Homeopathic treatment

Homeopathic treatment take homeopathy live healthy

07/02/2017
28/04/2016

• ऑपरेशन –

कई बार किसी भी दुर्घटना या बीमारी के कारण छोटा या बड़ा ऑपरेशन करवाना पड़ता है. ऐसी स्थिति में घाव और टांकों में शीघ्र आराम पाने और एंटीबायोटिक्स और दर्दनाशक दवाई लेने से बचने या कम से कम लेने के लिए निम्न दवा लें -
1. किसी भी ओपरेशन की पूर्व संध्या पर आर्निका 200 की पांच बूँद दवाई को आधा कप पानी से दिन में सिर्फ दो बार लें.
2. साथ ही Calc. Sulf 6X या 12X की 6-6 पिल्स दिन में चार बार मात्र तीन से पांच दिन तक कुनकुने पानी से दें या चूसने के लिये दें. इनसे कभी भी घाव या टांकों में सूजन, पस या मवाद नहीं पड़ेगा.
3. फिर भी अगर आप चाहे तो अतिरिक्त सुरक्षा के लिये हाईपेरिकम 200, लेडम पाल 200, बेलाडोना 200 और आर्निका 200 को मिलाकर पांच बूँद दवाई को आधा कप पानी से दिन में सिर्फ दो बार तीन दिन तक दें.
4. इससे सबसे बड़ा फायदा यह होगा की आपको कोई भी डॉक्टर पांच दिन से ज्यादा एंटीबायोटिक्स और दर्दनाशक दवाई दे नहीं पायेंगे.
5. आजकल अधिकाँश अस्पतालों में डिलीवरी सीजेरियन हो रही है. ऐसी स्थिति में अगर आप Arnica 200 दिन में दो बार पांच बूँद आधा कप पानी के साथ या पांच मीठी पिल्स मात्र तीन से पांच दिन तक चूसने के लिये लेते हैं, तो भी डिलीवरी के या सीजेरियन ऑपरेशन के घाव या टांकों में सूजन, पस या मवाद नहीं पड़ेगा.
6. किसी भी दुर्घटना में भी चोंट या घाव होने पर भी अगर आप इन दवाइयों को लेते हैं, तो भी इन घाव या टांकों में सूजन, पस या मवाद नहीं पड़ेगा.
• शरीर की ओवरहालिंग और रिचार्जिंग –

