Shashwat Ayurvedic Pharmacy

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गर्मियों के मौसम (Grishma Ritu) में शरीर में पित्त दोष बढ़ जाता है, जिससे डिहाइड्रेशन, पेट की गर्मी, और कमजोरी जैसी समस्...
03/06/2026

गर्मियों के मौसम (Grishma Ritu) में शरीर में पित्त दोष बढ़ जाता है, जिससे डिहाइड्रेशन, पेट की गर्मी, और कमजोरी जैसी समस्याएं होने लगती हैं। आयुर्वेद के अनुसार इस मौसम में शरीर को ठंडा रखने और ऊर्जा बनाए रखने के लिए सही खान-पान बेहद जरूरी है।
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​शाश्वत आयुर्वेदिक फार्मेसी (झूंसी, प्रयागराज) की ओर से गर्मियों के लिए विशेष डाइट चार्ट और उपचार की जानकारी नीचे दी गई है:

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​1. गर्मी में क्या खाएं? (Pathya - What to Eat)
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​गर्मियों में ऐसी चीजों का सेवन करना चाहिए जिनकी तासीर ठंडी हो और जो शरीर में पानी की कमी को पूरा करें:

​तरल पदार्थ (Hydration): मटका का पानी, ताजा नारियल पानी, मिश्री और सौंफ का शर्बत, पुदीने का रस, और जौ का सत्तू।

​फल और सब्जियां: तरबूज, खरबूजा, खीरा, ककड़ी, लौकी, तोरई, कद्दू, और परवल। ये पचाने में आसान होते हैं और शरीर को अंदर से ठंडा रखते हैं।

​डेयरी उत्पाद: ताजी छाछ (मट्ठा) जिसमें भुना जीरा और पुदीना मिला हो, मीठी लस्सी, और गाय का घी।

​अनाज: पुराना चावल, जौ (Barley), और गेहूं।

​2. गर्मी में क्या न खाएं? (Apathya - What to Avoid)
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​इन चीजों के सेवन से शरीर में गर्मी और एसिडिटी बढ़ती है, इसलिए इनसे परहेज करें:

​ज्यादा तीखा और मसालेदार भोजन: लाल मिर्च, गरम मसाला, और अत्यधिक लहसुन-अदरक का सेवन कम करें।

​तली-भुनी और भारी चीजें: समोसे, पकौड़े, फास्ट फूड और ज्यादा तेल वाला खाना पचाने में मुश्किल होता है।

​खट्टी और नमकीन चीजें: अत्यधिक अचार, सिरका, और फर्मेंटेड फूड (जैसे डोसा, इडली) पित्त को बढ़ाते हैं।

​चाय, कॉफी और अल्कोहल: ये शरीर को डिहाइड्रेट करते हैं।

कोल्ड ड्रिंक्स और अत्यधिक बर्फ वाले पानी से भी बचें, क्योंकि ये पाचन अग्नि (Digestive Fire) को धीमा कर देते हैं।

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​शाश्वत आयुर्वेदिक फार्मेसी में उपलब्ध उपचार व निवारण
​गर्मी के मौसम में होने वाले विकारों (जैसे- लू लगना, पेट की गर्मी, हाथ-पैरों में जलन, और कमजोरी) के लिए हमारी फार्मेसी पर निम्नलिखित आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियां और औषधियां परामर्श के अनुसार उपलब्ध हैं:

​कूलिंग हर्ब्स (शीतलता के लिए): शुद्ध आवंला चूर्ण, शतावरी, और चंदन आदि जो शरीर की आंतरिक गर्मी को शांत करते हैं।

​पाचन और पित्त शामक: अविपत्तीकर चूर्ण, कामदुधा रस, और प्रवाल पिष्टी (एसिडिटी और सीने की जलन के लिए)।

​मस्तिष्क और शरीर को शांति देने के लिए: शंखपुष्पी और ब्राह्मी युक्त योग, जो गर्मी के कारण होने वाले सिरदर्द और चिड़चिड़ेपन को दूर करते हैं।

​ताकत और इम्युनिटी के लिए: गर्मियों के लिए विशेष रूप से उपयुक्त धातु-पोषक और बल्य औषधियां।

​ग्रीष्म ऋतु आहार: तरबूज, खरबूजा, मट्ठा और आंवला का सेवन करें। अत्यधिक मसालेदार, गहरे तले हुए और अम्लीय भोजन से बचें।

​शीतल पेय: नारियल पानी, शिकंजी और खस का शर्बत।

​दैनिक दिनचर्या: ब्रह्म मुहूर्त में जागना, ठंडे तेलों से मालिश और शीतली/सीत्कारी प्राणायाम।

​लाभ: पित्त दोष का संतुलन, त्वचा का स्वास्थ्य और मानसिक शांति।

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​📍 संपर्क और पता (Contact & Address)
​फार्मेसी का नाम: शाश्वत आयुर्वेदिक फार्मेसी
​पता: झूंसी, प्रयागराज (UP)
​मोबाइल नंबर: +91 8707602842

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​गर्मियों में किसी भी औषधि का सेवन करने से पहले या अपनी प्रकृति के अनुसार कस्टमाइज्ड डाइट प्लान के लिए आप हमारी फार्मेसी पर संपर्क कर सकते हैं।

02/06/2026

शाश्वत आयुर्वेदिक फार्मेसी (झूंसी, प्रयागराज)
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​गर्मियों के विशेष आयुर्वेदिक पेय पदार्थ और शर्बत
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​भीषण गर्मी और लू से बचने के लिए आयुर्वेद में ठंडी तासीर (शीत वीर्य) वाले पेयों का उल्लेख है। शाश्वत आयुर्वेदिक फार्मेसी में उपलब्ध प्रमुख उपयोगी जूस, शर्बत और उनके सेवन का सही तरीका नीचे दिया गया है:

​1. प्रमुख आयुर्वेदिक शर्बत और जूस (Health Drinks & Syrups)

पेय पदार्थ का नाम मुख्य लाभ सेवन की मात्रा कब और कैसे पिएं?

