Shree Vishwabindu Ayurved and Panchkarma Clinic

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19/12/2019

Protect yourself against harsh winter by using ( #अदरक/ #सौंठ ).
Ginger protects against viruses that cause cough n cold as well as germs like E coli present in water.
Ayurveda calls it ‘Vishwabheshaja’ or ‘universal medicine’.

सिद्धीबुद्धूीप्रदे देवी भुक्तिमुक्ति प्रदायिनी ।मंत्रमूर्ते सदा देवी महालक्ष्मी नमोस्तूते ॥ ४ ॥May Goddess Bhagvati Maha...
27/10/2019

सिद्धीबुद्धूीप्रदे देवी भुक्तिमुक्ति प्रदायिनी ।
मंत्रमूर्ते सदा देवी महालक्ष्मी नमोस्तूते ॥ ४ ॥

May Goddess Bhagvati Mahalaxmi bless you and your family with success, wisdom and salvation in all aspects of life. Happy Diwali and a Healthy and Prosperous New year.

Dr. Nikita Savla Shah
http://liveayurvedway.blogspot.com/2015/11/lets-begin-new-year-with-abhyang-snan.html

13/10/2019

#शरदपूर्णिमा पर #खीर खाने का #वैज्ञानिक महत्व :
इस वर्ष आज यानि 13 अक्टूबर 2019 को शरद पूर्णिमा है, आज के दिन #चन्द्रमा विशेष #बलशाली होता है, जिसके कारण उसकी किरणों से प्राप्त खीर विशेष #गुणो से युक्त होती है।
शरद पूर्णिमा की रात खीर बनाकर #अस्थमा रोगियों को खिलाने की प्रथा से तो सब परिचित है लेकिन यहां हम बात कर रहे हैं खीर से #मलेरिया का सामना करने की। वास्तव में हमारी हर प्राचीन परंपरा में वैज्ञानिकता का दर्शन होता है, अज्ञानता का नहीं। पर यह बा‍त हमें बाद में समझ में आती है। श्राद्ध से लेकर #शरद #पूर्णिमा तक जो खीर हम खाते हैं वह हमें कई तरह के फायदे पहुंचाती है।
एक अध्ययन के अनुसार शरद पूर्णिमा के दिन #औषधियों की स्पंदन क्षमता अधिक होती है। रसाकर्षण के कारण जब अंदर का पदार्थ सांद्र होने लगता है, तब रिक्तिकाओं से विशेष प्रकार की ध्वनि उत्पन्न होती है।

लंकाधिपति रावण शरद पूर्णिमा की रात किरणों को दर्पण के माध्यम से अपनी नाभि पर ग्रहण करता था। इस प्रक्रिया से उसे पुनर्योवन शक्ति प्राप्त होती थी। चांदनी रात में 10 से मध्यरात्रि 12 बजे के बीच कम वस्त्रों में घूमने वाले व्यक्ति को ऊर्जा प्राप्त होती है। #सोमचक्र, #नक्षत्रीय चक्र और #आश्विन के त्रिकोण के कारण शरद ऋतु से ऊर्जा का संग्रह होता है और बसंत में निग्रह होता है।

अध्ययन के अनुसार दुग्ध में #लैक्टिक अम्ल और अमृत तत्व होता है। यह तत्व किरणों से अधिक मात्रा में शक्ति का शोषण करता है। चावल में स्टार्च होने के कारण यह प्रक्रिया और आसान हो जाती है। इसी कारण ऋषि-मुनियों ने शरद पूर्णिमा की रात्रि में खीर खुले आसमान में रखने का विधान किया है। यह परंपरा विज्ञान पर आधारित है।

जैसे हम सब जानते है #मच्छर काटने से मलेरिया होता है वर्ष मे कम से कम 700-800 बार तो मच्छर काटते ही होंगे अर्थात 70 वर्ष की आयु तक पहुंचते-पहुंचते लाख बार मच्छर काट लेते होंगे। लेकिन अधिकांश लोगों को जीवनभर में एक-दो बार ही मलेरिया होता है। सारांश यह है मच्छर के काटने से मलेरिया होता है, यह 1% ही सही है।

#खीर_खाओ_मलेरिया_भगाओ

लेकिन हमारे यहां ऐसे विज्ञापनो की कमी नहीं है, जो कहते हैं, एक भी मच्छर ‘डेंजरस’ है, हिट लाओगे तो एक भी मच्छर नहीं बचेगा। अब ऐसे विज्ञापनों के बहकावे मे आकर करोड़ों लोग इस मच्छर बाजार में अप्रत्यक्ष रूप से शामिल हो जाते हैं।
सभी जानते हैं #बेक्टिरिया बिना उपयुक्त वातावरण के नहीं पनप सकते।

