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14/04/2023
16/12/2021
Jab sir dard dhire-dhire badhta hua apne charam sima pe (bahut adhik ho jaye) pahunch kar ulti ho To us sir dard ko MIGR...
17/04/2020

Jab sir dard dhire-dhire badhta hua apne charam sima pe (bahut adhik ho jaye) pahunch kar ulti ho To us sir dard ko MIGRAINE samajhna chahiye.Homeopathy ke book me migraine ke bahut sare medicines ka zikr milta hai jisse kisi khas medicine ka diagnosis karna kathin ho jata hai parantu main apne practice ko adhar bana kar kuch khas medicine se migraine me accha result paya hoon, jise main aap logo se share kar raha hoon. Jo ye hai ---(1) Belladonna Q, 15 ml +Sangunarea can Q, 15 ml + Juglans cinarea ,15 ml + chionanthus Q 10 ml , sabhi ko ek saf kanch ki cc me mix kar len ,ab is mix kiye hue medicine ko migraine ke marij ko 20 drops subah, dopahar aur sham pani me mila kar den (2) Natrum mur 30 + chamomilla 30 + kali biochrom 30 bhi mix kar 3 times den sath me (3) bio combination No 12 5 tables 3 times gungune pani ke sath den. Sare medicines ko 3 mahine tak continues karen inshallah hamesha hamesha ke liye thik ho jayega .
. Ashraf**

03/04/2020

ज़रा सोंचो तो :- corona stage by stage फैलता है और नफरत direct ,तो दोनो से बचें और अपना,अपने परिवार , अपने देश का ख्याल रखें !

https://www.facebook.com/1787248381592823/posts/2547189602265360/
26/03/2020

https://www.facebook.com/1787248381592823/posts/2547189602265360/

बिहार के सहरसा में जिला प्रशासन ने अनुकरणीय कदम उठाया है। पारंपरिक सब्ज़ी मंडियों को बंद कर दिया है। उन्ही सब्ज़ी वि...

11/03/2020

थायराइड की समस्या होने पर दोनों हाथों और दोनों पैरों के अंगूठे के ठीक नीचे ऊपर उठे हुए भाग पर दबाव डालें। इस point ko dabayen और छोड़ दें। ऐसा कुछ समय तक करते रहें।

02/03/2020

खांसी की प्रमुख्य होम्योपैथिक दवाइयाँ-
होम्योपैथिक दवाइयां बीमारी के जड़ों पर काम करती है जिसके कारण बीमारी को रोकने तथा खत्म करने में मदद मिलती है। खांसी के लिए होम्योपैथिक दवाइयां कारगर और सुरक्षित होती हैं। वैसे तो बहुत सारी होम्योपैथिक दवाइयां हैं जो खांसी को खत्म कर सकती हैं लेकिन इनमें से कुछ ऐसी होम्योपैथिक दवाइयां हैं जो खांसी को पुरी तरह खत्म और कम कर सकती हैं।होम्योपैथिक दवाइयां संक्रमित व्यक्ति के लक्षणों पर चलाई जाती हैं खांसी में बहुत सारे लक्षण दिखाई पड़ते हैं उन लक्ष्यों को देखकर ही होम्योपैथिक दवाइयों का चयन किया जाता है।