खस का शर्बत (Khus Syrup) *

शरीर को तुरंत ठंडक देता है।

* अत्यधिक प्यास और जलन को शांत करता है। 20–30 ml (2 बड़े चम्मच) कब: दोपहर के समय।

कैसे: एक गिलास ठंडे पानी (मटके का पानी) में मिलाकर।

चंदन का शर्बत (Chandan Syrup) * दिल और दिमाग को शांत रखता है।

* गर्मी के कारण होने वाले सिरदर्द में आराम देता है। 15–20 ml कब: सुबह या दोपहर धूप से आने के बाद।

कैसे: पानी या ठंडे दूध के साथ।

गुलाब का शर्बत / गुलकंद शेक * पेट की गर्मी और एसिडिटी दूर करता है।

* त्वचा में निखार लाता है। 20 ml कब: सुबह खाली पेट या शाम को।

कैसे: पानी या ठंडे दूध के साथ मिलाकर।

बेल का जूस / शर्बत (Bel Fruit) * लू (Heat Stroke) से बचाता है।

* पाचन तंत्र को मजबूत करता है, दस्त-पेचिश में अमृत है।

1 गिलास (ताजा) या 30 ml सिरप कब: दोपहर के भोजन से आधा घंटा पहले।

कैसे: हल्के भुने जीरे और काले नमक के साथ।

आँवला जूस (Amla Juice) * विटामिन-C से भरपूर, इम्यूनिटी बढ़ाता है।

* गर्मी में चक्कर आना और आंखों की जलन कम करता है।

15–20 ml कब: सुबह खाली पेट।

कैसे: बराबर मात्रा में गुनगुने या सामान्य पानी के साथ।

ब्राह्मी-शंखपुष्पी शर्बत * गर्मी में बच्चों और बड़ों की एकाग्रता बढ़ाता है।

* मानसिक थकान दूर करता है।

10–15 ml कब: सुबह या रात को सोते समय।

कैसे: ठंडे दूध या पानी के साथ।

2. घर पर तैयार होने वाले पारंपरिक आयुर्वेदिक पेय (Home Remedies)
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​आम पन्ना (Raw Mango Drink):

यह लू की अचूक दवा है। उबले कच्चे आम के गूदे में पुदीना, जीरा और काला नमक मिलाकर दोपहर में पिएं।

​पुदीना-नींबू शिकंजी:

शरीर में इलेक्ट्रोलाइट्स का संतुलन बनाए रखती है। दोपहर में 1-2 गिलास पीना फायदेमंद है।

​जौ का सत्तू (Sattu Drink):

सत्तू की तासीर बहुत ठंडी होती है। इसे पानी, भुने जीरे और नमक (या गुड़) के साथ मिलाकर पीने से दिनभर एनर्जी रहती है और भूख नियंत्रित रहती है।

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​⚠️ सामान्य सावधानियां (Important Tips)

​फ्रिज के अत्यधिक ठंडे पानी से बचें:

शर्बत या जूस में हमेशा मटके (घड़े) के पानी का उपयोग करें। बहुत ठंडा पानी पाचन अग्नि को मंद कर देता है।

​डायबिटीज के मरीज:

चीनी युक्त शर्बत के बजाय आंवला जूस, एलोवेरा जूस या बिना चीनी का बेल का पन्ना लें।

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​संपर्क एवं पता (Contact Us)

​ये सभी प्रीमियम क्वालिटी के आयुर्वेदिक शर्बत और जूस आपकी अपनी फार्मेसी पर उपलब्ध हैं:

​पता: शाश्वत आयुर्वेदिक फार्मेसी, झूंसी, प्रयागराज (उत्तर प्रदेश)

​मोबाइल नंबर: 📞 8707602842

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​नोट: अपनी शारीरिक प्रकृति (वात, पित्त, कफ) के अनुसार सही पेय चुनने के लिए आप फार्मेसी पर आकर उचित परामर्श भी ले सकते हैं।
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नमस्ते! शाश्वत आयुर्वेदिक फार्मेसी (झूंसी, प्रयागराज) में आपका स्वागत है।■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■​आज हम बात करेंगे ...
01/06/2026

नमस्ते! शाश्वत आयुर्वेदिक फार्मेसी (झूंसी, प्रयागराज) में आपका स्वागत है।
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​आज हम बात करेंगे बॉडी डिटॉक्सिफिकेशन (शरीर का शुद्धिकरण या शोधन) के बारे में।
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आयुर्वेद में इसे "काया कल्प" या "पंचकर्म" के मूल सिद्धांत के रूप में देखा जाता है। किसी भी बीमारी के इलाज, दवा या योग का पूरा असर तभी होता है, जब हमारा शरीर अंदर से पूरी तरह साफ हो।

​नीचे विस्तार से जानिए कि डिटॉक्स क्या है, इसके फायदे क्या हैं,

खान-पान कैसा होना चाहिए और इसे कब-कब करना चाहिए।
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​1. दवा या योग से पहले बॉडी डिटॉक्स क्यों जरूरी है?
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​जब किसी बर्तन में पहले से ही गंदा पानी भरा हो, तो उसमें कितना भी साफ या कीमती पानी डाल लें, वह भी खराब हो जाएगा।

ठीक इसी तरह:

​दवाइयों का असर दोगुना:

अगर शरीर की नस-नस (स्रोतों) में टॉक्सिंस (आयुर्वेद में इसे 'आम दोष' कहते हैं) जमे हैं, तो अच्छी से अच्छी आयुर्वेदिक दवा या भस्म भी पूरी तरह असर नहीं कर पाती। डिटॉक्स के बाद दवाएं सीधे अंगों तक पहुँचती हैं।

​योग का अधिकतम लाभ:

जब शरीर हल्का और शुद्ध होता है, तो प्राणायाम से मिलने वाली ऑक्सीजन और योग से मिलने वाली ऊर्जा शरीर में आसानी से प्रवाहित होती है।

​2. बॉडी डिटॉक्स करने के फायदे (स्टैमिना और पावर बूस्ट)
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​जब शरीर से हानिकारक तत्व बाहर निकल जाते हैं, तो आपको ये बदलाव महसूस होते हैं:

​अद्भुत स्टैमिना और एनर्जी:

टॉक्सिंस हटने से आपके सेल्स (कोशिकाएं) बेहतर तरीके से काम करते हैं, जिससे सुस्ती गायब होती है और Stamina & Energy रॉकेट की तरह बूस्ट होती है।

​मजबूत पाचन तंत्र (Digestive Fire):

पेट की ब्लोटिंग, गैस, और कब्ज जैसी समस्याएं जड़ से खत्म होती हैं। भूख अच्छी लगती है और खाया-पिया शरीर को लगता है।

​दमकती त्वचा (Glowing Skin):

खून साफ होने से चेहरे के मुंहासे, दाग-धब्बे दूर होते हैं और प्राकृतिक निखार आता है।

​बेहतर इम्यूनिटी (Immunity Boost):