हमेशा स्वस्थ रहने के लिए कोई भी व्यक्ति या परिवार अगर निम्न उपचार द्वारा अपने शरीर की ओवरहालिंग और रिचार्जिंग करता है और खान-पान तथा एक्सरसाइज भी निम्न अनुसार लेता है, तो उसे कभी भी कैंसर, डायबटीज, ह्रदय रोग, लिवर रोग, किडनी फेल्यर, टी.बी., फेफड़े के रोग, चर्म रोग आदि कोई भी गंभीर बीमारी नहीं होगी और वह आजीवन सपरिवार स्वस्थ, प्रसन्न और खुशहाल रह सकेगा -
1. सबसे पहले आप सुबह 7 बजे कुल्ला करके सल्फर 200 को, फिर दोपहर को आर्निका 200 और रात्रि को खाने के एक से दो घंटे बाद या नौ बजे नक्स वोम 200 की पांच-पांच बूँद आधा कप पानी से एक हफ्ते तक ले, फिर हर तीन से छह माह में तीन दिन तक लें.
2. इन दवाइयों को लेने के एक हफ्ते बाद हर 15-15 दिन में सोरिनम 200 का मात्र एक-एक पांच बूँद का डोज चार बार तक ले, ताकि आपके शरीर के अंदर जमा दवाई और दूसरे अन्य केमिकल और पेस्टीसाइड के विकार दूर हो सकें और आपके शरीर के सभी ह्रदय, फेफड़े, लीवर, किडनी आदि मुख्य अंग सुचारू रूप से कार्य कर सकेंगे. बच्चों और ज्यादा वृद्धों में ये सभी दवा 30 की पावर में दें.
3. अगर कब्ज रहता हो, तो होम्योलेक्स या HSL कम्पनी की होम्योकाम्ब नं. 67 की एक या आधी गोली रोज रात एक सफ्ताह तक 9.30 बजे लें. इसके बाद हर व्यक्ति को चाहिए कि वह इसे हर हफ्ते एक या आधी गोली रात्रि 9.30 बजे ले.
4. आप सुबह दो से चार गिलास कुनकुना पानी पीकर 5 मिनिट तक कौआ चाल (योग क्रिया) करें.
5. साथ ही पांच या अधिक से अधिक दस बार तक सूर्य नमस्कार करें. फिर 200 से 500 बार तक कपाल-भांति करें. इसके बाद प्राणायाम करें.
6. रोज सुबह और रात को 15-15 मिनिट का शवासन भी करें.
7. फिर एक घंटे बाद अगर सूट करे, तो कम से कम एक माह तक नारियल पानी लें. या फिर इसे दोपहर चार बजे भी ले सकते हैं.
8. सुबह और शाम को अगर संभव हो, तो एक घंटा अवश्य घूमें.
9. रात को सोते समय अष्टावक्र गीता में बताये अनुसार दो मिनिट के लिए “मैं स्वयं ही तीन लोक का चैतन्य सम्राट हूँ” ऐसा जाप करें.
10. उत्तरी और दक्षिणी ध्रुव के चार्ज किये और मिलाकर बने चुम्बकित जल को लगभग 50 मिलीलीटर की मात्रा में रोज दिन में 3 बार उपयोग करें.
11. रोज सुबह उच्च शक्ति चुम्बकों को हथेलियों पर 15 मिनिट से आधे घंटे के लिए लगायें और रात्रि को खाने के दो घंटे बाद पैर के तलुवों पर 15 मिनिट से आधे घंटे के लिए दक्षिणी चुम्बक को बायीं ओर और उत्तरी चुम्बक को दाहिनी ओर लगाये.
12. गेंहू, जौ, देसी चना और सोयाबीन को सम भाग मिलाकर पिसवा ले और उसकी रोटी सादे मसाले की रेशेदार सब्जी से खाएं. दाल का प्रयोग कम कर दें.
13. बारीक आटे व मैदे से बनी वस्तुएं, तली वस्तुएं एव गरिष्ठ भोजन का त्याग करे।
14. सुबह-शाम चाय के स्थान पर नीबू का रस गरम पानी में मिला कर पिएं।
15. खाने में सिर्फ सेंधे नमक का प्रयोग करें.
16. रात को सोने से पहले पेट को ठण्डक पहुँचायें। इसके लिए खाने के चार घंटे बाद एक नेपकिन को सामान्य ठन्डे पानी से गीली करके पेट पर रखें और हर दो मिनिट में पलटते रहें. 15 मिनिट से 20 मिनिट तक इसे करें.
17. मैथी दाना 250 ग्राम, अजबाइन 100 ग्राम और काली जीरी 50 ग्राम को पीस कर इस चूर्ण को कुनकुने पानी से रात्रि 9.30 बजे एक चम्मच लें.
18. रात्रि को खाना और जमीकंद खाना, शराब पीना व धूम्रपान अगर करते हों या तम्बाखू खाते हों, तो इन्हें बंद करें. शाकाहारी भोजन ही लें.
19. अपने शरीर की सालाना ओवरहालिंग के लिए साल में एक बार अपने आसपास के किसी भी प्राकृतिक चिकित्सा केंद्र में जाकर वहां का दस दिन का कोर्स करें.
20. अपने घर के बुजुर्ग लोगों की रोज एक घंटे के लिये सेवा और मदद करें.
21. अपने आसपास की झोपड़पट्टी में रहने वाले किसी गरीब व्यक्ति की हर हफ्ते जाकर मदद करें.
22. होम्योकाम्ब और बायोकाम्ब नम्बर से मिलती हैं. इनके नम्बर ध्यान से लिखें. साथ ही होम्योकाम्ब और बायोकाम्ब में कन्फ्यूज न हों. इन्हें साफ़-साफ़ लिखें.
23.किसी भी गंभीर मरीज को किसी विशेषज्ञ डॉक्टर को तत्काल दिखायें.
24. होम्योपैथी की दवाइयों को मुंह साफ़ करके कुल्ला करके लेना चाहिए. इनको लेते समय किसी भी तरह की सुगन्धित चीजों और प्याज, लहसुन, काफी, हींग और मांसाहार आदि से बचे और दवा लेने के आधा घंटा पहले और बाद में कुछ न लें.
25.हर दिन नई एलोपथिक दवाइयां बन रही हैं और अधिकांश पुरानी दवाइयों के घातक और खतरनाक परिणामों के कारण इन्हें कुछ ही वर्षों में भारत को छोड़ कर विश्व के कई देशों में बेन भी किया जा रहा है.
26.हमें भी चाहिये कि हम मात्र एलोपथिक दवाइयों पर ही निर्भर न रहकर योगासन, सूर्य किरण भोजन, अमृत-जल या सूर्य किरण जल चिकित्सा, एक्यूप्रेशर, बायोकेमिक दवाइयाँ आदि निर्दोष प्रणालियों को अपना कर खुद और अपने परिवार को सुरक्षित करें.

