Sisodia aushdhi bhandhar

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आप सभी को  प्रणाम किसी को भी आयुर्वेदिक परामर्श ,आयुर्वेदिक दवाओं से जुड़ी कोई भी जानकारी अथवा डिलीवरी के लिए निम्न नंबर...
28/02/2025

आप सभी को प्रणाम
किसी को भी आयुर्वेदिक परामर्श ,आयुर्वेदिक दवाओं से जुड़ी कोई भी जानकारी अथवा डिलीवरी के लिए निम्न नंबर पर संपर्क कर सकते हैं

सिसौदिया औषधि भंडार
9758111655
9627729754

होलसेल डिस्ट्रीब्यूटर
Krishna ayurveda & herbals
Swadeshi haridwar
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18/03/2024

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01/06/2023

हार्ट अटैक -: भारत में 3000 साल पहले एक बहुत बड़े ऋषि हुये थे। नाम था महाऋषि वागवट जी उन्होंने एक पुस्तक लिखी, जिसका नाम है, अष्टांग हृदयम Astang hrudayam इस पुस्तक में उन्होंने बीमारियों को ठीक करने के लिए 7000 सूत्र लिखें थे। यह उनमें से ही एक सूत्र है। वागवट जी लिखते हैं कि कभी भी हृदय को घात हो रहा है मतलब दिल की नलियों मे blockage होना शुरू हो रहा है तो इसका मतलब है कि रक्त blood में acidity अम्लता बढ़ी हुई है अम्लता आप समझते हैं, जिसको अँग्रेजी में कहते हैं acidity अम्लता दो तरह की होती है एक होती है पेट की अम्लता और एक होती है रक्त blood की अम्लता आपके पेट में अम्लता जब बढ़ती है तो आप कहेंगे पेट में जलन सी हो रही है, खट्टी खट्टी डकार आ रही हैं , मुंह से पानी निकल रहा है और अगर ये अम्लता acidity और बढ़ जाये तो hyperacidity होगी और यही पेट की अम्लता बढ़ते-बढ़ते जब रक्त में आती है तो रक्त अम्लता blood acidity होती है और जब blood में acidity बढ़ती है तो ये अम्लीय रक्त blood दिल की नलियों में से निकल नहीं पाती और नलियों में blockage कर देता है तभी heart attack होता है इसके बिना heart attack नहीं होता और ये आयुर्वेद का सबसे बढ़ा सच है जिसको कोई डाक्टर आपको बताता नहीं क्योंकि इसका इलाज सबसे सरल है ! इलाज क्या है ? वागवट जी लिखते हैं कि जब रक्त (blood) में अम्लता (acidity) बढ़ गई है तो आप ऐसी चीजों का उपयोग करो जो क्षारीय हैं आप जानते हैं दो तरह की चीजें होती हैं अम्लीय और क्षारीय ! acidic and alkaline अब अम्ल और क्षार को मिला दो तो क्या होता है ? acid and alkaline को मिला दो तो क्या होता है ? neutral होता है सब जानते हैं तो वागवट जी लिखते हैं कि रक्त की अम्लता बढ़ी हुई है तो क्षारीय (alkaline) चीजें खाओ ! तो रक्त की अम्लता (acidity) neutral हो जाएगी ! और रक्त में अम्लता neutral हो गई ! तो heart attack की जिंदगी मे कभी संभावना ही नहीं ! ये है सारी कहानी ! अब आप पूछेंगे कि ऐसी कौन सी चीजें हैं जो क्षारीय हैं और हम खायें ? आपके रसोई घर में ऐसी बहुत सी चीजें है जो क्षारीय हैं जिन्हें आप खायें तो कभी heart attack न आए और अगर आ गया है तो दुबारा न आए यह हम सब जानते हैं कि सबसे ज्यादा क्षारीय चीज क्या हैं और सब घर मे आसानी से उपलब्ध रहती हैं, तो वह है लौकी जिसे दुधी भी कहते हैं English में इसे कहते हैं bottle gourd जिसे आप सब्जी के रूप में खाते हैं ! इससे ज्यादा कोई क्षारीय चीज ही नहीं है ! तो आप रोज लौकी का रस निकाल-निकाल कर पियो या कच्ची लौकी खायो वागवट जी कहते हैं रक्त की अम्लता कम करने की सबसे ज्यादा ताकत लौकी में ही है तो आप लौकी के रस का सेवन करें, कितना सेवन करें ? रोज 200 से 300 मिलीग्राम पियो कब पिये ? सुबह खाली पेट (toilet जाने के बाद ) पी सकते हैं या नाश्ते के आधे घंटे के बाद पी सकते हैं इस लौकी के रस को आप और ज्यादा क्षारीय बना सकते हैं इसमें 7 से 10 पत्ते तुलसी के डाल लो तुलसी बहुत क्षारीय है इसके साथ आप पुदीने के 7 से 10 पत्ते मिला सकते हैं पुदीना भी बहुत क्षारीय है इसके साथ आप काला नमक या सेंधा नमक जरूर डाले ये भी बहुत क्षारीय है लेकिन याद रखें नमक काला या सेंधा ही डाले वो दूसरा आयोडीन युक्त नमक कभी न डाले ये आओडीन युक्त नमक अम्लीय है तो आप इस लौकी के जूस का सेवन जरूर करें 2 से 3 महीने की अवधि में आपकी सारी heart की blockage को ठीक कर देगा 21 वें दिन ही आपको बहुत ज्यादा असर दिखना शुरू हो जाएगा कोई आपरेशन की आपको जरूरत नहीं पड़ेगी घर में ही हमारे भारत के आयुर्वेद से इसका इलाज हो जाएगा और आपका अनमोल शरीर और लाखों रुपए आपरेशन के बच जाएँगे।
सनातन धर्म ही सर्वश्रेष्ठ है।
अगर आप समय समय पर रक्तदान करते रहेंगे तो भी हार्ट ब्लॉक की समस्या खत्म हो जाएगी

