11/09/2026
🧘 अष्टांग योग
महर्षि पतंजलि ने योग को 'चित्त की वृत्तियों के निरोध' के रूप में परिभाषित किया है। उन्होंने योगदर्शन में योगसूत्रों का एक संकलन किया जिसमें उन्होंने पूर्ण कल्याण तथा शारीरिक, मानसिक और आत्मिक शुद्धि के लिये अष्टांग योग का एक मार्ग विस्तार से बताया है।
वे अष्ट योग इस प्रकार हैं – यम, नियम, आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार, धारणा, ध्यान, समाधि।
यम वह नियम है जो व्यक्ति को समाज में नैतिक तरीके से रहना सिखाता है। यम का अर्थ है निवृत्त होना।
पाँच यम (नैतिक संहिता) इस प्रकार हैं –
अहिंसा, 2. सत्य, 3. अस्तेय, 4. ब्रह्मचर्य, 5. अपरिग्रह।
पाँच नियम (आत्म अनुशासन) इस प्रकार हैं –
शौच, 2. सन्तोष, 3. तप, 4. स्वाध्याय, 5. ईश्वर-प्रणिधान।
शारीरिक • मानसिक • आत्मिक शुद्धि • पूर्ण कल्याण 🙏
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