25/05/2026
दवाइयों पर 50% डिस्काउंट का 'अंधा खेल' 💊💉
आजकल मेडिकल स्टोर पर आते ही लोग सबसे पहले पूछते हैं —"डिस्काउंट कितना मिलेगा?"
लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि बड़े और प्रतिष्ठित संस्थान 1% भी डिस्काउंट नहीं देते, फिर भी लोग वहाँ लाइन लगाते हैं.?
मार्जिन का गणित:
जितनी भी स्टैंडर्ड और एथिकल (Branded) दवाएं हैं, उन पर रिटेलर का मार्जिन सिर्फ 10% से 15% होता है। अब सोचिए, जो चीज़ दुकानदार को खुद 10% मुनाफे पर मिल रही है, वह आपको 50% की छूट कैसे दे सकता है?
50% की भारी छूट सिर्फ उन्हीं दवाओं पर संभव है जिनकी MRP बहुत ज्यादा बढ़ाकर छापी जाती है या जो नॉन-स्टैंडर्ड होती है.!
🤔 फिर भारी छूट कहाँ और कैसे मिलती है?👇
1️⃣ जेनेरिक दवाएं: सरकार द्वारा प्रमाणित जेनेरिक दवाएं (जैसे जन औषधि केंद्र की दवाएं) वाकई 50% से 90% तक सस्ती होती हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि इनके विज्ञापन और ब्रांडिंग पर करोड़ों रुपये खर्च नहीं किए जाते। ये दवाएं पूरी तरह सुरक्षित और असरदार होती हैं।
2️⃣ लोकल या नॉन-स्टैंडर्ड दवाएं: असली खतरा यहाँ है! कुछ ऐसी दवाएं जिनकी MRP जानबूझकर बहुत ज्यादा छापी जाती है ताकि भारी डिस्काउंट का लालच दिया जा सके।
सावधान रहें:
ज्यादा डिस्काउंट के चक्कर में ऑनलाइन या अनजान जगहों से दवा लेते समय नकली दवाओं का खतरा बढ़ जाता है। साथ ही, अगर दवाओं को सही तापमान (Storage Condition) में न रखा जाए, तो उनका असर खत्म हो जाता है।
मेरी सलाह: 👇👇
✔️ जेनेरिक दवा लें तो केवल प्रमाणित और सरकारी केंद्रों से ही लें, क्योंकि जेनेरिक दवाओं के विज्ञापन पर खर्च नहीं होता, इसलिए उन पर ईमानदारी से 50% से 90% तक का असली डिस्काउंट मिलता है।
✔️ डिस्काउंट के पीछे भागने के बजाय दवा की क्वालिटी, ब्रांड और भरोसेमंद स्टोर को प्राथमिकता दें।सस्ती दवा के चक्कर में बीमारी को लंबा न खींचें। सेहत अनमोल है, सही चुनिए! 🙏