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20/04/2016

लू या सनस्ट्रोक(Sunstro

बिहार मे अब लू चलने लगी है! ४३' के आगे तापमान बढ़ने पर इस प्रकार के हालत देखने को मिलते हैं ! लू या सनस्ट्रोक को मस्तिष्क प्रदाह या एनसेफे लाइटिस रोग भी कह सकते हैं ! यह रोग सूरज के अधिक उत्ताप मे घूमने से,कार्य के स्थान पर ठीक समय पर पहुचने के लिए तेज धूप मे दौड़कर जाने तथा उचित मात्रा मे पानी न पिने के कारण तथा छॉव न मिलने के कारण होता है !
लक्षण____
सिर मे अधिक खून के कारण सिर दर्द,थकान,घबराहट,कमजोरी,वायु का अभाव,शरीर गर्म होना,उल्टी होना,बुखार,मुह व गला सूखा मालूम होना,भूख की कमी,वक्षस्थल मे पीड़ा होना,अनिद्रा,तेज प्यास,दस्त होआदि है !
बड़ो के साथ छोटे बच्चों को लू अपनी चपेट मे ले लेता है ! बहुत देर तक उन्हें भीधूप मे घुमाने अथवा गर्मी मे बहुत देर तक सवारी आदि मे घुमने से शिशु सर्दी गर्मी या लू की चपेट मे आ जाते हैं ! इस प्रकार बच्चों के केस मे भी वही उपाय करें जो बड़ों के केस मे करते हैं ! डॉ. बताते हैं कि बच्चों के इय स्थिति मे चीनी या बताशे मे होमियोपैथिक दवा_ कैम्फर २ बून्द की मात्रा मे १०_१० मिनट के अन्तर से सेवन करना चाहिए !
[9835640593होमियोपैथ मे सर्वश्रेष्ठ औषधि है ग्लोनाइन 6,30 .
हमने अनेक लू के रोगी इस अकेली दवा से पूर्ण ठीक किया है ! मस्तिष्क मे रक्त संचय,चेहरा लाल रहने पर बेलाडोना भी दे सकते हैं ! यदि लू के कुछ लक्षण रह जाय तो नेट्रम कार्ब निम्न शक्ति का कुछ दिन सेवन करायें !
विशेष जानकारी के लिए सम्पर्क करे
इस मैसेज को अधिक से अधिक लोगों मे बॉटें !
धन्यवाद..............

20/04/2016

साइनस और नाक से जुड़ी सभी बीमारियों के लिए
जैसे
1:- नाक की हड्डी बढना
2:- रात में खरा्टे आना,
3:- नींद सही से न आना,
4:- रात्रि में बार बार जाग। आना,
5:- यादाश्त कमजोर होना
खासकर बच्चों के लिए,
6:- बच्चों का बिस्तर गीला करना,
7:- नाक से खून आना,
8:- सर्दी जुकाम

जैसी अनेको रोगों के लिए

(बच्चों के लिए एक एक बूंद ही डाले)

