05/07/2026
सुस्त अचल होत रहा तन |
व्यस्त विचल सतत ही है मन |
तन की अनगिनत रोज, व्याधि कथाएं |
मनमे भी अनचाही , दर्द व्यथाएं |
सब मर्ज एक योग ,तनके विकार हटाये |
और मन के सारे, विचार घटाये |
कसरत करे भले ही तनको तंदुरुस्त |
मात्र योग करे, तन मन को चुस्त |
सांस की धारा ही है योग का साधन |
न लगे यंत्र ,न कोई प्रसाधन |
एकाग्र करे मन,धारणा और ध्यान |
दिव्य दृष्टि जगाये,उभरे आत्मभान |
है योग ही कला, निरामय जीवन की धरा |
प्राचीन भारत की स्वस्थ परंपरा |
आओ सभी तन मन आत्म योग अपनाए |
योग साधना और स्वास्थ्य जीवनशैली बनाए |