The Pashupati Homoeo Centre

The Pashupati Homoeo Centre Homoeopathic Treatment for Acute and Chronic Diseases. Accupressure. Counseling. Diet Chart. Management techniques.

31/05/2026
30/05/2026

"बच्चा पढ़ाई से नहीं, कई बार असफलता के डर से थक जाता है।"

हर समय "अच्छे नंबर लाने हैं",
"गलती नहीं होनी चाहिए",
"सबसे आगे रहना है" —

ये बातें धीरे-धीरे बच्चे के मन पर दबाव बना सकती हैं।

असफलता का डर कई बार इन रूपों में दिखाई देता है:

• पढ़ने बैठकर भी ध्यान न लगना
• बार-बार भूलना
• परीक्षा से पहले घबराहट
• चिड़चिड़ापन
• आत्मविश्वास कम होना
• "मैं नहीं कर पाऊँगा" जैसे विचार

बच्चों को केवल यह मत सिखाइए कि कैसे जीतना है।

उन्हें यह भी सिखाइए कि गलती होने पर संभलना कैसे है।

क्योंकि सफलता आत्मविश्वास देती है,
लेकिन असफलता से सीखना मानसिक मजबूती देता है।

एक बच्चे को सबसे ज्यादा जरूरत आलोचना की नहीं,
बल्कि समझे जाने की होती है।

—Dr. Raghuraj Bali
The Pashupati Homoeo Centre

29/05/2026

होम्योपैथी से जुड़ा एक और सामान्य भ्रम —

"होम्योपैथी में केवल मीठी गोलियाँ होती हैं, इसलिए असर नहीं होता।"

वास्तव में किसी भी चिकित्सा पद्धति को केवल उसके स्वाद या आकार से नहीं समझा जा सकता।

महत्वपूर्ण बात यह होती है कि व्यक्ति की समस्या, लक्षण, दिनचर्या और सम्पूर्ण स्थिति को किस प्रकार समझा जा रहा है।

कई लोग केवल बीमारी का नाम बताते हैं, जबकि शरीर अक्सर अपने संकेत अलग-अलग तरीकों से देता है।

स्वास्थ्य को समझना केवल दवा लेना नहीं, अपने शरीर को सुनना भी है।

— The Pashupati Homoeo Centre |

28/05/2026

**"जो तुम में है, वही दिखता है" — सच या दिमागी धोखा?**

यह बात आधी सच है और आधी एक बहुत बड़ा भ्रम या इल्यूजन । इसके पीछे की असलियत को दो हिस्सों में समझें:
1. यह कब सच होता है?
जब बिना किसी ठोस वजह या सबूत के, आप हर किसी में खोट निकालने लगें। इसका मतलब है कि आप अपने अंदर की इनसिक्योरिटी, जलन या डर दूसरों पर थोप रहे हैं।

उदाहरण: जो खुद अंदर से असुरक्षित है, उसे लगता है हर कोई उसे ही जज कर रहा है। यहाँ सामने वाला न्यूट्रल है, पर चश्मा आपका धुंधला है।
2. यह कब बिल्कुल गलत होता है?
अगर आपके साथ सच में कोई धोखा या पीठ पीछे बुराई कर रहा है और आप उसे पकड़ लेते हैं, तो इसका मतलब यह नहीं कि आप खुद चीटर हैं!
यह आपका Survival Instinct है यानि खुद के बचाव की तकनीक। बाहर अगर सच में गड्ढा है, तो उसे देख पाना आपकी समझदारी है, कोई दिमागी वहम नहीं। हर बार खुद को कसूरवार मानना खुद को गैसलाइट करना है।

इसे सुलझाएं कैसे?

अपने आप से पूछें—क्या मेरे पास कोई ठोस सबूत या बदला हुआ व्यवहार मौजूद है, या यह सिर्फ मेरे मन का डर है?

क्या सामने वाले की गलती है, या आपका कोई पुराना पास्ट ट्रॉमा जाग गया है?

" चश्मा साफ़ रखना ज़रूरी है, लेकिन अगर सामने की दीवार सच में काली है, तो वो आपकी नज़र का धोखा नहीं, बल्कि वास्तविकता का सच है।"

- दी पशुपति होम्यो सेंटर

27/05/2026

कुछ लोग कहते हैं:

"जब तक दर्द सह सकते हैं, डॉक्टर के पास क्यों जाएँ?"

लेकिन एक सवाल —

क्या आप अपनी गाड़ी की छोटी आवाज़ को भी महीनों तक नजरअंदाज करते हैं?

तो फिर शरीर के संकेतों को क्यों?

अपने स्वास्थ्य को केवल बीमारी आने पर नहीं, रोज़ की आदतों से भी समझिए।

— The Pashupati Homoeo Centre

26/05/2026

डाइट का मतलब भूखे रहना या अपने मनपसंद खाने को हमेशा के लिए छोड़ देना नहीं है। डाइट का असली मतलब है— अपने शरीर को वो देना जिसकी उसे ज़रूरत है, न कि वो जो सिर्फ आपकी जुबान चाहती है।"
कम खाना समाधान नहीं है, सही खाना समाधान है।
प्लेट में कैलोरी गिनने के बजाय, न्यूट्रिशन (पोषण) गिनना शुरू कीजिए।

~ दी पशुपति होम्यो सेंटर

25/05/2026

कई बार शरीर नहीं, मन थका होता है।

हर समय चिड़चिड़ापन, गुस्सा, बिना कारण उदासी या छोटी बातों पर ज्यादा सोचते रहना — यह सिर्फ "स्वभाव" नहीं भी हो सकता।

जैसे बुखार शरीर का संकेत है, वैसे ही भावनाएं भी मन के संकेत होती हैं।

अपने मन की बात दबाने से बेहतर है उसे समझना।

– डॉ. रघुराज बाली

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The Pashupati Homoeo Centre, Opposite DIET Building, Main Road
Nahan
173001

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