शुद्ध देशी गाय का घी
जो आपको बहुत महंगा मिलेगा आज के समय में,

इसकी 2-2 बूद गुनगुना करके रात्रि में सोने से पहले दोनो नासिकाओ में डाले और बहुत हल्का सा पिछे की ओर खींचे जैसे सास लेते हैं

जब पहला नाक में डाले तो दूसरी नाक को बंद करके
हल्का सा सक करे
इसी तरह जब दूसरी नाक में डाले तो पहली, नाक बंद रखे और हल्का सा सक करे

बिना तकिया लिए 15 मिनट तक लेटे रहे फिर तकिया लगाकर से जाये तुरंत
बिना किसी से बात किये

इससे कई मित्रों को ठीक किया है : सर दद, माईेन, Sinus, नाक का मांस या ही का बढना, नद न आना, यादात कमजोर, खराटे, नाक का बहना, यादा छीके आना, एलज, Brain Stroke, Blood Clotting in Brain, कमजोरी, आखो क कमजोरी, isnophilia एवं मानसक रोग का एक अदभुत ईलाज बनाने क िवध:: सूयदय से पहले और सूयात के बाद गौ मां के थन से बछडो के पीने के पचात दूध िनकाला जाता है, िफ़र उस दूध को दही के प म जमाया जाता है तपचात दही को सूयदय से पूव सागोन, शीशम या अय िकसी औषधीय पेड क लकडी से बनाए गए मथनी यं से िनयिमत गित से मथा जाता है और उससे मखन ा िकया जाता है िफ़र उस ा मखन को मम मम आंच पर गम िकया जाता है िफ़र जो पदाथ ा होता है उसे घी कहते है इस घी म HDL (अछा कोलेटोल) होता है जो (LDL,VLDL) बुरे कोलेटाल को कम करता है और शरीर को पोषण और ताकत देता है कई िबमारया दूर करता है योग क िवध:: रात को सोते समय उपर लखी िवध से बनाए हए घी को हका गम करे और डापर क सहायता से २-२ बूंदे नाक म डाले और लेटे रहे, ये घी ऐसी ऐसी जगह पर जाता है जहां कोई दवा काम नही करती कमजोरी दूर करने और पोषण के लए: एक चमच घी को एक िगलास गम दूध म िमलाकर िपलाए, इससे शरीर ताकतवर बनेगा और अगर गभवती मिहलाए भी ये अजमाती है तो उनका सव बहत आराम से होगा िबना क के जानकारी:: भारतीय नल क गौ मां से इस पित से घी िनकालने म कम से कम 26 लीटर और अधक से अधक 34 लीटर दूध लगता है सूचना:: कुछ कंपिनया या डेयरी फ़ाम जस और भस के दूध से मशीन ारा म िनकालते है जसे Butter Oil कहते है वो असल म घी नही होता और इसके काफ़ नुकसान होते है जैसे मोटापा, कोलेटाल, बीपी आिद आजकल हम जो खा रहे है वो ये ही Butter Oil है जो म से बनता है अगर आपको पूरा फ़ायदा लेना है तो उपर लखी सही िवध से घी बनाए और कई बीमारयो से छुटकारा पाये..

20/04/2016

आदरणीय राष्ट्रप्रेमी भाईयों और बहनों

आज मैं भारत में जारी एक बहुत बड़े षड़यंत्र के ऊपर आप लोगों का ध्यान आकृष्ट करना चाहूँगा जिसे आप "मौत का व्यापार" कह सकते हैं और ये व्यापार है अंग्रेजी दवाओं का, क्यों कि भारत अंग्रेजी दवाओं का Dumping Ground बन गया है | जो दवाई विश्व में कहीं नहीं मिलेगी वो भारत में आपको मिल जाएगी और ऐसी कई दवाये हैं जिनका कोई लेबोरेटरी टेस्ट भी नहीं हुआ रहता है और वो भारत के बाज़ार में धड़ल्ले से बिक रहा हैं !

