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31/08/2026

Did you know female and male fertility are equally vital for conception? Learn how holistic care can support your journey.

28/08/2026

क्रोनिक एडेनोमायोसिस (Chronic Adenomyosis)एक गर्भाशय (uterus) से जुड़ी बीमारी है, जिसमें गर्भाशय के अंदर की परत (endomet...
27/08/2026

क्रोनिक एडेनोमायोसिस (Chronic Adenomyosis)

एक गर्भाशय (uterus) से जुड़ी बीमारी है, जिसमें गर्भाशय के अंदर की परत (endometrium) गर्भाशय की बाहरी मांसपेशियों की दीवार (myometrium) के अंदर बढ़ने लगती है।यह कोई कैंसर (benign) नहीं है, लेकिन मासिक धर्म (periods) के दौरान यह परत सामान्य रूप से व्यवहार करती है—यानी यह मोटी होती है और खून बहता है। इसके कारण गर्भाशय की दीवारों में सूजन आ जाती है, वे मोटी हो जाती हैं और गर्भाशय का आकार बढ़ जाता है।

यह समस्या आमतौर पर पीरियड्स बंद होने (menopause) के बाद खुद ही ठीक हो जाती है क्योंकि शरीर में एस्ट्रोजन हार्मोन का स्तर कम हो जाता है।

🔎 मुख्य लक्षण (Symptoms)

कुछ महिलाओं में इसके कोई लक्षण नहीं दिखते, लेकिन क्रोनिक होने पर निम्नलिखित समस्याएं हो सकती हैं:

👉 पीरियड्स के दौरान अत्यधिक दर्द: पेट के निचले हिस्से और पीठ में बहुत तेज़ ऐंठन (cramps) होना।

👉 भारी ब्लीडिंग (Heavy Bleeding): पीरियड्स के दौरान बहुत ज़्यादा खून बहना या बड़े खून के थक्के (blood clots) निकलना।

👉 लगातार पेल्विक दर्द: पीरियड्स के अलावा भी पूरे महीने पेट के निचले हिस्से में भारीपन या हल्का दर्द महसूस होना।

👉 संबंध बनाते समय दर्द: शारीरिक संबंध बनाने के दौरान या बाद में गहरा दर्द होना।

👉 पेट का फूलना (Bloating): गर्भाशय का आकार बढ़ने के कारण पेट का निचला हिस्सा सूजा हुआ या फूला हुआ दिखाई देना।

🛠 जांच और इलाज (Diagnosis & Treatment)

जांच (Diagnosis)इसके लक्षण फाइब्रॉएड (fibroids) या एंडोमेट्रियोसिस (endometriosis) से मिलते-जुलते होते हैं, इसलिए सही जांच ज़रूरी है:

👉 पेल्विक अल्ट्रासाउंड (Transvaginal Ultrasound): इसके ज़रिए गर्भाशय की दीवारों की मोटाई देखी जाती है।

👉 एमआरआई (MRI): अगर अल्ट्रासाउंड से साफ न हो, तो गर्भाशय की परतों की सटीक स्थिति जानने के लिए पेल्विक एमआरआई किया जाता है।

इलाज के विकल्प (Treatment Options)

इसका इलाज इस बात पर निर्भर करता है कि आपके लक्षण कितने गंभीर हैं और क्या आप भविष्य में गर्भधारण (pregnancy) करना चाहती हैं।
बेहतर सलाह के लिए डॉक्टर से संपर्क करें।

Bulky Uterus अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट में Bulky Uterus (बल्की यूट्रस) लिखे होने का मतलब है कि बच्चेदानी का आकार सामान्य से ब...
26/08/2026

Bulky Uterus

अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट में Bulky Uterus (बल्की यूट्रस) लिखे होने का मतलब है कि बच्चेदानी का आकार सामान्य से बड़ा या भारी हो गया है। आम भाषा में लोग इसे 'बच्चेदानी में सूजन' भी कह देते हैं।
यह ध्यान रखना बहुत ज़रूरी है कि बल्की यूट्रस अपने आप में कोई बीमारी नहीं है, बल्कि यह एक शारीरिक लक्षण या मेडिकल फाइंडिंग (finding) है जो किसी अन्य अंदरूनी कारण की वजह से दिखती है।

1. Bulky Uterus होने के मुख्य कारण (Causes)

गर्भाशय का आकार कई वजहों से बढ़ सकता है:

👉 यूट्राइन फाइब्रॉइड्स (Uterine Fibroids): ये बच्चेदानी की मांसपेशियों में बनने वाली गैर-कैंसरकारी गांठें (रसौली) होती हैं। ये आकार में छोटी या बहुत बड़ी भी हो सकती हैं।

👉 एडेनोमायोसिस (Adenomyosis): इस स्थिति में बच्चेदानी की अंदरूनी परत (endometrium) उसकी बाहरी मांसपेशियों की दीवारों में बढ़ने लगती है, जिससे दीवारें मोटी और भारी हो जाती हैं।

👉 पिछली गर्भावस्था (Past Pregnancy): जिन महिलाओं के बच्चे हो चुके हैं, उनका यूट्रस अक्सर सामान्य से थोड़ा बड़ा ही रहता है, जो कि पूरी तरह से सामान्य (Normal) है।

👉 पेरिमेनोपॉज़ (Perimenopause): मेनोपॉज़ (मासिक धर्म बंद होने) से कुछ साल पहले शरीर में होने वाले हार्मोनल उतार-चढ़ाव के कारण यूट्रस का आकार अस्थायी रूप से बढ़ सकता है।

👉 पेल्विक इंफ्लेमेटरी डिजीज (PID) या संक्रमण: गर्भाशय या पेल्विक हिस्से में किसी तरह का इन्फेक्शन होने से भी सूजन आ सकती है।

2. इसके प्रमुख लक्षण (Symptoms)

कुछ महिलाओं में बल्की यूट्रस के कोई लक्षण नहीं दिखते और यह केवल रूटीन अल्ट्रासाउंड में ही पता चलता है। हालांकि, कुछ मामलों में निम्नलिखित लक्षण हो सकते हैं:

👉 हैवी पीरियड्स: मासिक धर्म के दौरान अत्यधिक ब्लीडिंग होना, बड़े क्लॉट्स (खून के थक्के) आना या पीरियड्स का 7 दिनों से ज्यादा चलना।

👉 तेज़ दर्द: पीरियड्स के दौरान असहनीय ऐंठन होना, पीठ या पेट के निचले हिस्से (pelvic area) में लगातार भारीपन या दर्द रहना।

👉 बार-बार पेशाब आना: बढ़ा हुआ गर्भाशय जब आगे की तरफ स्थित ब्लैडर (मूत्रशय) पर दबाव डालता है, तो बार-बार पेशाब जाने की इच्छा होती है।

👉 कब्ज़ (Constipation): यूट्रस का दबाव पीछे मलाशय (re**um) पर पड़ने से कब्ज़ की समस्या हो सकती है।

👉 पेट का फूलना: पेट के निचले हिस्से में उभार या सूजन महसूस होना।

3. इलाज के विकल्प (Treatment)

बल्की यूट्रस का इलाज इस बात पर निर्भर करता है कि उसका मूल कारण क्या है, महिला की उम्र कितनी है, और क्या वह आगे गर्भधारण (pregnancy) की योजना बना रही हैं:

👉 दवाइयां: यदि कारण हार्मोनल असंतुलन या एडेनोमायोसिस है, तो डॉक्टर दर्द कम करने की दवाएं या हार्मोनल पिल्स (जैसे गर्भनिरोधक गोलियां या आईयूडी) दे सकते हैं。

👉 मायोमेक्टॉमी (Myomectomy): अगर फाइब्रॉइड (गांठ) के कारण समस्या है और महिला भविष्य में प्रेगनेंसी चाहती हैं, तो केवल गांठों को सर्जरी के जरिए निकाल दिया जाता है और यूट्रस को सुरक्षित रखा जाता है।

👉 यूट्राइन आर्टरी एम्बोलिज़ेशन (UAE): यह एक आधुनिक प्रक्रिया है जिसमें फाइब्रॉइड तक पहुँचने वाली खून की सप्लाई को रोक दिया जाता है, जिससे वे धीरे-धीरे सिकुड़ जाते हैं।

👉 हिस्टेरेक्टॉमी (Hysterectomy): यदि ब्लीडिंग और दर्द अत्यधिक असहनीय हो, अन्य इलाज काम न कर रहे हों और महिला का परिवार पूरा हो चुका हो, तो सर्जरी के जरिए बच्चेदानी को पूरी तरह निकाल दिया जाता है।

महत्वपूर्ण सलाह:

अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट में "Bulky Uterus" देखकर घबराएं नहीं। अपनी रिपोर्ट के साथ एक अच्छे स्त्री रोग विशेषज्ञ (Gynecologist) से मिलें ताकि वे आपके लक्षणों के आधार पर सही कारण का पता लगा सकें।