जैसे दूध में दही डालने मात्र से दही नहीं बनाता, दूध हल्का गरम होना चाहिए। उसे ढंककर गरम वातावरण में रखना होता है। बार बार हिलाने से भी दही नहीं जमता।

ऐसे ही मलेरिया का #प्रोटोज़ोआ को जब #पित्त का वातावरण मिलता है, तभी वह 4 दिन में पूरे शरीर में फैलता है, नहीं तो थोड़े समय में समाप्त हो जाता है। इतने सारे प्रयासो के बाद भी मच्छर और रोगवाहक सूक्ष्म कीट नहीं काटेंगे यह हमारे हाथ में नहीं।
लेकिन पित्त को नियंत्रित रखना तो हमारे हाथ में है। अब हमारी परंपराओं का चमत्कार देखिए। क्यों खीर #खाना इस मौसम में अनिवार्य हो जाता है। वास्तव में खीर खाने से पित्त का शमन होता है।

वर्षा ऋतु के बाद जब #शरदऋतु आती है तो आसमान में बादल व धूल के न होने से कड़क धूप पड़ती है। जिससे शरीर में पित्त #कुपित होता है। इस समय गड्ढों आदि मे जमा पानी के कारण बहुत बड़ी मात्रा मे मच्छर पैदा होते हैं इससे मलेरिया होने का खतरा सबसे अधिक होता है।
शरद में ही पितृ पक्ष (श्राद्ध) आता है पितरों का मुख्य भोजन है खीर। इस दौरान 5-7 बार खीर खाना हो जाता है। इसके बाद शरद पूर्णिमा को रातभर चांदनी के नीचे चांदी के पात्र में रखी खीर सुबह खाई जाती है। यह खीर हमारे शरीर में पित्त का प्रकोप कम करती है।
शरद पूर्णिमा की रात में बनाई जाने वाली खीर के लिए चांदी का पात्र न हो तो चांदी का चम्मच खीर में डाल दे, लेकिन बर्तन मिट्टी, कांसा या पीतल का हो।
(क्योंकि स्टील जहर और एल्यूमिनियम, प्लास्टिक, चीनी मिट्टी महा-जहर है) यह खीर विशेष ठंडक पहुंचाती है। #गाय के #दूध की हो तो अति उत्तम, विशेष गुणकारी होती है। इससे मलेरिया होने की संभावना नहीं के बराबर हो जाती है।

इस ऋतु में बनाई जाने वाली खीर में केसर और मेवों का प्रयोग कम करें। यह गर्म प्रवृत्ति के होने से पित्त बढ़ा सकते हैं। हो सके तो सिर्फ #इलायची और #चारोली / #चिरौंजी व #जायफल अवश्य डालें
डॉ. महेश दाधीच
प्रोफेसर आयुर्वेद व पेज एडमिन

10/10/2019

The post monsoon season, that is the Sharad Ritu or the Fall is a season of festivals marked by benevolence, grace and beauty. ...

One of the most common herbs and most versatile in it's uses in Ayurved, Guduchi is rightly called the Amrit or elixir f...
01/10/2019

One of the most common herbs and most versatile in it's uses in Ayurved, Guduchi is rightly called the Amrit or elixir for longevity of our health. This wonder herb should definitely be part of our herb garden!!

With the ongoing rainy season in India, many of our relatives and friends can be se...

The winter is coming. But we are still it the transition season. So just before we relish the warmest and best of foods,...
28/09/2019

The winter is coming. But we are still it the transition season. So just before we relish the warmest and best of foods, let's see how we can slowly prepare ourselves for the change in temperatures and climate and put them to our best benefits.

The post monsoon season, that is the Sharad Ritu or the Fall is a season of festivals marked by benevolence, grace and beauty. ...

26th October, 2019
25/09/2019

26th October, 2019

41 days to go for Ayurveda Day 2018 (5th November 2018).

Ayurveda has some well known merits over conventional medicine:

1. Main focus is on the preventive aspects rather than curative aspects.

2. Principles of treatment are in conformity with nature’s laws.

3. Balance is maintained among bodily Humors, Panchamahabhutas and Mind. This makes Ayurveda a friendly system for both healthy and unhealthy.

