श्री राम शरणम्

श्री राम शरणम् Shri Ram Sharnam stands as an emblem of supreme devotion to Shri Ram and Selfless service of humanity in the war : ravaged historical city of Panipat.

The grace and dignity of its congregation halls and its atmosphere suffused with piety and devotion attract devotees in large numbers. With ceutres spread all over India and abroad, Shri Ram Sharnam Panipat has the honour of being the only prayer hall inaugurated by Swami Satya Nandji himself in 1960, who described it as divinely inspired. swamiji's great disciple Maa Shakuntala Devi and Maa Darsh

i Devi, the present head of Shri Ram Sharnam have worked with great commitment and devotion to develop it into a singular place for the mental, moral and spiritual advancement of its innumerable devotees. Features of Amritvani Satsang

THE MAIN FACETS ARE

• Sri Amritvani Sankirtan
• Recitation of ‘Sri Bhakti Prakash’ and ‘Srimad Bhagwat Gita’
• Recitation of ‘Sri Valmiki Ramayana - The Gist’
• Musical chanting and choric singing of Hymns and Bhajans of representative Saint - Poets.
• DHAYANA (Meditation)
• Organization of Sadhna Satsangs
• AKHAND RAM NAAM RECITAL and Sadhana
• Naam Deeksha (Initiation of the Sadhak through bestowal of Guru-Mantra – Ram-Mantra). THE MAIN FEATURES OF THE SATSANG
PUNCTUALITY

• The Satsang starts and concludes strictly on the given time. DISCIPLINE


AIM OF AMRITVANI

Vridhi Aastik Bhaav Ki, Shubh Mangal Snchaar
Abheu Udai Sad Dharam Ka, Ram Nam Vistaar

Enhancing one’s faith in the existance of God, disseminating Divine Blessings for the well being of all, exposing the wisdom of Sanatan Dharma, and spreading the glory of "Ram Naam".

26/12/2018
तू कितनी अच्छी है ।तू कितनी प्यारी है ।ओ माँ ओ माँ ।।                                                   मातृ दिवस, के पा...
13/05/2018

तू कितनी अच्छी है ।
तू कितनी प्यारी है ।
ओ माँ ओ माँ ।। मातृ दिवस, के पावन पर्व के अवसर पर परम पूजनीय माँ को कोटि कोटि नमन ।।
HAPPY MOTHER'S DAY

30/09/2017
*"दिल" कहता है, कि बहुत "नजदीक" से "दर्शन" करूँ "आपका",,,,,!"पर क्या करूँ",,,,,???*ये "आँखे" "आपके" "करीब" आने से "पहले"...
20/09/2017

*"दिल" कहता है, कि बहुत "नजदीक" से "दर्शन" करूँ "आपका",,,,,!
"पर क्या करूँ",,,,,???
*ये "आँखे" "आपके" "करीब" आने से "पहले" ही "भीग" जाती है,,,,,! "
🌲🙏"सतगुरु"🙏🌲

((((  सब्र का इम्तिहान  ))))एक अमीर ईन्सान था उसने समुद्र मे अकेले घूमने के लिए एक नाव बनवाई। छुट्टी के दिन वह नाव लेकर ...
19/08/2017