शरीर की बीमारियों से लड़ने की ताकत कई गुना बढ़ जाती है।

​3. घर पर आसानी से डिटॉक्स कैसे करें? (आयुर्वेदिक तरीके)
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​उष्णोदक (गुनगुना पानी):

दिनभर में थोड़ा-थोड़ा गुनगुना पानी पिएं। यह शरीर के कचरे को पिघलाकर बाहर निकालता है।

​डिटॉक्स वॉटर/काढ़ा:

सुबह खाली पेट आंवला और एलोवेरा का रस, या फिर त्रिफला का पानी लें। यह आंतों की सफाई (Colon Cleanse) के लिए सबसे बेस्ट है।

​हर्बल टी:

चाय-कॉफ़ी की जगह जीरा, धनिया और सौंफ को पानी में उबालकर बनाई गई हर्बल चाय पिएं।

​4. डिटॉक्स के दौरान और बाद में कैसा हो खान-पान?
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​डिटॉक्स का मतलब भूखे रहना नहीं, बल्कि सही खाना है:

क्या खाएं (पथ्य)

मूंग दाल की पतली खिचड़ी (घी और जीरे के तड़के के साथ)

ताजे फल (पपीता, सेब, अनार) और उबली सब्जियां

छाछ (मट्ठा) में भुना जीरा और काला नमक डालकर

क्या न खाएं (अपथ्य)

मैदा, समोसे, पिज्जा, या तली-भुनी चीजें

डिब्बाबंद जूस, कोल्ड ड्रिंक्स और ज्यादा मीठी चीजें

भारी और बासी भोजन (ज्यादा नॉन-वेज या पनीर से बचें)

5. कितने दिनों पर डिटॉक्स करते रहना चाहिए?
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​साप्ताहिक (Weekly):

हफ्ते में कम से कम 1 दिन हल्का भोजन (जैसे सिर्फ खिचड़ी या फल) खाकर शरीर को आराम दें।

​मासिक (Monthly):

महीने में 3 दिन का कड़ा डिटॉक्स रूटीन अपनाएं, जिसमें सिर्फ जूस, सूप और त्रिफला का सेवन करें।

​ऋतु परिवर्तन (Seasonal डिटॉक्स):

आयुर्वेद के अनुसार, जब मौसम बदलता है (विशेषकर शरद ऋतु और बसंत ऋतु में), तब शरीर में दोष सबसे ज्यादा बढ़ते हैं। साल में इन दो मोर्चों पर 7 से 10 दिन का गहरा डिटॉक्स जरूर करना चाहिए।

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​विशेष संदेश:

यदि आप किसी पुरानी बीमारी से जूझ रहे हैं या किसी विशेष दवा का सही और सटीक असर चाहते हैं, तो एक बार अपने शरीर की प्रकृति के अनुसार सही डिटॉक्स प्लान जरूर तैयार करवाएं।
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​शाश्वत आयुर्वेदिक फार्मेसी
📍 पता: झूंसी, प्रयागराज (उत्तर प्रदेश)
📞 संपर्क नंबर: 8707602842

आज के समय में लोगों की लंबाई (Height) पहले के मुकाबले कम क्यों दिखती है, यह एक बहुत ही महत्वपूर्ण और वैज्ञानिक विषय है। ...
31/05/2026

आज के समय में लोगों की लंबाई (Height) पहले के मुकाबले कम क्यों दिखती है, यह एक बहुत ही महत्वपूर्ण और वैज्ञानिक विषय है। इसके पीछे कई मुख्य कारण हैं, जिन्हें हम दो हिस्सों में समझ सकते हैं—पहला कि ऐसा क्यों हो रहा है, और दूसरा कि शाश्वत आयुर्वेदिक फार्मेसी (Shashwat Ayurvedic Pharmacy) इसमें किस तरह मदद कर सकती है।
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​लंबाई कम होने के मुख्य कारण

​आमतौर पर किसी भी व्यक्ति की लंबाई 80% उसके जेनेटिक्स (Genetics/अनुवांशिकी) पर और 20% उसके खान-पान, रहन-सहन और शारीरिक गतिविधियों पर निर्भर करती है। आज के समय में जो गिरावट दिखती है, उसके पीछे ये मुख्य कारण हैं:

​पोषक तत्वों की कमी (Poor Nutrition):

आजकल के भोजन में फास्ट फूड, प्रोसेस्ड फूड और केमिकल वाले अनाज की मात्रा बढ़ गई है। शरीर को जो जरूरी विटामिन्स (विशेषकर Vitamin D3) और मिनरल्स (जैसे Calcium, Zinc) मिलने चाहिए, वे नहीं मिल पाते।

​शारीरिक निष्क्रियता (Lack of Physical Activity):

पहले के लोग दौड़-धूप, खेल-कूद और शारीरिक मेहनत ज्यादा करते थे। आज मोबाइल, लैपटॉप और स्क्रीन टाइम बढ़ने की वजह से बच्चे और युवा शारीरिक रूप से कम सक्रिय हैं, जिससे ग्रोथ हार्मोन्स (Human Growth Hormone - HGH) का स्राव कम होता है।

​अधूरी नींद और तनाव (Poor Sleep & Stress):

हमारी लंबाई बढ़ाने वाले ग्रोथ हार्मोन्स रात को गहरी नींद के दौरान सबसे ज्यादा एक्टिव होते हैं। देर रात तक जागने और पढ़ाई या करियर के तनाव के कारण यह प्रक्रिया प्रभावित होती है।

​समय से पहले प्यूबर्टी (Early Puberty):

खान-पान में मिलावट और लाइफस्टाइल के कारण आजकल बच्चों में वयस्कों जैसे शारीरिक बदलाव (Puberty) समय से पहले आ जाते हैं। एक बार जब हड्डियों के ग्रोथ प्लेट्स (Epiphyseal Plates) आपस में जुड़ जाते हैं, तो लंबाई बढ़ना रुक जाता है।

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​शाश्वत आयुर्वेदिक फार्मेसी में इसका उपचार और समाधान
​आयुर्वेद में शरीर के संपूर्ण विकास (Dhatu Poshan) पर काम किया जाता है। यदि व्यक्ति की उम्र 18 से 21 वर्ष से कम है (जब तक हड्डियों की ग्रोथ प्लेट्स खुली होती हैं), तो आयुर्वेद के जरिए एक अच्छी-खासी लंबाई पाने में बेहतरीन मदद मिल सकती है।
​शाश्वत आयुर्वेदिक फार्मेसी में इसके लिए निम्नलिखित वैज्ञानिक और पारंपरिक तरीकों से उपचार किया जाता है:

