neuro spine physiotherapy centre

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19/03/2026

सायटिका बीमारी एक आम समस्या है जिसमें सायटिक तंत्रिका पर दबाव पड़ने से दर्द, सुन्नता और कमजोरी होती है। यह तंत्रिका पीठ से शुरू होकर पैरों तक जाती है, और जब यह दब जाती है या क्षतिग्रस्त हो जाती है, तो यह समस्या उत्पन्न होती है।

*कारण:*

सायटिका बीमारी के कई कारण हो सकते हैं, जिनमें से कुछ प्रमुख कारण हैं:

- हर्नियेटेड डिस्क: जब रीढ़ की हड्डी के बीच की डिस्क फट जाती है और तंत्रिका पर दबाव डालती है।
- स्पॉन्डिलोलिस्टेसिस: जब एक कशेरुका दूसरी कशेरुका पर फिसल जाती है और तंत्रिका पर दबाव डालती है।
- स्पाइनल स्टेनोसिस: जब रीढ़ की हड्डी की नहर तंग हो जाती है और तंत्रिका पर दबाव डालती है।
- मांसपेशियों में खिंचाव: जब पीठ की मांसपेशियों में खिंचाव होता है और तंत्रिका पर दबाव डालता है।

*मेडिसिन ट्रीटमेंट:*

सायटिका बीमारी के इलाज के लिए कई दवाएं उपयोग की जा सकती हैं, जिनमें से कुछ प्रमुख दवाएं हैं:

- दर्द निवारक दवाएं: जैसे कि एसिटामिनोफेन या इबुप्रोफेन, जो दर्द और सूजन को कम करने में मदद करती हैं।

*फिजियोथैरेपी ट्रीटमेंट:*

फिजियोथैरेपी सायटिका बीमारी के इलाज में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। फिजियोथैरेपिस्ट आपको निम्नलिखित तकनीकों के माध्यम से मदद कर सकता है:

- व्यायाम: जो पीठ की मांसपेशियों को मजबूत बनाने और लचीलेपन में सुधार करने में मदद करते हैं।
- मैनुअल थेरेपी: जो पीठ की मांसपेशियों को आराम देने और दर्द को कम करने में मदद करती है।
- हीट या कोल्ड थेरेपी: जो दर्द और सूजन को कम करने में मदद करती है।

यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि सायटिका बीमारी के इलाज के लिए एक अनुभवी डॉक्टर या फिजियोथैरेपिस्ट से परामर्श करना आवश्यक है। वे आपको व्यक्तिगत सलाह और उपचार प्रदान कर सकते हैं जो आपकी विशिष्ट आवश्यकताओं के अनुसार होगा।

चेहरे का लकवा या बेल्स पॉलिसी एक ऐसी स्थिति है जिसमें चेहरे की मांसपेशियों में अचानक से कमजोरी आ जाती है, जिससे चेहरे का...
15/02/2026

चेहरे का लकवा या बेल्स पॉलिसी एक ऐसी स्थिति है जिसमें चेहरे की मांसपेशियों में अचानक से कमजोरी आ जाती है, जिससे चेहरे का एक तरफ का हिस्सा मुरझा जाता है। यह स्थिति फेसिअल नर्व (सातवीं क्रेनियल नर्व) की खराबी के कारण होती है, जो चेहरे की मांसपेशियों को नियंत्रित करती है ¹ ² ³।

*मेडिकल ट्रीटमेंट:*

- स्टेरॉयड थेरेपी: बेल्स पॉलिसी के इलाज में स्टेरॉयड दवाएं जैसे कि प्रेडनिसोन का उपयोग किया जाता है, जो सूजन को कम करने में मदद करती हैं।
- एंटीवायरल दवाएं: यदि बेल्स पॉलिसी वायरल संक्रमण के कारण होती है, तो एंटीवायरल दवाएं दी जा सकती हैं।
- पेन मैनेजमेंट: पेन और सूजन को कम करने के लिए पेनकिलर दवाएं दी जा सकती हैं ⁴।