खांसी किसे कहते हैं?
खांसी मनुष्य में होने वाली एक आम बीमारी है। यह सभी मौसम में उत्पन्न हो सकती है। सर्दी के मौसम में यह सभी उम्र के व्यक्तियों को ज्यादा परेशान करती है। खांसी से जितनी परेशानी बच्चों तथा बुजुर्गों को होती है उतनी ही परेशानी व्यस्को में भी देखी गई है। आम खांसी मुख्यतः हमारे शरीर में मौजूद बाहरी पदार्थ जैसे सूक्ष्म जीव, तरल पदार्थ, बलगम इत्यादि को बाहर निकालने के लिए उत्पन्न होती है।
पल्सटिला (pulsatilla)-: रात की खांसी आ रही है जो कूपर को बैठने के लिए और रिबैकेज को पकड़ने के लिए मजबूर करता है. शाम और रात में खांसी शुष्क, अस्थिर और निराशाजनक होती है. आपको सुबह तक बार-बार बैठने के लिए मजबूर होना पड़ता है. यह सूखा और बेहद तात्पर्य से शुरू हो जाता है. लेकिन जैसा कि कफ सुबह की ओर मोटी म्यूकस लूज़ेंस परिपक्व होती है. खांसी के घने सूखे गले के गले को खराब करते हैं और छाती में दर्द का कारण बनते हैं. संबंधित ठंड के लक्षणों में चिपचिपा आंख की जलन शामिल होती है. नाक रात में भरी होती है और सुबह में खुल जाती है. मामूली बुखार ठंडा होने पर श्लेष्म मोटा और हरा होता है और सब कुछ पल्सटिला की तरह, लक्षण बहुत बदलते हैं. विशिष्ट लोगों को पुल्सटिला की आवश्यकता सबसे ज्यादा होती हैं. यह 'नरम, सौम्य, हल्के, स्नेही, साथ ही साथ चिपचिपा, रोटी, मूडी, कभी-कभी बचपन' होते हैं. सुरक्षा की गहरी आवश्यकता और कभी भी मनोदशा और लक्षण बदलते हैं.

न्यूक्स वोमिका(Nux vomica)-: एक घुटन खांसी बेहद ठंडे या फ्लू से अत्यधिक चिलचिलाहट पर प्रकाश डालती है.

खांसी शुष्क, तंग और हैकिंग है. यह साँस लेने को पीड़ा करता है और एक चोट की बीड़ा पड़ता है. इसमें अक्सर सिर में दर्द होता है. खांसी और अन्य लक्षण आम तौर पर प्रकाश, शोर इत्यादि के लिए नक्स के ट्रेडमार्क चिड़चिड़ापन और संवेदनशीलता को प्रेरित करते हैं. सुबह सुबह (संभवतया 3 एएम से शुरू होता है) और ठंडे शुष्क वातावरण में लक्षण खराब होते हैं. एक समाप्त नैप और नम मौसम के लक्षणों को थोड़ा कम करना पड़ता है. चरम ठंडाता ड्राफ्ट असहनीय बनाता है. सर्दी में गर्म परेशान करने वाला श्लेष्म भी हो सकता है, जो रात में नाक को अवरुद्ध करता है और एक गले में दर्द होता है. यह आपके गले में गांठ को निगलने की कोशिश करने पर कान की ओर दर्द भेजता है. भावनात्मक पक्ष पर, नक्स व्यक्तियों या राज्यों के लिए विशिष्ट विशेषण में शामिल हैं: प्रतिस्पर्धी, अधीर, आवेगपूर्ण, महत्वाकांक्षी, आक्रामक और रेस्टलैस होना है. अतिरिक्त से तनाव एक महत्वपूर्ण मुख्य बात है, फिर वह चाहे बहुत ज्यादा काम, भोजन, मज़ा के कारण क्यों न हो.

काली बिच(kali biochrom)-: जिद्दी, घुटने वाली खांसी. मोटा, रस्सी, पीला से हरा, चिपचिपा, स्ट्रिंग, जिद्दी, सुगंधित श्लेष्म इस उपाय के इलाज के दिल में है. खांसी जिद्दी, घबराहट, हैकिंग दुःख है क्योंकि आप अपने गले से मोटी श्लेष्म को साफ़ करने का प्रयास करते हैं. म्यूकस नाक में क्रस्ट हो जाता है और नाक की जड़ पर विशेष रूप से नाक ड्रिप, घोरपन और दर्द के बाद चकमा देने वाले साइनस भरता है. खांसी अक्सर बहुत सूखी शुरू होती है लेकिन समय के साथ ताजा हवा में चलने के बाद अधिक उत्पादक बन जाता है. जब श्लेष्म रात भर जमा होता है, तो सुबह जिद्दी हैकिंग, हॉकिंग, गैगिंग और खांसी के साथ अवरुद्ध नाक के मार्गों की पीड़ा बन जाती है. गर्मी लेकिन गर्म मौसम नहीं, मदद कर सकते हैं. लेकिन सुबह-सुबह बियर और उत्तेजक होती जा रही है.