​1. प्रमुख आयुर्वेदिक औषधियां (Herbal Remedies)
​अश्वगंधा (Ashwagandha):
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यह शरीर में ह्यूमन ग्रोथ हार्मोन (HGH) को प्राकृतिक रूप से बढ़ावा देने में सबसे कारगर जड़ी-बूटी है। यह हड्डियों और मांसपेशियों को मजबूती देती है।

​शतावरी और सफेद मूसली:

ये जड़ी-बूटियां शरीर के ऊतकों (Tissues) को पोषण देती हैं और मेटाबॉलिज्म को दुरुस्त करती हैं, जिससे खाया-पिया शरीर को लगता है।

​प्रवाल पिष्टी और शंख भस्म:

यह प्राकृतिक कैल्शियम के बेहतरीन स्रोत हैं, जो हड्डियों के घनत्व (Bone Density) और उनकी लंबाई को बढ़ाने में मदद करते हैं।

​2. खान-पान और पोषण (Dietary Support)
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​फार्मेसी द्वारा सही डाइट चार्ट की सलाह दी जाती है, जिसमें दूध, देसी घी, हरी पत्तेदार सब्जियां, और अंकुरित अनाज शामिल होते हैं, ताकि जेनेटिक्स के प्रभाव को सही पोषण से बेहतर किया जा सके।

​3. योग और एक्सरसाइज गाइडेंस
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​औषधियों के साथ-साथ ताड़ासन, भुजंगासन, और स्ट्रेचिंग एक्सरसाइज की सलाह दी जाती है, जो रीढ़ की हड्डी को लचीला बनाकर लंबाई बढ़ाने में मदद करती हैं।

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​संपर्क करें (Contact Information)

​यदि आप अपनी या अपने बच्चों की लंबाई को लेकर सही परामर्श और शुद्ध आयुर्वेदिक औषधियां चाहते हैं, तो सीधे संपर्क कर सकते हैं:
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​फार्मेसी का नाम: शाश्वत आयुर्वेदिक फार्मेसी (Shashwat Ayurvedic Pharmacy)

​पता: झुंसी, प्रयागराज (Jhusi, Prayagraj, Uttar Pradesh)

​मोबाइल नंबर: 8707602842
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​नोट: लंबाई बढ़ने की एक निश्चित उम्र सीमा होती है, इसलिए जितनी जल्दी (कम उम्र में) इसका सही उपचार और खान-पान शुरू किया जाए, परिणाम उतने ही बेहतर और संतोषजनक मिलते हैं।
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30/05/2026

Aankhon ki roshni kam hone ke piche aaj kal ki modern lifestyle, galat khan-pan aur sahi care na karna sabse bade karan hain. Bachpan se lekar badepon tak, chashma lagne aur roshni kam hone ke kai thosh karan hain.
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​Shashwat Ayurvedic Pharmacy (Jhusi, Prayagraj) ke anusar yahan iska pura ayurvedic vishleshan, karan aur upchar diye gaye hain:

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हाँ, आपने बिल्कुल सही पकड़ा है! फ्रिज का अत्यधिक और गलत उपयोग भी आँखों की रोशनी कम होने का एक बहुत बड़ा और छुपा हुआ कारण है।
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​आयुर्वेद के अनुसार, हमारे शरीर में 'जठराग्नि' (Digestion Power) होती है, जो खाने को पचाती है और उससे मिलने वाले पोषक तत्वों को आँखों और शरीर के बाकी अंगों तक पहुँचाती है।

जब हम फ्रिज का एकदम ठंडा पानी, ठंडी कोल्ड-ड्रिंक, आइसक्रीम या फ्रिज में रखा बासी खाना बार-बार खाते हैं, तो यह जठराग्नि मंद (कमजोर) हो जाती है। जब पेट ठीक नहीं रहेगा, तो आँखों की नसों को पूरा पोषण नहीं मिलेगा, जिससे दृष्टि कमजोर होने लगती है और चश्मा चढ़ जाता है।

​यहाँ आपकी पूरी बात का उत्तर सरल और शुद्ध हिंदी में दिया गया है:

​1. आँखों की रोशनी कम होने और चश्मा लगने के मुख्य कारण
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​बच्चों में कोल्ड-ड्रिंक्स, आइसक्रीम और फ्रिज का पानी: आजकल के बच्चे बचपन से ही फ्रिज में रखी ठंडी चीजें ज्यादा खाते हैं।

अत्यधिक ठंडी और मीठी चीजें शरीर में कफ दोष को बढ़ाती हैं और पाचन तंत्र को बिगाड़ती हैं। इससे आँखों के टिश्यूज (Tissues) को जरूरी विटामिंस नहीं मिल पाते।

​बड़ों में स्क्रीन का ज्यादा इस्तेमाल (Screening):
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दिनभर मोबाइल, लैपटॉप या टीवी देखने से निकलने वाली ब्लू लाइट आँखों को अंदर से सुखा देती है। इससे वात दोष बढ़ता है, आँखों की मांसपेशियां कमजोर होती हैं और धुंधलापन आने लगता है।

​कम रोशनी और गलत पोस्चर: अंधेरे में या लेटे-लेटे मोबाइल चलाना या पढ़ना आँखों की नसों पर बहुत ज्यादा दबाव डालता है।

​पोषक तत्वों की कमी:
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भोजन में हरी सब्जियां, फल और शुद्ध घी की कमी होना।

​2. खान-पान: क्या खाएं और किससे बचें?
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​❌ इन चीजों से बिल्कुल बचें (परहेज):

​फ्रिज का ठंडा पानी और बर्फ: इसकी जगह मटके (घड़े) के पानी का उपयोग करें।

​बासी भोजन: फ्रिज में रखकर बार-बार गर्म किया हुआ खाना खाने से उसके पोषक तत्व नष्ट हो जाते हैं और वह आँखों के लिए नुकसानदेह होता है।

​मैदा और फास्ट फूड: चाउमीन, पिज्जा, बर्गर और ज्यादा तला-भुना खाना, जिससे पेट में कब्ज (Constipation) होती है।

कब्ज सीधे आँखों पर असर डालती है।

​ज्यादा नमक और चीनी:
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अत्यधिक मात्रा में नमक या चीनी का सेवन आँखों की रोशनी को घटाता है।

​इन चीजों को अपनी डाइट में शामिल करें:
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​आँवला:

यह आँखों के लिए अमृत है। आप रोज सुबह आँवले का रस, मुरब्बा या चूर्ण ले सकते हैं।

​हरी पत्तेदार सब्जियां:

पालक, मेथी, बथुआ और चौराई की सब्जी (विटामिन-A और आयरन से भरपूर)।

​गाजर और चुकंदर:

इनका जूस या सलाद आँखों की रोशनी बढ़ाने में सबसे बेहतरीन है।

​भीगे हुए बादाम और अखरोट:

सुबह खाली पेट 4-5 भीगे हुए बादाम चबाकर खाएं।

​शुद्ध गाय का घी:

आयुर्वेद में गाय के घी को 'चक्षुष्य' (आँखों के लिए सबसे उत्तम) माना गया है।

​3. शाश्वत आयुर्वेदिक फार्मेसी में इसके उपचार
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​आयुर्वेद में आँखों की रोशनी को वापस ठीक करने और चश्मा हटाने के लिए बहुत ही असरदार औषधियां और थैरेपी उपलब्ध हैं:

​त्रिफला घृत और त्रिफला चूर्ण:

रात में एक चम्मच त्रिफला चूर्ण को पानी में भिगो दें। सुबह उस पानी को पतले कपड़े से अच्छी तरह छानकर उससे आँखों को धोएं (नेत्र प्रक्षालन)। यह चश्मा हटाने में बहुत मदद करता है।

​सप्तामृत लौह:

यह एक प्रसिद्ध आयुर्वेदिक दवा है, जिसे सौंफ, बादाम और मिश्री के पाउडर के साथ लेने से आँखों की नसें बेहद मजबूत होती हैं।

​अनु तैल / बादाम रोगन (नस्य कर्म):

रात को सोते समय नाक में 2-2 बूंद बादाम तेल या अनु तैल डालने से सिर और आँखों की कमजोरी दूर होती है।

​महात्रिफला घृत:

इसका नियमित और सही मात्रा में सेवन करने से आँखों का सूखापन खत्म होता है और दृष्टि तेज होती है।

​4. योग और कुछ आसान उपाय
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​त्राटक क्रिया:

एक दीपक या मोमबत्ती की लौ को बिना पलक झपकाए एकटक देखना। इससे आँखों की रोशनी और एकाग्रता (Concentration) दोनों बढ़ती हैं।

​अनुलोम-विलोम प्राणायाम:

रोजाना 10-15 मिनट करने से आँखों की नस-नाड़ियों में रक्त संचार सही होता है।

​20-20-20 का नियम:

मोबाइल या लैपटॉप चलाते समय हर 20 मिनट बाद, 20 सेकंड के लिए, कम से कम 20 फीट दूर किसी वस्तु को देखें और पलकें झपकाएं।

​सुबह की ओस:

सुबह-सुबह हरी घास पर नंगे पैर चलना आँखों के लिए बहुत ही ज्यादा फायदेमंद है।

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​🏥 संपर्क केंद्र (शाश्वत आयुर्वेदिक फार्मेसी):

​बच्चों या बड़ों के चश्मे के नंबर और समस्या के अनुसार सही दवा और उसकी खुराक (Dosage) की पूरी जानकारी के लिए आप सीधे फार्मेसी पर संपर्क कर सकते हैं:

​पता (Address): झुंसी, प्रयागराज, उत्तर प्रदेश
​संपर्क नंबर (Contact): +91 8707602842

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29/05/2026

रीढ़ की हड्डी (Spine) से जुड़ी समस्याएं आजकल ऑफिस में लगातार बैठने वाले लोगों में बहुत आम हो चुकी हैं। आपकी सुविधा के लिए इसकी पूरी जानकारी, बैठने का सही तरीका और शाश्वत आयुर्वेदिक फार्मेसी (Shashwat Ayurvedic Pharmacy) में इसके उपचार की पूरी प्रक्रिया नीचे विस्तार से दी गई है:
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​1. रीढ़ की हड्डी से होने वाले मुख्य रोग
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​लगातार गलत तरीके से बैठने या झुककर काम करने से रीढ़ की हड्डी में ये समस्याएं हो सकती हैं:

​स्लिप डिस्क (Slip Disc / Sciatica): रीढ़ की गद्दियों (Discs) का अपनी जगह से खिसक जाना, जिससे पैरों में तेज दर्द और सुन्नपन आता है।

​सर्वाइकल स्पॉन्डिलाइटिस (Cervical Spondylitis): गर्दन और कंधे की हड्डियों का घिसना या जकड़न।

​लम्बर स्पॉन्डिलाोसिस (Lumbar Spondylosis): पीठ के निचले हिस्से (कमर) में लगातार तेज दर्द रहना।

​पोस्चरल बैकपेन (Postural Back Pain): मांसपेशियों में खिंचाव के कारण होने वाला सामान्य दर्द।

​2. क्या ऑफिस के काम की वजह से यह प्रॉब्लम होती है?
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​हाँ, बिल्कुल। कंप्यूटर के सामने लगातार 7-8 घंटे बिना ब्रेक लिए बैठना, झुककर लैपटॉप चलाना, या आरामदायक कुर्सी न होना रीढ़ की हड्डी पर अतिरिक्त दबाव डालता है। इससे रीढ़ की प्राकृतिक बनावट (S-Shape) बिगड़ने लगती है और दर्द शुरू हो जाता है।

​3. बैठने का सही तरीका (जिससे कोई दिक्कत न हो)
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​ऑफिस में काम करते समय इन नियमों का पालन करें:
​90-90-90 का नियम: बैठते समय आपकी पीठ सीधी होनी चाहिए। आपकी कोहनी, कूल्हे (Hips) और घुटने तीनों 90 डिग्री के कोण पर होने चाहिए।

​स्क्रीन की ऊंचाई: आपके लैपटॉप या कंप्यूटर की स्क्रीन आपकी आंखों के बिल्कुल सामने (Eye Level) होनी चाहिए, ताकि गर्दन न झुकानी पड़े।

​कमर को सपोर्ट: कुर्सी पर बैठते समय पीठ के निचले हिस्से (Lower Back) के पीछे एक छोटा तकिया या 'लम्बर सपोर्ट रोल' जरूर लगाएं।

​पैर जमीन पर रखें: पैरों को क्रॉस करके (एक के ऊपर एक रखकर) न बैठें। दोनों पैर जमीन पर सीधे होने चाहिए।

​20-20 का ब्रेक: हर 45 मिनट से 1 घंटे के काम के बाद अपनी सीट से उठें, 2 मिनट के लिए टहलें और शरीर को थोड़ा स्ट्रेच करें।