(((( सब्र का इम्तिहान ))))
एक अमीर ईन्सान था उसने समुद्र मे अकेले घूमने के लिए एक नाव बनवाई। छुट्टी के दिन वह नाव लेकर समुद्र की सैर करने निकला।
अभी वह आधे समुद्र तक पहुंचा ही था कि अचानक एक जोरदार तुफान आया। और उस तूफ़ान में उसकी नाव पुरी तरह से तहस-नहस हो गई लेकिन वह लाईफ जैकेट की मदद से समुद्र मे कूद गया।
जब तूफान शांत हुआ तब वह तैरता-तैरता एक टापू पर पहुंचा लेकिन वहाँ भी कोई नही था।
टापू के चारो और समुद्र के अलावा कुछ भी नजर नही आ रहा था टापू पूरी तरह से वीरान था|
उस आदमी ने सोचा कि जब मैंने पूरी जिदंगी मे किसी का कभी भी बुरा नही किया तो मेरे साथ ऐसा क्यूँ हुआ ?
उस ईन्सान को लगा कि अगर प्रभू ने मौत से बचाया तो आगे का रास्ता भी प्रभू ही बताएगा।
धीरे-धीरे वह वहाँ पर उगे फल-फूल-पत्ते खाकर दिन बिताने लगा। परन्तु जैसे जैसे दिन बीतने लगे अब धीरे-धीरे उसकी आस टूटने लगी, प्रभू पर से उसका भरोसा उठने लगा।
फिर उसने सोचा कि अब पूरी जिंदगी यही इस टापू पर ही बितानी है तो क्यूँ ना एक झोपडी बना लूँ ?
फिर उसने झाड की डालियो और पत्तो से एक सुन्दर छोटी सी झोपडी बनाई। उसने मन ही मन कहा कि आज से झोपडी मेँ सोने को मिलेगा आज से बाहर नही सोना पडेगा।
रात हुई ही थी कि अचानक मौसम बदला बिजलियाँ जोर जोर से कड़कने लगी|
तभी अचानक एक बिजली उस झोपडी पर आ गिरी और झोपडी धधकते हुए जलने लगी।
यह देखकर वह ईन्सान टूट गया। आसमान की तरफ देखकर बोला हे प्रभू ये तेरा कैसा इंसाफ है ?
तूने मुझ पर अपनी कृपा की दृष्टि क्यूँ नहीं की ?

फिर वह ईन्सान हताश होकर सर पर हाथ रखकर रो रहा था तभी अचानक एक नाव टापू के पास आई।
नाव से उतरकर दो आदमी बाहर आये और बोले कि हम तुम्हे बचाने आये हैं।
दूर से इस वीरान टापू मे जलता हुआ झोपड़ा देखा तो लगा कि कोई उस टापू पर मुसीबत मे है।
अगर तुम अपनी झोपड़ी नही जलाते तो हमे पता ही नही चलता कि टापू पर कोई है।
उस आदमी की आँखो से आँसू गिरने लगे। उसने प्रभू से क्षमा माँगी और बोला कि “हे प्रभू मुझे क्या पता कि तूने मुझे बचाने के लिए मेरी झोपडी जलाई थी।
यक़ीनन तू अपने भक्तौ का हमेशा ध्यान रखता है। तूने मेरे सब्र का इम्तिहान लिया लेकिन मैं उसमे फैल हो गया। मुझे क्षमा करना।
दिन चाहे सुख के हों या दुख के, प्रभू अपने भक्तौ के साथ हमेशा रहता

*राम के फरिश्ते*    ---------------------------एक छोटा सा बोर्ड रेहड़ी की छत से लटक रहा था,उस पर मोटे मारकर से लिखा हुआ थ...
12/08/2017

