Health Tips and Ayurvedic Treatment Patiala

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29/05/2026

एक पौधे में दांत दर्द, पायरिया, मुंह के छाले और घाव ठीक करने के अद्भुत औषधीय गुण हैं. दातून और काढ़ा बनाकर इसका उपयोग बेहद लाभदायक है........

सोचिए क्या होगा यदि किसी टूथपेस्ट से भी शानदार चीज आपको प्रकृति से मिल जाए...... एक ऐसा पौधा भी पाया जाता है जिसके उपयोग के बारे में कम ही लोग जानते हैं...... इस पौधे की दातून कऱने से गंदे दांत भी साफ़ हो जाते हैं. साथ ही दांत दर्द, पायरिया, मूंह के छाले और घाव भी ठीक हो जाते हैं......

अपामार्ग को चिरचिटा, लटजीरा या चिचड़ा भी बोलते हैं।
चिरचिटा (अपामार्ग) के पत्तों के कई फायदे हैं, जिनमें मुंह के छालों से राहत, दांतों के स्वास्थ्य में सुधार और खांसी व श्वसन संबंधी समस्याओं में आराम मिलना शामिल है। इसके पत्तों का लेप लगाने से घाव भरने में मदद मिलती है और त्वचा संक्रमण से बचाव होता है।

मौखिक स्वास्थ्य के लिए
मुंह के छाले: चिरचिटा के पत्तों को चबाने से मुंह के छालों में आराम मिलता है।
मसूड़ों की समस्या: यह मसूड़ों से खून आने, मसूड़ों से बदबू आने और दांतों की संवेदनशीलता को कम करने में मदद करता है....

दांतों की चमक: इसके पत्तों का उपयोग दांतों की प्राकृतिक चमक वापस लाने में किया जा सकता है.....

खांसी और श्वसन के लिए
कफ और खांसी: चिरचिटा के पत्तों को हुक्के में रखकर पीने से बलगम वाली खांसी ठीक होती है।

त्वचा और अन्य लाभ
घाव भरना: चिरचिटा में रोगाणुरोधी और सूजनरोधी गुण होते हैं, जिससे यह घावों, कटने और त्वचा के संक्रमण के इलाज में उपयोगी होता है। इसके पत्तों का लेप घावों को भरने में मदद करता है.....

सूजन:
आयुर्वेद में इसे एक सूजनरोधी एजेंट के रूप में इस्तेमाल किया जाता है.

29/05/2026

🌞 *नौतपा (25 मई - 2 जून): साल के 9 सबसे गर्म दिनों में क्या खाएं, क्या न खाएं?* 🌞
*(आयुर्वेदिक श्लोक प्रमाण सहित)*

❌ *नौतपा में क्या न खाएं और क्यों?*

*1. बैंगन*
> *श्लोक: "वातलं कटुकं पाके तिक्तं उष्णं गुरु च तत्... वार्ताकं त्यजेत्" - चरक संहिता*
* *अर्थ:* बैंगन गरम तासीर, भारी और वात बढ़ाने वाला है।
* ⁠*क्यों न खाएं:* नौतपा में जब शरीर पहले से ही 45°C पर तप रहा है, तब बैंगन ऊपर से आग लगाने का काम करता है।
* ⁠*हानि:* पेट में जलन, गैस, छाले और स्किन पर लाल दाने हो सकते हैं। आयुर्वेद के अनुसार यह इस मौसम में खून में गर्मी बढ़ा देता है।

*2. दही*
> *श्लोक: "ग्रीष्मे शरदि चाद्यात् दधि नो" - अष्टांग हृदयम्*
* *अर्थ:* नौतपा (ग्रीष्म) और पतझड़ में दही न खाएं।
* ⁠*क्यों न खाएं:* लोग समझते हैं दही ठंडी है, लेकिन असल में यह भारी और गरम तासीर की होती है। इस समय पाचन अग्नि सबसे कमजोर होती है।
* ⁠*हानि:* गले में बलगम, खराश, और जोड़ों का दर्द बढ़ सकता है। रात में खाने से सर्दी-जुकाम की समस्या और लूज मोशन हो सकते हैं।