​4. शाश्वत आयुर्वेदिक फार्मेसी में उपचार और नियम
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​शाश्वत आयुर्वेदिक फार्मेसी में रीढ़ की हड्डी के विकारों का इलाज वात दोष को संतुलित करके और हड्डियों को मजबूती देकर किया जाता है।

​उपचार कैसे काम करता है?
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​वात शमन (Balancing Vata): आयुर्वेद के अनुसार रीढ़ और जोड़ों का दर्द 'वात दोष' के बढ़ने से होता है। हमारी औषधियां बढ़े हुए वात को शांत करती हैं जिससे दर्द और सूजन में तुरंत आराम मिलता है।

​पोषण और मजबूती (Nourishment): ऐसी जड़ी-बूटियों का उपयोग किया जाता है जो रीढ़ की गद्दियों (Discs) और नसों को अंदरूनी ताकत देती हैं, जिससे बीमारी दोबारा नहीं लौटती।

​मुख्य औषधियां और उपचार:
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​गूगल कल्प और रस औषधियां: जैसे त्रयोदशांग गुग्गुल, महायोगराज गुग्गुल या एकांगवीर रस (लक्षणों के आधार पर), जो नसों की सूजन को कम करते हैं।

​हर्बल तेल (External Oils): महानारायण तेल, प्रसारिणी तेल या धनवंतराम तेल से मालिश, जो जकड़न को दूर करती है।

​पंचकर्म परामर्श: गंभीर स्थिति में कटी बस्ती (पीठ पर तेल रोकने की प्रक्रिया) और पत्र पोटली स्वेद की सलाह दी जाती है।

​इलाज के नियम (परहेज):
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​ठंडी चीजों से परहेज: फ्रिज का पानी, छाछ, दही और बासी भोजन का सेवन पूरी तरह बंद करना होता है क्योंकि ये वात बढ़ाते हैं।

​गर्म पानी का सेवन: पीने के लिए हमेशा गुनगुने पानी का इस्तेमाल करें।

​हल्का व्यायाम: दर्द कम होने पर रीढ़ को मजबूत करने वाले हल्के आसन (जैसे भुजंगासन या मर्कटासन) नियमित रूप से करने होते हैं।

​संपर्क एवं पता
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​यदि आप इस समस्या से परेशान हैं, तो उचित परामर्श और शुद्ध आयुर्वेदिक दवाओं के लिए सीधे संपर्क कर सकते हैं:

​पता: झूंसी, प्रयागराज (Jhusi, Prayagraj)
​मोबाइल नंबर: 8707602842
​प्रतिष्ठान: शाश्वत आयुर्वेदिक फार्मेसी

28/05/2026

आयुर्वेद के अनुसार दर्द (Pain) के प्रकार, कारण और उपचार
​आयुर्वेद में दर्द को 'शूल' या 'वेदना' कहा जाता है। सबसे जरूरी बात यह है कि आयुर्वेद के अनुसार बिना वात दोष (Vata Dosha) के शरीर में कहीं भी दर्द नहीं हो सकता। जब शरीर में वात असंतुलित होता है, तभी दर्द पैदा होता है।
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​1. दर्द कितने प्रकार के होते हैं? (Types of Pain)

​दोषों के असंतुलन के आधार पर दर्द मुख्य रूप से तीन प्रकार के होते हैं:

​वातज शूल (Vata-induced Pain):

यह दर्द तीखा, सुई चुभने जैसा या अचानक घटने-बढ़ने वाला होता है। शरीर के जोड़ों का दर्द (Joint Pain), पीठ दर्द या नसों का खिंचाव इसी में आता है।

​पित्तज शूल (Pitta-induced Pain):

इस दर्द में जलन, गर्मी और सूजन महसूस होती है। जैसे पेट में जलन के साथ दर्द या माइग्रेन का सिरदर्द।

​कफज शूल (Kapha-induced Pain):

यह दर्द हल्का लेकिन लगातार बना रहता है। इसमें भारीपन और जकड़न महसूस होती है।

​2. दर्द क्यों और कैसे होता है? (Causes & Mechanism)

​गलत खान-पान:

बहुत ज्यादा ठंडा, बासी, सूखा, तीखा या गैस बनाने वाला भोजन करने से वात बिगड़ता है।

​लाइफस्टाइल:

देर रात तक जागना, शारीरिक क्षमता से ज्यादा काम करना, या बिल्कुल एक्टिविटी न करना।

​कब्ज (Constipation):

पेट साफ न होने से शरीर में 'आम' (टॉक्सिन्स) बनते हैं, जो जोड़ों और नसों में जाकर दर्द पैदा करते हैं।

​मौसम का बदलाव:

3. बचाव और खान-पान (Prevention & Diet)

क्या खाएं (Pathya)
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* गुनगुना पानी और ताजा, गर्म भोजन।

* खाने में देसी घी, तिल का तेल और अदरक, लहसुन, मेथी, अजवाइन का प्रयोग।

* बथुआ, लौकी, तोरई और सहजन (Drumstick) की सब्जियां।

क्या न खाएं (Apathya)
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* बासी भोजन, फास्ट फूड और ठंडी चीजें।

* वात बढ़ाने वाली चीजें जैसे- उड़द की दाल, गोभी, अरबी और ठंडी छाछ/दही।

* फ्रिज का ठंडा पानी और आइसक्रीम।

4. योग और प्राणायाम (Yoga & Pranayama)

​नियमित रूप से 15-20 मिनट अभ्यास करने से नसों का ब्लॉकेज खुलता है और दर्द में आराम मिलता है:

​प्राणायाम:

अनुलोम-विलोम (नसों को शांत करने के लिए) और कपालभाति (पाचन सुधारने के लिए)।

​आसन:

पवनमुक्तासन (गैस और पीठ दर्द के लिए), मार्जरी आसन (कमर दर्द के लिए), और हल्के सूक्ष्म व्यायाम (जोड़ों के लिए)।

​5. शाश्वत आयुर्वेदिक फार्मेसी पर उपलब्ध उपचार (Treatment & Remedies)

​दर्द से पूरी तरह राहत पाने के लिए आप हमारे यहाँ से शुद्ध और प्रामाणिक आयुर्वेदिक औषधियां प्राप्त कर सकते हैं:

​पंचकर्म और बाह्य उपचार:

दर्द वाले हिस्से पर महानारायण तेल या विषगर्भ तेल से हल्की मालिश (अभ्यंग) करने के बाद गर्म सिंकाई (स्वेदन) करने से वात तुरंत शांत होता है।

​प्रमुख औषधियां:

