स्वास्थ्य विभाग समाचार लखीमपुर

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04/06/2026
04/06/2026

04/06/2026

लखीमपुर खीरी। ​अस्पताल के गलियारे में मां-बाप की सांसें अटकी हुई थीं, 3 साल का मासूम दर्द से बेहाल था और सामने चुनौती थी भोजन नली में फंसा पांच रुपये का सिक्का। लेकिन स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय (सम्बद्ध जिला चिकित्सालय मोतीपुर) की टीम ने महज 120 मिनट के भीतर जो कर दिखाया, उसने न सिर्फ एक मासूम को नई जिंदगी दी, बल्कि सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की मुस्तैदी की एक बेहतरीन मिसाल भी पेश की।

प्रधानाचार्य मेडिकल कॉलेज लखीमपुर डॉ वाणी गुप्ता ने बताया कि ​सोमवार सुबह करीब 11:00 बजे परिजन अपने 3 वर्षीय बच्चे को लेकर अस्पताल पहुंचे, उनके अनुसार बच्चे ने खेलते-खेलते पाँच रुपए का सिक्का निगल लिया है। ई एन टी, ओ पी डी में मौजूद असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ मनोज शर्मा ने बिना वक्त गंवाए तुरंत एक्स-रे कराया, और सिक्के का स्थान और गंभीरता की जानकारी ली, सिक्का भोजन नली (Esophagus) के शुरुआती हिस्से में फंसा पाया गया। मामला गंभीर था, क्योंकि थोड़ी सी भी देरी बच्चे की सांसों पर भारी पड़ सकती थी।
प्राचार्या प्रोफेसर डॉ. वाणी गुप्ता के कुशल नेतृत्व में चिकित्सा टीम ने मोर्चा संभाला और
​अस्पताल प्रशासन ने तुरंत इमरजेंसी प्रोटोकॉल के तहत आपरेशन कक्ष में बच्चे को वरीयता क्रम में सबसे ऊपर रखते हुए तयारियाँ चालू करी।
असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. श्वेता वर्मा (निशचेतक), असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. मनोज शर्मा और स्टाफ नर्स रेखा सैनी एवं पूरी टीम ने ऑपरेशन थिएटर (OT) में, ​दोपहर 12:45 बजे बच्चे को सुरक्षित बेहोशी (Anesthesia) दी एवं दूरबीन विधि (Endoscopy) का इस्तेमाल किया, और बिना कोई चीरा या टांका लगाए कुछ ही मिनटों में भोजन नली से वह सिक्का सुरक्षित बाहर निकाल लिया।

*​महज 2 घंटे में सब कुछ फाइनल!*

प्रधानाचार्य डॉ वाणी गुप्ता ने बताया कि सुबह 11 बजे बच्चे का अस्पताल आना, जांच होना, ऑपरेशन की तैयारी और दोपहर 01 बजे से पहले सिक्का बाहर निकालकर परिजनों को सौंप देना—संस्थान की तत्परता और बेजोड़ टीमवर्क की कहानी खुद बयां करता है।

*​परिजनों ने जताया डॉक्टरों का आभार*

​सिक्का हाथ में आते ही माता-पिता के चेहरे पर मुस्कान लौट आई और उन्होंने राहत की सांस ली। परिजनों ने डॉक्टरों को 'भगवान' बताते हुए पूरी मेडिकल टीम का हाथ जोड़कर आभार व्यक्त किया।
​इस सफल ऑपरेशन पर अस्पताल प्रशासन का कहना है कि संस्थान क्षेत्र के लोगों को उत्कृष्ट और उन्नत स्वास्थ्य सेवाएं देने के लिए निरंतर प्रतिबद्ध है और यह सफल केस इसी कड़ी का एक हिस्सा है।

04/06/2026

*मासूम के गले में फंसा ₹5 का सिक्का, मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों ने 'बिना चीरे' के निकाला, बचाई जान!*​लखीमपुर खीरी।​अस्पताल...
03/06/2026

*मासूम के गले में फंसा ₹5 का सिक्का, मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों ने 'बिना चीरे' के निकाला, बचाई जान!*

