Jivamrit, ayurveda, treatment center

Jivamrit, ayurveda, treatment center our center is successfully treated with complex ayurveda of complex diseases.

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18/04/2019

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हमारे इस केंद्र पर जैविक (आर्गेनिक) खाद्य सामग्री एवं समस्त बीमारियो का आयुर्वेद पद्धति से सफल उपचार किया जाता हे.

22/09/2018

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22/09/2018

रूसी (dandruff)

परिचय

आमतौर पर लोगों का मानना है की रूसी तभी होती है, जब हमारे सिर की त्वचा रूखी होती है। लेकिन ऐसा नहीं है। रूसी होने का कारण है, यीस्ट, जो कि सिर की मृत त्वचा को और सिर में जमे हुए तेल को खा कर जीती है। रूसी की वजह से हमारे सिर की त्वचा की कोशिकाएं जल्दी-जल्दी झड़ने लगती है और हमें लगता है कि हमारे सर में रूसी हो गई है।



कारण :

• मौसम में बदलाव
अत्यधिक गर्म या अत्यधिक ठंडा मौसम दोनों ही सिर की त्वचा को नुकसान पहुंचाते हैं। जिस तरह मौसम का उतार चढ़ाव हमारे शरीर को प्रभावित करता है उसी प्रकार सिर की त्वचा को भी, जिसका नतीजा डैंड्रफ हो सकता है।

• हाइजीन
बालों की ठीक से सफाई न करने या सिर से संबंधित उपकरणों को साफ न रखने जैसे कंघी, तौलिया, हेयर ब्रश आदि इसके साथ ही किसी और के द्वारा इस्तेमाल किए गए कंघी या तौलिया को इस्तेमाल करने से भी रूसी होने की समस्या हो सकती है।

• सही डाइट
शरीर में पोषक तत्वों का सही संतुलन न होने से भी स्कैल्प से रूसी नुमा पपड़ी उतरने लगती है। डाइट में दाल, दूध, ताज़ा फल और हरी सब्जियों (Diet for Dandruff) का इस्तेमाल जरूरी है। इसके अलावा बालों में सही मात्रा में तेल न लगाने से भी डैंड्रफ शुरू हो जाता है।

• ऑयल ग्लैंड का बंद होना
कई बार किसी बीमारी या हार्मोनल असंतुलन के कारण ऑयल ग्लैंड बंद हो जाते हैं जिससे रूसी होने लगती है।

• संक्रमण
बालों की स्टाइलिंग के लिए केमिकल का प्रयोग, हेयर कलर का इस्तेमाल, बालों को नेचुरल रूप से न सूखने देना, गीले बालों को ही बांध लेना आदि कुछ ऐसे कारण हैं जिससे डैंड्रफ (Rusi) होने लगता है। इससे बालों में खुजली शुरू होती है और धीरे धीरे समस्या बढ़ती जाती है।

• हेयर कलर
हेयर कलर में अमोनिया होता है जो कि स्कैल्प पर रूसी को जन्म देता है। हेयर कलर का इस्तेमाल एक्सपर्ट से राय लेकर ही करना चाहिए और अच्छे किस्म के हेयर कलर का इस्तेमाल करना चाहिए।

• पसीना और धूल
गर्मियों के दिनों में सिर की त्वचा पर जमा पसीना जब धूल के संपर्क में आता है तो स्कैल्प पर गंदगी जमा होना शुरू हो जाती है। जो कि धीरे धीरे डैंड्रफ का कारण बन जाती है।

• एलर्जी
कई बार हम जो तेल, शैंपू, हेयर स्टाइलिंग प्रॉडक्ट या हेयर कलर इस्तेमाल कर रहे होते हैं वह हमें सूट नहीं करता, नतीजा एलर्जी हो जाती है जो डैंड्रफ होने का बड़ा कारण है।


लक्षण :

