदनीय, न ही दबाने योग्य—बल्कि उसे अत्यंत सम्मान दिया जाना चाहिए;
क्योंकि हम उसी से जन्मे हैं।
वही हमारी जीवन-ऊर्जा है।
और जीवन-ऊर्जा की निंदा करना—सब कुछ की निंदा करना है।”

#वात्सायनफाउंडेशनखजुराहो #सभ्यतासंस्कृतिकीरक्षा #कामवासनानहींसाधनाहै #भारतीय_कामशास्त्र #कामसूत्र_और_सुगंध #खजुराहोबोलरहाहूं #आलिंगन

अभी भी समय है समाज को बर्बाद होने से रोकना होगा..???प्रकृति ने नारी के शरीर पर स्तन दिए,ताकि वह अपनी संतान को स्तनपान कर...
13/01/2026

अभी भी समय है समाज को बर्बाद होने से रोकना होगा..???
प्रकृति ने नारी के शरीर पर स्तन दिए,ताकि वह अपनी संतान को स्तनपान करा कर उसका पालन पोषण कर सके पर..???

पिछले कुछ वर्षों से असंख्य महिलाओं ने अपने स्तनों को सोशल मीडिया पर फॉलोवर्स बढ़ाने का माध्यम बना लिया हैं..???
एक देश इजरायल है जहां लड़कियां देश की सुरक्षा के लिए कदम से कदम मिलाकर लड रही है..???
एक देश हमारा भारत है जहां ज्यादातर लड़कियां यूट्यूब,इंस्टाग्राम पर नंगी होकर मुजरा कर रही है और दुःख इस बात का है मां-बाप / पति उन्हें मना करने के बजाय बहुत खुश हो रहें हैं और उनकी हौसला अफजाई कर रहे हैं...???
फॉलो और लाइक,कमेंट्स करने वाले भाई इनके मजे ले रहे हैं और वाह वाह कर रहे हैं..???

कुछ लोग कह रहे हैं कि इसमें कुछ ग़लत नहीं है ..???
आपकी सोच ग़लत है..???
उनको मैं बताना चाहता हूं कि समाज की कुछ मर्यादाएं भी होती हैं जिनका पालन करना सबके लिए अनिवार्य होता है ।
ऐसे लोगों से मेरा प्रश्न है कि - मान लीजिए आप अपनी बहन बेटियों की बहुत इज्जत करते हैं, आपकी सोच भी गंदी नहीं है तो क्या आपकी बहन बेटियां आपके सामने निर्वस्त्र घूम सकती हैं..???
नहीं ना..?

इसलिए सामाजिक नियमों का पालन कीजिए, बच्चों को नैतिकता की शिक्षा दीजिए, व्यभिचार से दूर रहिए और देश की संस्कृति बचाने में अपना योगदान दीजिए।🙏
सार्वजनिक जीवन में अश्लीलता का विरोध सदैव होगा, वीडियो ही बनाना है तो कुछ अच्छे वीडियो बनाएं, ऐसे वीडियो जो परिवार संग देखे जा सके..????
लोगों को अपना टैलेंट दिखाना है, अपने निजी अंग नही..???

बहुत महत्वपूर्ण विचारणीय विषय है..???
अश्लीलता फैलाने वाले एकाउंट को जैसे दिखे तुरंत रिपोर्ट कीजिए।

इस मुहिम का हिस्सा बनिए पोस्ट जितना ज्यादा हो सके शेयर जरूर कीजिएगा।🙏
जनहित में जारी...
जय हिन्द जय भारत 🙏
#वात्सायनफाउंडेशनखजुराहो #सभ्यतासंस्कृतिकीरक्षा #कामवासनानहींसाधनाहै #भारतीय_कामशास्त्र #कामसूत्र_और_सुगंध #खजुराहोबोलरहाहूं #आलिंगन

सिर्फ प्यार कह देने से अपराध माफ नहीं हो जाता…???“अगर लड़की 18 साल से कम उम्र की है,तो उसे घर से भगा ले जाना..???भारतीय ...
13/01/2026

सिर्फ प्यार कह देने से अपराध माफ नहीं हो जाता…???

“अगर लड़की 18 साल से कम उम्र की है,
तो उसे घर से भगा ले जाना..???
भारतीय न्याय संहिता – BNS के तहत अपराध है।

“BNS धारा 137 —
7 साल तक की जेल और जुर्माना का प्रावधान है..!!

“शादी या गलत इरादे से ले गए तो
BNS धारा 140 —
10 साल तक की सज़ा का प्रावधान है।।

“और अगर नाबालिग से शारीरिक संबंध हुआ,
तो POCSO कानून लगेगा —
10 साल से लेकर उम्रकैद तक प्रावधान है।

“याद रखिए —
नाबालिग की सहमति की कोई क़ानूनी कीमत नहीं होती है..???

“एक ग़लत फैसला
पूरी ज़िंदगी बर्बाद कर सकता है..???
सोचिए समझिए जिंदगी बहुत खूबसूरत है इसे ऐसे ही बर्बाद होने न दे।
⚖️ कानून जानिए, अपराध से बचिए
📢 यह संदेश जन जन तक जरूर पहुँचाइए।🙏
#वात्सायनफाउंडेशनखजुराहो #सभ्यतासंस्कृतिकीरक्षा #कामवासनानहींसाधनाहै #भारतीय_कामशास्त्र #कामसूत्र_और_सुगंध #खजुराहोबोलरहाहूं #आलिंगन

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