​लखीमपुर खीरी।
​अस्पताल के गलियारे में मां-बाप की सांसें अटकी हुई थीं, 3 साल का मासूम दर्द से बेहाल था और सामने चुनौती थी भोजन नली में फंसा पांच रुपये का सिक्का। लेकिन स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय (सम्बद्ध जिला चिकित्सालय मोतीपुर) की टीम ने महज 120 मिनट के भीतर जो कर दिखाया, उसने न सिर्फ एक मासूम को नई जिंदगी दी, बल्कि सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की मुस्तैदी की एक बेहतरीन मिसाल भी पेश की।

प्रधानाचार्य मेडिकल कॉलेज लखीमपुर डॉ वाणी गुप्ता ने बताया कि ​सोमवार सुबह करीब 11:00 बजे परिजन अपने 3 वर्षीय बच्चे को लेकर अस्पताल पहुंचे, उनके अनुसार बच्चे ने खेलते-खेलते पाँच रुपए का सिक्का निगल लिया है। ई एन टी, ओ पी डी में मौजूद असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ मनोज शर्मा ने बिना वक्त गंवाए तुरंत एक्स-रे कराया, और सिक्के का स्थान और गंभीरता की जानकारी ली, सिक्का भोजन नली (Esophagus) के शुरुआती हिस्से में फंसा पाया गया। मामला गंभीर था, क्योंकि थोड़ी सी भी देरी बच्चे की सांसों पर भारी पड़ सकती थी।
प्राचार्या प्रोफेसर डॉ. वाणी गुप्ता के कुशल नेतृत्व में चिकित्सा टीम ने मोर्चा संभाला और
​अस्पताल प्रशासन ने तुरंत इमरजेंसी प्रोटोकॉल के तहत आपरेशन कक्ष में बच्चे को वरीयता क्रम में सबसे ऊपर रखते हुए तयारियाँ चालू करी।
असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. श्वेता वर्मा (निशचेतक), असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. मनोज शर्मा और स्टाफ नर्स रेखा सैनी एवं पूरी टीम ने ऑपरेशन थिएटर (OT) में, ​दोपहर 12:45 बजे बच्चे को सुरक्षित बेहोशी (Anesthesia) दी एवं दूरबीन विधि (Endoscopy) का इस्तेमाल किया, और बिना कोई चीरा या टांका लगाए कुछ ही मिनटों में भोजन नली से वह सिक्का सुरक्षित बाहर निकाल लिया।

*​महज 2 घंटे में सब कुछ फाइनल!*

प्रधानाचार्य डॉ वाणी गुप्ता ने बताया कि सुबह 11 बजे बच्चे का अस्पताल आना, जांच होना, ऑपरेशन की तैयारी और दोपहर 01 बजे से पहले सिक्का बाहर निकालकर परिजनों को सौंप देना—संस्थान की तत्परता और बेजोड़ टीमवर्क की कहानी खुद बयां करता है।

*​परिजनों ने जताया डॉक्टरों का आभार*

​सिक्का हाथ में आते ही माता-पिता के चेहरे पर मुस्कान लौट आई और उन्होंने राहत की सांस ली। परिजनों ने डॉक्टरों को 'भगवान' बताते हुए पूरी मेडिकल टीम का हाथ जोड़कर आभार व्यक्त किया।
​इस सफल ऑपरेशन पर अस्पताल प्रशासन का कहना है कि संस्थान क्षेत्र के लोगों को उत्कृष्ट और उन्नत स्वास्थ्य सेवाएं देने के लिए निरंतर प्रतिबद्ध है और यह सफल केस इसी कड़ी का एक हिस्सा है।

1 जून से शुरू हुआ 'मलेरिया रोधी माह, 2030 तक मलेरिया खत्म करने का संकल्प, हर बुखार पीड़ित की होगी जांच​​लखीमपुर खीरी। जन...
03/06/2026

1 जून से शुरू हुआ 'मलेरिया रोधी माह, 2030 तक मलेरिया खत्म करने का संकल्प, हर बुखार पीड़ित की होगी जांच

