Himalayan Ayurveda Vedhyashala

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गिलोय एक ही ऐसी बेल है,जिसे आप सौ मर्ज की एक दवा कह सकते हैं।इसलिए इसे संस्कृत में अमृता नाम दिया गया है।कहते हैं कि देव...
29/07/2020

गिलोय एक ही ऐसी बेल है,
जिसे आप सौ मर्ज की एक दवा कह सकते हैं।
इसलिए इसे संस्कृत में अमृता नाम दिया गया है।
कहते हैं कि देवताओं और दानवों के बीच समुद्र मंथन के दौरान जब अमृत निकला और इस अमृत की बूंदें जहां-जहां छलकीं, वहां-वहां गिलोय की उत्पत्ति हुई।

इसका वानस्पिक नाम (Botanical name) टीनोस्पोरा कॉर्डीफोलिया (tinospora cordifolia है। इसके पत्ते पान के पत्ते जैसे दिखाई देते हैं और जिस पौधे पर यह चढ़ जाती है, उसे मरने नहीं देती। इसके बहुत सारे लाभ आयुर्वेद में बताए गए हैं, जो न केवल आपको सेहतमंद रखते हैं, बल्कि आपकी सुंदरता को भी निखारते हैं। आइए जानते हैं गिलोय के फायदे…

गिलोय बढ़ाती है रोग प्रतिरोधक क्षमता :-

गिलोय एक ऐसी बेल है, जो व्यक्ति की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ा कर उसे बीमारियों से दूर रखती है। इसमें भरपूर मात्रा में एंटीऑक्सीडेंट्स होते हैं, जो शरीर में से विषैले पदार्थों को बाहर निकालने का काम करते हैं। यह खून को साफ करती है, बैक्टीरिया से लड़ती है। लिवर और किडनी की अच्छी देखभाल भी गिलोय के बहुत सारे कामों में से एक है। ये दोनों ही अंग खून को साफ करने का काम करते हैं।

ठीक करती है बुखार :-

अगर किसी को बार-बार बुखार आता है तो उसे गिलोय का सेवन करना चाहिए। गिलोय हर तरह के बुखार से लडऩे में मदद करती है। इसलिए डेंगू के मरीजों को भी गिलोय के सेवन की सलाह दी जाती है। डेंगू के अलावा मलेरिया, स्वाइन फ्लू में आने वाले बुखार से भी गिलोय छुटकारा दिलाती है।

गिलोय के फायदे –

मधुमेह के रोगियों के लिए :-

गिलोय एक हाइपोग्लाइसेमिक एजेंट है यानी यह खून में शर्करा की मात्रा को कम करती है। इसलिए इसके सेवन से खून में शर्करा की मात्रा कम हो जाती है, जिसका फायदा टाइप टू डायबिटीज के मरीजों को होता है।

पाचन शक्ति बढ़ाती है :-

यह बेल पाचन तंत्र के सारे कामों को भली-भांति संचालित करती है और भोजन के पचने की प्रक्रिया में मदद कती है। इससे व्यक्ति कब्ज और पेट की दूसरी गड़बडिय़ों से बचा रहता है।

कम करती है स्ट्रेस :-

गलाकाट प्रतिस्पर्धा के इस दौर में तनाव या स्ट्रेस एक बड़ी समस्या बन चुका है। गिलोय एडप्टोजन की तरह काम करती है और मानसिक तनाव और चिंता (एंजायटी) के स्तर को कम करती है। इसकी मदद से न केवल याददाश्त बेहतर होती है बल्कि मस्तिष्क की कार्यप्रणाली भी दुरूस्त रहती है और एकाग्रता बढ़ती है।

बढ़ाती है आंखों की रोशनी :-

गिलोय को पलकों के ऊपर लगाने पर आंखों की रोशनी बढ़ती है। इसके लिए आपको गिलोय पाउडर को पानी में गर्म करना होगा। जब पानी अच्छी तरह से ठंडा हो जाए तो इसे पलकों के ऊपर लगाएं।

