आयुर्वेदिक उपचार

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27/04/2026

अग्नि कोण में बाथरूम
अग्नि कोण में बाथरूम और पानी की टंकी—यह वास्तु के अनुसार एक बड़ा दोष माना जाता है। अग्नि कोण का तत्व “आग” है, जबकि पानी (टंकी/बाथरूम) उसका विपरीत तत्व है, इसलिए जीवन में रुकावट, पैसे की कमी, तनाव आदि समस्याएँ आ सकती हैं।
लेकिन घबराने की जरूरत नहीं है—इसका व्यावहारिक समाधान (उपाय) किया जा सकता है 👇
🔥 अग्नि कोण दोष के प्रभाव
काम बनते-बनते रुकना
आर्थिक दिक्कत
घर में तनाव/बहस
स्वास्थ्य पर असर (खासकर महिलाओं पर)
✅ सरल और असरदार उपाय
1. अग्नि तत्व को मजबूत करें
उस एरिया में लाल रंग (Red) का उपयोग बढ़ाएँ
एक लाल बल्ब / लाल टाइल / लाल पेंट का टच दें
रोज शाम को वहाँ दीपक या लाल बल्ब जलाना लाभकारी है
2. पानी के प्रभाव को कम करें
टंकी पर लाल रंग का कपड़ा / टेप बांधें
कोशिश करें कि टंकी जमीन से थोड़ा ऊपर (स्टैंड पर) हो
3. धातु (Metal) का संतुलन
बाथरूम में तांबे (Copper) की कोई वस्तु रखें
या कॉपर पाइप/कॉपर स्ट्रिप लगाना भी अच्छा रहता है
4. विशेष वास्तु उपाय
अग्नि कोण (South-East दीवार) पर 3 तांबे के पिरामिड लगाएं
या वास्तु पिरामिड (Copper/Brass) लगाना बहुत प्रभावी माना जाता है
5. नमक (Salt) उपाय
बाथरूम में एक कटोरी सेंधा नमक रखें
हर 10–15 दिन में बदलें → यह नेगेटिव ऊर्जा को सोखता है
6. साफ-सफाई और ड्रेनेज
पानी का जमाव बिल्कुल न हो
बाथरूम हमेशा सूखा और साफ रखें
⚠️ अगर संभव हो (Long-term Solution)
भविष्य में टंकी को West या South-West की तरफ शिफ्ट करना सबसे अच्छा रहेगा
अग्नि कोण ideally किचन / इलेक्ट्रिकल एरिया के लिए होता है
👉
यह दोष पूरी तरह खत्म नहीं, लेकिन इन उपायों से उसका असर काफी कम किया जा सकता है और धीरे-धीरे स्थिति सुधरती है।
अगर चाहें तो आप अपने घर का नक्शा या फोटो भेज दें, मैं exact customized उपाय बता दूँगा—कहाँ क्या रखना है, बिल्कुल स्पष्ट तरीके से।

31/03/2026

तब ब्रह्माजी ने प्रीतिपूर्वकं उस वास्तुपुरुष को वरदान देते हुए कहा कि हे वास्तुपुरुष ¦! ग्राम निर्माण, नगर निर्माण, बस्ती निर्माण अथवा दुर्ग (किला) बनाते समय अथवा पत्तन (व्यापारिक नगर) बनाते समय अथवा भवन, प्रपा (प्याऊ=पौसरा, पौशाला=पानी कौ टंकी, नल, जल प्रदाय योजना आदि), जलाशय, उद्यान आदि के निर्माण से पूर्वं जो तुम्हारी पूजा नहीं करेगे उनकी निर्धन रहकर मृत्यु होगी तथा पगपग पर उन्हें विघ्न-बाधाएं आर्येगी । इन अवसरों पर जो वास्तुपूजा नहीं करेगा, वह हे वास्तुपुरुष ! तुम्हारा आहार बन जायेगा ॥ १५-१७॥