फॉस्फोरस(phosphorus)-: कच्ची गले में दर्द के साथ एक कठोर, सूखी, तंग, रैकिंग खांसी एक गुदगुदी से निकलती है. ठंड फॉस्फोरस छाती में जल्दी से सबसे अच्छा कदम व्यवहार करता है. खांसी शरीर को कांपकर सेट कर सकती है और सीने में श्रमिक सांस लेने और मजबूती का कारण बन सकती है. शीत हवा, बात करना और शारीरिक परिश्रम खांसी के झगड़े ट्रिगर कर सकती है. बुखार के लिए एक महत्वपूर्ण विशेषता शीतल पेय के लिए बहुत चाहत होती है. लेकिन यह पेट में गर्म होने के तुरंत बाद उल्टी के रूप में निकल जाती है. होर्सनेस आमतौर पर इन ठंडों से निकलती है. लेकिन यह विशेष रूप से गायकों में अतिसंवेदनशीलता से भीड़ में मदद करती है. फॉस्फोरस उत्साही, प्रभावशाली अक्सर जीवंत व्यक्तियों के लिए सबसे अधिक कर सकता है, यह ऊर्जा समाप्त होने तक दोनों सिरों पर मोमबत्ती जलाते हैं; तो उदासी, क्रोध और यहां तक कि उदासीनता भी हावी हो सकती है.

ब्रायनिया(Bryonia Alb)-: एक सूखी, हैकिंग, दर्दनाक खांसी सिलाई दर्द के साथ- दौरों के लिए बदतर है. ब्रायनिया उन बीमारियों से राहत देता है जो धीरे-धीरे संपर्क करते हैं. यह बहुत लंबे समय तक चलते हैं. अत्यधिक गर्म होने या तेज मौसम परिवर्तन से ठंडा होने का परिणाम हो सकता है. इसकी धीमी गति से चलने वाली फ्लू और सर्दी सूखापन और शरीर को दर्द से पीड़ित करती है. सूखी हैकिंग खांसी स्टर्नम में दर्द का कारण बनती है और आपको विशेष रूप से रात में बैठने के लिए मजबूर करती है. हॉकिंग अंततः श्लेष्म को स्थानांतरित कर देता है. एक गर्म कमरे में जाने के रूप में बढ़ती खांसी खाने और पीना है. अन्य लक्षणों में एक हड्डी-दर्द, ठंडा-बुखार बुखार, ठंडे पानी के लिए बड़ी प्यास, शुष्क गले और ""मुझे छूना नहीं, मुझे अकेला छोड़ दो"" चिड़चिड़ापन शामिल है.

हेपर सल्फ(Heper sulphur)-: शांतता के साथ एक सूखी या झुकाव खांसी, चक्कर आना और पीला कफ भी इस ठंड पर हावी है. यह स्प्लिंटर-जैसे गले के साथ साइनस दबाव हो सकता है. शीत शुष्क हवा, चलने, यहां तक कि कवर के नीचे से किसी भी शरीर के हिस्से का संपर्क करने से इस बदलती खांसी को उकसाया जा सकता है. जो एक भौंकने वाली सूखी घास के खांसी से ढीला, घुटने टेकने और चकमा देने से निकलती है. हेपर सल्फ़ की जरूरत वाले व्यक्तियों की आंतरिक गर्मी सबसे ज्यादा कम है, आसानी से नाराज हैं और अशिष्टता या कारणों के प्रति संवेदनशील हैं. यह विशेष रूप से रात में बहुत दुखी और अत्यधिक चिड़चिड़ाहट हो सकती हैं. हालांकि, अत्यधिक सक्रिय नहीं है, यह जल्दी और आवेग से इंटरैक्ट कर सकते हैं. सामान्य रूप से यदि ठंड, दर्द और स्पर्श के प्रति अत्यधिक संवेदनशील होता है, तो आप हेपर सल्फ़ की जांच करना चाहेंगे, खासकर अगर ठंडी हवा खतरे में पड़ती है.

