17/07/2020
आयुर्वेदिक चिकित्सा में, गिलोय को तीन अमृत पौधों में से एक माना जाता है, इसीलिए संस्कृत में इसे "अमृतवल्ली" नाम दिया गया है।
गिलोय आयुर्वेदिक साहित्य में अच्छी तरह से प्रलेखित है। वैज्ञानिक अध्ययन इस औषधीय जड़ी-बूटी के लाभकारी गुणों का मूल्यांकन और पुष्टि भी करते हैं, जैसे
इम्यूनोमॉड्यूलेटरी (रोग प्रतिकारक क्षमता बदलने वाला),
हेपेटोप्रोटेक्टिव (यकृती का रक्षण करनेवाला),
कार्डियोप्रोटेक्टिव, (हृदय का रक्षण करनेवाला )
एंटीइंफ्लेमेटरी (सूजन-संबंधी रोगों को कम करनेवाला)
एनाल्जेसिक प्रभाव (दर्द दूर करनेवाला)
कायाकल्प करने वाला और
एक रोग प्रतिरक्षा क्षमता बढ़ाने वाले के रूप में गिलोय के आयुर्वेदिक गुणों की पुष्टि करता है।
In Ayurvedic medicine, Giloy is considered to be one of the three Amrit plants, that’s why in Sanskrit it named as “Amritavalli”.
Giloy is well- documented in Ayurvedic literature. Scientific studies also evaluate and confirm the insight beneficial properties of this medicinal herb like Immunomodulatory, Hepatoprotective, Cardioprotective, Antiinflammatory, Analgesic effect, confirms the ayurvedic view of Guduchi as a Rasayana (rejuvenator) and an immunity booster.
आयुर्वेद - यही इस महामारी के समय की पुकार है। इसीलिए रुद्र सनातन आयुर्वेद आपके लिए उत्तराखंड की पावन भूमि से लाए हैं अलौकिक शक्तियों वाली आयुर्वेदिक औषधियाँ।
वेदराज रत्नम श्री श्री 108 स्वामी हुकुम दास निर्मनी के अथक प्रयत्नों से जो कार्य सन 1965 में प्रारम्भ हुआ, उसे आप तक पहुंचाने का दायित्व हमनें उठाया है।
सिर्फ आयुर्वेद ही हमें इस महामारी से उबार सकता है। सबकुछ आपकी रोग प्रतिरोधक क्षमता पर निर्भर करता है कि आप इस विषाणु से कितने प्रभावित हो सकते हैं।
इसीलिये आप सभी से नम्र निवेदन है कि किसी भी प्रमाणित आयुर्वेदाश्रम द्वारा निर्मित औषधियों का सेवन निरंतर रूप से आवश्य करें।
हमें मिलकर स्वस्थ और निरोगी भारत बनाना है।
जय महाकाल। जय श्री राम। जय बद्री विशाल।