मौत का व्यापार
भारत सरकार ने 1974 में श्री जयसुखलाल हाथी की अध्यक्षता में एक कमिटी बनाई थी, जिसे हम हाथी कमिटी या हाथी कमीशन के रिपोर्ट के रूप में जानते हैं और जिसे कहा गया था कि बाज़ार में कौन कौन से दवाएं हैं जो हमारे लिए सबसे जरूरी हैं और जिनके बिना हमारा काम नहीं चल सकता | हाथी कमिटी ने अपनी रिपोर्ट 1975 में तैयार कर सरकार को बताया कि भारत के मौसम, वातावरण और जरूरत के हिसाब से 117 दवाएं काफी जरूरी हैं | इन 117 दवाओं में छोटे बीमारी (खांसी, बुखार, आदि) से लेकर बड़ी बिमारियों (कैंसर) तक की दवा थी | कमिटी ने कहा कि ये वो दवाएं हैं जिनके बिना हमारा काम नहीं चल सकता | कुछ सालों बाद विश्व स्वस्थ्य संगठन (WHO) ने कहा कि ये लिस्ट कुछ पुरानी हो गयी हैं और उसने हाथी कमिटी की लिस्ट को बरक़रार रखते हुए कुछ और दवाएं इसमें जोड़ी और ये लिस्ट हो गया 350 दवाओं का | मतलब हमारे देश के लोगों को केवल 350 दवाओं की जरुरत है किसी भी प्रकार की बीमारी से लड़ने के लिए, चाहे वो बुखार हो या कैंसर लेकिन हमारे देश में बिक रही है 84000 दवाएं |

हमारे भारत में एक मंत्रालय है जो परिवार कल्याण एवं स्वास्थ्य मंत्रालय कहलाता है | हमारी भारत सरकार प्रति वर्ष करीब 23700 करोड़ रुपये लोगों के स्वास्थ्य पर खर्च करती है | फिर भी हमारे देश में ये बीमारियाँ बढ़ रही है | आइये कुछ आंकड़ों पर नजर डालते है -

भारत सरकार के आंकड़े बताते है कि सन 1951 में भारत की आबादी करीब 34 करोड़ थी जो सन 2012 तक 120 करोड़ हो गई है |

सन 1951 में पूरे भारत में 4780 अंग्रेजी डॉक्टर थे, जो सन 2012 तक बढ़कर करीब 18,00,000 (18 लाख) हो गयी है |

सन 1947 में भारत में एलोपेथी दवा बनाने वाली करीब 10-12 कंपनिया ही हुआ करती थी जो आज बढ़कर करीब 20 हजार हो गई है |

सन 1951 में पूरे भारत में करीब 70 प्रकार की दवाइयां बिका करती थी और आज इन दवाओं की संख्या बढ़कर करीब 84000 (84 हजार) हो गई है|

सन 1951 में भारत में बीमार लोगों की संख्या करीब 5 करोड़ थी आज बीमार लोगों की संख्या करीब 100 करोड़ हो गई है |

हमारी भारत सरकार ने पिछले 64 सालों में अस्पतालों पर, दवाओ पर, डॉक्टर और नर्सों पर, ट्रेनिंग वगेरह वगेरह में सरकार ने जितना खर्च किया उसका 5 गुना यानी करीब 50 लाख करोड़ रूपया खर्च कर चुकी है | आम जनता ने जो अपने इलाज के लिए पैसे खर्च किये वो अलग है | आम जनता का लगभग 50 लाख करोड़ रूपया बर्बाद हुआ है पिछले 64 सालों में इलाज के नाम पर, बिमारियों के नाम पर | इतना सारा पैसा खर्च करने के बाद भी भारत में रोग और बीमारियाँ बढ़ी है |

हमारे देश में आज करीब 5 करोड़ 70 लाख लोग डाईबिटिज (मधुमेह) के मरीज है | और भारत सरकार के आंकड़े बताते है कि करीब 3 करोड़ लोगों को डाईबिटिज होने वाली है |

हमारे देश में आज करीब 4 करोड़ 80 लाख लोग ह्रदय सम्बन्धी विभिन्न रोगों से ग्रसित है |

करीब 8 करोड़ लोग कैंसर के मरीज है | भारत सरकार कहती है कि 25 लाख लोग हर साल कैंसर के कारण मरते है |

