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09/04/2026
08/02/2026

कैंसर..!!!
चिकित्सा विज्ञान...नई खोज..नई उम्मीद..

एक नया शोध हो रहा है और एक ऐसी MRI तकनीक से बिना किसी ऑपरेशन के कैंसर को खत्म करने की कोशिश की जा रही है। सिडनी में डॉक्टर एक बहुत ही आधुनिक कैंसर इलाज का इस्तेमाल कर रहे हैं, जिसे MRI-guided cryoablation कहते हैं।

यह कैसे काम करता है?

MRI की लाइव तस्वीरों की मदद से एक बहुत पतली सुई सीधे ट्यूमर तक पहुँचाई जाती है। फिर उस ट्यूमर को अंदर से बहुत ज़्यादा ठंडा करके जमा दिया जाता है। इस प्रकिया में ना तो कोई बडा चीरा लगता और ना ही कोई टांका लगाया जाता है। अस्तपाल में भी नहीं रखा जाता है। मरीज उसी दिन इलाज करवाकर घर चला जाता है। न दर्द, न निशान।

यह तकनीक इतनी सटीक है कि सिर्फ ट्यूमर को नष्ट करती है और आसपास के स्वस्थ ऊतकों को नुकसान नहीं पहुँचाती। जो लोग सर्जरी के लिए बहुत कमजोर हैं, ज्यादा उम्र के हैं, या जिनका ट्यूमर खतरनाक जगह पर है — उनके लिए यह इलाज नई ज़िंदगी का मौका हो सकता है।

रोचक बात ये भी है कि यह सुई टिश्यू को –40°C या उससे भी ज्यादा ठंडा कर सकती है, जिससे कैंसर कोशिकाएँ फट जाती हैं, लेकिन बाकी शरीर सुरक्षित रहता है।

सच्चाई ये है कि बड़ी खोजें बड़े ऑपरेशन से नहीं होतीं —बल्कि समझदारी और ठंडी तकनीक से होती हैं।

Sources: NSW Health | Sydney Adventist Hospital | Radiological Society of North America (RSNA)

08/01/2026

मोतियाबिंद (Cataract) का पता चला है? सिर्फ 'सर्जरी' न कराएं, सही निर्णय लें।

मरीज सर्जरी को सिर्फ एक "प्रक्रिया" मानते हैं। लेकिन एक सफल विज़न रेस्टोरेशन (Vision Restoration) के लिए ऑपरेशन थिएटर में जाने से पहले लिए गए फैसले सबसे ज्यादा मायने रखते हैं।

अगर आप या आपके घर के बड़े-बुजुर्ग मोतियाबिंद की सर्जरी के बारे में सोच रहे हैं, तो यह '5-पॉइंट चेकलिस्ट' आपको सही निर्णय लेने में मदद करेगी। अपने डॉक्टर से कंसल्टेशन के दौरान इन तथ्यों पर जरूर चर्चा करें।

1️⃣ सही सर्जन और अस्पताल का चुनाव (The Safety Net)

सिर्फ "नज़दीक" देखकर अस्पताल न चुनें। काबिलियत देखें।

✅ प्लानिंग: एक आधुनिक सर्जन सिर्फ यह नहीं पूछता कि "लेंस कौन सा चाहिए?", बल्कि वह आपके 'टारगेट विज़न' पर चर्चा करता है। उनसे पूछें: "अगर सर्जरी के बाद भी चश्मे का नंबर रह गया (Refractive surprise), तो उसे ठीक करने के लिए आपके पास क्या बैकअप प्लान है?"

✅ सुरक्षा (Safety): सुनिश्चित करें कि अस्पताल के पास NABH जैसी मान्यता (Accreditation) हो। यह इन्फेक्शन से बचाव के लिए बेहद ज़रूरी है।

✅ इमरजेंसी सपोर्ट: उनसे पूछें, "अगर सर्जरी के बाद रात में मुझे दर्द हो, तो मैं किससे संपर्क करूँ?" ऐसे अस्पताल को चुनें जहाँ 24/7 इमरजेंसी सुविधा उपलब्ध हो।

2️⃣ आँखों की सटीक माप (The Math Matters)