*फिजियोथैरेपी ट्रीटमेंट:*

- एक्सरसाइज: फेसिअल मांसपेशियों को मजबूत करने के लिए एक्सरसाइज की जाती है, जैसे कि मिरर एक्सरसाइज।
- इलेक्ट्रिकल स्टिमुलेशन: मांसपेशियों को मजबूत करने के लिए इलेक्ट्रिकल स्टिमुलेशन का उपयोग किया जा सकता है।
- मैसेज: फेसिअल मांसपेशियों को आराम देने और रक्त प्रवाह को बढ़ाने के लिए मैसेज किया जाता है।
- टेपिंग: फेसिअल मांसपेशियों को समर्थन देने के लिए टेपिंग का उपयोग किया जा सकता है ⁵।

*मैनेजमेंट:*

- आंखों की देखभाल: बेल्स पॉलिसी में आंखों की देखभाल करना बहुत महत्वपूर्ण है, क्योंकि आंखें सूख सकती हैं।
- फेसिअल एक्सरसाइज: नियमित फेसिअल एक्सरसाइज करने से मांसपेशियों को मजबूत करने में मदद मिलती है।
- स्टेरॉयड थेरेपी का पालन: स्टेरॉयड थेरेपी का पालन करना बहुत महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह सूजन को कम करने में मदद करती है।

फ्रोजन शोल्डर (कंधा जाम) एक दर्दनाक स्थिति है जिसमें कंधे के जोड़ की गति सीमित हो जाती है और दर्द होता है। यहाँ इसके बार...
01/02/2026

फ्रोजन शोल्डर (कंधा जाम) एक दर्दनाक स्थिति है जिसमें कंधे के जोड़ की गति सीमित हो जाती है और दर्द होता है। यहाँ इसके बारे में जानकारी दी जा रही है:

*कारण:*
फ्रोजन शोल्डर के कारण कई हो सकते हैं, जिनमें शामिल हैं:

- चोट या आघात
- लंबे समय तक कंधे को एक ही स्थिति में रखना
- मधुमेह, थायराइड विकार, या अन्य चिकित्सीय स्थितियाँ
- उम्र बढ़ना

*मेडिसिन ट्रीटमेंट:*
फ्रोजन शोल्डर के लिए मेडिसिन ट्रीटमेंट में शामिल हो सकते हैं:

- दर्द निवारक दवाएं: एसिटामिनोफेन या इबुप्रोफेन
- स्टेरॉयड इंजेक्शन: कंधे में दर्द और सूजन को कम करने के लिए
- फिज़ियोथैरेपी के साथ दर्द निवारक दवाएं

*फिजियोथैरेपी ट्रीटमेंट:*
फिजियोथैरेपी फ्रोजन शोल्डर के इलाज में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। फिजियोथैरेपी के कुछ तरीके हैं:

- कंधे की गति बढ़ाने वाले व्यायाम
- दर्द निवारक और मांसपेशियों को आराम देने वाले व्यायाम
- कंधे की मांसपेशियों को मजबूत करने वाले व्यायाम
- जोड़ की गतिशीलता बढ़ाने के लिए मैनुअल थेरेपी

*बचाव:*
फ्रोजन शोल्डर से बचाव के लिए कुछ तरीके हैं:

- नियमित व्यायाम करें जो कंधे की गति और मजबूती बढ़ाते हैं
- लंबे समय तक एक ही स्थिति में न रहें
- कंधे की चोटों का उचित इलाज करें
- मधुमेह और अन्य चिकित्सीय स्थितियों का प्रबंधन करें

