01/04/2026
भारत में लिव-इन रिलेशनशिप (विवाह के बिना साथ रहना) कानूनी रूप से अपराध नहीं है और इसे अनुच्छेद 21 के तहत जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार के रूप में मान्यता प्राप्त है, बशर्ते दोनों बालिग हों। अदालतों के अनुसार, बिना तलाक लिए शादीशुदा व्यक्ति का लिव-इन में रहना अवैध हो सकता है, लेकिन आपसी सहमति से बालिगों का साथ रहना मान्य है।
भारत में लिव-इन रिलेशनशिप से जुड़े मुख्य कानूनी और सामाजिक तथ्य:कानूनी स्थिति: सर्वोच्च न्यायालय और विभिन्न उच्च न्यायालयों ने माना है कि लिव-इन रिलेशनशिप अनैतिक हो सकती है, लेकिन यह अवैध या गैरकानूनी नहीं है।
घरेलू हिंसा से सुरक्षा: 2005 के घरेलू हिंसा अधिनियम के तहत, लिव-इन में रहने वाली महिला को उसी तरह की कानूनी सुरक्षा प्राप्त है, जैसी एक विवाहित पत्नी को होती है।बच्चों के अधिकार: लिव-इन कपल से पैदा हुए बच्चों को माता-पिता की संपत्ति में उत्तराधिकार का अधिकार है, लेकिन हिंदू पैतृक संपत्ति पर उनका हक नहीं होता है।शादीशुदा लोगों का लिव-इन: इलाहाबाद हाई कोर्ट के हालिया फैसलों के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति तलाक लिए बिना दूसरी महिला/पुरुष के साथ लिव-इन में रहता है, तो उसे कानूनी सुरक्षा नहीं मिलेगी।
जनगणना 2027: आगामी जनगणना में, यदि कपल का रिश्ता 'स्टेबल' (स्थिर) है, तो उन्हें 'शादीशुदा' (Married) की श्रेणी में गिना जा सकता है, जो उनके स्वयं के घोषणापत्र पर आधारित होगा।पुलिस सुरक्षा: बालिग कपल अपनी मर्जी से साथ रह सकते हैं और परिवार द्वारा खतरा होने पर कोर्ट से सुरक्षा की मांग कर सकते हैं। इस वीडियो को अंत तक देख कर अपने मिलने वाले लोगों को शेयर करें।
भारत में लिव-इन रिलेशनशिप (विवाह के बिना साथ रहना) कानूनी रूप से अपराध नहीं है और इसे अनुच्छेद 21 के तहत जीवन और व्यक्.....