अस्थमा में भी फायदेमंद :-

मौसम के परिवर्तन पर खासकर सर्दियों में अस्थमा को मरीजों को काफी परेशानी होती है। ऐसे में अस्थमा के मरीजों को नियमित रूप से गिलोय की मोटी डंडी चबानी चाहिए या उसका जूस पीना चाहिए। इससे उन्हें काफी आराम मिलेगा।

गठिया में मिलेगा आराम :-

गठिया यानी आर्थराइटिस में न केवल जोड़ों में दर्द होता है, बल्कि चलने-फिरने में भी परेशानी होती है। गिलोय में एंटी आर्थराइटिक गुण होते हैं, जिसकी वजह से यह जोड़ों के दर्द सहित इसके कई लक्षणों में फायदा पहुंचाती है।

अगर हो गया हो एनीमिया :-

भारतीय महिलाएं अक्सर एनीमिया यानी खून की कमी से पीड़ित रहती हैं। इससे उन्हें हर वक्त थकान और कमजोरी महसूस होती है। गिलोय के सेवन से शरीर में लाल रक्त कणिकाओं की संख्या बढ़ जाती है और एनीमिया से छुटकारा मिलता है।

बाहर निकलेगा कान का मैल :-

कान का जिद्दी मैल बाहर नहीं आ रहा है तो थोड़ी सी गिलोय को पानी में पीस कर उबाल लें। ठंडा करके छान के कुछ बूंदें कान में डालें। एक-दो दिन में सारा मैल अपने आप बाहर जाएगा।

कम होगी पेट की चर्बी :-

गिलोय शरीर के उपापचय (मेटाबॉलिजम) को ठीक करती है, सूजन कम करती है और पाचन शक्ति बढ़ाती है। ऐसा होने से पेट के आस-पास चर्बी जमा नहीं हो पाती और आपका वजन कम होता है।

यौनेच्छा बढ़ाती है गिलोय :-

आप बगैर किसी दवा के यौनेच्छा बढ़ाना चाहते हैं तो गिलोय का सेवन कर सकते हैं। गिलोय में यौनेच्छा बढ़ाने वाले गुण पाए जाते हैं, जिससे यौन संबंध बेहतर होते हैं।

खूबसूरती बढ़ाती है गिलोय :-

गिलोय न केवल सेहत के लिए बहुत फायदेमंद है, बल्कि यह त्वचा और बालों पर भी चमत्कारी रूप से असर करती है….

जवां रखती है गिलोय :-

गिलोय में एंटी एजिंग गुण होते हैं, जिसकी मदद से चेहरे से काले धब्बे, मुंहासे, बारीक लकीरें और झुर्रियां दूर की जा सकती हैं। इसके सेवन से आप ऐसी निखरी और दमकती त्वचा पा सकते हैं, जिसकी कामना हर किसी को होती है। अगर आप इसे त्वचा पर लगाते हैं तो घाव बहुत जल्दी भरते हैं। त्वचा पर लगाने के लिए गिलोय की पत्तियों को पीस कर पेस्ट बनाएं। अब एक बरतन में थोड़ा सा नीम या अरंडी का तेल उबालें। गर्म तेल में पत्तियों का पेस्ट मिलाएं। ठंडा करके घाव पर लगाएं। इस पेस्ट को लगाने से त्वचा में कसावट भी आती है।

बालों की समस्या भी होगी दूर :-

अगर आप बालों में ड्रेंडफ, बाल झडऩे या सिर की त्वचा की अन्य समस्याओं से जूझ रहे हैं तो गिलोय के सेवन से आपकी ये समस्याएं भी दूर हो जाएंगी।

गिलोय का प्रयोग ऐसे करें:-

अब आपने गिलोय के फायदे जान लिए हैं, तो यह भी जानिए कि गिलोय को इस्तेमाल कैसे करना है…

गिलोय जूस :-

गिलोय की डंडियों को छील लें और इसमें पानी मिलाकर मिक्सी में अच्छी तरह पीस लें। छान कर सुबह-सुबह खाली पेट पीएं। अलग-अलग ब्रांड का गिलोय जूस भी बाजार में उपलब्ध है।

