Gau Seva and Gau raksha

Gau Seva and Gau raksha organic farming
made organic compost
supplier in all over UP
pure deshi cow organic products

मैं आप लोगों से ही निवेदन करना चाहता हूं कि गौ माता के संरक्षण संवर्धन के लिए आगे आये और ज्यादा से ज्यादा गौशाला खोलें और गोमूत्र और जैविक खाद बनाकर लोगों को बेचे.गोमूत्र से कैंसर जैसी भयंकर बीमारियों का निदान होता है. अतः आप इस मुहीम मे मेरी भागीदारी करें और मेरे चैनल से जुड़े धन्यवाद

मै एक प्रशिक्षित योग शिक्षक हूं और मैं योगा क्लास से चलाता हूं अतः अगर आपको योगा क्लास से चाहिए तो मेरे यूट्यू

ब चैनल से जुड़े हैं और हेल्प टिप्स चाहिए तो इसके लिए आप मेरे व्हाट्सएप चैनल से जुड़े हैं और मैं आपको 2 क्लासेज फ्री दूंगा अगर आपको मेरी क्लास अच्छा लगते हैं तो आगे आप कंटिन्यू कर सकते हैं धन्यवाद
प्रदीप जायसवाल
व्हाट्सप्प नंबर.8882525302

17/02/2026
31/12/2025

Welcome 2026!
This year, may you stay consistent to your goals,
show up for yourself, and keep moving forward —
even if it’s one small step a day.
Progress is progress. 🌱
Happy New Year!

19/12/2025

🌱 जैविक खेती : मिट्टी, मानव और भविष्य की रक्षा

(कृषक गोष्ठी हेतु प्रेरक व वैज्ञानिक भाषण)

माननीय अध्यक्ष महोदय,
मंचासीन अतिथिगण,
और मेरे किसान भाइयों–बहनों…

🙏 सप्रेम नमस्कार!

आज मैं आपसे कोई किताब का ज्ञान नहीं,
बल्कि खेत की सच्चाई, मिट्टी की पीड़ा
और हमारे बच्चों के भविष्य की बात करने आया हूँ।

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🌾 भूमिका : एक सवाल – एक तालियाँ

👉 सवाल (किसानों से):
“भाइयों! आज की खेती में
खर्च बढ़ रहा है या घट रहा है?”

(किसान: बढ़ रहा है…)
👏👏👏

👉 “पैदावार के बाद भी
किसान खुश है या परेशान?”

(परेशान…)
👏👏👏

👉 “तो गलती कहाँ है –
किसान में या प्रणाली में?”

यहीं से जन्म लेती है – जैविक खेती।

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🌍 जैविक खेती क्या है?

जैविक खेती कोई नई खोज नहीं,
यह हमारे दादा–परदादा की खेती है।

जहाँ
✔ मिट्टी को ज़हर नहीं
✔ भोजन को दवा
✔ और किसान को आत्मनिर्भर बनाया जाता है

जैविक खेती = प्रकृति के साथ समझौता नहीं,
बल्कि सहयोग।

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🧪 रासायनिक खेती की सच्चाई (कड़वी पर ज़रूरी)

आज हम खेत में क्या डाल रहे हैं?

❌ मिट्टी में: रसायन
❌ पानी में: ज़हर
❌ भोजन में: अवशेष
❌ शरीर में: बीमारी

👉 सवाल:
“भाइयों, क्या बीमार किसान
देश को स्वस्थ भोजन दे सकता है?”

(नहीं…)
👏👏👏

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🌱 जैविक खेती के 5 वैज्ञानिक आधार

1️⃣ जीवित मिट्टी

- Trichoderma
- Pseudomonas
- गोबर, कम्पोस्ट

👉 मिट्टी जितनी जीवित, फसल उतनी सुरक्षित

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2️⃣ जैविक कीट नियंत्रण

- नीम तेल
- Bt
- NPV
- Beauveria, Metarhizium

👉 कीट मारो,
मित्र कीट बचाओ

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3️⃣ रोग प्रबंधन – दवा नहीं, प्रतिरोध

- Trichoderma से जड़ सड़न नियंत्रण
- Pseudomonas से ब्लाइट नियंत्रण

👉 रोग से लड़ने की शक्ति
पौधे के अंदर पैदा करो

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4️⃣ लागत में कमी – लाभ में वृद्धि