लक्षणों के आधार पर सिंहनाद गुग्गुल, त्रयोदशांग गुग्गुल, महारास्नादि काढ़ा और अश्वगंधा चूर्ण जैसी जड़ी-बूटियों का सही कॉम्बिनेशन दिया जाता है, जो दर्द को जड़ से ठीक करने में मदद करता है।

​🏥 शाश्वत आयुर्वेदिक फार्मेसी (Shashwat Ayurvedic Pharmacy)

​पता (Address): झुंसी, प्रयागराज (Jhusi, Prayagraj)

​संपर्क सूत्र (Contact No): 📞 8707602842

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​किसी भी औषधि के सेवन या विशेष जानकारी के लिए आप दिए गए नंबर पर संपर्क कर सकते हैं या सीधे फार्मेसी पर आ सकते हैं।
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लिवर फेलियर (Liver Failure) क्या है और कैसे होता है?■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■​लिवर (यकृत) हमारे शरीर का एक बेहद महत्...
27/05/2026

लिवर फेलियर (Liver Failure) क्या है और कैसे होता है?
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​लिवर (यकृत) हमारे शरीर का एक बेहद महत्वपूर्ण अंग है जो भोजन पचाने, शरीर से जहरीले पदार्थों (toxins) को बाहर निकालने और पोषक तत्वों को स्टोर करने का काम करता है।

​लिवर फेलियर तब होता है जब लिवर का एक बहुत बड़ा हिस्सा इस कदर क्षतिग्रस्त (damage) हो जाता है कि वह अपना काम करने में पूरी तरह असमर्थ हो जाता है। यह दो प्रकार का होता है:

​एक्यूट लिवर फेलियर (Acute Liver Failure):
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यह अचानक कुछ ही दिनों या हफ्तों में तेजी से होता है (जैसे किसी गलत दवा के रिएक्शन या अचानक हुए भारी इन्फेक्शन के कारण)।

​क्रोनिक लिवर फेलियर (Chronic Liver Failure):
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यह सबसे आम है। इसमें लिवर कई सालों में धीरे-धीरे खराब होता है (जैसे फैटी लिवर या सिरोसिस के कारण)।

​लिवर फेलियर क्यों होता है? (मुख्य कारण)
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​गलत खान-पान और मोटापा:

ज्यादा तला-भुना, जंक फूड और मीठा खाने से लिवर पर चर्बी जमा हो जाती है, जिसे फैटी लिवर (Fatty Liver) कहते हैं। आगे चलकर यह लिवर को गंभीर नुकसान पहुंचाता है।

​शराब का अत्यधिक सेवन:

लंबे समय तक शराब पीने से लिवर की कोशिकाएं (cells) नष्ट होने लगती हैं।

​हेपेटाइटिस इन्फेक्शन:

हेपेटाइटिस B और C जैसे वायरस लिवर को अंदर से पूरी तरह खराब कर देते हैं।

​दवाइयों का ओवरडोज:

बिना डॉक्टर की सलाह के दर्द निवारक (pain killers) या भारी एलोपैथिक दवाइयों का लगातार सेवन करना।

​शाश्वत आयुर्वेदिक फार्मेसी (Shashwat Ayurvedic Pharmacy) में इसका उपचार
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​आयुर्वेद में लिवर को यकृत कहा गया है, जो शरीर में पित्त दोष का मुख्य स्थान है। शाश्वत आयुर्वेदिक फार्मेसी में लिवर की समस्याओं को जड़ से ठीक करने और लिवर की कार्यक्षमता को बढ़ाने के लिए शुद्ध और प्रभावी जड़ी-बूटियां उपलब्ध हैं:

​भूमिआमलकी (भूईं आंवला):

यह लिवर की कोशिकाओं को दोबारा ठीक करने (regenerate) और लिवर को हर तरह के इन्फेक्शन से बचाने की सर्वश्रेष्ठ औषधि है।

​पुनर्नवा:

यह लिवर और शरीर की सूजन (swelling) को कम करता है और हानिकारक तत्वों को बाहर निकालता है।

​कटुकी:

यह लिवर के एंजाइम्स (SGOT/SGPT) को संतुलित करती है और पित्त के प्रवाह को ठीक रखती है।

​कालमेघ और शरपुंखा:

ये लिवर को प्राकृतिक रूप से डिटॉक्सिफाई (साफ) करते हैं और उसकी कमजोरी को दूर करते हैं।

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​नोट:

हर व्यक्ति की शारीरिक प्रकृति अलग होती है, इसलिए बीमारी के चरण के अनुसार सही औषधि और खुराक (dose) की जानकारी के लिए आप हमारी फार्मेसी पर आकर परामर्श ले सकते हैं।
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​लिवर को कैसे बचाएं? (खान-पान और परहेज)
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​लिवर को स्वस्थ रखने और उसे दोबारा मजबूत बनाने के लिए अपनी जीवनशैली में यह बदलाव करें:

​1. क्या खाएं? (पथ्य)

​हरी और हल्की सब्जियां:

लौकी, टिंडा, परवल, करेला और तोरई का सेवन अधिक करें।

​फल:

पपीता, सेब, चीकू और अनार लिवर के स्वास्थ्य के लिए बहुत फायदेमंद हैं।

​सलाद:

मूली और गाजर का सेवन करें, ये लिवर के टॉक्सिन्स को नेचुरल तरीके से साफ करते हैं।

​पानी:

दिनभर में कम से कम 3-4 लीटर साफ या गुनगुना पानी पिएं ताकि गंदगी बाहर निकल सके।

​2. किन चीजों से परहेज करें? (अपथ्य)

​मैदा, फास्ट फूड, पिज्जा, बर्गर और ज्यादा मिर्च-मसाले वाले भोजन से पूरी तरह दूर रहें।

​पैक्ड जूस, कोल्ड ड्रिंक्स और बहुत ज्यादा मीठी चीजों का सेवन न करें।

​शराब (Alcohol) और धूम्रपान का सेवन बिल्कुल बंद कर दें।

​लिवर के लिए योग और प्राणायाम
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​रोजाना सुबह 20-30 मिनट योग करने से लिवर में रक्त का संचार बेहतर होता है और वह सुचारू रूप से काम करता है:

​कपालभाति प्राणायाम:

यह लिवर की सभी समस्याओं के लिए सबसे रामबाण प्राणायाम है। यह लिवर की कोशिकाओं को सक्रिय करता है।

​अनुलोम-विलोम:

यह शरीर में ऑक्सीजन का स्तर बढ़ाता है और तनाव को कम करता है, जिससे अंगों की कार्यक्षमता बढ़ती है।