कमर के निचले हिस्से का दर्द (Lumbar Pain) आयुर्वेद में 'कटीशूल' (Katishoola) कहलाता है, जो मुख्य रूप से शरीर में वात दोष...
23/08/2026

कमर के निचले हिस्से का दर्द (Lumbar Pain) आयुर्वेद में 'कटीशूल' (Katishoola) कहलाता है, जो मुख्य रूप से शरीर में वात दोष (Vata Dosha) के असंतुलन के कारण होता है। गलत मुद्रा में बैठना, शारीरिक व्यायाम की कमी, भारी वजन उठाना और मानसिक तनाव इसके मुख्य कारण हैं।
🌿 आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियाँ (Ayurvedic Herbs)

👉 अश्वगंधा (Ashwagandha): मांसपेशियों को मजबूती देता है और नसों के दर्द व तनाव को कम करता है। रोज रात को आधा चम्मच अश्वगंधा पाउडर गुनगुने दूध के साथ लें।

👉 गुग्गुल (Guggulu): त्रियोदशांग गुग्गुल या महायोगराज गुग्गुल जैसी आयुर्वेदिक दवाएं जोड़ों और कमर दर्द में अत्यधिक प्रभावी हैं (चिकित्सक की सलाह पर लें)।

👉 शल्लकी (Shallaki): यह जड़ी-बूटियों में प्राकृतिक पेनकिलर मानी जाती है, जो रीढ़ की हड्डी की सूजन को कम करती है।

🏵️पंचकर्म और बाहरी उपचार(मालिश)🏵️

👉 कटि बस्ती (Kati Basti): यह एक विशेष आयुर्वेदिक पंचकर्म चिकित्सा है। इसमें कमर के प्रभावित हिस्से पर उड़द की दाल के आटे से घेरा बनाकर उसमें गुनगुना औषधीय तेल (जैसे महानारायण तेल) भरा जाता है। यह रीढ़ की हड्डी को गहराई से पोषण देता है।

👉 औषधीय तेल से मालिश: महानारायण तेल, कोटमचुक्कादी तेल या प्रसारिणी तेल को हल्का गुनगुना करके कमर पर हल्के हाथों से मालिश करें और उसके बाद गर्म सिकाई (हीट थेरेपी) करें।

🧘 योग और जीवनशैली में बदलाव योगासन: दर्द कम होने पर रीढ़ की हड्डी को लचीला बनाने के लिए भुजंगासन, मर्कटासन और शलभासन का नियमित अभ्यास करें।

👉 बैठने की मुद्रा: लंबे समय तक एक ही जगह पर झुककर बैठने से बचें। कुर्सी पर बैठते समय कमर के पीछे सपोर्ट या कुशन का इस्तेमाल करें।

👉 परहेज: ठंडी चीजें, बासी भोजन, गोभी, मटर और आलू जैसी वात बढ़ाने वाली चीजों का सेवन कम करें

20/08/2026

नस्य (Nasya) और धूम्र (Dhoomra/Dhumapana) चिकित्सा आयुर्वेद के पंचकर्म और उपकर्मों का हिस्सा हैं, जो मुख्य रूप से सिर, ग...
19/08/2026

नस्य (Nasya) और धूम्र (Dhoomra/Dhumapana) चिकित्सा आयुर्वेद के पंचकर्म और उपकर्मों का हिस्सा हैं, जो मुख्य रूप से सिर, गर्दन, नाक और श्वसन तंत्र (respiratory system) से जुड़े विकारों को ठीक करने के लिए उपयोग की जाती हैं। आयुर्वेद में कहा गया है—"नासा हि शिरसो द्वारम्" अर्थात नाक ही सिर का द्वार है। इसलिए, सिर के रोगों के लिए नाक के मार्ग को सबसे प्रभावी माना जाता है।

चिकित्सा पद्धतियों का विस्तृत विवरण

1. नस्य चिकित्सा (Nasya Therapy) नस्य चिकित्सा में औषधीय तेल, घी, जड़ी-बूटियों का रस या चूर्ण नाक के छिद्रों के माध्यम से शरीर में डाला जाता है।

नस्य के प्रमुख फायदे (Benefits):

👉माइग्रेन और सिरदर्द से राहत: यह पुराने सिरदर्द, माइग्रेन और तनाव से होने वाले दर्द को कम करने में अत्यधिक प्रभावी है।

👉साइनस और एलर्जी में सुधार: यह बंद नाक को खोलती है, साइनस के संक्रमण (Sinusitis) को ठीक करती है और धूल-मिट्टी से होने वाली एलर्जी से बचाती है।