- यूरिया: ₹3000/एकड़
- जैविक इनपुट: ₹500–800/एकड़

👉 कम खर्च – स्थायी लाभ

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5️⃣ बाज़ार और स्वास्थ्य

- जैविक गेहूं = ₹30–40/kg
- जैविक सब्जी = 1.5–2 गुना दाम

👉 स्वास्थ्य + सम्मान + आय

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🌾 जैविक खेती के व्यावहारिक साधन

✔ जीवामृत
✔ घन जीवामृत
✔ नीमास्त्र
✔ दशपर्णी अर्क
✔ फेरोमोन ट्रैप
✔ मल्चिंग

👉 सब कुछ गांव में उपलब्ध

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🙋‍♂️ किसानों के सामान्य प्रश्न (तालियाँ दिलाने वाले)

❓ सवाल:

“जैविक खेती में पैदावार कम होती है?”

✅ उत्तर:
पहले वर्ष थोड़ी कम,
दूसरे वर्ष बराबर,
तीसरे वर्ष रसायन से ज़्यादा

👏👏👏

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❓ सवाल:

“कीट बहुत बढ़ जाए तो?”

✅ उत्तर:
कीट नहीं बढ़ते,
रसायन से मित्र कीट मर जाते हैं।

👏👏👏

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❓ सवाल:

“बिक्री कहाँ करेंगे?”

✅ उत्तर:
PGS समूह,
स्थानीय मंडी,
सीधी बिक्री,
ऑनलाइन प्लेटफॉर्म

👏👏👏

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🇮🇳 सरकारी सहयोग

- PGS–India
- NCOF
- PKVY योजना
- जैविक इनपुट पर अनुदान

👉 सरकार भी आपके साथ

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🔔 अंतिम संदेश (सबसे ज़रूरी)

भाइयों–बहनों,

🌱 जैविक खेती सिर्फ खेती नहीं,
यह आंदोलन है।

यह
✔ मिट्टी को बचाती है
✔ किसान को बचाती है
✔ और देश के भविष्य को बचाती है

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✋ समापन प्रश्न (ज़ोरदार तालियों के लिए)

👉 “क्या हम अपनी मिट्टी को ज़हर से मुक्त करेंगे?”
(हाँ…) 👏👏👏

👉 “क्या हम अपने बच्चों को सुरक्षित भोजन देंगे?”
(हाँ…) 👏👏👏

👉 “तो कहिए –
जैविक खेती ज़िंदाबाद!”
👏👏👏👏👏
अधिक जानकारी के लिये हमारे फेसबुक ग्रुप से जुड़ें।
🙏 धन्यवाद! जय किसान! जय जैविक खेती!

05/03/2024

पतंजलि का अपना अलग ही जलवा है।

जो रेट बाजार में, वही रेट एयरपोर्ट पर।।

बाकी कंपनिया तो 5-8 गुना वसूलती हैं।

स्वामी जी और पतंजलि परिवार की जय हो।

05/03/2024

जनपद मीरजापुर के किसान भाईयों को सहर्ष अवगत कराना है कि आपके अपने कृषि विज्ञान केन्द्र, बरकछा-मीरजापुर राजीव गाँधी दक्षिणी परिसर मे वसंतकालीन/जायद मे बुवाई के लिए मूंग और उर्द का बीज उपलब्ध है।इच्छुक किसान भाई अपनी आवश्यकतानुसार आधार कार्ड और उध्दरण खतौनी के साथ केन्द्र से नकद मूल्य पर बीज ले सकते हैं। बीज की मात्रा सीमित है।इसलिए पहले आओ पहले पाओ के आधार पर दिया जाएगा ।
Mob.8882525302