नेट्रम मूर(Natrum Mur)-: एक सूखी गुदगुदी खांसी है. सूखी नट मूर के कई अनुप्रयोगों को कम करता है. इसकी सर्दी और भीड़ में सूखे कच्चेपन होते हैं जो श्वेत श्लेष्म को स्पष्ट करते हैं. गले में घूमने से छाती में झुकाव के साथ खांसी सूख जाती है. यह सुबह में विशेष रूप से खराब हो सकता है और रात में बिस्तर पर बहुत फिट हो सकता है. खांसी अक्सर सालमने वाले सिरदर्द को ट्रिगर करती है जो ऐसा लगता है जैसे माथे फट जाएगा. भावुक विमान पर, सूखापन मुहावरे बन जाता है क्योंकि नट मूल खराब परिचालित तनाव-दमन, अपमान और दिल का दर्द हो सकता है. उदासी, चिड़चिड़ापन, क्रोध, सामयिक अनिद्रा और भूतिया यादों को हावी होनी चाहिए. शिकायतें खुली हवा, गहरी सांस लेने और तंग कपड़ों के साथ सुधार करती हैं और सांत्वना, अधिक भावना, हार्मोनल उतार-चढ़ाव और सूरज की रोशनी (विशेष रूप से सिरदर्द) से खराब होती हैं. निचले होंठ में गहरी दरार और नमकीन खाद्य पदार्थों की इच्छा से आगे निक मूर की आवश्यकता होती है

आम खांसी 2 से 4 दिनों तक होकर ही खत्म हो जाती है। कभी कभी आम खांसी में भी होम्योपैथिक चिकित्सा तथा घरेलू उपचार की जरूरत पड़ सकती है।

खांसी अगर बच्चे व्यस्क तथा बुजुर्गो के शरीर में कुछ ज्यादा दिनों तक बनी रहे तो वह किसी बीमारी का संकेत हो सकता है। यह किसी अन्य बीमारी के साथ में भी प्रकट हो सकती है। जैसे यकृत विकार, कंठ नलिका का विकार, दमा, सर्दी, निमोनिया इत्यादि बिमारियों के साथ खांसी प्राय: उपस्थित रहती है इसलिए खांसी अगर ज्यादा दिनों तक परेशान करे तो आप अपने नजदीकी डॉक्टर से संपर्क कर इसका इलाज जरूर करवाएं।
लक्षण अनुसार इनमे से मिलते हुए दवाई को दें और साथ में SBL Company ka stodal cough syrap or किसी अच्छी company ka cough syrap देदें !
इंशाअल्लाह ठीक हो जायेगा l
Dr. Ashraf Bashar

