22/06/2026
मैंने भरतभाई का केम्प ज्वाइन किया था, मैं बीस साल से रूमेटॉयड आर्थराइटिस से परेशान थी,
मुम्बई के, बंगलौर के, जयपुर के, सभी डाक्टरों की दवाईयां खाकर परेशान थी।
ठीक ही नहीं हो पायी।
जब मेरी एक भाभी ने मुझे तप-सेवा-सुमिरन का कोर्स करके के देखो।
मैंने मना कर दिया। बड़े बड़े डाक्टर कुछ नहीं कर सके,
यहां क्या होगा???
लेकिन हर बार भाभी कहती... एक बार कोशिश तो करो,
मैंने सोचा ठीक है, फिर मैंने मुम्बई के जोगेश्वरी में यह कोर्स सीखा, और एक साल फोलो किया, पुरी जिदंगी ही बदल गयी,
बिमारी बिल्कुल नहीं रही,
अब एकदम फिट और ठीक हु।
Sarda
जय श्री कृष्ण / प्रणाम बहन,
आपका यह संदेश पढ़कर मन अत्यंत आनंदित और गद्गद हो गया। जब कोई साधक वर्षों पुरानी पीड़ा से मुक्त्त होकर इस तरह अपनी नई जिंदगी की कहानी साझा करता है, तो 'मानस आरोग्य' का मिशन और मजबूत हो जाता है।
आपकी भाभी जी सचमुच आपके जीवन में एक देवदूत (Angel) बनकर आईं, जिनकी जिद के कारण आप इस मार्ग पर आईं। लेकिन सबसे बड़ी सराहना आपकी है कि आपने पूरी निष्ठा, समर्पण और 'जिद' के साथ एक साल तक तप-सेवा-सुमिरन को अपने जीवन में उतारा। आपकी इस अटूट श्रद्धा और नियमितता का ही यह परिणाम है कि आज आप पूरी तरह फिट और स्वस्थ हैं।
प्रभु आपको हमेशा ऐसा ही आरोग्यता और मुस्कान प्रदान करें। अब आपका यह कर्तव्य है कि जिस पीड़ा से आप मुक्त्त हुई हैं, वैसी ही पीड़ा से जूझ रहे अन्य लोगों तक भी इस दिव्य मार्ग का प्रकाश पहुंचाएं।
शुभकामनाएं और आशीर्वाद!
~ डॉ. भरत सोलंकी एवं डॉ. हेमांगी सोलंकी