26/04/2026
*धर्म और आध्यत्म का मूल्यांकन* - मन के ओज से--
धर्म हमेशा अलग अलगस्थान पर बदल जाता है
भृम भरे पड़े हैं
परन्तु ईश्वर अकाट्य कण कण क्षण क्षण में निरंतर प्रवाह मान है
धर्म देश काल परिस्थितियों से बदलता रहता है
परन्तु स्वम्भू आध्यत्म अपरिवर्तनीय अकाट्य तन्द्रा है ये ही सनातन है- *मन मलंग*