19/02/2020

NAFRAT se BACHO
NAFRAT ApKo BIMAR BANATa Hai

17/02/2020

NASAL POLYPUS - (नासाबुर्द)
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नाक के अंदर मास का बढ़ जाना:- इस रोग से बहुत लोग
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ग्रसित हैं <
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नाक के भीतर की श्लेष्मिक झिल्ली से यह अबुर्द (मास )पैदा होता है lअबुर्द श्लेष्मिक झिल्ली की एक गांठ सा होता है l ये गांठें एक या एक से ज़्यादा भी हो सकता है, ये चिकनी होती है तथा अपने जगह से इधर उधर फिसलती भी है l रोगी जब बात करता है तो ऐसा लगता है नाक से बोल रहा हो ! नाक से सांस ना लेकर मुँह से सांस लेता है, मुँह खुला रहता है, कभी कभी इसमें ज़ख़्म, पिप, इत्यादि भी बनजाता है और कभी कभी रोगी का सांस रुकने के कारण दम घुटता हुआ मालूम पड़ता है l
इस रोग का इलाज होम्योपैथिक से मुमकिन है बसर्ते किसी होम्योपैथिक एक्सपर्ट डॉक्टर से इलाज कराई जाए l होम्योपैथिक मेडिसिन जो इसमें बहुत ही मुफ़ीद है जिसके लगातार डॉक्टर के देख रेख मे लेते रहने से रोग को ख़तम किया जा सकता है, जो निम्न है :- (1)Thuja 200, इस दवाई को रोज़ाना सुबह खाली पेट 4 ड्रॉप्स लेते रहना है (2) Formica Rufa 1x or 3x, 2 टेबलेट्स, या 2 ड्रॉप्स 3 times (3)Lemna minor 1x या 30, 2 ड्रॉप्स 3times और 15दिनों मे एक बार Tuebercolinum 1M की एक खुराक देना है उस दिन कोई भी दूसरी दवाई नहीं खानी है l
और भी दवाई है जो लक्षण के अनुसार अच्छा काम करती है :- Phosphorus, psorinum, calcerea phos, Allium cepa, Belladona, Merc sol, Aconit nap, kali biochrom, calcerea carb, Arsenic iod, etc
Dr.Ashraful Bashar