काढ़ा :-

चार इंच लंबी गिलोय की डंडी को छोटा-छोटा काट लें। इन्हें कूट कर एक कप पानी में उबाल लें। पानी आधा होने पर इसे छान कर पीएं। अधिक फायदे के लिए आप इसमें लौंग, अदरक, तुलसी भी डाल सकते हैं।

पाउडर :-

यूं तो गिलोय पाउडर बाजार में उपलब्ध है। आप इसे घर पर भी बना सकते हैं। इसके लिए गिलोय की डंडियों को धूप में अच्छी तरह से सुखा लें। सूख जाने पर मिक्सी में पीस कर पाउडर बनाकर रख लें।

गिलोय वटी :-

बाजार में गिलोय की गोलियां यानी टेबलेट्स भी आती हैं। अगर आपके घर पर या आस-पास ताजा गिलोय उपलब्ध नहीं है तो आप इनका सेवन करें।

साथ में अलग-अलग बीमारियों में आएगी काम :-

अरंडी यानी कैस्टर के तेल के साथ गिलोय मिलाकर लगाने से गाउट(जोड़ों का गठिया) की समस्या में आराम मिलता है।इसे अदरक के साथ मिला कर लेने से रूमेटाइड आर्थराइटिस की समस्या से लड़ा जा सकता है।चीनी के साथ इसे लेने से त्वचा और लिवर संबंधी बीमारियां दूर होती हैं।आर्थराइटिस से आराम के लिए इसे घी के साथ इस्तेमाल करें।कब्ज होने पर गिलोय में गुड़ मिलाकर खाएं।

साइड इफेक्ट्स का रखें ध्यान :-

वैसे तो गिलोय को नियमित रूप से इस्तेमाल करने के कोई गंभीर दुष्परिणाम अभी तक सामने नहीं आए हैं लेकिन चूंकि यह खून में शर्करा की मात्रा कम करती है। इसलिए इस बात पर नजर रखें कि ब्लड शुगर जरूरत से ज्यादा कम न हो जाए।

गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाओं को गिलोय के सेवन से बचना चाहिए। :-

पांच साल से छोटे बच्चों को गिलोय का प्रयोग ना करने दें

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24/06/2020

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30/12/2019

तिमला :
पहाड़ों में इसे तिमला, तिमिल, तिमली, तिरमल आदि नामों से जाना जाता है। तिमला का वानस्पतिक नाम फाइकस आरिकुलाटा है। यह मोरासी प्रजाति का फल है, जिसमें गूलर भी शामिल है। तिमला मुख्य रूप से हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, नेपाल और भूटान में होता है। तिमला का पेड़ मध्यम आकार का होता है जिसमें जड़ से कुछ दूरी के बाद ही टहनियां निकलनी शुरू हो जाती हैं। इसके पत्ते काफी बड़े होते हैं। इस वजह से तिमला को अंग्रेजी में 'एलीफेंट इयर फिग' कहा जाता है। इसके इन पत्तों को, विशेषकर सर्दियों के समय में जब वे कोमल होते हैं, तब चारे के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। इसकी पत्तियां काफी पौष्टिक होती हैं और इसलिए इन्हें दूध देने वाले पशुओं को खिलाया जाता है।इसके पत्तों को शुद्ध माना जाता है और इसलिए किसी भी तरह के धार्मिक कार्य में इनका उपयोग किया जाता है। अब भी धार्मिक कार्यों से जुड़े कई ब्राह्मण कम से कम पूजा में तिमला के पत्तों और उनसे बनी 'पुड़की' (कटोरीनुमा आकार) का उपयोग करना पसंद करते हैं।
कहा जाता है कि इसमें फल नहीं आता लेकिन कुछ वनस्पति विज्ञानियों का मानना है कि इसका जो फल होता है असल में वह इसका फूल है। यह ऐसा फूल है जो चारों तरफ से बंद रहता था लेकिन इसके अंदर बीज होते हैं तथा कुछ छोटे कीट इसके अंदर जाकर परागण संपन्न करवाने और बीजों को पकाने में मदद करते हैं। तिमला के फल इसकी जड़ से ही लगना शुरू हो जाते हैं और हर टहनी पर लगे रहते हैं। । कई बार तो पेड़ तिमला से इतना लकदक बन जाता है कि सिर्फ इसके पत्ते और फल ही दिखायी देते हैं। इसका फल पहले हरा होता है जबकि पकने के बाद यह लाल या भूरा हो जाता है। इसके कच्चे फल की सब्जी बनती है। सब्जी बनाने लिये छोटे छोटे तिमलों का उपयोग किया जाता है। इनको दो हिस्सों में काटकर छांछ में भिगाने के लिये रखने से इससे निकलने वाला सफेद रस (चोप) पूरी तरह से निकल जाता है। इसके बाद उन्हें अच्छी तरह से साफ करके सब्जी बनायी जा सकती है।