​मंडूकासन:

यह पेट के अंगों और लिवर पर हल्का दबाव बनाकर उन्हें एक्टिव और स्वस्थ रखता है।

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​हमारा पता और संपर्क सूत्र (Address & Contact)
​यदि आप फैटी लिवर, पीलिया (Jaundice), लिवर में सूजन या लिवर की कमजोरी जैसी किसी भी समस्या से परेशान हैं, तो उचित परामर्श और शुद्ध आयुर्वेदिक दवाओं के लिए हमसे संपर्क करें:

​पता: शाश्वत आयुर्वेदिक फार्मेसी, झुंसी, प्रयागराज, उत्तर प्रदेश।
​मोबाइल नंबर: 8707602842
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26/05/2026

शरीर में जब भी कोई बीमारी पनपती है, तो हमारा शरीर छोटे-छोटे संकेतों (Symptoms/लक्षणों) के जरिए हमें सावधान करता है। आयुर्वेद में इन संकेतों को 'पूर्वरूप' या 'लक्षण' कहा जाता है। इन्हें सही समय पर पहचान कर बीमारी को बढ़ने से रोका जा सकता है।

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​यहाँ कुछ आम शारीरिक संकेत, उनसे होने वाले संभावित रोग, और शाश्वत आयुर्वेदिक फार्मेसी (झूंसी, प्रयागराज) में उनके निवारण, खान-पान व उपचार की पूरी जानकारी दी गई है:

​1. पेट से जुड़े संकेत (गैस, कब्ज, भारीपन)

​संकेत: पेट में हमेशा गैस बनना, सुबह पेट साफ न होना, खट्टी डकारें आना या खाने के बाद पेट फूलना।

​संभावित रोग: अपच (Dyspepsia), पुरानी कब्ज (Constipation), या फैटी लीवर की शुरुआत।

​निवारण और खान-पान:

​मैदा, जंक फूड, और ज्यादा तेल-मसाले से दूर रहें।
​भोजन में फाइबर (सलाद, हरी सब्जियाँ) बढ़ाएं। ताजे छाछ (मट्ठा) में भुना जीरा डालकर पिएं।

​रात को तांबे के बर्तन में रखा पानी सुबह खाली पेट पिएं।
​शाश्वत आयुर्वेदिक उपचार: हमारे यहाँ इसके लिए त्रिफला चूर्ण, अविपत्तीकर चूर्ण, और लीवर की ताकत के लिए विशेष लीवर टॉनिक/सिरप उपलब्ध हैं, जो पाचन तंत्र को जड़ से ठीक करते हैं।

​2. जोड़ों और मांसपेशियों का दर्द

​संकेत: सुबह उठते ही जोड़ों में जकड़न होना, घुटनों या कमर में लगातार दर्द, या चलने-फिरने में कट-कट की आवाज आना।

​संभावित रोग: आमवात (Rheumatoid Arthritis), संधिवात (Osteoarthritis), या यूरिक एसिड का बढ़ना।

​निवारण और खान-पान:

​बासी भोजन, ठंडी चीजें (आइसक्रीम, ठंडा पानी) और उड़द की दाल, अरबी जैसी वात बढ़ाने वाली चीजों से परहेज करें।

​भोजन में लहसुन, अदरक और मेथी दाने का प्रयोग बढ़ाएं।

​शाश्वत आयुर्वेदिक उपचार: जोड़ों के दर्द के लिए हमारे पास महायोगराज गुग्गुल, पीड़ाहर तेल (Pen relief oil), और वात नाशक विशेष औषधियां उपलब्ध हैं जो सूजन और दर्द को प्राकृतिक रूप से कम करती हैं।

​3. हर समय थकान और कमजोरी लगना

​संकेत: भरपूर सोने के बाद भी शरीर में ऊर्जा की कमी महसूस होना, थोड़ा सा काम करने पर हांफ जाना, या चक्कर आना।

​संभावित रोग: एनीमिया (खून की कमी), कमजोरी, या अत्यधिक मानसिक तनाव।

​निवारण और खान-पान:

​अनार, चुकंदर, पालक, खजूर और मौसमी फलों का सेवन करें।
​चाय-कॉफी का सेवन कम करें और उसकी जगह दूध या ताजे जूस को शामिल करें।

​शाश्वत आयुर्वेदिक उपचार: शरीर की इम्युनिटी और ताकत बढ़ाने के लिए हमारे यहाँ शुद्ध अश्वगंधा चूर्ण/अवलेह, लोहासव (खून बढ़ाने के लिए), और ताकत देने वाले विशेष टॉनिक तैयार मिलते हैं।

​4. बालों का झड़ना और समय से पहले सफेद होना
​संकेत:

कंघी करते समय बहुत ज्यादा बाल टूटना, स्कैल्प (सिर की त्वचा) में रूखापन या डैंड्रफ होना।

​संभावित रोग: शरीर में पित्त दोष का बढ़ना, पोषक तत्वों की कमी, या थायराइड असंतुलन।

​निवारण और खान-पान:

​ज्यादा तीखा, नमकीन और खट्टा खाना बंद करें।

​आंवला, एलोवेरा जूस और हरी पत्तेदार सब्जियों का सेवन नियमित करें।

​शाश्वत आयुर्वेदिक उपचार: बालों की जड़ों को मजबूत करने के लिए हमारे यहाँ विशेष जड़ी-बूटियों से निर्मित भृंगराज तेल, आंवला रसायन, और बालों के लिए खास आयुर्वेदिक हेयर किट उपलब्ध है।

​शाश्वत आयुर्वेदिक फार्मेसी क्यों चुनें?

​हमारा सिद्धांत: आयुर्वेद केवल बीमारी को दबाता नहीं है, बल्कि वात, पित्त और कफ के असंतुलन को ठीक करके उसे जड़ से खत्म करता है। हमारी सभी दवाएं शुद्ध जड़ी-बूटियों से और पूरी शुद्धता के साथ तैयार की जाती हैं।

​अगर आपको या आपके परिवार में किसी को भी शरीर में कोई ऐसा संकेत या परेशानी दिख रही है, तो आप सीधे हमसे संपर्क कर सकते हैं या फार्मेसी पर आ सकते हैं।

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​हमारा पता: झूंसी, प्रयागराज (उत्तर प्रदेश)
​संपर्क नंबर: 📱 8707602842
​आप ऊपर दिए गए नंबर पर कॉल या व्हाट्सएप करके भी अपनी समस्या के अनुसार सही दवा और परामर्श की जानकारी ले सकते हैं।

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