Aadarsh pain clinic & palliative care centre

Aadarsh pain clinic & palliative care centre information about Pain conditions and palliative possibilities

11/04/2026

पंछी और पिंजरा

दूसरों की पीड़ा देखते देखते जिंदगी बीत रही है। कैंसर पीड़ित मरीज से सहानुभूति होना स्वाभाविक है और जब सारा फोकस एक व्यक्ति पर रहता है, बाकी सब लोग पृष्ठ भूमि में समा जाते हैं।

हम कारवां गुजरते देखते हैं, जो समय से पहले अर्थी में तब्दील हो जाते हैं। जिनका शरीर मोमबत्ती की तरह पिघलते हुए कुछ ही हफ्तों मे केवल तस्वीर में सिमट जाता है। तंदरुस्त युवा शरीर को जैसे घुन लग गया हो या दीमक ने लकड़ी को खोखला कर दिया हो।

आखिर ऐसा क्या हुआ कि कैंसर दबे पांव हृष्ट पुष्ट शरीर पर हावी होता जाता है। शुरुआत में कोई लक्षण नही,मतलब बिल्कुल भी नहीं। आम जांच में कैंसर पकड़ में आता ही नही आप चाहे अपनी सेहत के प्रति कितना भी जागरूक हों। जब अनायास वजन कम होता है,भूख नही लगती,कमजोरी महसूस होती है और नींद नही आती, तब आदमी डाॅक्टर से परामर्श करके कुछ दिन दवा खाता है।
पहली बार में कोई भी डाॅक्टर के मन में कैंसर का संशय नही आता है।इस तकलीफ का पता तब चलता है जब पानी सिर से उपर निकल जाता है।

दुख इस बात का है कि अचानक आई आपदा में परिवार असमंजस में घिर जाता है कि किस डाॅक्टर या अस्पताल में इलाज करायें। ऐलोपैथी से घृणा छुपी नही,बायोप्सी के खिलाफ हजारों वीडियो हैं। तरह तरह की पैथी मौजूद हैं जिसमें मरते व्यक्ति का कैंसर ठीक होने का दावा है। कुल मिलाकर हर पैथी की दवा कराने के चक्कर में मरीज प्रताड़ना झेलता है।
निर्णय लेने की क्षमता, सही निर्णय और कारगर इलाज मिल जाये तो किस्मत वाले हैं।
सारे कैंसर एक जैसे नही होते, एक ही तरह का कैंसर हर शरीर में अलग अलग तरह का प्रकोप फैलाता है।
एक ही अंग का कैंसर अलग अलग तरह का होता है। सारे ब्रेस्ट कैंसर एक समान नही होते ना ही सबका इलाज एक ही तरह से होता है।
शुरुआत में डाॅक्टर शॉपिंग, हॉस्पिटल हाॅपिग जोश से करी जाती है। जान पहचान निकालना, मोलभाव करना, गारंटी मांगने में कीमती समय बर्बाद हो जाता है।

लगातार खोजबीन चल रही है कि कैसे बचें , कैंसर से, लेकिन रंगों की बौछार सा यह चारों ओर बिखरता पनपता दिख रहा है, हर कैंसर का अलग रंग का रिबन।
जब तक स्याह राख में शरीर तब्दील न हो जाये, यह हर विधा को चकमा देता बढता चला जाता है।

अंततः उसकी आखिरी सांस राहत देती है तीमारदार को, आंसू थमते नही और थकान आंखों में जो समा गई , वो जो की
त्यों बनी रहती है।

हमसे क्या गलती हुई, क्या इलाज में लापरवाही रही या विधा, दवा, डाॅक्टर अस्पताल, का चयन सही नही किया। ग्लानि और पश्चाताप जितना परिवार को सताता है उतना ही डाॅक्टर को।

कैंसर का इलाज करना आसान नहीं। कैंसर आपके आदेश नही मानता,वो जिद्दी जानवर है जिसे कोई लिहाज, शर्म, तहजीब नही। वो अपनी मर्जी का मालिक है और एक पैरासाईट की तरह कतरा कतरा खून सोख लेता है। जहां मर्जी वो अपने मन मुताबिक विस्तार करके ठठा के हंसता है, करो पैट स्कैन करो, देखों मैने अब कुछ भी नही छोड़ा। लिवर गुर्दे हड्डियां पेट आंत और दिमाग,सब पर कब्जा कर लिया है। तुम्हारी महंगी दवा,गामा नाईफ और अटरम शटरम बेकार हैं।

इतना क्षीण कर दिया शरीर और आत्मा को कि वो कहेगा अब बस करो,मुझे जाने दो।
हां, अक्सर मरीज इलाज से मना कर देते हैं। डाॅक्टर, दवा ,अस्पताल , पैसा, किसी की कमी नही पर वो आगे जंग नही लड़ना चाहते। उनको देह के पिंजरे से मुक्त होना है। वो कमजोर नहीं है, बस थक चुके हैं, उनमें शारीरिक क्षमता नही बची। उनकी जीने की इच्छा मुर्झा जाती है,वो अस्पताल की लाईन में लड़खड़ाना नही चाहते, उनका शरीर व्हील चेयर पर बैठना नही चाहता।

वो घर में अपने बिस्तर पर बिल्कुल शांत अवस्था में पड़ा रहना चाहता है। हाथ मत लगाना, मालिश मत करना।मालूम है हवा का स्पर्श भी तकलीफ देता है, नही होता ना आपको विश्वास। बीमारी के बारे में पढ़कर आप बीमारी की दशा महसूस नही कर सकते।

बहुत क्रोध आता है उसकी मूक हंसी पर जो हमें लज्जित करती है कि तुमसे न होगा रे डाॅक्टर। तुम हार चुके हो।

और कितना समय है डाकसाब? मत पूछो यह सवाल फुसफुसाकर।
बस एक एक दिन सूर्य की रोशनी में नहा कर उस दिन को जियो।

तुम्हारा दर्द मैं सम्हालने में सक्षम हूं, पूरा नहीं सिर्फ इतना कि बर्दाश्त कर सको।
शरीर को लगातार कुतरते चूहे वाला एहसास का इलाज कुदरत ने दिया है।

उल्टी बेचैनी भय कब्ज मुंह के छाले निराशा, सबमें तुम्हारा हाथ थामकर निरंतर साथ दूंगी, बस विश्वास रखो मुझपर, जैसे मैं तुम्हारी हर तकलीफ को बिना शब्दों में कहे समझ लेती हूं।

*यूं ही नही चुनी मैनें राह कांटो भरी
जख्म गहरे हैं उसके चले जाने का।*

17/03/2026

Disheartened, euthanasia is not acceptable Me Lord.

12/11/2022

Using a wheel chair is a facility, just like a lift or escalator.
It is not an indicator of disability.
Normalise wheelchair facility at public places and your home.

11/11/2022

Pain is the most complicated physical and mental condition.

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Meerut City
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