27/03/2026
कच्चा तेल सस्ता, पर डीजल पेट्रोल महंगा',
क्या है सरकार का खेल ? समझिए :
केंद्र सरकार ने पेट्रोल और डीज़ल पर सेंट्रल एक्साइज़ ड्यूटी में कटौती की है. बीजेपी नेता इस फ़ैसले को सरकार की तरफ से एक बड़ा कदम बता रहे हैं.
इस मुद्दे पर कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने एक्स पर एक पोस्ट में लिखा, "मई 2014 में कच्चे तेल की क़ीमत 106.94 डॉलर प्रति बैरल थी लेकिन पेट्रोल की कीमत ₹71.71 प्रति लीटर और डीज़ल की ₹56.71 थी."
"जबकि पश्चिम एशिया में संघर्ष शुरू होने से ठीक पहले कच्चे तेल की क़ीमत गिरकर 70 डॉलर प्रति बैरल थी, लेकिन दिल्ली में पेट्रोल ₹94.72 प्रति लीटर और डीज़ल ₹87.62 में बिक रहा था."
"भारत ने रूस से भी सस्ते में कच्चा तेल ख़रीदा. लेकिन इस फ़ायदे का लाभ उपभोक्ताओं को राहत के रूप में नहीं मिला. तो एक तरफ तेल की विश्व भर में क़ीमतें गिरीं और वहीं भारतीय उपभोक्ताओं पर बोझ बढ़ गया."
मतलब देशवासियों को लूट कर सरकार अपनी जेब भर रही थी।
साल 2014 और 2026 के बीच, सरकार ने एक्साइज़ ड्यूटी में कुल 21 बार बदलाव किए जिसमें 12 बार इसे बढ़ाया गया.
इससे पहले केंद्र सरकार ने पेट्रोल और डीज़ल पर एक्साइज़ ड्यूटी में 10 रुपये प्रति लीटर की कटौती की है.
इसका मक़सद देश की तेल कंपनियों को मध्य-पूर्व में चल रहे युद्ध के बीच कच्चे तेल की बढ़ती वैश्विक कीमतों से मुक़ाबले के लिए सपोर्ट करना है.
वित्त मंत्रालय ने 26 मार्च को जारी एक अधिसूचना में, पेट्रोल पर एक्साइज़ ड्यूटी को पहले के 13 रुपये प्रति लीटर से घटाकर 3 रुपये प्रति लीटर कर दिया है, जबकि डीज़ल पर लगने वाले शुल्क 10 रुपये प्रति लीटर को पूरी तरह ख़त्म कर दिया गया है.
मंत्रालय ने बताया कि ये शुल्क कटौती तत्काल प्रभाव से लागू हो गई है.
साल 2014 में मई महीने में पहली बार नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र में सरकार बनी थी.
आरोप लगते रहे हैं कि केंद्र सरकार ने डीज़ल और पेट्रोल की क़ीमतों को बढ़ाकर खूब कमाई की और लोगों को इसका लाभ नहीं मिला.
मतलब 12 साल तक आम लोगों को महंगा बेचकर खूब कमाई की तो अब लोगों को लाइन में क्यों लगना पड़ रहा है, पब्लिक ही क्यों मारी जाय हर बार?
आपने क्या सीखा कमेंट में जरूर बताइये