• अगर आपको तीन हफ्ते से अधिक से खांसी है
• कब्ज और ख़राब पेट : कुछ अध्ययनों से यह पता चलता है कि कब्ज और ख़राब पेट होने की वजह से भी रुसी होती है
• डैंड्रफ से सिर में खुजली रहती है और बाल गिरने लगते हैं। यह ज्यादातर सर्दियों में होती है
• बालों का गिरना : आमतौर पर हमारे रोज़ 20 से 50 बाल गिरते हैं। सर में रुसी होने से भी बाल झड़ते हैं, अगर इससे ज्यादा बाल झड़ते है तो रुसी भी कारण हो सकती है
• सर की सूखी त्वचा : सर की सूखी त्वचा रुसी होने का एक प्रमुख कारण है
• सर में खुजली: जब रुसी होना शुरू होती है तो सबसे पहले सर में खुजली होना शुरू हो जाती है


आयुर्वेदिक उपचार :

• नींबू
3 या 4 नींबू के छिलके उतारकर उन्हें 4 या 5 कप पानी में 15 से 20 मिनट उबालें। जब ठंडा हो जाए तो इस घोल से बाल धोने के बाद लास्ट रिंस दें।

• मेथी
मेथी दानों को रात में भिगोकर सुबह उसे पीसकर लेप बनाएं और सिर की त्वचा में लगाएं, कुछ समय बाद धो दें। बालों की सभी समस्याओं में फायदा होगा।

• सिरका
सिरका और पानी को बराबर मात्रा में मिलाकर लगाने से भी डैंड्रफ खत्म होता है। इस मिश्रण को रात भर लगाकर सुबह बालों में शैंपू करें।

• दही
दही को स्कैल्प में लगाकर एक घंटा छोड दें और उसके बाद सिर धो लें।

• एलोवेरा
एलोवेरा जेल की मालिश करने से भी सिर की त्वचा संबंधी कई समस्याएं ठीक हो जाती हैं।

• नारियल तेल
5 चम्मच नारियल तेल में एक चम्मच नींबू रस मिलाकर लगाने से भी डैंड्रफ ठीक हो जाता है।

• नीम की पत्ती
नीम की पत्तियों का लेप सिर की त्वचा को गीला किए बिना ही लगाएं और कुछ देर बार सिर धो लें।

• बेसन
दही और बेसन मिलाकर सिर की त्वचा की हल्के हाथों से मालिश करें। ऐसा करने से भी डैंड्रफ खत्म हो जाता है।

• तुलसी
तुलसी और आंवले के पाउडर को मिलाकर लेप बनाएं और सिर की त्वचा पर आधा घंटा लगा रहने दें। इसके बाद शैंपू करें।

• अंडा
दो अण्डों को फोड़कर उसे फेंटे और सिर की स्कैलप पर मालिश करें। आधा घंटा बाद सिर धो लें।

बचाव :

• अपने सर की सतह को रुखा होने से बचाने के लिए सर और बालों में नियमित रूप से तेल लगायें।
• बालों को नियमित रूप से धोये, ऐसे करने से यह साफ रहेंगे और किसी प्रकार की समस्या के आसार कम होंगे।
• बालों को संक्रमण से बचाने के लिए दूसरों की कंघी आदि का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए

अधिक जानकारी के लिए संपर्क करे।
जीवामृत आयुर्वेद चिकित्सा केंद्र।
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21/09/2018

डिमेंशिया

परिचय

दिमाग की कोशिकाओं को न्यूरॉन्स (Neurons) कहते हैं जो दिमाग को संचालित करती हैं। डिमेंशिया एक ऐसा मानसिक रोग है जिसमें धीरे धीरे दिमाग के न्यूरॉन्स नष्ट हो जाते हैं। डिमेंशिया के शिकार लोगों के दिमाग में प्रोटीन का जमाव होने लगता है। यह दिमाग के स्मरणशक्ति में फैल जाता है जिससे दिमाग के कुछ हिस्सों के न्यूरॉन मरने लगते हैं। इससे याददाश्त के लिए जरूरी महत्त्वपूर्ण न्यूरो ट्रांसमीटर (Neuro Transmitter) मसलन एसेटिलकोलाइन (Asetilkolin) का स्तर कम हो जाता है।

डिमेंशिया के कारण होने वाली समस्या (Problem Due to Dementia)
इन बीमारियों (Dimagi Bimari) में रोगी की याददाश्त और सोचने की शक्ति धीरे धीरे कम होती जाती है। किसी के लिए भी डिमेंशिया बेहद परेशानी वाली बीमारी है। धीरे-धीरे यह व्यक्ति के रोजमर्रा के क्रियाकलापों को भी कठिन बना देती है। डिमेंशिया के रोगी धीरे धीरे पूरी तरह से दूसरों पर निर्भर होते जाते हैं|