19/02/2024
05/02/2024

चना:
1. चने की फसल में झुलसा रोग की रोकथाम के सलए ब्जंक मैग्नीस काबोनेट 2 ककलोग्राम
अथवा जीरम 90 प्रनतशत 2 ककलोग्राम प्रनत हेक्टेर्र की दर से नछडकाव करें।
2. चने की फसल को फली छेदक कीट से बचाव के सलए फली बनना शुरू होते ही बैससलस
थ ररनब्जएब्न्सस (बी.टी.) 1.0 ककग्रा अथवा फे नवैलरेट 20 प्रनतशत ई.सी. 1.0 लीटर अथवा
क्र् नालफास 25 प्रनतशत ई.सी. 2.0 लीटर प्रनत हेक्टेर्र 500-600 लीटर पानी में घोलकर
नछडकाव करें।
मटर:
1. मटर में बुकनी रोग (पाउडरी समल््र् ) रोग की रोकथाम के सलए प्रनत हेक्टेर्र 2.0 ककग्रा
घुलनशील सल्फर र्ा काबेन्डाब्जम 500 ग्राम र्ा ट्राइडोमाफय 80 ई.सी. 500 समलीलीटर की
दर से 12-14 हदन के अन्तराल पर दो नछडकाव करें।
राई:
1. माह कीट की रोकथाम के सलए प्रनत हेक्टेर्र समथाइल-ओ- डडमेटान 25 ई.सी. 1.00 लीटर
र्ा मैलाधथर्ान 50 ई.सी. 1.50 लीटर का प्रर्ोग करना चाहहए।
मक्का:
1. रबी मक्का में तीसरी सस ंचाई, बोआई के 75-80 हदन पर तथा चौथी सस ंचाई 105-110 हदन
बाद कर दें।
2. बसन्तकालीन मक्का की बोआई प रे माह की जा सकती है।
3. मक्का की बोआई के सलए संकर प्रजानतर्ों 20 ककलोग्राम प्रनत हेक्टेर्र व संकुल प्रजानतर्ों के
सलए 20 से 25 ककलोग्राम प्रनत हेक्टेर्र बीज की आवश्र्कता होती है।
4. मक्का में प्रनत हेक्टेर्र 120 ककलोग्राम नाइट्रोजन, 60 ककलोग्राम फास्फे ट र्ा फास्फोरस तथा
40 ककलोग्राम पोटास में से नाइट्रोजन की नतहाई मात्रा व फास्फे ट एवं पोटाश की प री मात्रा
बुवाई के समर् प्रर्ोग करना चाहहए।
गन्ना:
1. बसन्तकालीन गन्ने की बोआई देर से काटे गर्े धान वाले खेत में और तोररर्ां/मटर /आल
की फसल से खाली हुए खेत में की जा सकती हैं।
2. गन्ने की मध्र्म एवं देर से पकने वाली प्रमुख ककस्में हैं – को.शा. 767, को.शा. 802,
को.शा. 7918 एवं को.शा. 8118 जल्दी तैर्ार होने वाली ककस्में हैं- को. पन्त 211, को.शा.
687 व को.शा. 8436 । जल-ननकास की समस्र्ा वाले क्षेत्रों के सलए बी.ओ. 54 व बी.ओ.
91 अच्छी ककस्में हैं।
3. गन्ना का बीज ब्जस खेत से लेना हो तो 2 सप्ताह पव य उसकी सस ंचाई कर दें।
4. उपचाररत बीज की बवु ाई 75 से 90 सेंटीमीटर की दर ी पर, कतारों में 10 सेंटीमीटर की

05/02/2024

फसलोत्पादन:
गेह ूँ
:
1. बोआई के समर् के हहसाब से गेह ूँमें दस री सस ंचाई बोआई के 40-45 हदन बाद तथा तीसरी
सस ंचाई 60-65 हदन की अवस्था में कर दें। चौथी सस ंचाई बोआई के 80-85 हदन बाद बाली
ननकलने के समर् करें।
2. गेह ूँ के खेत में च हों का प्रकोप होने पर ब्जंक फास्फाइड से बने चारे अथवा एल्र् समननर्म
फास्फाइड की हटककर्ा का प्रर्ोग करें। च हों की रोकथाम के सलए साम हहक प्रर्ास अधधक
सफल होगा।
3. खेत में र्हद कण्डुवा रोग से ग्रस्त बाली हदखाई दे तो उसे ननकाल कर जला दें।
जौ:
1. जो मैंतीन सस ंचाई उपलजध हो तो दस री सस ंचाई बुवाई के 55-60 हदन बाद गांठ बनने की
अवस्था में और तीसरी सस ंचाई दध धर्ा अवस्था में बुवाई के 95-100 हदन बाद करें।
2. जौ की फसल में ननराई-गुडाई का अच्छा प्रभाव होता है।
3. जौ की खेत में र्हद कण्डुवा रोग से ग्रस्त बाली हदखाई दे तो उसे ननकाल कर जला दें।

03/02/2024

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