सर्जरी के बाद चश्मे के मोटे नंबर आने का मुख्य कारण गलत माप (measurement) है।

✅ तथ्य: पुराने 'मैन्युअल अल्ट्रासाउंड' (A-scan) में गलती की गुंजाइश ज्यादा होती है।

सही निर्णय: हमेशा 'Optical Biometry' की मांग करें। यह लेज़र तकनीक से आँख की माप लेती है जो माइक्रोन स्तर तक सटीक होती है और लेंस का पावर एकदम सही बताती है।

3️⃣ एस्टिग्मेटिज्म (Astigmatism) को नज़रअंदाज़ न करें

✅ तथ्य: अगर आपकी आँख में बेलनाकार नंबर (Cylindrical power > 0.75 D) है, तो साधारण लेंस लगाने के बाद भी आपको धुंधला दिखेगा।

सही निर्णय: 'Toric IOL' के बारे में पूछें। यह लेंस आपके एस्टिग्मेटिज्म को ठीक करता है। याद रखें, यहाँ डॉक्टर की सर्जिकल सटीकता (precision) ही सब कुछ है।

4️⃣ लेंस (IOL) का चुनाव - अपनी लाइफस्टाइल के अनुसार
कोई भी लेंस "परफेक्ट" नहीं होता, आपको अपनी ज़रुरत देखनी होगी:

✅ Monofocal: दूर की नज़र बेहतरीन, कॉन्ट्रास्ट अच्छा रहता है। शर्त: आपको पढ़ने के लिए चश्मा लगाना पड़ेगा।

✅ Multifocal (Bifocal & Trifocal): चश्मे से लगभग आज़ादी। शर्त: रात में लाइट के चारों ओर घेरे (Halos/Glare) दिख सकते हैं।

✅ EDOF: यह बीच का रास्ता है - कंप्यूटर और डैशबोर्ड विज़न के लिए बेहतरीन है और रात में भी दिक्कत कम होती है।

5️⃣ आपके शरीर की सेहत (Systemic Health)

आपकी आँखें तभी ठीक होंगी जब आपका शरीर स्वस्थ होगा।

✅ HbA1c: सर्जरी के लिए यह 7% से कम होना आदर्श है। शुगर बढ़ने पर इन्फेक्शन और रेटिना में सूजन (CME) का खतरा रहता है।

✅ Blood Pressure: सर्जरी के दिन BP नियंत्रित होना चाहिए (Systolic 180 से ऊपर होने पर सर्जरी कैंसल हो सकती है)।

✅ दवाइयां: अगर आप प्रोस्टेट की दवा (जैसे Tamsulosin) ले रहे हैं, तो अपने सर्जन को पहले ही बता दें। इससे सर्जरी की तकनीक बदलनी पड़ती है।

मोतियाबिंद की सर्जरी जीवन में एक बार होती है। इसे सिर्फ एक "काम" न समझें, बल्कि अपनी रोशनी को अपग्रेड करने का मौका समझें। जागरुक बनें, सही सवाल पूछें।

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27/12/2025

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Anti Cancer Drug found in Japan: वैज्ञानिकों ने कैंसर के इलाज की दिशा में एक नई और अनोखी खोज की है। यह खोज जापानी वृक्ष मेंढक की आंत में ....

27/11/2025

■ MBBS में सबसे पहले क्लास लगी और विषय पढ़ाया गया ग्रॉस एनाटॉमी...फिर अप्पर लिम्ब थोरेक्स...फिर लोअर लिम्ब एब्डॉमिन एन्ड पेल्विस...हेड एन्ड नेक...अंत में ब्रेन न्यूरो एनाटॉमी 🙄

अब अगला आग का दरिया था जिसका नाम था फिजियोलॉजी...के आपने अब तक जो जो देखा सीखा समझा वो सब अंग कैसे करतें हैं 😞 एक रोज ब्रेन न्यूरो एनाटॉमी की कक्षा चल रही थी और टीचर जी पूछ बैठे की मोर देखा है आपने ? हम सब जोर से बोले कि हाँ 😂

टीचर ने बोर्ड पर लिखा MORs 🙄 ये कौनसा मोर था हम सब हैरान थे... इतने में दूजा सवाल पूछे के हिंदी में आत्मसम्मान शब्द सुना है ? हम बोले हाँ ! उन्होंने बोर्ड पर लिखा ACC हम सब हैरान थे कि आत्मसम्मान को ACC कब लिखा जाता है 😞 हमें क्या पता था अभी सवाल और पूछे जाएंगे और जवाब हमको क्या देना है समझ न आ रहा था...अब टीचर महोदय ने सवाल पूछे हम सबसे :-