तिमला जब पक जाता है तो इसके अंदर का गूदा बहुत स्वादिष्ट होता है। इसमें काफी मात्रा में कैल्सियम पाया जाता है। इसमें कार्बोहाइड्रेड, प्रोटीन, फाइबर तथा कैल्सियम, मैग्निसियम, पोटेसियम और फास्फोरस जैसे खनिज विद्यमान होते हैं। पक्के हुए फल में ग्लूकोज, फूक्टोज और सुक्रोज पाया जाता है। इसमें जितना अधिक फाइबर होता है उतना किसी अन्य फल में नहीं पाया जाता है। इसमें कई ऐसे पोषक तत्व होते हैं जिनकी एक इंसान को हर दिन जरूरत पड़ती है। इस फल के खाने से केंसर समेत कई बीमारियों को दूर भगाया जा सकता है। पेट और मूत्र संबंधी रोगों तथा गले की खराश और खांसी के लिये इसे उपयोगी माना जाता है। इसे शरीर से जहरीले पदार्थों को बाहर निकालने में भी मदद मिलती है।

पर्वतीय क्षेत्रों में उगने वाला कुणजा, जिसका वानस्पतिक नाम आर्टीमीसिया वलगेरिस है, उसका स्थानीय स्तर पर भले ही काफी ज्या...
29/12/2019

पर्वतीय क्षेत्रों में उगने वाला कुणजा, जिसका वानस्पतिक नाम आर्टीमीसिया वलगेरिस है, उसका स्थानीय स्तर पर भले ही काफी ज्यादा उपयोग और कोई अहमियत न हो. लेकिन हमारे देश के पड़ोसी मुल्क चीन में भी कुणजा कई तरह के कश्तकारों की आर्थिकी का मुख्य जरिया होता है. कुणजा एक औषधीय गुणों से भरा पौधा है, इसके तेल को कीटनाशक के तौर पर प्रयोग में लाया जाता है. इतना ही नहीं कुणजा का प्रयोग बड़े-बुजुर्ग दाद, खुजली में आमतौर पर करते है. इससे साफ जाहिर होता है कि स्थानीय स्तर पर बुजुर्गों को इसके औषधीय गुणों की जानकारी काफी है, लेकिन आज तक इसको किसानों ने आर्थिकी का जरिया नहीं बनाया है.

क्या होता है कुणजा

स्थानीय स्तर पर परंपरागत तौर पर कुणजा के नाम से पहचाने जाने वाला पौधे का वानसप्तिक नाम आर्टीमीसियावलगेरिस है. यह साल के बारह महीने उगने वाले इस पौधे को चीन में मुगवर्ट के नाम से जाना जाता है. बता दें कि चीन में कुणजा का एक लीटर तेल एक हजार से बारह सौ रूपये प्रति लीटर के हिसाब से बेचा जाता है. इतना ही नहीं, चीन में कुणजा का न केवल तेल बनाया जाता है, बल्कि कई तरह औषधियों में भी इसको मुख्य घटक के रूप में प्रयोग किया जाता है. तेल बन सकता है आर्थिकी आधार कुणजा

कुणजा देश के पहाड़ों में लगने वाली एक ऐसी घास है जो कि आर्थिकी का प्रमुख आधार बन सकती है. पहाड़ों में पाई जाने वाली लैमनग्रास, रोमाघास और जावाघास एक ऐसी घास है जिनका तेल निकाल कर अच्छी खासी कमाई की जा सकती है और भारी मुनाफा कमाया जा सकता है. लेकिन यह चिंता की बात है कि अभी तक कुणजा की खेती को बढ़ाने पर कोई विशेष ध्यान नहीं दिया गया है.