🙏हर हर महादेव 🙏

30/01/2023

कुछ आयुर्वेदिक चूर्ण :-
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आयुर्वेद के कुछ महत्वपूर्ण व कारगर चूर्ण की जानकारी दी जा रही है, जरुरत के हिसाब से इन्हें घर पर रखिये, क्योंकि आपातकाल में अन्य परिस्तिथतियों में हमारे दैनिक जीवन में बहुत उपयोगी हैं।

अश्वगन्धादि चूर्ण :-
००००००००००००
धातु पौष्टिक, दिमाग की कमजोरी, प्रमेह, शक्तिवर्द्धक, वीर्य-वर्द्धक, पौष्टिक तथा बाजीकर, शरीर की झुर्रियों को दूर करता है। मात्रा 5 से 10 ग्राम प्रातः व सायं दूध के साथ।

अविपित्तकर चूर्ण :-
०००००००००००००
अम्लपित्त की सर्वोत्तम दवा। छाती और गले की जलन, खट्टी डकारें, कब्जियत आदि पित्त रोगों के सभी उपद्रव इससे शांत होते हैं। मात्रा 3 से 6 ग्राम पानी के साथ।

आमलकी रसायन चूर्ण :-
००००००००००००००००
पौष्टिक, पित्त नाशक व रसायन है। नियमित सेवन से शरीर व इन्द्रियां दृढ़ होती हैं। मात्रा 3 ग्राम प्रातः व सायं पानी के साथ।

जातिफलादि चूर्ण :-
००००००००००००
अतिसार, संग्रहणी, पेट में मरोड़, अरुचि, अपचन, मंदाग्नि, वात-कफ तथा सर्दी-जुकाम को नष्ट करता है। मात्रा 1.5 से 3 ग्राम शहद से।

दाडिमाष्टक चूर्ण :-
००००००००००००
स्वादिष्ट एवं रुचिवर्द्धक। अजीर्ण, अग्निमांद्य, अरुचि गुल्म, संग्रहणी, व गले के रोगों में। मात्रा 3 से 5 ग्राम भोजन के बाद। पानी से।