​लखीमपुर खीरी। जनपद को मलेरिया और डेंगू जैसी बीमारियों से मुक्त बनाने के लिए 01 जून से 30 जून तक विशेष 'मलेरिया रोधी माह' अभियान चलाया जा रहा है। "मलेरिया को समाप्त करने का संकल्प—अब हम कर सकते हैं, अब हमें करना ही होगा" की थीम पर आधारित इस अभियान के तहत जिले की 10 प्रतिशत आबादी की मलेरिया जांच करने का लक्ष्य रखा गया है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) डॉ0 संतोष गुप्ता ने सभी सामुदायिक और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों को इसके विस्तृत दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं।

​मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) डॉ0 संतोष गुप्ता ने बताया कि इस पूरे महीने स्वास्थ्य विभाग द्वारा आम जनता के बीच व्यापक जन-जागरूकता कार्यक्रम चलाए जाएंगे। इसके लिए रैलियां, बैठकें, गोष्ठियां, पैम्फलेट वितरण और कार्यशालाएं आयोजित की जाएंगी। अभियान के तहत बुखार से पीड़ित हर मरीज की अनिवार्य रूप से जांच की जाएगी। यदि कोई मरीज मलेरिया पॉजिटिव (धनात्मक) पाया जाता है, तो उसे तुरंत पूरा इलाज दिया जाएगा और आशा कार्यकर्ता द्वारा उस रोगी की पूरी देखरेख (फॉलो-अप) की जाएगी।
​सीएमओ ने बताया कि यदि किसी क्षेत्र में मलेरिया का मरीज मिलता है, तो पीड़ित के परिवार और उसके आसपास के 50 घरों का तत्काल सर्वे किया जाएगा। वहां बुखार के अन्य मरीजों की खोज, मच्छरों के पनपने वाले स्थानों की पहचान और उन्हें नष्ट करने की कार्रवाई की जाएगी। मरीजों के इलाज की पूरी निगरानी 'मलेरिया ट्रीटमेंट कार्ड' (MTC) के जरिए होगी। हर रविवार को सार्वजनिक स्थलों पर "हर रविवार, मच्छर पर वार, लार्वा पर प्रहार" और "हमने ठाना है, मलेरिया मिटाना है" जैसे नारों के साथ सफाई अभियान चलाया जाएगा। इसके साथ ही आशा, एएनएम और सीएचओ को इसके लिए विशेष ट्रेनिंग दी जा रही है।

*​जिले में मलेरिया और डेंगू के घटते आंकड़े*

स्वास्थ्य विभाग के मुस्तैद प्रयासों के चलते जनपद में मलेरिया और डेंगू के मामलों में लगातार कमी आई है:
​वर्ष 2024: मलेरिया के 614 और डेंगू के 305 मामले सामने आए थे।
​वर्ष 2025: मलेरिया के मामले घटकर 445 और डेंगू के 68 रह गए।
​वर्ष 2026 (अब तक): इस साल अब तक मलेरिया के केवल 22 और डेंगू के मात्र 04 मामले ही दर्ज हुए हैं।
​जिला मलेरिया अधिकारी हरि शंकर ने बताया कि भारत सरकार ने वर्ष 2030 तक देश से मलेरिया को पूरी तरह खत्म करने का लक्ष्य रखा है। इसके लिए जरूरी है कि हर इलाके में मलेरिया के स्थानीय मामलों को शून्य किया जाए और लगातार 3 वर्षों तक यह स्थिति शून्य बनी रहे। इसी को ध्यान में रखकर यह अभियान चलाया जा रहा है। जिला मलेरिया अधिकारी की टीम किसी भी मरीज के मिलने पर 24 से 48 घंटे के भीतर वहां निरोधात्मक कार्रवाई पूरी कर लेती है।
​अधिकारियों ने आम जनता से अपील की है कि वे अपने घरों के पास, कूलर, टायर और गमलों में पानी जमा न होने दें। स्कूलों, ग्राम सभाओं और धार्मिक स्थलों पर भी जागरूकता कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं, क्योंकि जनसहभागिता के बिना मलेरिया उन्मूलन का यह लक्ष्य हासिल करना संभव नहीं है।

02/06/2026

With Natural History Museum of Los Angeles County – I just got recognized as one of their top fans! 🎉
02/06/2026