डिमेंशिया से बचाव (Protection from Dementia)
कुछ क्रियाकलापों और जीवनशैली में तब्दीली लाकर न सिर्फ इस बीमारी के होने वाले खतरे को कम किया जा सकता है, बल्कि हो जाने के बाद इसके बढ़ने की गति को धीमा भी किया जा सकता हैं।
डिमेंशिया का कोई इलाज उपलब्ध नहीं है। डिमेंशिया की समस्याएं अचानक, रातों-रात नहीं होतीं. ये धीरे धीरे बढ़ती हैं. शुरू में ये छोटी, मामूली बातों में दिखाई देती हैं जिस कारण परिवार वाले इनको नज़रअंदाज़ कर देते हैं। यदि परिवार वाले सतर्क रहें तो पहचान पायेंगे कि क्या भूलना सामान्य किस्म का है या गंभीर समस्या का सूचक हो सकता है। वे फिर डॉक्टर से सलाह से रोगी का उचित इलाज करवायें। सिर में कई बार चोट लग जाने से इस बीमारी के होने की आशंका बढ़ जाती है।



कारण :

• आनुवांशिक: अगर परिवार में कोई भी इस बीमारी से पीड़ित हो, तो खतरे की संभावना ब़ढ जाती है
• बढ़ती उम्र में इस बीमारी के खतरे बढ़ जाते हैं।
• उच्च रक्तचाप से पीड़ित रोगियों को डिमेंशिया के प्रति सचेत रहना चाहिए।
• मधुमेह और मोटापे को भी इसका मुख्य कारण माना जाता है।
• ज़्यादा जंक फूड खाने से और आधुनिक जीवनशैली से शरीर से जरूरी पोषक तत्व नहीं मिल पाते जिस कारण डिमेंशिया (Dementia) होने की संभावना बढ़ जाती है।


लक्षण :

• अपने आप में गुमसुम रहना, मेल-जोल बंद कर देना, चुप्पी साधना
• कपडे उलटे पहनना, साफ़-सुथरा न रह पाना
• किसी बात को या प्रश्न को दोहराना, जिद्द करना, तर्क न समझ पाना
• किसी वस्तु का चित्र देखकर यह न समझ पाना कि यह क्या है
• कुछ काम शुरू करना, फिर भूल जाना कि क्या करना चाहते थे, और बहुत कोशिश के बाद भी याद न कर पाना
• चीज़ों को गलत, अनुचित जगह पर रख छोडना (जैसे कि घडी को, या ऑफिस फाइल को फ्रिज में रख देना)
• छोटी छोटी समस्याओं को भी न सुलझा पाना
• छोटी-छोटी बात पर, या बिना कारण ही बौखला जाना, चिल्लाना, रोना, इत्यादि
• डिमेंशिया से प्रभावित व्यक्ति में, रोग के बढ़ने के साथ ज्यादा और अधिक गंभीर लक्षण नज़र आते हैं। (याद रखें कि हर व्यक्ति में अलग अलग लक्षण नज़र आते हैं)
• नंबर जोड़ने और घटाने में दिक्कत, गिनती करने में दिक्कत
• बोलते या लिखते हुए गलत शब्द का प्रयोग करना, या शब्दों के अर्थ न समझ पाना
• बड़ी रकम को फालतू की स्कीम में डाल देना, पैसे से सम्बंधित अजीब निर्णय लेना, लापरवाही या गैरजिम्मेदारी दिखाना
• यह भूल जाना कि तारीख क्या है, कौनसा महीना है, साल कौनसा है, व्यक्ति किस घर में हैं, किस शहर में हैं, किस देश में



आयुर्वेदिक उपचार :

• चीनी को अवॉइड करें (Avoid sugar)
सबसे पहले अपने खाने से मीठा (sweet), कार्बोहाइड्रेट (carbohydrate) तथा रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट (refined carbohydrate) सभी को अलग कर दें। जब तक कि आपका वजन नियंत्रित नहीं हो जाता है, कार्बोहाइड्ट वाली चीजों को खाने से बचें। बहुत अधिक चीनी खो से भी दिमागी ऊतक (brain membrane) कमजोर होते हैं जिसका असर याद्दाश्त (memmory) पर पड़ता है।

