07/07/2023
आयुर्वेद में 3 प्रकार के देशों का वर्णन मिलता है।
आनूप देश:
जो देश नदी, छोटी – छोटी जलाशय और पर्वतों से भरे हुआ हो
ताम्र वर्ण की भूमि वाली
अधिक विस्तृत स्थान वाली, नीरस, अनु उष्ण होती है
अधिक वर्षा होती हो
कमल आदि पुष्पो से युक्त
हंस, सारस, कारण्डव पक्षी, चक्रवाक पक्षी
खरगोश, सूअर, भैंस, रुरू, रोहि आदि पशुओं
हरे-हरे धान्य विशेष, शालि, केले, ईख आदि की फसल
बड़े पेड़, तमाल, नारियल के वृक्ष के घने वन
नदी या समुद्र तत्वी भूमि भाग हो
शीतल हवा चले
कफ दोष की प्रधानता होती है
वात कफ संबंधित रोग उत्पन्न करने वाला
रोग बहुत अधिक हो
उदर रोग व आम दोष उत्पन्न करने वाला
यहां के निवासी कोमल शरीर वाले होते हैं
Coastal areas/river beds can be said
जांगल देश:
थोड़े जल व वृक्ष से युक्त हो (कम हो)
देश से विपरीत त्रिन व घास युक्त हो
धूसर वर्ण की मिट्टी वाली व उष्ण होती है।
मूंग, धान, यव आदि धन्य वर्ग युक्त
चारो ओर खुला सूखा आसमान फैला हो
हवा अधिक चलती हो
गाय भैंस अधिक दूध देती है
कुओ स पानी मिलता है
शमी, करील, बेल, मदार, पीलू, बेर, अर्जुन, धव, तिनिश, सल, विज्यक्षार आदि वृक्ष
सुखी हवा के झोंके से छोटे-छोटे वृक्ष झुकते व लोच खाते रहे
बालू व छोटी कंकरीट भ्रम उत्पन्न करती हो ( Hallucinations)
हिरण, एन, रीक्ष, श्वेत बिंदु मृग, गोकर्ण, गधा आदि पशु
रोग बहुत कम हो
निवासी ठोस व कठोर शरीर वाले हो
वात, पित्त, रक्त रोग उत्पन्न करने वाला
Can be considered desert areas
साधारण देश:
आनूप व जांगल देश के मिश्रित लक्षण होते हैं
शीत, वर्षा, गर्मी, वायु समान रूप से होते है
अधिक गेहूं तथा यव के नाल, उड़द आदि धान्य हो
सभी को सुख देने वाली
वात, पित्त, कफ की समता होती है
आहार, विहार, निद्रा आदि का सही आचरण किया जाए तो रोग नहीं होती
रोगी भी अधिक न हो
यहां के निवासी स्थिर शरीर, कोमल प्रकृति, बलशाली, उत्तम वर्ण वाले, सुसंगठित देश वाले होते है