12 करोड़ लोगों को आँखों की विभिन्न प्रकार की बीमारियाँ है |
14 करोड़ लोगों को छाती की बीमारियाँ है |
14 करोड़ लोग गठिया रोग से पीड़ित है |
20 करोड़ लोग उच्च रक्तचाप (High Blood Pressure ) और निम्न रक्तचाप (Low Blood Pressure ) से पीड़ित है |
27 करोड़ लोगों को हर समय 12 महीने सर्दी, खांसी, जुकाम, कलरा, हैजा आदि सामान्य बीमारियाँ लगी ही रहती है |

30 करोड़ भारतीय महिलाएं एनीमिया की शिकार है | एनीमिया यानी शरीर में खून की कमी | महिलाओं में खून की कमी से पैदा होने वाले करीब 56 लाख बच्चे जन्म लेने के पहले साल में ही मर जाते है | यानी पैदा होने के एक साल के अन्दर-अन्दर उनकी मृत्यु हो जाती है | क्यों कि खून की कमी के कारण महिलाओं में दूध प्रयाप्त मात्र में नहीं बन पाता | प्रति वर्ष 70 लाख बच्चे कुपोषण के शिकार होते है | कुपोषण के मायने उनमे खून की कमी, फास्फोरस की कमी, प्रोटीन की कमी, वसा की कमी, वगैरह-वगैरह .......

ऊपर बताये गए सारे आंकड़ों से एक बात साफ़ तौर पर साबित होती है कि भारत में एलोपेथी का इलाज कारगर नहीं हुआ है, एलोपेथी का इलाज सफल नहीं हो पाया है | इतना पैसा खर्च करने के बाद भी बीमारियाँ कम नहीं हुई बल्कि और बढ़ गई है | यानि हम बीमारी को ठीक करने के लिए जो एलोपेथी दवा खाते है उससे और नई तरह की बीमारियाँ सामने आने लगी है |

पहले मलेरिया हुआ करता था | मलेरिया को ठीक करने के लिए हमने जिन दवाओ का इस्तेमाल किया उनसे डेंगू, चिकनगुनिया और न जाने क्या-क्या नई-नई तरह की बुखारे, बिमारियों के रूप में पैदा हो गई है | किसी ज़माने में सरकार दावा करती थी कि हमने छोटी माता / बड़ी माता और टी.बी. जैसी घातक बिमारियों पर विजय प्राप्त कर ली है लेकिन हाल ही में ये बीमारियाँ फिर से अस्तित्व में आ गई है, फिर से लौट आई है | यानी एलोपेथी दवाओं ने बीमारियाँ कम नहीं की और ज्यादा बढ़ायी है |

यानि धीरे धीरे ये दवा कम्पनियां भारत में व्यापार बढाने लगी और इनके व्यापार को बढ़ावा दिया हमारी सरकारों ने | ऐसा इसलिए हुआ क्यों कि हमारे नेताओं को इन दवा कंपनियों ने खरीद लिया | हमारे नेता लालच में आ गए और अपना व्यापार धड़ल्ले से शुरू करवा दिया | इसी के चलते जहाँ हमारे देश में सन 1951 में 10-12 दवा कंपनिया हुआ करती थी वो आज बढ़कर 20000 से ज्यादा हो गई है | 1951 में जहाँ लगभग 70 कुल दवाइयां हुआ करती थी आज की तारीख में ये 84000 से भी ज्यादा हो गयी हैं | फिर भी रोग कम नहीं हो रहे है, बिमारियों से पीछा नहीं छूट रहा है |

आखिर सवाल खड़ा होता है कि इतनी सारे जतन करने के बाद भी बीमारियाँ कम क्यों नहीं हो रही है | इसकी गहराई में जाए तो हमे पता लगेगा कि मानव के द्वारा निर्मित ये दवाए किसी भी बीमारी को जड़ से समाप्त नहीं करती बल्कि उसे कुछ समय के लिए रोके रखती है | जब तक दवा का असर रहता है तब तक ठीक, दवा का असर खत्म हुआ तो बीमारियाँ फिर से हावी हो जाती है | दूसरी बात इन दवाओं के साइड इफेक्ट बहुत ज्यादा है यानी एक बीमारी को ठीक करने के लिए दवा खाओ तो एक दूसरी बीमारी पैदा हो जाती है | आपको कुछ उदहारण दे कर समझाता हूँ -