👉मानसिक स्वास्थ्य और नींद: नस्य के लिए उपयोग होने वाले तेल (जैसे अनु तैलम) तंत्रिका तंत्र को शांत करते हैं, जिससे चिंता, तनाव, और अनिद्रा (Insomnia) जैसी समस्याओं में आराम मिलता है।

👉इंद्रियों की शक्ति बढ़ाना: यह आंखों की रोशनी में सुधार करने, कान बजने (Tinnitus) की समस्या को कम करने और सूंघने की क्षमता को मजबूत करने में मदद करती है।

👉बालों और त्वचा के लिए: नियमित नस्य से बालों का असमय सफेद होना, झड़ना रुकता है और चेहरे की रंगत व चमक में सुधार होता है।

2. धूम्र चिकित्सा / धूमपान (Dhoomra Chikitsa / Dhumapana)धूम्र चिकित्सा (औषधीय धूम्रपान) में विशेष जड़ी-बूटियों (जैसे हल्दी, कपूर, चंदन, वचा) को जलाकर उसके धुएं को नाक या मुंह के जरिए अंदर खींचा जाता है और मुंह के जरिए बाहर निकाला जाता है। ध्यान रहे, यह सिगरेट या तंबाकू का धुआं नहीं है, बल्कि विशुद्ध रूप से हर्बल उपचार है।

धूम्र चिकित्सा के प्रमुख फायदे (Benefits):

👉कफ और बलगम से मुक्ति: औषधीय धुआं छाती और नाक के मार्ग में जमे भारी कफ को पिघलाकर बाहर निकालता है।

👉श्वसन रोगों में लाभकारी: यह अस्थमा (Asthma), बार-बार होने वाली खांसी, ब्रोंकाइटिस और गले की खराश में तुरंत राहत देता है।

👉कीटाणुओं का नाश (Antimicrobial): नाक और गले के मार्ग में मौजूद हानिकारक बैक्टीरिया और वायरस को नष्ट करने में यह धुआं मदद करता है।

👉सूंघने की शक्ति और भारीपन दूर करना: यह सिर के भारीपन, सुस्ती और नाक के रिसेप्टर्स को उत्तेजित कर बंद सूंघने की क्षमता को सक्रिय करता है।

महत्वपूर्ण सलाह: यद्यपि सामान्य नस्य (जैसे गाय का घी या अनु तेल की 2-2 बूंदें) घर पर किया जा सकता है, लेकिन तीव्र रोगों के लिए तीव्र नस्य और धूम्र चिकित्सा हमेशा किसी कुशल आयुर्वेदिक चिकित्सक (Vaidya) की देखरेख में ही करानी चाहिए। गलत तरीके से धुआं लेने या तेल डालने से गले या नाक में जलन हो सकती है।

एलोपेसिया (Alopecia) को हिंदी में सामान्य बोलचाल में बाल झड़ना, खालित्य (गंजापन) या एलोपेसिया एरेटा के मामलों में चकत्ते...
17/08/2026

एलोपेसिया (Alopecia) को हिंदी में सामान्य बोलचाल में बाल झड़ना, खालित्य (गंजापन) या एलोपेसिया एरेटा के मामलों में चकत्तेदार गंजापन कहा जाता है। यह एक चिकित्सीय स्थिति है जिसमें सिर या शरीर के अन्य हिस्सों से अचानक या अत्यधिक मात्रा में बाल झड़ने लगते हैं।

एलोपेसिया के मुख्य प्रकार

👉 एलोपेसिया एरेटा (Alopecia Areata): इसे आम भाषा में सिक्के के आकार का गंजापन या कई जगह ग्रामीण क्षेत्रों में भ्रमवश 'कीड़ा लगना' भी कहा जाता है, जिसमें सिर या दाढ़ी पर गोल-गोल चिकने चकत्ते (पैच) में बाल गायब हो जाते हैं।

👉 एंड्रोजेनेटिक एलोपेसिया (Androgenetic Alopecia): इसे पुरुष पैटर्न गंजापन (Male Pattern Baldness) या महिलाओं में महिला पैटर्न बाल पतला होना कहा जाता है।

👉 एलोपेसिया टोटलिस (Alopecia Totalis): इस स्थिति में सिर के सारे बाल पूरी तरह झड़ जाते हैं।

👉 एलोपेसिया यूनिवर्सलिस (Alopecia Universalis): इसमें पूरे शरीर के सभी बाल (भौं, पलकें और शरीर के अन्य रोंगटे) झड़ जाते हैं।