28/03/2026

अध्याय 1
वास्तुशास्त्र – परिचय

वास्तु को समझने से पहले हमें सर्वप्रथम ईश्वर का ध्यान करना चाहिए। साथ ही हम वास्तु पुरुष और उनके शरीर पर विराजमान सभी देवी-देवताओं को नमन करते हैं। इसके पश्चात हम यह जानेंगे कि वास्तु पुरुष की उत्पत्ति कैसे हुई और कैसे सभी देवता उनके शरीर पर स्थापित हुए।

इस विषय के पीछे एक अत्यंत रोचक कथा है, जिसकी शुरुआत भगवान शिव और अंधकासुर के युद्ध से होती है। इन दोनों के बीच अत्यंत भयंकर युद्ध हुआ। इस युद्ध के दौरान उनके शरीर से जो पसीना बहा, उससे एक विशालकाय जीव की उत्पत्ति हुई। वह जीव इतना शक्तिशाली था कि जन्म लेते ही वह हर वस्तु को खाने लगा। यह देखकर देवता और दानव दोनों ही भयभीत हो गए और उससे बचने के लिए भागने लगे।

वह जीव सीधे ब्रह्मा जी के पास पहुँचा और उन्हें प्रणाम किया। ब्रह्मा जी ने उसे अपने मानस पुत्र के रूप में स्वीकार कर लिया। तभी से उसे वास्तु पुरुष कहा जाने लगा।

इसके बाद ब्रह्मा जी ने सभी देवी-देवताओं और दानवों को आदेश दिया कि वे वास्तु पुरुष के शरीर पर विराजमान हो जाएँ। सभी ने मिलकर उसे पृथ्वी में दबा दिया ताकि वह सृष्टि का विनाश न कर सके।

इस प्रकार:

जहाँ वास्तु पुरुष का सिर है, उसे ईशान कोण (उत्तर-पूर्व) कहा गया
जहाँ उनके पैर हैं, उसे नैऋत्य कोण (दक्षिण-पश्चिम) कहा गया
और जहाँ उनकी नाभि है, उसे ब्रह्मस्थान (मध्य भाग) कहा गया

इसके बाद वास्तु पुरुष ने ब्रह्मा जी से पूछा कि वह अब क्या करेगा। ब्रह्मा जी ने कहा कि जो लोग घर बनाते समय प्रकृति के नियमों का पालन नहीं करेंगे, तुम उनके घर में रहने वालों को कष्ट दे सकते हो।

📍 महत्वपूर्ण दिशा – ईशान कोण

ईशान कोण वास्तु पुरुष का मस्तिष्क माना जाता है। यह घर के चेहरे के समान होता है। यदि यह स्थान साफ और व्यवस्थित नहीं होगा, तो घर में रहने वाले लोग परेशान रहेंगे। जैसे हम अपने ईशान कोण को रखेंगे, वैसे ही हमारा जीवन भी प्रभावित होगा।

वास्तुशास्त्र बहुत प्राचीन विद्या है, जिसका उल्लेख वेदों में भी मिलता है। प्राचीन काल से ही इसका उपयोग भवन निर्माण में होता आ रहा है। राजा भोज के समय में यह विशेष रूप से प्रचलित हुआ।

समय के साथ परिस्थितियाँ बदल गई हैं। पहले लोग सरल जीवन जीते थे और शौचालय घर के बाहर होते थे, परंतु आज आधुनिक जीवनशैली में बहुत परिवर्तन आ गया है। लोग प्रगति के लिए ऋण लेते हैं और प्रकृति के पंचतत्वों के साथ संतुलन नहीं बना पाते, जिसके कारण उन्हें अनेक समस्याओं का सामना करना पड़ता है।

इसलिए स्वस्थ और समृद्ध जीवन के लिए आवश्यक है कि हम वास्तु के सिद्धांतों को समझें और उन्हें अपने घर के निर्माण में अपनाएँ।