चातुर्भद्र चूर्ण :-
००००००००००
बच्चों के सामान्य रोग, ज्वर, अपचन, उल्टी, अग्निमांद्य आदि पर गुणकारी। मात्रा 1 से 4 रत्ती दिन में तीन बार शहद से।

चोपचिन्यादि चूर्ण :-
०००००००००००००
उपदंश, प्रमेह, वातव्याधि, व्रण आदि पर। मात्रा 1 से 3 ग्राम प्रातः व सायं जल अथवा शहद से।

पुष्यानुग चूर्ण :-
०००००००००००
स्त्रियों के प्रदर रोग की उत्तम दवा। सभी प्रकार के प्रदर, योनि रोग, रक्तातिसार, रजोदोष, बवासीर आदि में लाभकारी। मात्रा 2 से 3 ग्राम सुबह-शाम शहद अथवा चावल के पानी में।

यवानिखांडव चूर्ण :-
००००००००००००
रोचक, पाचक व स्वादिष्ट। अरुचि, मंदाग्नि, वमन, अतिसार, संग्रहणी आदि उदर रोगों पर गुणकारी। मात्रा 3 से 6 ग्राम।

लवणभास्कर चूर्ण :-
००००००००००००००
यह स्वादिष्ट व पाचक है तथा आमाशय शोधक है। अजीर्ण, अरुचि, पेट के रोग, मंदाग्नि, खट्टी डकार आना, भूख कम लगना आदि अनेक रोगों में लाभकारी। कब्जियत मिटाता है और पतले दस्तों को बंद करता है। बवासीर, सूजन, शूल, श्वास, आमवात आदि में उपयोगी। मात्रा 3 से 6 ग्राम मठा (छाछ) या पानी से भोजन के पूर्व या पश्चात लें।

लवांगादि चूर्ण :-
०००००००००००
वात, पित्त व कफ नाशक, कंठ रोग, वमन, अग्निमांद्य, अरुचि में लाभदायक। स्त्रियों को गर्भावस्था में होने वाले विकार, जैसे जी मिचलाना, उल्टी, अरुचि आदि में फायदा करता है। हृदय रोग, खांसी, हिचकी, पीनस, अतिसार, श्वास, प्रमेह, संग्रहणी, आदि में लाभदायक। मात्रा 3 ग्राम सुबह-शाम शहद से।

व्योषादि चूर्ण :-
०००००००००००
श्वास, खांसी, जुकाम, नजला, पीनस में लाभदायक तथा आवाज साफ करता है। मात्रा 3 से 5 ग्राम सायंकाल गुनगुने पानी से।

शतावरी चूर्ण :-
००००००००००
धातु क्षीणता, स्वप्न दोष व वीर्यविकार में, रस रक्त आदि सात धातुओं की वृद्धि होती है। शक्ति वर्द्धक, पौष्टिक, बाजीकर तथा वीर्य वर्द्धक है। मात्रा 5 ग्राम प्रातः व सायं दूध के साथ।

स्वादिष्ट विरेचन चूर्ण (सुख विरेचन चूर्ण) :-
०००००००००००००००००००००००००००
हल्का दस्तावर है। बिना तकलीफ के पेट साफ करता है। खून साफ करता है तथा नियमित व्यवहार से बवासीर में लाभकारी। मात्रा 3 से 6 ग्राम रात्रि सोते समय गर्म जल अथवा दूध से।

सारस्वत चूर्ण :-
०००००००००००
दिमाग के दोषों को दूर करता है। बुद्धि व स्मृति बढ़ाता है। अनिद्रा या कम निद्रा में लाभदायक। विद्यार्थियों एवं दिमागी काम करने वालों के लिए उत्तम। मात्रा 1 से 3 ग्राम सुबह शाम दूध से।

सितोपलादि चूर्ण :-
०००००००००००००
पुराना बुखार, भूख न लगना, श्वास, खांसी, शारीरिक क्षीणता, अरुचि जीभ की शून्यता, हाथ-पैर की जलन, नाक व मुंह से खून आना, क्षय आदि रोगों की प्रसिद्ध दवा। मात्रा 1 से 3 ग्राम सुबह-शाम शहाद से।

