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Celebrating my 11th year on Facebook. Thank you for your continuing support. I could never have made it without you. 🙏🤗🎉...
08/04/2026

Celebrating my 11th year on Facebook. Thank you for your continuing support. I could never have made it without you. 🙏🤗🎉
Thanks all our well wishers and supporters
We are always ready to serve you the best
We always, respect your attitude and support.
It's very long time of 11years, with all of you
We again thanks for the love you are sending.

भगवान श्रीराम के आदर्श हमें सत्य, धैर्य और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देते हैं।माता सीता हमें पवित्रता और शक्ति का...
04/04/2026

भगवान श्रीराम के आदर्श हमें सत्य, धैर्य और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देते हैं।
माता सीता हमें पवित्रता और शक्ति का संदेश देती हैं, लक्ष्मण जी हमें निष्ठा सिखाते हैं और हनुमान जी भक्ति व साहस का प्रतीक हैं।

आइए, उनके जीवन से प्रेरणा लेकर अपने कर्मों से जीवन को श्रेष्ठ बनाएं।
जय श्री राम 🙏

Being a reiki master, I am sending Devine vibes of pure love, healing, happiness and wisdom to all the group members.I t...
29/03/2026

Being a reiki master, I am sending Devine vibes of pure love, healing, happiness and wisdom to all the group members.

I thanks my higher self to permit me to radiate the divinity for the higher Good of all the friends.
Please be open to accept the energy to live happy, healthy and energetic all the time.

जो कर्म पर विश्वास करे, वो सनातन हिंदू जो मर्यादाओं का पालन करें, वो सनातन हिन्दू जो कण कण में भगवान देखें, वो सनातन हिन...
19/03/2026

जो कर्म पर विश्वास करे, वो सनातन हिंदू
जो मर्यादाओं का पालन करें, वो सनातन हिन्दू
जो कण कण में भगवान देखें, वो सनातन हिन्दू
जो भेद न जाने, मर्म पहचाने, वो सनातन हिंदू
जो हर ग्रंथ का सम्मान करें, वो सनातन हिन्दू
जो सुख दुख में भी कृतज्ञ रहे, वो सनातन हिंदू
हिन्दू धर्म नहीं है दोस्तो , हिन्दू मानवता की पहचान है
समस्त जगत के हर चैतन्य पुरुष को मेरा अभिनन्दन
नव संवत 2083 आपको आत्मविश्वास,अंतस चेतना व हर सद्कर्म से परिपूर्ण करने वाला हो।
जय श्रीराम राम
जय महाप्राण
जय शक्ति
जय प्राणशक्ति

मां के दर्शन अपनों के संग
07/03/2026

मां के दर्शन अपनों के संग

20/02/2026
*"शक्ति जीवन है, निर्बलता मृत्यु है।"**  विवेकानंद जी का मानना था कि *डर ही दुनिया के सभी दुखों और बुराइयों का कारण है।*...
20/02/2026

*"शक्ति जीवन है, निर्बलता मृत्यु है।"**

विवेकानंद जी का मानना था कि *डर ही दुनिया के सभी दुखों और बुराइयों का कारण है।* जब *आप निडर* होते हैं, तभी आप अपनी असली शक्तियों को पहचान पाते हैं।
*सिर्फ एक कदम* (जापान की कहानी)
यह कहानी जापान के एक प्रसिद्ध विद्वान और मार्शल आर्ट्स गुरु की है। उनके पास एक युवक शिक्षा लेने आया जो बहुत जल्दी घबरा जाता था और हार मान लेता था।
*घटना* :
एक दिन गुरु ने उस युवक को एक ऊँचे पहाड़ की चोटी पर ले जाने का फैसला किया। रास्ता बहुत कठिन था। आधे रास्ते में ही युवक के पैर कांपने लगे। उसने नीचे देखा और डर के मारे बैठ गया। उसने कहा, "गुरु जी, मैं आगे नहीं बढ़ सकता। मेरी हिम्मत जवाब दे गई है, यहाँ से गिर गया तो मौत निश्चित है।"
गुरु ने मुस्कुराते हुए उससे कहा, "ऊपर चोटी की तरफ मत देखो और न ही ये सोचो कि कितना रास्ता बचा है। *बस अगले 'एक कदम' पर ध्यान दो।* क्या तुम सिर्फ एक कदम और चल सकते हो?"
युवक ने कहा, "हाँ, एक कदम तो चल सकता हूँ।"
*परिणाम* :
युवक ने सिर्फ अगले एक कदम पर ध्यान दिया। जैसे ही वह एक कदम चलता, गुरु फिर कहते, "बस एक और कदम।" ऐसे करते-करते वे चोटी पर पहुँच गए। वहाँ पहुँचकर युवक को एहसास हुआ कि उसका डर केवल उसके मन में था। उसकी शारीरिक शक्ति तो उतनी ही थी, लेकिन उसके "डर" ने उसे निर्बल बना दिया था।
*सीख* :
जापान की इस कहानी से हमें वही सीख मिलती है जो विवेकानंद जी ने कही थी। *जब हम डर को त्याग कर साहस के साथ कदम आगे बढ़ाते हैं, तो ब्रह्मांड की शक्तियाँ हमारी मदद करने लगती हैं।*