📐 सही प्लॉट का चयन
प्लॉट का आकार वर्ग (Square) या आयताकार (Rectangle) होना चाहिए
गौमुखी प्लॉट (सामने से छोटा, पीछे से बड़ा) घर के लिए शुभ माना जाता है
शेरमुखी प्लॉट (सामने से बड़ा, पीछे से छोटा) व्यापार के लिए उपयुक्त होता है
🌱 भूमि की जाँच (मिट्टी परीक्षण)
ब्रह्मस्थान में 3 फीट लंबा और 3 फीट गहरा गड्ढा खोदकर उसमें पानी भर दें और रातभर छोड़ दें।
यदि अगले दिन उसमें कुछ पानी बचा रहे, तो भूमि अच्छी मानी जाती है।
गड्ढे की मिट्टी निकालकर पुनः उसी गड्ढे में भरें।
यदि गड्ढा पूरी तरह भर जाए → भूमि अच्छी है
यदि मिट्टी बच जाए → भूमि अत्यंत उत्तम है
यदि गड्ढा न भरे → भूमि उचित नहीं है
⚠️ प्लॉट का इतिहास

यदि उस स्थान पर पहले:

कब्रिस्तान
अस्पताल
या कोई नकारात्मक स्थान रहा हो

तो वहाँ घर नहीं बनाना चाहिए।

🧭 प्लॉट की फेसिंग
मुख्य सड़क के बहुत निकट या T-पॉइंट पर स्थित प्लॉट से बचें
घर का मुख्य द्वार सही दिशा में होना अत्यंत महत्वपूर्ण है
यदि मुख्य द्वार सही हो, तो छोटे-मोटे वास्तु दोष का प्रभाव कम हो जाता है
🌍 पंचतत्वों का महत्व

वास्तुशास्त्र में पाँच तत्व अत्यंत महत्वपूर्ण हैं:

जल
वायु
अग्नि
पृथ्वी
आकाश

इन पाँचों तत्वों से ही हमारा शरीर, घर और सम्पूर्ण ब्रह्मांड बना है।

“भगवान” शब्द का अर्थ:

भ → भूमि
ग → गगन (आकाश)
व → वायु
न → जल

यदि घर में इन पाँचों तत्वों का संतुलन सही हो, तो वह घर मंदिर के समान बन जाता है। यदि संतुलन बिगड़ जाए, तो वही घर समस्याओं का कारण बन सकता है।

🔁 तत्वों का निर्माण चक्र
आकाश से जल उत्पन्न होता है
जल से वायु
वायु से अग्नि
अग्नि से पृथ्वी
पृथ्वी से आकाश
❌ तत्वों का विनाश
जल अग्नि को नष्ट करता है
अग्नि आकाश को
आकाश वायु को
वायु पृथ्वी को
पृथ्वी जल को
⚖️ तत्वों का दमन (Suppress)
पृथ्वी अग्नि को दबाती है
आकाश पृथ्वी को
जल आकाश को
वायु जल को
अग्नि वायु को
🧠 शरीर और वास्तु का संबंध

वास्तु को समझने के लिए घर को मानव शरीर के समान समझना चाहिए। जैसे:

नाभि → पाचन शक्ति (अग्नि तत्व)
जल → संतुलन बनाए रखता है

यदि हम भोजन के तुरंत बाद पानी पीते हैं, तो पाचन क्रिया प्रभावित होती है, क्योंकि जल तत्व अग्नि तत्व को कम कर देता है। इसी प्रकार घर में तत्वों का असंतुलन समस्याएँ उत्पन्न करता है।

⚠️ वास्तु करते समय ध्यान रखने योग्य बातें
वास्तु निरीक्षण करते समय उस घर का भोजन नहीं करना चाहिए
अपने साथ भोजन और जल लेकर जाना चाहिए
इससे आपकी ऊर्जा प्रभावित नहीं होती
🔑 निष्कर्ष

वास्तुशास्त्र केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि ऊर्जा संतुलन का विज्ञान है।
यदि घर में पंचतत्वों का संतुलन सही हो, तो जीवन सुखी और समृद्ध बनता है।
अतः घर बनाते समय वास्तु के नियमों का पालन करना अत्यंत आवश्यक है।

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