महासुदर्शन चूर्ण :-
००००००००००००००
सब तरह का बुखार, इकतरा, दुजारी, तिजारी, मलेरिया, जीर्ण ज्वर, यकृत व प्लीहा के दोष से उत्पन्न होने वाले जीर्ण ज्वर, धातुगत ज्वर आदि में विशेष लाभकारी। कलेजे की जलन, प्यास, खांसी तथा पीठ, कमर, जांघ व पसवाडे के दर्द को दूर करता है। मात्रा 3 से 5 ग्राम सुबह-शाम पानी के साथ।

सैंधवादि चूर्ण :-
०००००००००
अग्निवर्द्धक, दीपन व पाचन। मात्रा 2 से 3 ग्राम प्रातः व सायंकाल पानी अथवा छाछ से।

हिंग्वाष्टक चूर्ण :-
०००००००००००००
पेट की वायु को साफ करता है तथा अग्निवर्द्धक व पाचक है। अजीर्ण, मरोड़, ऐंठन, पेट में गुड़गुड़ाहट, पेट का फूलना, पेट का दर्द, भूख न लगना, वायु रुकना, दस्त साफ न होना, अपच के दस्त आदि में पेट के रोग नष्ट होते हैं तथा पाचन शक्ति ठीक काम करती है। मात्रा 3 से 5 ग्राम घी में मिलाकर भोजन के पहले अथवा सुबह-शाम गर्म जल से भोजन के बाद।

त्रिकटु चूर्ण :-
००००००००००
खांसी, कफ, वायु, शूल नाशक, व अग्निदीपक। मात्रा 1/2 से 1 ग्राम प्रातः-सायंकाल शहद से।

त्रिफला चूर्ण :-
००००००००००
कब्ज, पांडू, कामला, सूजन, रक्त विकार, नेत्रविकार आदि रोगों को दूर करता है तथा रसायन है। पुरानी कब्जियत दूर करता है। इसके पानी से आंखें धोने से नेत्र ज्योति बढ़ती है। मात्रा 1 से 3 ग्राम घी व शहद से तथा कब्जियत के लिए 5 से 10 ग्राम रात्रि को जल के साथ।

श्रृंग्यादि चूर्ण :-
००००००००००
बच्चों के श्वास, खांसी, अतिसार, ज्वर में।
मात्रा 2 से 4 रत्ती प्रातः-सायंकाल शहद से।

अग्निमुख चूर्ण :-
००००००००००००
उदावर्त, अजीर्ण, उदर रोग, शूल, गुल्म व श्वास में लाभप्रद। अग्निदीपक तथा पाचक। मात्रा 3 ग्राम प्रातः-सायं गरम जल से।

सादर प्रणासादर प्रणाम आपको वह आपके परिवार को  दीपावली के महापर्व की हार्दिक शुभकामनाएं।। माँ महालक्ष्मी आपकी संम्पनता, स...
24/10/2022

सादर प्रणासादर प्रणाम

आपको वह आपके परिवार को दीपावली के महापर्व की हार्दिक शुभकामनाएं।। माँ महालक्ष्मी आपकी संम्पनता, स्वास्थ व हर्षोल्लास मे वृद्धि करें।

सिसोदिया औषधि भंडार
बेगम पुल मेरठ

Brown sugar , stevia tablets , stevia powder is now also available at sisodia aushdhi bhandhar Begum pul meerut For more...
30/09/2022

Brown sugar , stevia tablets , stevia powder is now also available at sisodia aushdhi bhandhar

Begum pul meerut
For more details contact on
W.a - 9758111655

आज बात करते है फालिश , लकवा मैं दी जाने वाली आयुर्वेदिक की सबसे महत्वपूर्ण औषधि  ात_चिंतामणि_रस ( वृहत) की इसका व्यवहार ...
26/09/2022

आज बात करते है फालिश , लकवा मैं दी जाने वाली आयुर्वेदिक की सबसे महत्वपूर्ण औषधि ात_चिंतामणि_रस ( वृहत) की