*राम के फरिश्ते*
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एक छोटा सा बोर्ड रेहड़ी की छत से लटक रहा था,उस पर मोटे मारकर से लिखा हुआ था.....!!
*"घर मे कोई नही है,मेरी बूढ़ी माँ बीमार है,मुझे थोड़ी थोड़ी देर में उन्हें खाना,दवा और टायलट कराने के लिए घर जाना पड़ता है,अगर आपको जल्दी है तो अपनी मर्ज़ी से फल तौल ले और पैसे कोने पर गत्ते के नीचे रख दें,साथ ही रेट भी लिखे हुये हैं"*
और अगर आपके पास पैसे नही हो तो मेरी तरफ से ले लेना,इजाजत है..!!
मैंने इधर उधर देखा,पास पड़े तराजू में दो किलो सेब तोले,दर्जन भर केले लिए,बैग में डाले,प्राइज लिस्ट से कीमत देखी,पैसे निकाल कर गत्ते को उठाया वहाँ सौ पच्चास और दस दस के नोट पड़े थे,मैंने भी पैसे उसमे रख कर उसे ढक दिया।बैग उठाया और अपने फ्लैट पे आ गया,रात को खाना खाने.के.बाद मैं और भाई उधर निकले तो देखा एक कमज़ोर सा आदमी,दाढ़ी आधी काली आधी सफेद,मैले से कुर्ते पजामे में रेहड़ी को धक्का लगा कर बस जाने ही वाला था ,वो हमें देख कर मुस्कुराया और बोला "साहब! फल तो खत्म हो गए
नाम पूछा तो बोला सीताराम ..
फिर हम सामने वाले ढाबे पर बैठ गए...
चाय आयी,कहने लगा "पिछले तीन साल से मेरी माता बिस्तर पर हैं,कुछ पागल सी भी हो गईं है,और अब तो फ़ालिज भी हो गया है,मेरी कोई संतान नही है,बीवी मर गयी है,सिर्फ मैं हूँ और मेरी माँ.! माँ की देखभाल करने वाला कोई नही है इसलिए मुझे हर वक़्त माँ का ख्याल रखना पड़ता है"
एक दिन मैंने माँ का पाँव दबाते हुए बड़ी नरमी से कहा, *माँ ! तेरी सेवा करने को तो बड़ा जी चाहता है। पर जेब खाली है और तू मुझे कमरे से बाहर निकलने नही देती,कहती है तू जाता है तो जी घबराने लगता है,तू ही बता मै क्या करूँ?"*
अब क्या गले से खाना उतरेगा? न "मेरे पास.कोई जमा पूंजी है
ये सुन कर माँ ने हाँफते काँपते उठने की कोशिश की,मैंने तकिये की टेक लगवाई,उन्होंने झुर्रियों वाला चेहरा उठाया अपने कमज़ोर हाथों को ऊपर उठाया मन ही मन राम जी की स्तुति की फिर बोली...
*"तू रेहड़ी वहीं छोड़ आया कर हमारी किस्मत हमे इसी कमरे में बैठ कर मिलेगा"*
"मैंने कहा माँ क्या बात करती हो,वहाँ छोड़ आऊँगा तो कोई चोर उचक्का सब कुछ ले जायेगा, आजकल कौन लिहाज़ करता है? और बिना मालिक के कौन खरीदने आएगा?"
कहने लगीं "तू राम का नाम लेने के बाद बाद रेहड़ी को फलों से भरकर छोड़ कर आजा बस,ज्यादा बक बक नही कर,शाम को खाली रेहड़ी ले आया कर, अगर तेरा रुपया गया तो मुझे बोलियो"
*ढाई साल हो गए है भाई! सुबह रेहड़ी लगा आता हूँ शाम को ले जाता हूँ,लोग पैसे रख जाते है फल ले जाते हैं,एक धेला भी ऊपर नीचे नही होता,* बल्कि कुछ तो ज्यादा भी रख जाते है,कभी कोई माँ के लिए फूल रख जाता है,कभी कोई और चीज़! परसों एक बच्ची पुलाव बना कर रख गयी साथ मे एक पर्ची भी थी "अम्मा के लिए"
एक डॉक्टर अपना कार्ड छोड़ गए पीछे लिखा था माँ की तबियत नाज़ुक हो तो मुझे काल कर लेना मैं आजाऊँगा,कोई खजूर रख जाता है , रोजाना कुछ न कुछ मेरे हक के साथ मौजूद होता है।
*न माँ हिलने देती है न मेरे राम कुछ कमी रहने देता है माँ कहती है तेरा फल मेरा राम अपने फरिश्तों से बिकवा देता है।*

आखिर में इतना ही कहूँगा की अपने *मां बाप की खिदमत करो ,और देखो दुनिया की कामयाबियाँ कैसे हमारे कदम चूमती है ।*

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Panipat
132103

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