With Natural History Museum of Los Angeles County – I just got recognized as one of their top fans! 🎉

02/06/2026

*विश्व तंबाकू निषेध दिवस की पूर्व संध्या पर सीएमओ कार्यालय में संगोष्ठी, अधिकारियों और कर्मचारियों ने ली शपथ*

​लखीमपुर खीरी। विश्व तंबाकू निषेध दिवस की पूर्व संध्या पर मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय के सभागार में एक विशेष संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता सीएमओ डॉ. संतोष गुप्ता ने की। इस अवसर पर उपस्थित सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को तंबाकू का सेवन न करने और समाज में इसके प्रति जागरूकता फैलाने की सामूहिक शपथ दिलाई गई।

​​संगोष्ठी को संबोधित करते हुए सीएमओ डॉ. संतोष गुप्ता ने तंबाकू उत्पादों से होने वाले जानलेवा नुकसानों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने धुआं रहित और धुआं वाले तंबाकू उत्पादों के दुष्प्रभावों को अलग-अलग रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि ​धुआं रहित तंबाकू उत्पाद (खैनी, गुटका, पान मसाला आदि) चबाने वाले तंबाकू उत्पादों से मुंह का कैंसर (ओरल कैंसर), जीभ, गले और मसूड़ों की बीमारियां होने का खतरा सबसे ज्यादा होता है। यह उत्पाद सीधे तौर पर पाचन तंत्र को भी नुकसान पहुंचाते हैं।
​धुआं वाले तंबाकू उत्पाद (बीड़ी, सिगरेट, हुक्का आदि): इनके सेवन से फेफड़ों का कैंसर, क्रॉनिक ब्रोंकाइटिस, अस्थमा, दिल का दौरा (हार्ट अटैक) और स्ट्रोक जैसी गंभीर और जानलेवा बीमारियां होती हैं। यह सीधे तौर पर श्वसन तंत्र को नष्ट कर देता है।

*​'पैसिव स्मोकिंग' भी है बेहद खतरनाक*

​सीएमओ ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि तंबाकू का धुआं सिर्फ पीने वाले को ही नहीं, बल्कि उसके आसपास रहने वाले लोगों को भी समान रूप से बीमार बनाता है। इसे पैसिव स्मोकिंग कहा जाता है। जन जागरूकता फैलाते हुए उन्होंने कहा कि धूम्रपान करने वालों के संपर्क में आने से निर्दोष लोग भी फेफड़ों और दिल की बीमारियों का शिकार हो जाते हैं।

*​गर्भवती माताओं और अजन्मे बच्चे को बड़ा खतरा*

​संगोष्ठी में महिलाओं और बच्चों के स्वास्थ्य पर पड़ने वाले असर को लेकर भी गंभीर चिंता व्यक्त की गई। डॉ. संतोष गुप्ता ने कहा:
​"यदि कोई गर्भवती माता तंबाकू उत्पादों का सेवन करती है या किसी अन्य के धूम्रपान के धुएं के संपर्क में आती है, तो इसका सीधा और घातक असर उसके गर्भ में पल रहे बच्चे पर पड़ता है। इससे समय से पहले प्रसव (प्री-मैच्योर डिलीवरी), बच्चे का वजन कम होना और बच्चे में जन्मजात विकृतियां होने का खतरा अत्यधिक बढ़ जाता है।​कार्यक्रम के दौरान एसीएमओ डॉ. एसपी मिश्रा, एसीएमओ डॉ. आरएम गुप्ता, और डिप्टी सीएमओ व कार्यक्रम के नोडल अधिकारी डॉ. प्रमोद वर्मा सहित जिला कार्यक्रम प्रबंधक अनिल यादव ने भी तंबाकू मुक्ति को लेकर अपने-अपने विचार साझा किए और स्वास्थ्य विभाग की ओर से चलाए जा रहे जागरूकता अभियानों की जानकारी दी।
​कार्यक्रम का सफल संचालन विजय वर्मा द्वारा किया गया। संगोष्ठी के अंत में सभी ने जिले को तंबाकू मुक्त बनाने में अपना सक्रिय योगदान देने का संकल्प लिया।

Address

Cmo Office
Lakhimpur
262701

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