Antipyretic - बुखार को ठीक करने के लिए हम एंटीपायिरेटिक दवाएं खाते है जैसे - पैरासिटामोल, आदि | बुखार की ऐसी सैकड़ों दवाएं बाजार में बिकती है | ये एंटीपायिरेटिक दवाएं हमारे गुर्दे ख़राब करती है | गुर्दा ख़राब होने का सीधा मतलब है कि पेशाब से सम्बंधित कई बिमारियों का पैदा होना, जैसे पथरी, मधुमेह, और न जाने क्या क्या | एक गुर्दा खराब होता है, उसके बदले में नया गुर्दा लगाया जाता है तो ऑपरेशन का खर्चा करीब 3.50 लाख रुपये का होता है |

Antidiarrheal - इसी तरह से हम लोग दस्त की बीमारी में antidiarrheal दवाए खाते है | ये antidiarrheal दवाएं हमारी आँतों में घाव करती है जिससे कैंसर, अल्सर, आदि भयंकर बीमारियाँ पैदा होती है |

Analgesic (commonly known as a Painkiller) - इसी तरह हमें सरदर्द होता है तो हम एनाल्जेसिक दवाए खाते है जैसे एस्प्रिन, डिस्प्रिन, कोल्डरिन, ऐसी और भी सैकड़ो दवाए है | ये एनाल्जेसिक दवाए हमारे खून को पतला करती है | आप जानते है कि खून पतला हो जाये तो शरीर की प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है और कोई भी बीमारी आसानी से हमारे ऊपर हमला बोल सकती है |

आप आये दिन अखबारों में या टी वी पर सुना होगा की किसी का एक्सिडेंट हो जाता है तो उसे अस्पताल ले जाते ले जाते रस्ते में ही उसकी मौत हो जाती है | समझ में नहीं आता कि अस्पताल ले जाते ले जाते मौत कैसे हो जाती है ? होता क्या है कि जब एक्सिडेंट होता है तो जरा सी चोट से ही खून शरीर से बाहर आने लगता है और क्यों कि खून पतला हो जाता है तो खून का थक्का नहीं बनता जिससे खून का बहाव रुकता नहीं है और खून की कमी लगातार होती जाती है और कुछ ही देर में उसकी मौत हो जाती है |

पिछले करीब 30 से 40 सालों में कई सारे देश है जहाँ पे ऊपर बताई गई लगभग सारी दवाएं बंद हो चुकी है | जैसे अमेरिका, ब्रिटेन, फ़्रांस, जर्मनी, इटली, और भी कई देश में जहा ये दवाए न तो बनती और न ही बिकती है लेकिन हमारे देश में ऐसी दवाएं धड़ल्ले से बन रही है, बिक रही है | इन 84000 दवाओं में अधिकतर तो ऐसी है जिनकी हमारे शरीर को जरुरत ही नहीं है | यानी जिन दवाओं कि जरूरत ही नहीं है वो डॉक्टर हमे लिखते है | मजेदार बात ये है कि डॉक्टर कभी भी इन दवाओं का इस्तेमाल नहीं करता और न अपने बच्चो को खिलाता है | ये सारी दवाएं तो आप जैसे और हम जैसे लोगों को लिखी जाती है | वो ऐसा इसलिए करते है क्यों कि उनको इन दवाओं के साइड इफ़ेक्ट पता होता है और कोई भी डॉक्टर इन दवाओं के साइड इफ़ेक्ट के बारे में कभी किसी मरीज को नहीं बताता | अगर भूल से पूछ बैठो तो डॉक्टर कहता है कि "तुम ज्यादा जानते हो या मैं ?" दूसरी और चौकाने वाली बात ये है कि ये दवा कंपनिया बहुत बड़ा कमीशन देती है डॉक्टर को | यानी डॉक्टर कमिशनखोर हो गए है या यूँ कहे कि डॉक्टर दवा कम्पनियों के एजेंट हो गए है तो गलत नहीं होगा |