यह ध्यान रखें कि फ्रोजन शोल्डर का इलाज एक लंबी प्रक्रिया हो सकती है और इसमें मरीज की सक्रिय भागीदारी की आवश्यकता होती है। एक फिजियोथैरेपिस्ट या डॉक्टर से परामर्श करना उचित होगा जो आपको व्यक्तिगत उपचार योजना बनाने में मदद कर सकते हैं।

डॉ महेश प्रताप (pt)
MPT ( neuro)

पीआईवीडी (प्रोलैप्स्ड इंटरवर्टेब्रल डिस्क) एक ऐसी स्थिति है जिसमें रीढ़ की हड्डी के बीच स्थित डिस्क का एक हिस्सा अपने स्...
21/01/2026

पीआईवीडी (प्रोलैप्स्ड इंटरवर्टेब्रल डिस्क) एक ऐसी स्थिति है जिसमें रीढ़ की हड्डी के बीच स्थित डिस्क का एक हिस्सा अपने स्थान से हट जाता है, जिससे नसों पर दबाव पड़ता है और दर्द, सुन्नता, और कमजोरी जैसी समस्याएं हो सकती हैं. ¹ ²

*लक्षण:*

- पीठ या गर्दन में दर्द
- दर्द जो हाथों या पैरों में फैलता है
- सुन्नता या झुनझुनी
- मांसपेशियों में कमजोरी
- चलने या उठने-बैठने में परेशानी ³

*कारण:*

- भारी वस्तुओं को उठाना
- बार-बार झुकना या घूमना
- खराब मुद्रा या बैठने की आदतें
- उम्र बढ़ना
- मोटापा
- धूम्रपान

*मेडिकल ट्रीटमेंट:*

- दर्द निवारक दवाएं
- मांसपेशियों को आराम देने वाली दवाएं
- एंटी-इंफ्लेमेटरी दवाएं
- जरूरत पड़ने पर सर्जरी ⁴

*फिजियोथैरेपी ट्रीटमेंट:*

- दर्द प्रबंधन
- मांसपेशियों को मजबूत करने वाले व्यायाम
- मुद्रा सुधार
- स्ट्रेचिंग और फ्लेक्सिबिलिटी बढ़ाने वाले व्यायाम
- कोर स्ट्रेंथनिंग व्यायाम
- एयरोबिक व्यायाम जैसे कि चलना या तैरना ⁵

*बचाव:*

- नियमित व्यायाम करना
- अच्छी मुद्रा बनाए रखना
- भारी वस्तुओं को सही तरीके से उठाना
- धूम्रपान छोड़ना
- स्वस्थ वजन बनाए रखना
- नियमित जांच और परीक्षण करवाना
डॉ महेश प्रताप(pt)
MPT( neurology)

सायटिका बीमारी एक आम समस्या है जिसमें सायटिक तंत्रिका पर दबाव पड़ने से दर्द, सुन्नता और कमजोरी होती है। यह तंत्रिका पीठ ...
08/01/2026

सायटिका बीमारी एक आम समस्या है जिसमें सायटिक तंत्रिका पर दबाव पड़ने से दर्द, सुन्नता और कमजोरी होती है। यह तंत्रिका पीठ से शुरू होकर पैरों तक जाती है, और जब यह दब जाती है या क्षतिग्रस्त हो जाती है, तो यह समस्या उत्पन्न होती है।

*कारण:*

सायटिका बीमारी के कई कारण हो सकते हैं, जिनमें से कुछ प्रमुख कारण हैं:

- हर्नियेटेड डिस्क: जब रीढ़ की हड्डी के बीच की डिस्क फट जाती है और तंत्रिका पर दबाव डालती है।
- स्पॉन्डिलोलिस्टेसिस: जब एक कशेरुका दूसरी कशेरुका पर फिसल जाती है और तंत्रिका पर दबाव डालती है।
- स्पाइनल स्टेनोसिस: जब रीढ़ की हड्डी की नहर तंग हो जाती है और तंत्रिका पर दबाव डालती है।
- मांसपेशियों में खिंचाव: जब पीठ की मांसपेशियों में खिंचाव होता है और तंत्रिका पर दबाव डालता है।