4. Adopts individualistic and holistic approaches towards the unhealthy.

5. Medicines in Ayurveda are prepared from natural sources. Hence causing minimal adverse effects.




दरमहा ४ दिवस पाळीची रजा Menstruation Leave 4 days per monthइथं टच/टॅप करा👇🏼https://youtu.be/tgax3FQDt2w      मागच्या पिढ...
19/09/2019

दरमहा ४ दिवस पाळीची रजा Menstruation Leave 4 days per month
इथं टच/टॅप करा👇🏼
https://youtu.be/tgax3FQDt2w

मागच्या पिढीतील स्त्रीला पाळीच्या दिवसांत कोणत्याच कामाला हात लावू देत नसत. कारण अजिबात तिला कुणी स्पर्श करायचा नाही आणि तिनेही कुणाला स्पर्श करायचा नाही. त्यामुळे अन्नपाणीसुद्धा तिला जागेवर मिळत असे. यामागे तिला पूर्ण विश्रांती मिळावी हाच हेतू होता. अन्यथा घरातल्या नणंद जाऊ सासू या अन्य स्त्रियांनी तिला अशी सुखासुखी विश्रांती घेऊ दिली असती का? इतकेच काय तर स्नानसुद्धा चौथ्या दिवशीच कारण रज:स्रावाचे काळात स्नानाचेसुद्धा श्रमच होतात.
आज विभक्त कुटुंबात किंवा कामावर जाणाऱ्या स्त्रीला सुद्धा कुणी अशी विश्रांती घेऊ देतंय का? का नवरा / मुलं असं म्हणतात की हे ४दिवस तू फक्त ऑफिसचे काम बघ. बाकी घरातले संपूर्ण स्वयंपाक नाश्ता आवराआवर आम्ही बघतो. खरंतर आजच्या स्त्री मुक्तीव स्त्री पुरूषसमानतेच्या जमान्यातील 'मुक्त स्त्री'वरच जास्त अत्याचार होतो. कारण तिला आज अर्थार्जनासाठी पुरूषाइतकेच राबावे लागते आणि शिवाय 'गृहिणी' म्हणून सगळी कामे आहेतच. त्यात कुठेही पुरूष मदत करत नाहीतच.
सर्वात महत्त्वाचा मुद्दा असा की साधारणपणे १२ ते ५० या वयात म्हणजे ३८ वर्षे पाळी नियमितपणे दरमहा ४ दिवस येतेच. थोडेफार अपवाद वगळता आपण हिशोबासाठी ३५ वर्षे धरू. म्हणजे ३५ वर्षे x १२ महिने X ४ दिवस = १६८० दिवस हे प्रत्येक स्त्रीच्या आयुष्यात हक्काच्या नैसर्गिक आवश्यक विश्रांतीचे आहेत. पण आज आपण ते तिला मिळू देत नाही. आणि म्हणूनच सावधान... १६८० भागिले ३६५ = ४.६ वर्षे ... जवळपास इतकाच काळ ती सध्या मेनोपॉझचे (रजोनिवृत्ती Menopause) त्रास भोगते. पूर्वी मेनोपॉझचे एवढे विचित्र स्वरूप का नव्हते. कारण दरमहाची विश्रांती मिळत असे. आता निसर्ग तेवढे दिवस केलेल्या निष्काळजीपणाची व्याजासहित वसुली करतो.
म्हणूनच प्रत्येक स्त्रीने ‘पाळीचे ४ दिवस' हे माझे हक्काचे विश्रांतीचे दिवस आहेत आणि नैसर्गिकरीत्या ते मला मिळालेच पाहिजेत याचा हट्ट धरावा. म्हणूनच आताच चला आयाबहिणींनो आपल्या न्याय्य हक्कासाठी एकत्र म्हणू या ... 'होय आम्हाला आमच्या निसर्गदत्त विश्रांतीसाठी दरमहा ४ दिवस पाळीची रजा द्या.' ... आणि तमाम पुरूषांनीही आपल्या मायभगिनींच्या कल्याणासाठी या संकल्पनेला यथाशीघ्र मूर्त रूप द्यावे. आणि आपल्या पूर्वजांच्या प्रत्येक सण उत्सव रूढी नियम व्रतवैकल्ये या सर्वामागची तर्कसंगती शास्त्रीयता यथार्थता आपणच शोधून काढायची आहे आणि त्याची युगानुरूपता आपणच साकारायची आहे.
लेखक : वैद्य हृषीकेश बा. म्हेत्रे.
एम्. डी. आयुर्वेद, एम्. ए. संस्कृत.
पुणे क्लिनिक : केवळ रविवारी
अवंती आयुर्वेद
97 A, पाटील प्लाझा, सारसबाग जवळ, मित्रमंडळ चौक, पुणे 411009.
आणि
नाशिक क्लिनिक : सोम ते शुक्रवारी
अवंती आयुर्वेद
डी के नगर , प्रसाद मंगल कार्यालय जवळ, निर्मला कॉन्व्हेंट मागे, शांतिनिकेतन चौक, जुना गंगापुर रोड, नाशिक 422013
मोबाइल : 9422016871
www.MhetreAyurved.com

मागच्या पिढीतील स्त्रीला पाळीच्या दिवसांत कोणत्याच कामाला हात लावू देत नसत. कारण अजिबात तिला कुणी स्पर्श करायचा ...

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