• हल्दी (Haldi)
हल्दी में मौजूद तत्व करक्यूमिन (curcumin) डिमेंशिया से सुरक्षा प्रदान करता है। हल्दी में एंटीऑक्सीडेंट (antioxidant) तत्व भी होते हैं जो दिमागी विकास के लिए जरूरी हैं। ऐसे में भोजन में हल्दी का इस्तेमाल जरूर करें।

• नारियल तेल (Coconut oil)
नारियल तेल में खाना बनाने से भी डिमेंशिया का उपचार संभव है। नारियल तेल में वसा की मात्रा बहुत ज्यादा नहीं होती और यह दिमाग को भी तेज करता है।

• सलमन मछली और अंडा (Salmon fish and egg)
ठंडे पानी (cold water) में रहने वाली मछली सलमन और अंडे की जर्दी (egg yolk) दोनों ही दिमाग को तेज बनाती हैं। ऐसे में भोजन में दोनों को शामिल किया जाना बेहद जरूरी है। एक दिन में दो अंडे जरूर खाएं।

• अदरक (Ginger)
अदरक भी डिमेंशिया से बचाव के लिए बेहद फायदेमंद है। अदरक की चाय (ginger tea), खाने में अदरक का प्रयोग या सूखा अदरक (dry ginger), किसी भी रूप में अदरक खाना डिमेंशिया में बेहद लाभदायक है।

• ग्रीन टी (Green tea)
ग्रीन टी भी अच्छे स्वास्थ्य व अच्छे दिमागी विकास के लिए बेहद जरूरी है। ग्रीन टी पीने से शरीर में ऑक्सीजन (Oxygen) का संचार होता है और जमी हुई वसा (Saturated fat) दूर होती है। इससे याद्दाश्त बढ़ती है और भूलने की समस्या दूर होती है।

• बादाम (Almond)
बादाम भी तेज दिमाग के लिए फायदेमंद होता है। बादाम के तेल में वसा होती है जिसे खाने से चर्बी नहीं बढ़ती और दिमाग को अन्य पोषक तत्व (nutrient) भी मिलते हैं, जिससे न केवल शरीर बल्कि दिमाग भी स्वस्थ होता है।

बचाव :

• डिमेंशिया का व्यक्ति और परिवार पर क्या असर पड़ेगा, यह समझें और स्वीकारें।
• देखभाल कई वर्षों तक चल सकती है, इसलिए यह जानना जरूरी है कि रोगी की देखभाल के अलावा और क्या क्या जिम्मेदारियां निभानी हैं और देखभाल के लिए समय और पैसे का इंतजाम किस प्रकार करेंगे।
• इसलिए अपनी जिंदगी में उसी प्रकार से बदलाव लाएं ताकि रोगी की देखभाल के साथ साथ आप अपनी अन्य जिम्मेदारियां भी निभा सकें। इसके लिए जो भी सीखना है, वह सीखें, और खुशी खुशी अपने कर्तव्य का निर्वाह करें।
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19/09/2018

मधुमेह


परिचय

किसी भी कार्य को करने के लिए ऊर्जा की आवश्यकता होती है। शरीर को भी ऊर्जा की आवश्यकता होती है और शरीर इसकी पूर्ति, शरीर में उपलब्ध ग्लूकोज़ से करता है।

रक्त से ग्लूकोज़ इन्सुलिन नामक हार्मोन के द्वारा कोशिकाओं में पहुंचकर ऊर्जा प्रदान करता है। शरीर में इन्सुलिन का उत्पादन अग्न्याशय (pancreas) के द्वारा होता है।

भोजन शरीर में जाकर ग्लूकोज़ में परिवर्तित हो जाता है और ग्लूकोज़ रक्त में मिल जाता है। मधुमेह रोगी शरीर में उपलब्ध ग्लूकोज़ का पूरा उपयोग नही कर पाता है।

मधुमेह, चयापचय विकार (Metabolic Disorder) है। रक्त में ग्लूकोज़ की बढ़ी हुई मात्रा का अगर सही समय पर उपचार नही किया जाये तो यह शरीर के महत्वपूर्ण अंगो के लिए काफी नुकसानदायक होती है।