| *निडरता* | डर पर काबू पाते ही नामुमकिन लक्ष्य भी मुमकिन हो गया। |
| *आत्मविश्वास* | अपनी क्षमता पर शक करना ही असली कमजोरी है। *निरंतरता* | लक्ष्य कितना भी बड़ा हो, छोटे-छोटे साहसी कदमों से उसे पाया जा सकता है। |
> " *ब्रह्मांड की सारी शक्तियां पहले से ही हमारी हैं। वो हमीं हैं जिन्होंने अपनी आंखों पर हाथ रख लिया है और फिर रोते हैं कि कितना अंधकार है।"*
*बस अगले 'एक कदम' पर ध्यान दो,
जीवन में अनिश्चितता का डर
ही असफलता का कारण है।
अक्सर हमें किसी घटना से उतना डर नहीं लगता,
जितना इस विचार से लगता है कि "क्या होगा अगर कार्य सिद्धि नहीं हुई"।
हम असफलता से नहीं, बल्कि उस अनजाने 'कल' से डरते हैं जिसके बारे में हमें कुछ पता नहीं होता। इसी स्थिति को 'Intolerance of Uncertainty' कहते हैं।

यह समस्या शुरू कहाँ से होती है?
यह डर बचपन की कुछ सीखों से विकसित होता है, जैसे:
* "हर चीज़ का जवाब होना चाहिए।"
* "हर गलती से पहले ही संभल जाना चाहिए।"
* "हर हाल में कंट्रोल रखना चाहिए।"

इन बातों की वजह से हमारा मन अनजानी स्थितियों को 'खतरे' की तरह देखने लगता है। नतीजा यह होता है कि हर नया अनुभव, नया रिश्ता या बदलाव हमें डर जैसा महसूस होने लगता है।

दिमाग और नर्वस सिस्टम पर असर
जब कोई अनिश्चित स्थिति आती है, तो मस्तिष्क उसे प्रेडिक्ट (predict) करने की कोशिश करता है।

जब वह ऐसा नहीं कर पाता, तो Nervous System घबरा जाता है और False Alarms भेजने लगता है। दिल तेज़ धड़कने लगता है और हमें लगता है कि "कुछ गड़बड़ है", जबकि असल में कुछ हुआ ही नहीं होता।

मनोवैज्ञानिक तथ्य (Study)
जो लोग अनिश्चितता सहन नहीं कर पाते, वे:
* ज़्यादा बेचैन (Anxious) रहते हैं।
* खुद पर भरोसा कम करते हैं।
* जीवन के प्रति कम आशावादी होते हैं।
वे कमज़ोर नहीं हैं, बस उनका मन
"अज्ञात में असुरक्षित" महसूस करता है।

कंट्रोल बनाम विश्वास
जब हम हर बात को प्लान करने और कंट्रोल करने की कोशिश करते हैं, तो हम Present (वर्तमान) से कट जाते हैं। असली समाधान कंट्रोल में नहीं, बल्कि Trust (विश्वास) में है।
हमे खुद से कहना चाहिए:
"जो होगा, उसे संभाल लूँगा"
आपने अतीत में भी बहुत कुछ संभाला है, तो आगे भी संभाल लेंगे।

अब क्या करें? (रास्ता)
* खुद से सवाल करें: जब भी बेचैनी बढ़े, पूछें— "मैं क्या जानने की कोशिश कर रहा हूँ जो अभी जानना ज़रूरी नहीं है?"
* छोटी जीत पर ध्यान दें: परफेक्ट बनने के बजाय बेहतर बनने पर ध्यान दें।
* नया नज़रिया: हर अनजान चीज़ को खतरा नहीं, बल्कि एक अवसर मानें।

याद रखें:
जीवन का सौंदर्य 'अभी' में है। अगर हम निश्चिंत हैं, तो शांति की शुरुआत इसी पल से हो सकती है।

> "विश्वास (Faith)
यह नहीं है कि आगे क्या होगा, बल्कि यह भरोसा है कि जो भी होगा, बेहतर ही होगा"