इसके अलावा ये कंपनियाँ टेलीविजन के माध्यम से, पत्र-पत्रिकाओं के माध्यम से, अख़बारों के माध्यम से फिजूल की दवाएं भारत के बाजार में बेच लेती हैं | आप जानेंगे तो आश्चर्य करेंगे कि दुनिया भर के देशों में एक अंतर्राष्ट्रीय कानून है कि दवाओं का विज्ञापन आप टेलीविजन पर, पत्र-पत्रिकाओं में, अख़बारों में नहीं कर सकते, लेकिन भारत में धड़ल्ले से हर माध्यम में दवाओं का विज्ञापन आता है, और भारत में भी ये कानून लागु है, उसके बावजूद आता है | जब इससे सम्बंधित विभागों के अधिकारियों से बात कीजिये तो वो कहते हैं कि " हम क्या कर सकते हैं, आप जानते हैं कि भारत में सब संभव है" | तो ऐसी बहुत सारी फालतू की दवाएँ हजारों की संख्या में भारत के बाजार में बेचीं जा रही है |

आपने एक नाम सुना होगा M.R. यानि मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव | ये नाम अभी हाल के कुछ वर्षो में ही अस्तित्व में आया है | ये MR नाम का विचित्र प्राणी कई तरह की दवा कम्पनियों की दवाएं डॉक्टर के पास ले जाते है और इन दवाओं को बिकवाते है | ये दवा कंपनिया 40-40% तक कमीशन डॉक्टर को सीधे तौर पर देती है | जो बड़े बड़े शहरों में दवा कंपनिया है नकद में डॉक्टर को कमिसन देती है | ऑपरेशन करते है तो उसमे कमीशन खाते है, एक्सरे में कमीशन, विभिन्न प्रकार की जांचे करवाते है डॉक्टर , उसमे कमीशन, सबमे इनका कमीशन फिक्स रहता है | जिन बिमारियों में जांचों की कोई जरुरत ही नहीं होती उनमे भी डॉक्टर जाँच करवाने के लिए लिख देते है ये जाँच कराओ, वो जाँच करवाओ आदि आदि | कई बीमारियाँ ऐसी है जिसमे दवाएं जिंदगी भर खिलाई जाती है | जैसे हाई-ब्लड प्रेसर या लो-ब्लड प्रेसर, डाईबिटिज, आदि | यानी जब तक दवा खाओगे आपकी धड़कन चलेगी, दवाएं बंद तो धड़कन बंद | जितने भी डॉक्टर है उनमे से 99% डॉक्टर कमिशनखोर हैं केवल 1% इमानदार डॉक्टर है जो सही मायने में मरीजो का सही इलाज करते है |

सारांश के रूप में अगर हम कहे कि मौत का खुला व्यापार धड़ल्ले से पूरे भारत में चल रहा है तो कोई गलत नहीं होगा | अभी भारत सरकार ने नई ड्रग प्राइसिंग पालिसी लाया है देखिये उसके माध्यम से क्या गुल खिलाती हैं ये दवा कंपनियां |

जय हिंद

उपरोक्त लेख पढ़ने के बाद अपनी राय जरूर दें ! . धन्यवाद.......

20/04/2016

Early Symptoms of Asthma
Early warning signs are changes that happen just before or at the very beginning of an asthma attack. These signs may start before the well-known symptoms of asthma and are the earliest signs that your asthma is worsening.

In general, these signs are not severe enough to stop you from going about your daily activities. But by recognizing these signs, you can stop an asthma attack or prevent one from getting worse. Early warning signs of asthma include:

Frequent cough, especially at night
Losing your breath easily or shortness of breath
Feeling very tired or weak when exercising
Wheezing or coughing after exercise
Feeling tired, easily upset, grouchy, or moody
Decreases or changes in lung function as measured on a peak flow meter
Signs of a cold or allergies (sneezing, runny nose, cough, nasal congestion, sore throat, and headache)
Trouble sleeping
If you have early warning signs or symptoms of asthma, you should take more asthma medication as described in your asthma action plan.now a days asthma is spreading very rapidly.

17/08/2014

aap apne bimariyon k baare me msg karo aur medicine k baare me jaano

17/08/2014

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