टाईप 1 मधुमेह (Type 1 Diabetes):
यह एक ऑटोइम्यून डिसऑर्डर (Autoimmune Disorder) है, इसमें शरीर की श्वेत कोशिकाएं अग्नाशय की इन्सुलिन बनाने वाली कोशिकाओं को नष्ट कर देती हैं।

टाईप 2 मधुमेह (Type 2 Diabetes):
टाईप 2 मधुमेह में शरीर में उत्पादित इन्सुलिन का सही उपयोग नहीं हो पता है। शरीर में इन्सुलिन की अतिरिक्त मात्रा के कारण अग्नाशय इन्सुलिन नही बनाता है।


कारण :

• मोटापा (Diabetes due to Obesity): मोटापा टाईप 2 मधुमेह होने का सबसे बड़ा कारण है।

• आनुवांशिक (Hereditary): इसे खानदानी रोग भी कहते है। अगर परिवार में किसी को टाईप 2 मधुमेह है या था तो सावधानी बरतने की ज़रूरत है।

• गर्भावस्था में रक्त में ग्लूकोज़ की अधिक मात्रा (High sugar levels during pregnancy)

• रक्त वाहिका रोग (Blood vessel disease)

• उच्च रक्त चाप और उच्च कोलेस्ट्रोल लेवल (High blood pressure, high cholesterol)

• प्री डायबिटिक (Pre-diabetes or impaired fasting glucose)


लक्षण :

• अत्यधिक प्यास लगना और बार बार पेशाब आना (Excessive Thirst): यह मधुमेह होने के पुख्ता लक्षण हैं

• जख्मों का जल्दी नही भरना और बार बार संक्रमण से प्रभावित होना (Slow Healing Sores and Recurrent Infections)

• थकान महसूस होना (Feeling Lazy): कोशिकाओं में ग्लूकोज़ नही पहुंचने के कारण शरीर को ऊर्जा आपूर्ति पूरी तरह से नही हो पाती है और मधुमेह का रोगी हमेशा थकान महसूस करता है

• धुंधला दिखना (Blurred Vision): रक्त में अतिरिक्त शुगर की उपस्थिति के कारण आँखों की कोशिकाओं में रक्त आपूर्ति पर असर पड़ता है और धीरे धीरे आँखे प्रभावित होने लगती हैं

• पैरो और हाथों में झनझनाहट होना (Tingling in Hands and Feet): रक्त में अतिरिक्त शुगर का कारण हमारे तंत्रिका प्रणाली को नुकसान पहुंचा सकता है

• मसूड़ों में सूजन (Swollen Gums): मधुमेह के कारण मसूड़ों में संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है

• रक्त में अतिरिक्त शुगर की उपस्थिति के कारण गुर्दे रक्त को साफ़ करने के लिए अधिक काम करने लगते हैं और मूत्र के द्वारा अतिरिक्त शुगर को शरीर से बाहर निकलते हैं। इस कारण बार बार पेशाब आता है और अत्यधिक प्यास लगती है

• वजन कम होना (Weight Loss): हमारे शरीर में जब कोशिकाओं को ग्लूकोज़ नही मिलता तो शरीर, शरीर में उपस्थित वसा तथा मांसपेशिओ से उसकी आपूर्ति करता है जिसके कारण शरीर में जमा वसा और मांसपेशिओ में कमी आती है और वजन बहुत जल्दी कम होने लगता है


आयुर्वेदिक उपचार :

दिन में एक बार 2 चम्मच करेले के रास का सेवन करें।
• दिन में दो बार 1 चम्मच मेथी के पाउडर का सेवन पानी के साथ अवश्य करें।
• दिन में एक बार 2 चम्मच कड़वी लौकी के रस को एक चम्मच आंवला के रास के साथ मिलकर कर सेवन करें।


बचाव :

• प्रतिदिन एक घंटा व्यायाम जरूर करें।
• अपने घर में प्रतिदिन मधुमेह का टेस्ट करें। रक्त में शुगर की मात्रा का ध्यान रखें।
• इन्सुलिन इंजेक्शन (Insulin Injetion) को तैयार करना और स्वयं लगाना आना चाहिए।
• एक इन्सुलिन पम्प (Insulin Pump) साथ रखना।
• कार्बोहाइड्रेट (Carbohydrate) की गिनती को ध्यान में रखना।
• रक्तचाप (Blood Pressure) कम होने पर मत्वपूर्ण जानकारी का ध्यान रखना