18/02/2026

गुरु ही शिव है, शिव ही गुरु है
ज्यों ही जीवन, शिवमय हो जाता है, गुरु तत्व से युक्त हो जाता है
जैसे आज तक अबूझ पहेली है, कि पहले कौन, जीव या अंडा, इसी प्रकार शिव और गुरु का भी ध्यान या अनुसरण , अनबूझ है।
जब तक गुरु कृपा नहीं, शिव से योग नहीं
जब तक शिव कृपा नहीं, गुरु दीक्षा नहीं
इस लिए हर मनुष्य को निसंदेह, अपने हर प्रयास से शिव पूजन, शिव स्तुति पर जैसा भी बन सके, प्रयास करना चाहिए। तभी कदम गुरु की ओर बढ़ते हैं, और अगर जीवन के किसी मोड़ पर, गुरु से मुलाकात हो जाए, और आंतरिक संदेश मिले, तो निसंदेह गुरु चरणों को पकड़, लेना चाहिए और गुरु सानिध्य को शिवकृपा मान कर आत्मसात कर लेना चाहिए।
कभी भी यह मत सोचो, गुरु मिलेंगे तो शिव आराधना करुंगा, या शिव आराधना से ही गुरु प्राप्ति होगी, नहीं, जो पहले संभव हो कर लेने में ही सनातन सात्विकता है।
शिव में गुरु ढूंढ और गुरु में शिव
दोनों ही रास्ते एक ही गंतव्य तक पहुंचते है, यह अटल सत्य है।
हरि बोल हरि बोल हरि बोल

15/02/2026

ॐ नमः शिवाय शुभम् करु शुभम् करु

आज के पावन अवसर पर #हृदय प्रेम से, #आह्लाद से व समर्पण से परिपूर्ण होकर
समस्त #सनातन संस्कृति को नेति नेति का आशीर्वाद दे रहा है।
आज #हवाएं अनूकूल व सुगंधित होकर बह रही है, पूर्ण प्रकृति #नव यौवन में अठखेलियां कर रही है, पूर्ण ब्रह्माण्ड #हर्षोल्लास से परिपूर्ण है।
आज #महाशिवरात्रि का पावन दिवस है।
पूर्ण प्रकृति #चैतन्य है, हर साधक अपनी #साधना में प्रवृत्त है।
आओ आज एक जुट होकर पूर्ण वातावरण को
ॐ नमः शिवाय
की #ऊच ध्वनियों से भर दें, आज हृदय के #उल्लास को और निखारें और ध्यान रहे आज कोई भी #शिवलिंग बिना अभिषेक ने रहे, कोई भी #शिवालय घंटानाद से वहीन न हो, आज मेरे आराध्य को यह सुनिश्चित हो जाए कि #हर सनातनी #मन से जीवित है और #पूर्ण #जागरूक हैं।
एक फिर समस्त सनातन जगत को हार्दिक शुभकामनाएं।
हमारा #धर्म सनातन, हमारा कर्म #मानव कल्याण और हमारा ध्येय सदैव चैतन्यता से युक्त होकर #शिवमय रहना।

14/02/2026

NIKHIL is my true LOVE

प्रेम, पवित्रता की शाश्वत धारा है, जो आदि काल है प्रवाहित हो रही है।
प्रेम, पूजा है समर्पण है
प्रेम , आत्मसात करने की क्रिया है
प्रेम करना है तो
आत्मतत्व को जागृत कर पड़ता है
प्रेम के लिए
राधा मय भाव में स्थित होना जरूरी है
प्रेम, माता पिता से करो
प्रेम, गुरु और ईष्ट से करो
प्रेम, मानवता को करो
प्रेम, वनस्पतियों को करो
प्रेम, भगवान की हर कलाकृति से करो
प्रेम, खुद से करो
प्रेम वासना नहीं, आनंद है
आनंद को बिखेर दो आनंद में समा जाओ
यही है हमारा सनातन वैलेंटाइन

25/01/2026

मैं और आप हम सब भारत मां की संतान हैं, हम अपने देश के संविधान का हृदय से सम्मान करते हैं।
हम भारतीय हैं, सनातन है, हम सदैव मानवता का सम्मान करते हैं। हमारा धर्म मानवता है, हमारा उद्देश्य मानवता का उत्थान है, हम सदैव एक पिता, एको माता , एको उद्देश्य के सिद्धांत के अनुयाई हैं।
हमें गर्व है हम इस महान देश के अटूट अंग है।
एक ही आवाज एक ही नारा
भारत माता की जय
तिरंगा हमारी शान है
हमारा संविधान श्रेष्ठतम है

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