इसका व्यवहार सब प्रकार के वात रोगों मैं किया जाता है तथा वात - कृत रोगों मैं उत्तम लाभ प्रदान करता है । जब सन्निपात ज्वर मैं प्रलाप , मोह ,नाड़ी की क्षीणता हाथ पांव कांपना ,कमर का दर्द , हिस्टीरिया,साइटिका , नसों मैं दर्द रहना , पसीना अधिक होकर शरीर ठंडा होना आदि लक्षण प्रकट हो तब इसका प्रयोग लाभदायक है ।

Packing- 50 tab
खाने की विधि फोन पर पूछ सकते है
आयुर्वेद अपनाएं स्वस्थ रहें

बायोस्लिम (आज से ही अपना वजन कम करें) अतिरिक्त कार्बोहाइड्रेट के बसा में बदलने की क्रिया को बाधित करता है वसा को जमा होन...
30/08/2022

बायोस्लिम (आज से ही अपना वजन कम करें) अतिरिक्त कार्बोहाइड्रेट के बसा में बदलने की क्रिया को बाधित करता है वसा को जमा होने से रोकता है। मेटाबॉलिज्म को बढ़ावा देता है। ज्यादा भूख लगने से रोकता है। चर्बी बढ़ने से रोकता है। मनचाहे परिणाम पाने के लिए नियमित व्यायाम और कम वसा व कम कार्बोहाइड्रेट वाले भोजन के साथ कम से कम 3 महीने या उससे लंबे समय तक सुनोवा बायोस्लिम का सेवन जारी रखें।

सुवर्णप्राशन यह षोडश संस्कारों में से एक है । (गर्भाधान से मृत्यु तक किए जाने वाले 16 संस्कार जो मनुष्य की जीवन यात्रा क...
15/08/2022

सुवर्णप्राशन यह षोडश संस्कारों में से एक है । (गर्भाधान से मृत्यु तक किए जाने वाले 16 संस्कार जो मनुष्य की जीवन यात्रा के महत्वपूर्ण पड़ाव को दर्शाते हैं ) यह काल की कसौटी पर खरी उतरती विधि है , जो हजार सालों से बच्चों के संपूर्ण स्वास्थ्य वर्धन के लिए उपयोगी लाई जा रही है।

सुवर्णप्राशन बुद्धि पाचन शक्ति तथा बल को बढ़ाता है। यह आयुष्य को बढ़ाता है यह मंगल में है आशीर्वचन समान है । यह वृश्य , वर्ण सुधरता है तथा ग्रह बाधा नष्ट करने में मदद करता है 1 महीने तक हर रोज सुवर्णप्राशन देने पर बालक परम मेधावी बनता है अर्थात बालक की बुद्धि तथा धारणा शक्ति बढ़ती है 6 महीनों तक हर रोज सुवर्णप्राशन देने पर बालक श्रुत धर बनता है अर्थ अर्थ सुनी हर बात का स्मरण जल्द करता है जन्म से लेकर 16 साल तक की आयु के के बच्चों में महा स्वर्ण योग का उपयोग किया जा सकता है अच्छे परिणाम पाने के लिए इसका उपयोग प्रातकाल खाली पेट करें जिससे बालक के शारीरिक तथा मानसिक विकास में मदद होगी।

अधिक जानकारी के लिए संपर्क करें
9758111655

आप सब के लिए पेश है गर्मी मैं बेहतरीन अलग अलग स्वाद के स्क्वाश जो आपको गर्मी मैं अलग ही मजा देंगे इनके निम्न प्रकार आम प...
30/04/2022

आप सब के लिए पेश है गर्मी मैं बेहतरीन अलग अलग स्वाद के स्क्वाश जो आपको गर्मी मैं अलग ही मजा देंगे
इनके निम्न प्रकार
आम पन्ना
ब्राह्मी बादाम
जैजी जीरा
काला खट्टा
लेमन
लीची
आम
खास
पान
ऑरेंज
गुलाब
इलाइची

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