• प्राणायाम
• सेतुबंधासन
• बालासन
• वज्रासन
• सर्वांगासन
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18/09/2018

चिकन पॉक्स (चेचक)

परिचय

चेचक एक वायरल संक्रमण (viral infection) है जिससे शरीर पर छाले की तरह दाने बनते हैं और उनमें खुजली (itching) होती है। चेचक ऐसे लोगों को ज्यादा होता है जो बीमार न पड़ते हों या जिन्होंने चेचक से बचने के लिए टीकाकरण न करवाया हो। पहले के समय में युवा होने तक हर कोई चेचक रोग से एक न एक बार जरूर प्रभावित होता था लेकिन आज के समय में इस तरह के रोगों में कमी आई है। ज्यादातर लोगों के लिए, चेचक एक हल्की बीमारी है। फिर भी, यह टीका लगाया जाना बेहतर है। चेचक के टीके चेचक और उसकी संभावित जटिलताओं को रोकने के लिए एक सुरक्षित और प्रभावी तरीका है।

कारण (Causes of Chicken)
वरसैला- जोस्टर वायरस (vericells zoster virus) चिकन पॉक्स या चेचक (Chechak) के लिए जिम्मेदार होता है। ज्यादातर मामलों में यह संक्रमित व्यक्ति से अन्य लोगों में फैलती है। शरीर पर दाने निकलने के कई दिन पहले से ही वायरस शरीर में प्रवेश कर चुका होता है और यह दानों के सूखने तक बना रहता है। यह सलाइवा, छींकने और संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने से फैलता है।

चेचक के लक्षण (Symptoms of Chickenpox)
• दानों का एक या दोनों आंखों में फैलना।
• दानों का बहुत अधिक लाल और सूजा हुआ दिखना, यह त्वचा के अन्य संक्रमण के लक्षण भी हो सकते हैं।
• दानों के साथ, चक्कर आना, दिल की धड़कनों का तेज होना, सांस तेजी से चलना, कांपना, मांसपेशियों में समन्वय के नुकसान की तकलीफ, बिगड़ती खांसी, उल्टी, गर्दन में अकड़न या बुखार तेज होना।
• घर में किसी को भी प्रतिरक्षा की कमी या 6 महीने से छोटा बच्चा होना ।



कारण :

चेचक अत्यधिक संक्रमित होती है, और यह तेजी से फैल सकती है। वायरस के दाने के साथ सीधे संपर्क में आने से या खांसने या छींकने से हवा में बैक्टीरिया फैलने से दूसरों को हो सकती है। चेचक (chechak) का खतरा तब और अधिक होता है जब:

• किसी को कभी चेचक न हुई हो।
• चेचक के लिए टीकाकरण न करवाया हो।
• बच्चे जो स्कूल या हॉस्टल में संक्रमण से प्रभावित हुए हों।


लक्षण :

• थकान (कमजोरी) महसूस होना
• बुखार, सिरदर्द
• भूख में कमी
• शरीर पर लाल-गुलाबी, छोटे दानों का उभरना


आयुर्वेदिक उपचार :

• जई का आटा (Oat Flour)
चिकन पॉक्स होने पर शरीर में बहुत तेज खुजली होती है। खुजली से बचने के लिए जई के आटे को पानी में मिलाकर स्नान करना चाहिए। 2 लीटर पानी में 2 कप जई का आटा मिलाकर लगभग 15 मिनट तक उबालें, पके आटे को एक कॉटन के बैग में अच्छी तरह से बांधकर बॉथ टब में डालकर नहाएं।

• भूरा सिरका (Brown Vinegar)
आधा कप भूरे सिरके को पानी में डालकर नहाने से शरीर में हो रही खुजली से निजात पायी जा सकती है। इससे दानों की सूजन कम होती है और दाने सूखने भी लगते हैं।

• नींबू का रस (Lemon Juice)
नींबू का रस पीने से चिकन पॉक्स में राहत मिलती है। उपचार के लिए समय समय पर एक गिलास साफ पानी में नींबू निचोड़कर पीते रहें।