👉 कभी बच्चों को देखा है ? भागते भागते गिर जाते है...हँसी एक ही पल में आंसुओ में बदल जाती है ?
👉 उनके हाथ से कोई चॉकलेट छीन ले तो ?
👉 तुम किसी से बाइक/पैसा लेने जाओ और मना कर दे ?
👉 जब कोई आपका प्रपोजल ठुकरा दे ?
👉 ऑफिस में अचानक आपको नोकरी से निकाल दे ?
👉 कोई इंटरव्यू में आप रिजेक्ट हो गये ?
👉 या हम किसी भी क्षेत्र में रिजेक्ट हो जाते है ?
👉 आपके साथ अचानक कोई दुर्व्यवहार कर ले ?
👉 आपके साथ रहकर आपको कोई धोखा दे दे ?

हम सब चुप थे...मास्टर जी बोले कि रिजेक्ट होने का दिल पर बहुत ही बुरा प्रभाव पड़ता है। सामाजिक हो, या व्यक्तिगत क्षेत्र, हम में से कोई भी ठुकराया जाना नहीं चाहता। लेकिन हमें नहीं पता होता की ठुकराए जाने का दर्द शारीरिक पीड़ा जैसी ही होती है, और यह केवल मानसिक दर्द न होकर शरीर पर भी असर दिखाता है। क्योंकि हमारा मस्तिष्क ( ब्रेन ) रिजेक्शन को शारीरिक दर्द, पीड़ा और तकलीफ के बराबर मानता है, इसलिए रिजेक्ट होने पर मस्तिष्क की प्रतिक्रिया भी वैसी ही होती है।

रिजेक्शन से, मस्तिष्क के उन्ही भागों में ज्यादा असर होता है, जो शारीरिक चोट से प्रभावित होते है। एम आर आई स्टडी से हमें पता चलता है, कि मस्तिष्क रिजेक्ट होने पर वैसी ही प्रतिक्रिया देता है, जैसा शारीरिक चोट लगने पर देता है।

ठोकर ज्यादा तकलीफ देती है क्योंकि हमारी यादाश्त उसे समर्थन करती है - शरीर के ज़ख्म दवाई से भर जाते हैं, और उसकी पीड़ा दूर हो जाती है, लेकिन मस्तिष्क पर लगी ठोकर की चोट इंसान को बार-बार याद आती रहती है, वह क्षण, वह हादसा उसे भविष्य में भी सताता रहता है। मस्तिष्क उस दर्द को भूलना नहीं चाहता, इसलिए दर्द ज्यादा होता है।

ठुकराए जाने पर हमारे आत्म-सम्मान को ठेस पहुंचती है - आत्मविश्वास टूटने पर तकलीफ ज्यादा होता है। ठुकराए जाने पर हमारा खुद पर से गुरूर मिट जाता है, और अंदर का इंसान मर जाता है।

👉 मोर MORs देखे हो कभी ? रोते हुए भी नाचता रहता है ? बोले हाँ ! तो क्या हुआ उसके आत्मसम्मान ACC का ?
कैसे निकले आँसू उसके ?

बोले MORs को mu-opioid receptors (MORs) कहना चालू कर देना ! और आत्मसम्मान को anterior cingulate cortex (ACC) समझना चालू कर देना और आँसुओं को एमिगडाला समझना !!

क्योंकि ठोकर कैसी भी हो...ठुकराए जाने पर आपके मस्तिष्क में एमिगडला और एन्टीरीयर सिंगुलेट कोर्टेक्स के वेंट्रल पार्ट में mu-opioids रसायन का अत्याधिक बनने से भूचाल आता है। लेकिन शरीर शारीरिक/मानसिक ठोकर की चिकित्सा खुद ब खुद करता है। कमाल की बात है यही रसायन बनने से पीड़ा का अनुभव होता है और यही रसायन धीरे धीरे उस जख्म को ही भर देते है जिससे आपके जज्बात कुछ दिन बाद शांत हो जाते है।

डॉ मोनिका जौहरी

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