28/10/2019

( Alopecia (Baldness)- गंज तथा बाल झड़ना )-_-
एलोपीशिया बाल झड़ने मे उपयोग किया जाने वाला सामान्य शब्द है। यह त्वचा के किसी भी बालवाले स्थान पर हो सकता है।
लगातार hormones मे असंतुलन होते रहने के प्रभावों से होता है। इसे एंड्रोजेनिक या एंड्रोजेनिक एलोपीशिया भी कहा जाता है क्योंकि रोग का कारण पुरुष यौन हार्मोन के एंड्रोजन्स में छिपा होता है। इसमें सिर पर बालों के पतले होते जाने के साथ बालों के पीछे हटते जाने का एक खास तरीका होता है।
महिलाओं का सिर के ऊपरी हिस्से में बाल पतले होते जाते हैं।
एलोपीशिया एरिएटा-इसे टुकड़ों में गंजत्व कह सकते हैं क्योंकि इसमें गंजेपन के हिस्से आते-जाते रहते हैं। यह आमतौर पर किशोरों और युवाओं को प्रभावित करता है लेकिन यह किसी भी आयु के व्यक्ति को हो सकता है। एलोपीशिया एरिएटा सामान्यतया प्रतिरक्षक तंत्र की समस्या से उत्पन्न होता है। कभी-कभी यह परिवारों में फैलता जाता है।
स्केरिंग एलोपीशिया-यह मुख्यतः त्वचा पर स्थित किसी दाग या निशान होने के बाद होता है। इस प्रकार के एलोपीशिया को साईकेट्रीशियल एलोपीशिया कहते हैं। इसमें बालों को धारण करने वाले रोमकूप पूरी तरह नष्ट हो जाते हैं। इसका मतलब यह है कि प्रभावित क्षेत्रों पर अब फिर से बाल नहीं उगेंगे।
एनाजेन एफ्लुवियम अधिक विस्तृत रूप से बाल झड़ने वाला रोग है जो सिर के अतिरिक्त पूरे शरीर को प्रभावित करता है। सामान्यतया यह कैंसर के लिए की जाने वाली कीमोथेरेपी से फैलता है।
टीलोजन एफ्लुवियम-इसमें छोटे-छोटे स्थानों के बाल गिरने की बजाय पूरे शरीर के बाल कम होते जाते हैं। यह कुछ औषधियों के तनाव से हो सकता है।
हार्मोन के प्रभावों से होता है। इसे एंड्रोजेनिक या एंड्रोजेनिक एलोपीशिया भी कहा जाता है क्योंकि रोग का कारण पुरुष यौन हार्मोन के एंड्रोजन्स में छिपा होता है। इसमें सिर पर बालों के पतले होते जाने के साथ बालों के पीछे हटते जाने का एक विशिष्ट तरीका होता है।
महिलाओं का गंजत्व-सिर के ऊपरी हिस्से में बाल पतले होते जाते हैं।
एलोपीशिया एरिएटा-इसे टुकड़ों में गंजत्व कह सकते हैं क्योंकि इसमें गंजेपन के हिस्से आते-जाते रहते हैं। यह आमतौर पर किशोरों और युवाओं को प्रभावित करता है लेकिन यह किसी भी आयु के व्यक्ति को हो सकता है। एलोपीशिया एरिएटा सामान्यतया प्रतिरक्षक तंत्र की समस्या से उत्पन्न होता है। कभी-कभी यह परिवारों में फैलता जाता है।
स्केरिंग एलोपीशिया-यह मुख्यतः त्वचा पर स्थित किसी दाग या निशान होने के बाद होता है। इस प्रकार के एलोपीशिया को साईकेट्रीशियल एलोपीशिया कहते हैं। इसमें बालों को धारण करने वाले रोमकूप पूरी तरह नष्ट हो जाते हैं। इसका मतलब यह है कि प्रभावित क्षेत्रों पर अब फिर से बाल नहीं उगेंगे।
एनाजेन एफ्लुवियम अधिक विस्तृत रूप से बाल झड़ने वाला रोग है जो सिर के अतिरिक्त पूरे शरीर को प्रभावित करता है। सामान्यतया यह कैंसर के लिए की जाने वाली कीमोथेरेपी से फैलता है।
टीलोजन एफ्लुवियम-इसमें छोटे-छोटे स्थानों के बाल गिरने की बजाय पूरे शरीर के बाल कम होते जाते हैं। यह कुछ औषधियों के तनाव से हो सकता है।
, खान्दान मे T.B का इतिहास मिलता हो जिसके कारण सर मे रींगवर्मस हो तो इस रोग का शिकार हो जाता है !
उपचार ----- अगर मरीज मे होर्मोंस मे गड़बरी की शिकायत हो तो ऐसे मरीज को हुमेंपथी की Thyroidinum 200 की दवा 4 बूँद 4 दिन मे एक बार खली पेट मे लेना चाहिए और खांदान T.B का लक्षण मिले तो Becillinum 200 , 4 ड्रोपस 4 दिन मे एक बार भुखे पेट मे लेना चाहिए ,अगर साधारन तौर से बाल गिर रहा हो ,गर्म प्रकृती का हो तो Acid Flour 200 ,4 ड्रोपस एक बार भुखे पेट मे रोजाना ल भाओं से ,मूछों से , जन्निद्रियों के स्थान से बाल झड़ता हो तो Selenium 200 रोजाना 4ड्रोपस भुखे पेट मे और Mezerium , Lycopodium ,Kali carb ,Acid nitricum , Arsenic Alb , phosphorus , Natrum mur ,Bryta carb , sepia ,Jabrandi ,etc बहुत बहुत सारी medicine हैं ज़िसका लक्षण मिला कर देते रहनेसे इसे ठीक किया जा सकता है !
होम्योपैथी में सिर्फ रोग के कारण को दूर करके मरीज को ठीक किया जाता है। उसी प्रकार से बालों की समस्या के कारण को दूर कर के हम उसको ठीक कर सकते हैं। जैसे हॉर्मोन्स का असंतुलन होने पर उसे ठीक कर सकते हैं। शैंपू या हेयर डाई का प्रयोग कम या बंद करके या कुपोषण (malnutrition)को ठीक करके हम इन समस्यायों से मुक्त हो सकते हैं, लेकिन बहुत से कारण ऐसे होते हैं जिनको दूर करना थोड़ा मुश्किल होता है जैसे प्रदूषण…
जल या वायु प्रदूषण को दूर तो नहीं कर सकते हैं, पर उसके प्रभाव को होम्योपथिक दवा देकर कम जरूर कर सकते हैं।
डाo अशरफ

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