• नीम की पत्तियां (Margosa Leaves)
नीम की पत्तियों को गर्म पानी में डालकर नहाने से खुजली समाप्त होती है। नीम प्राकृतिक रूप से एंटी बैक्टीरियल गुणों से भरपूर होता है। ऐसे में चिकन पॉक्स ठीक करने में बेहद फायदेमंद है।

• बेकिंग सोडा (Baking Soda)
आधा चम्मच बेकिंग सोडा को एक गिलास गुनगुने पानी में मिलाएं और इस लेप को पूरे शरीर पर लगाकर सूखने दें। इससे चिकनपॉक्स जल्द ठीक हो जाता है।

• सेब का सिरका (Apple Cider Vinegar)
आधा कप सेब के सिरके को हल्के गर्म पानी में मिलाकर नहाने से राहत मिलती है। इस पानी में तकरीबन 20 मिनट तक जरूर बैठें।

• विटामिन ई तेल (Vitamin E Oil)
विटामिन-ई युक्त तेल को शरीर पर लगाने से चिकन पॉक्स के दौरान होने वाली खुजली से राहत मिलती है।

• गाजर (Carrot)
उबले गाजर और धनिया खाने से चिकन पॉक्स से आई कमजोरी कम होती है। गाजर और धनिया का सूप बनाकर पीने से राहत मिलती है।

• हर्बल चाय (Herbal Tea)
तुलसी, गेंदा और कैमोमाइल को मिलाकर चाय बनाइए फिर उसमें शहद या नींबू मिलाकर पीजिए। इस चाय को दिन में 3-4 बार पीने से राहत मिलती है।

• हरी मटर (Green Pea)
हरी मटर को पानी में पकाकर इसके पानी को शरीर में लगाइए, इससे चिकन पॉक्स के लाल चकत्ते समाप्त होते हैं।

• अदरक (Ginger)
बाथ टब में ठंडा पानी लें और उसमें अदरक डालकर तीस मिनट तक छोड़ दें। उसके बाद इस पानी में बैठ जाएं। इससे चिकनपॉक्स के दौरान होने वाली खुजली में आराम मिलता है।


बचाव :

• एक चम्मच बेकिंग सोडा (baking soda) को एक गिलास पानी में घोलकर, इस पानी को रूई की सहायता से शरीर पर लगाएं। चेचक से निजात मिलेगी।
• चेचक के दौरान होने वाली खुजली से बचने के लिए ओटमील (oatmeal) को पानी में डालकर नहाएं।
• चेचक (chechak) से होने वाली खुजली से बचने के लिए कैलामाइन लोशन (calamine lotion) को दानों के ऊपर लगाएं।
• दिन में दो से तीन बार प्रभावित स्थान पर शहद लगाएं।
• चेचक को जल्दी ठीक करने के लिए गाजर और हरे धनिया का सूप बनाकर पीएं।
• चंदन के तेल में रूई भिगाकर, प्रभावित स्थान पर लगाएं।
• हरी मटर को उबालकर उसका पेस्ट बनाकर, दानों पर लगाएं, आराम मिलेगा।
• एलोवेरा का ताजा रस निकालकर दानों पर लगाएं।



टिप्स (Tips for Chicken Pox)
• यदि चेचक के साथ बुखार भी है तो खूब पेय पदार्थ पीएं। पानी, जूस और सूप समय समय पर लेते रहें। यदि बच्चा संक्रमित मां का दूध पीता हो, तो मां को दूध नहीं पिलाना चाहिए।
• दानों को न खुजलाएं और हाथों के नाखून छोटे रखें। रात में सोते समय खुजलाने से बचने के लिए हाथों पर ग्लव्स (gloves) पहनें।
• खुजली से बचने के लिए शरीर को ठंडा रखें। हल्के कपड़े पहनें और गरम पानी से नहाने से बचें।
• इस बात का भी ध्यान रखें कि संक्रमण घर के दूसरों सदस्यों तक न फैले। संक्रमित व्यक्ति के कपड़े, बिस्तर आदि दूर रखें और उन्हें घर के अन्य सदस्यों के कपड़ों से अलग ही धोएं।
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