*मेडिसिन ट्रीटमेंट:*

सायटिका बीमारी के इलाज के लिए कई दवाएं उपयोग की जा सकती हैं, जिनमें से कुछ प्रमुख दवाएं हैं:

- दर्द निवारक दवाएं: जैसे कि एसिटामिनोफेन या इबुप्रोफेन, जो दर्द और सूजन को कम करने में मदद करती हैं।

*फिजियोथैरेपी ट्रीटमेंट:*

फिजियोथैरेपी सायटिका बीमारी के इलाज में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। फिजियोथैरेपिस्ट आपको निम्नलिखित तकनीकों के माध्यम से मदद कर सकता है:

- व्यायाम: जो पीठ की मांसपेशियों को मजबूत बनाने और लचीलेपन में सुधार करने में मदद करते हैं।
- मैनुअल थेरेपी: जो पीठ की मांसपेशियों को आराम देने और दर्द को कम करने में मदद करती है।
- हीट या कोल्ड थेरेपी: जो दर्द और सूजन को कम करने में मदद करती है।

यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि सायटिका बीमारी के इलाज के लिए एक अनुभवी डॉक्टर या फिजियोथैरेपिस्ट से परामर्श करना आवश्यक है। वे आपको व्यक्तिगत सलाह और उपचार प्रदान कर सकते हैं जो आपकी विशिष्ट आवश्यकताओं के अनुसार होगा।

सर्वाइकल स्पॉन्डिलाइटिस एक सामान्य स्थिति है जो गर्दन की हड्डियों, डिस्क और जोड़ों में घिसाव के कारण होती है। यह समस्या ...
28/12/2025

सर्वाइकल स्पॉन्डिलाइटिस एक सामान्य स्थिति है जो गर्दन की हड्डियों, डिस्क और जोड़ों में घिसाव के कारण होती है। यह समस्या उम्र बढ़ने के साथ बढ़ती है और आपकी गलत जीवनशैली इसे और गंभीर बना सकती है। इसके लक्षणों में गर्दन, कंधे, और हाथों में दर्द और जकड़न शामिल हैं।

*कारण:*

- उम्र बढ़ना
- गलत जीवनशैली
- शारीरिक गतिविधियों की कमी
- मोटापा
- अस्वस्थ खान-पान
- धूम्रपान

*लक्षण:*

- गर्दन में दर्द और जकड़न
- कंधों और हाथों में दर्द या सुन्नता
- मांसपेशियों की कमजोरी
- संतुलन और समन्वय की समस्या

*उपचार:*

1. *दवाएं:* दर्द और सूजन को कम करने के लिए डॉक्टर द्वारा निर्धारित दवाएं।
2. *फिजियोथेरेपी:* गर्दन की मांसपेशियों को मजबूत और लचीला बनाने के लिए व्यायाम।
3. *जीवनशैली में बदलाव:* सही आहार, व्यायाम, और अच्छी नींद लेना।
4. *स्पाइनल डीकंप्रेशन उपचार:* एक नॉन-सर्जिकल तकनीक जो रीढ़ पर दबाव कम करके दर्द से राहत दिलाने में मदद करती है।
5. *सर्जरी:* गंभीर मामलों में जब नॉन-सर्जिकल उपचार काम नहीं करता है।

*फिजियोथैरेपी उपचार:*

- मांसपेशियों को मजबूत करने वाले व्यायाम
- स्ट्रेचिंग और मसाज
- लवचिकता और गती की श्रेणी बढ़ाने के लिए व्यायाम

*रोकथाम:*

- सही पोश्चर बनाए रखना
- नियमित व्यायाम करना
- धूम्रपान टालना
- तनाव कम करना

डॉ महेश प्रताप (PT)
MPT (neuro)

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