केंद्र सरकार कर रही प्रेरित

कुणजा घास को लेकर अभी तक कोई भी विशेष रूप से ध्यान नहीं दिया गया है. पहाड़ की गोद में बहुत सारी घास काफी महत्वपूर्ण है जिनपर ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है.

माखन चुराकर जिसने खाया, बंसी बजाकर जिसने नचाया, खुशी मनाओ उसके जन्मदिन की, जिसने दुनिया को प्रेम का रास्ता दिखाया.Happy ...
23/08/2019

माखन चुराकर जिसने खाया, बंसी बजाकर जिसने नचाया, खुशी मनाओ उसके जन्मदिन की, जिसने दुनिया को प्रेम का रास्ता दिखाया.

Happy Janmashtami!

 #मरुआ हो  #घर में तो आस पास भी नहीं फटकता  #सांपजब कहीं घर के आसपास सांप दिख जाए तो घर वालो को मरुआ की याद आ जाती है......
24/07/2019

#मरुआ हो #घर में तो आस पास भी नहीं फटकता #सांप

जब कहीं घर के आसपास सांप दिख जाए तो घर वालो को मरुआ की याद आ जाती है... मरुआ की पत्तियों की तेज #तेलीय_गंध के कारण साँप सहित जहरीले #कीट ओर #मच्छर घर में प्रवेश नही करते...।

मरुआ #तुलसी प्रजाति का ही एक पौधा.... इसके फूल देवताओं पर चढ़ाए जाते हैँ...इसका पेड़ ड़ेढ से दो फीट तक ऊँचा होता है....इस पर #कार्तिक #अगहन में तुलसी के भाँति #मंजरी निकलती है....यह पौधा बीज से उगता है इसकी कोमल टहनी की कलम भी चल जाती है .....मरुआ दो प्रकार का होता है, काला और सफेद। काले मरुए का प्रयोग #औषधि रूप में नहीं होता और केवल फूल आदि के साथ देवताओं पर चढ़ाने के काम आता है..… #सफेद_मरुआ ओषधियों में काम आता है।

मरुआ को मरुवक, मरुत्तक, फणिज्जक, प्रस्थपुष्प, समीरण, कुलसौरभ, गधंपत्र, खटपत्र आदि अनेक नामो से जाना जाता है...।

#औषधीय_गुण : #सिर_दर्द हो या टी.बी.रोग...पेट दर्द हो या #खूनी_अतिसार या #मोच #सूजन मरुआ अत्यंत लाभकारी है

मरुआ पंचांग (जड़, तना, पत्ती, फल और फूल) का #काढ़ा बनाकर 100 मिलीलीटर की मात्रा में दिन में 3 बार पीने से #गठिया_रोग में लाभ होता है।

#आमवात (गठिया रोग): मरुआ के काढ़े में स्नान या मरुआ का धुंआ ग्रहण करना आमवात गठिया रोग मे लाभप्रद है।

माँ-बाप की मूरत है गुरु !कलयुग में भगबान की सूरत है गुरु !गुरु पूर्णिमा के दिन करते हैं आभार सलाम से।आओ इस गुरु पूर्णिमा...
16/07/2019

माँ-बाप की मूरत है गुरु !
कलयुग में भगबान की सूरत है गुरु !
गुरु पूर्णिमा के दिन करते हैं आभार सलाम से।
आओ इस गुरु पूर्णिमा पर करें अपने गुरु को प्रणाम।

गुरु पूर्णिमा की शुभ कामनायें!

08/07/2019

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Mohali
160062

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