*3. लहसुन*
> *श्लोक: "लशुनः कटुको उष्णश्च तीक्ष्णो... पित्तप्रकृतये न हितः" - चरक संहिता*
* *अर्थ:* लहसुन तीखा, गरम और पित्त बढ़ाने वाला है।
* *क्यों न खाएं:* शरीर का पित्त गर्मी में वैसे ही बढ़ा हुआ है। लहसुन आग में घी डालने का काम करेगा।
* ⁠*हानि:* सिरदर्द, आँखें लाल होना, मुँह में छाले और उल्टी जैसी समस्याएं हो सकती हैं। लू का असर सीधा दिमाग पर पड़ सकता है।

*4. तेज मिर्च-मसाला + तला-भुना*
> *श्लोक: "तिक्तं कषायं कटुकं विदाहि चाम्लं च वर्जयेत्" - अष्टांग हृदय 3/26*
* *अर्थ:* गर्मी में कड़वा, कसैला, तीखा, खट्टा और जलन करने वाला खाना छोड़ दें।
* *क्यों न खाएं:* बाहर 45°C तापमान और अंदर मिर्च की भट्टी, शरीर यह सह नहीं पाएगा।
* ⁠*हानि:* सीने में एसिड जैसी जलन, खट्टी डकार, और दस्त। पानी की कमी से चक्कर आना जिसे अक्सर "लू लगना" कहा जाता है।

*5. फ्रिज का बर्फ वाला पानी + आइसक्रीम*
* *शास्त्र नियम:* अति ठंडा पानी पीने से पाचन अग्नि बुझ जाती है।
* *क्यों न खाएं:* तपती धूप से आकर एकदम चिल्ड पानी पीने से शरीर को शॉक लगता है।
* *हानि:* गला बैठना, टॉन्सिल सूजना, और पेट की गर्मी एकदम दबने से खाने का वहीं सड़ जाना। पेट में मरोड़ शुरू हो सकती है।

*6. दिन में सोना*
> *श्लोक: "दिवास्वप्नं न कुर्वीत ग्रीष्मे... ज्वरं चैव प्रवर्धयेत्" - अष्टांग हृदय 3/55*
* *अर्थ:* गर्मी में दिन में सोना बीमारियों को बुलावा देना है।
* ⁠*हानि:* शरीर में कफ गाढ़ा-चिपचिपा होता है, बुखार, सिर भारी, पूरा दिन आलस और मोटापा बढ़ता है।

✅ *नौतपा में अमृत समान क्या खाएं?*
> *श्लोक: "सक्तून् शीतान् सशर्करान्... जलं शीतलं बहु"*
* *अर्थ:* सत्तू, शक्कर, मीठे-ठंडे-हल्के पदार्थ और खूब सारा ठंडा पानी पिएं।
* ⁠*क्या खाएं/पिएं:* सत्तू का घोल, बेल का शरबत, नारियल पानी, तरबूज, खरबूज, खीरा, ककड़ी, लौकी, तोरई, छाछ, लस्सी और गुलकंद।
* *फायदा:* शरीर 24 घंटे ठंडा रहेगा, लू छू भी नहीं पाएगी, पानी की कमी पूरी होगी, चेहरे पर चमक आएगी और एनर्जी फुल रहेगी।

💡 *नौतपा का निचोड़ (सार श्लोक):*
> *"ग्रीष्मे तु अत्युष्णतीक्ष्णाम्ललवणान् कटुकानि च। व्यायाममातपं चैव व्यवायं च विवर्जयेत्।।"*

* *अर्थ:* गर्मी में अति गरम, तीखा, खट्टा, नमकीन, तेज धूप और ज्यादा मेहनत से बचें।
*खुद भी स्वस्थ रहें और अपने परिवार को भी स्वस्थ रखें! 🌿*

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