🏵️🏵️मुख्य लक्षण🏵️🏵️

👉 सिर, दाढ़ी, मूंछ या भौंहों पर सिक्के के आकार के गोल और चिकने गंजे धब्बे बनना।

👉 गंजेपन वाले स्थान पर किसी तरह की लालिमा, सूजन या खुजली का आमतौर पर न होना।

👉 नाखूनों में छोटे-छोटे गड्ढे या खुरदरापन दिखाई देना।

🏵️🏵️कारण🏵️🏵️

👉 यह मुख्य रूप से एक ऑटोइम्यून डिसऑर्डर (Autoimmune Disorder) है, जिसमें शरीर की अपनी रोग प्रतिरोधक क्षमता (इम्यून सिस्टम) गलती से स्वस्थ बालों की जड़ों (हेयर फॉलिकल्स) को नुकसान पहुँचाने लगती है।

👉 अत्यधिक मानसिक तनाव।

👉 आनुवंशिक कारण (परिवार में किसी को यह समस्या होना)।

Happy Independence Day
15/08/2026

Happy Independence Day

पेट में गैस (Gastric Problem) बनना पाचन क्रिया का एक सामान्य हिस्सा है, लेकिन जब यह अत्यधिक मात्रा में बनने लगती है या आ...
13/08/2026

पेट में गैस (Gastric Problem) बनना पाचन क्रिया का एक सामान्य हिस्सा है, लेकिन जब यह अत्यधिक मात्रा में बनने लगती है या आंतों में फंस जाती है, तो पेट फूलना (ब्लोटिंग), दर्द और बेचैनी जैसी समस्याएं होने लगती हैं।
आयुर्वेद और आधुनिक चिकित्सा के अनुसार, इसके पीछे मुख्य वजह हमारी जीवनशैली और खान-पान की आदतें होती हैं।

1. गैस बनने के मुख्य कारण (Causes)

👉 गलत खान-पान: अत्यधिक तला-भुना, तीखा या मसालेदार भोजन खाना। इसके अलावा बीन्स, राजमा, छोले, गोभी और मैदा से बनी चीजें गैस बढ़ाती हैं।

👉 जल्दी-जल्दी खाना: भोजन को बिना चबाए तेजी से निगलने पर खाने के साथ बाहर की हवा भी पेट में चली जाती है, जो गैस का रूप ले लेती है।

👉 कब्ज (Constipation): पेट साफ न होने के कारण बड़ी आंत में मल सड़ने लगता है, जिससे हानिकारक बैक्टीरिया गैस पैदा करते हैं।

👉 लैक्टोज इनटॉलरेंस: कुछ लोगों को दूध या डेयरी प्रोडक्ट्स पचाने में दिक्कत होती है, जिससे पेट में गुड़गुड़ और गैस बनने लगती है।

👉 शारीरिक सक्रियता की कमी: खाना खाने के बाद तुरंत बैठ जाना या सो जाना पाचन तंत्र को धीमा कर देता है।

2. गैस के प्रमुख लक्षण (Symptoms)

👉 पेट का फूलना या भारीपन महसूस होना
👉 सुबह उठते ही या खाना खाने के बाद बार-बार डकार आना
👉 पेट में तेज चुभन, ऐंठन या मरोड़ होना
👉 कभी-कभी गैस का सिर में चढ़ना, जिससे सिरदर्द या चक्कर आने जैसी समस्या होना
👉 छाती या सीने में जलन (एसिडिटी) महसूस होना

क्या करें और क्या न करें

क्या करें (Do's)
👉 भोजन को हमेशा आराम से और खूब चबा-चबाकर खाएं।
👉 दिनभर में पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं।
👉 भोजन में फाइबर युक्त चीजें और छाछ-दही शामिल करें।

क्या न करें (Don'ts)
👉 एक बार में बहुत अधिक (Overeating) खाना न खाएं।
👉 कोल्ड ड्रिंक्स, सोडा और अत्यधिक चाय-कॉफी का सेवन न करें।
👉 रात को देर से भारी या गरिष्ठ भोजन करने से बचें।

डॉक्टर से सलाह कब लें?
यदि गैस की समस्या हफ्तों तक बनी रहे, या इसके साथ बिना वजह वजन कम होना, लगातार उल्टी आना, मल में खून आना या पेट में अत्यधिक तेज असहनीय दर्द होना जैसे लक्षण दिखें, तो तुरंत किसी विशेषज्ञ डॉक्टर (Gastroenterologist) से जांच करानी चाहिए।

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