कुछ घरेलू उपाय

कुछ घरेलू उपाय Health is wealth

20/05/2026

20/05/2026

“भोजन के साथ पानी पीने का सही तरीका क्या है? कहीं गलत आदत आपकी पाचन अग्नि को कमजोर तो नहीं कर रही!”
* आयुर्वेदिक दृष्टिकोण
आयुर्वेद में भोजन और जल के संबंध को बहुत महत्वपूर्ण माना गया है।
गलत तरीके से पानी पीना पाचन अग्नि (Digestive Fire) को मंद कर सकता है, जिससे गैस, भारीपन, अपच और आलस्य जैसी समस्याएँ बढ़ सकती हैं। मानव शरीर भी कभी-कभी ऐसा व्यवहार करता है जैसे उसने निर्देश पुस्तिका पढ़ने से साफ मना कर दिया हो।
* भोजन के साथ जल कैसे लेना चाहिए?
✅ भोजन शुरू करने से पहले थोड़ा जल लिया जा सकता है।
✅ भोजन के बीच में आवश्यकता अनुसार थोड़ा-थोड़ा जल पीना हितकारी माना गया है।
✅ भोजन के तुरंत बाद बहुत अधिक पानी पीना उचित नहीं माना गया।
✅ छोटे घूंट लेकर धीरे-धीरे पानी पीना बेहतर माना गया है।
* अधिक पानी क्यों हानिकारक माना गया है?
आयुर्वेद के अनुसार भोजन के दौरान अत्यधिक जल सेवन से:
पाचन अग्नि मंद हो सकती है
भोजन पचने में कठिनाई हो सकती है
कफ वृद्धि और भारीपन महसूस हो सकता है
गैस और अपच की समस्या बढ़ सकती है
* ठंडा जल या सामान्य जल?
❌ बहुत ठंडा पानी पाचन के लिए अनुकूल नहीं माना गया है।
✅ सामान्य तापमान या हल्का गुनगुना जल अधिक हितकारी माना जाता है।
विशेषकर तैलीय, भारी या ठंडे मौसम में गुनगुना जल उपयोगी माना गया है।
🌱 पानी पीने का सही तरीका
बैठकर पानी पिएं
धीरे-धीरे छोटे घूंट लें
अत्यधिक तेजी से पानी न पिएं
प्यास और शरीर की आवश्यकता को समझकर जल लें
भोजन के साथ संतुलित मात्रा में ही जल लें
📚 आयुर्वेदिक संदर्भ (References)
📖 चरक संहिता - भोजन, पाचन अग्नि एवं जल सेवन वर्णन
📖 अष्टांग हृदयम् - भोजन विधि एवं जलपान नियम
📖 सुश्रुत संहिता - संतुलित आहार एवं पाचन संबंधी सिद्धांत
Note: This post includes AI‑generated images/videos for illustration

भोजन के साथ पानी पीने का सही तरीका क्या है? क्या आपको पता है कि गलत आदतें आपकी पाचन अग्नि को कमजोर कर सकती हैं और आपको ग...
20/05/2026

भोजन के साथ पानी पीने का सही तरीका क्या है? क्या आपको पता है कि गलत आदतें आपकी पाचन अग्नि को कमजोर कर सकती हैं और आपको गैस, भारीपन, अपच और आलस्य जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है? आयुर्वेद के अनुसार, भोजन और जल के संबंध को बहुत महत्वपूर्ण माना गया है। आइए जानते हैं कि भोजन के साथ जल कैसे लेना चाहिए।

क्या आपको पता है कि एल्युमिनियम फॉयल में रोटी लपेटकर रखने से कितनी प्रकार की बीमारियाँ हो सकती हैं? ऐसी महत्वपूर्ण जानका...
20/05/2026

क्या आपको पता है कि एल्युमिनियम फॉयल में रोटी लपेटकर रखने से कितनी प्रकार की बीमारियाँ हो सकती हैं? ऐसी महत्वपूर्ण जानकारी के लिए हमें फॉलो कीजिए, लाइक और शेयर कीजिए.

20/05/2026
27/09/2025

🌲🌲 नागदोन🌲🌲का पौधा ज्यादातर लोग देखे होंगे,पर इसके औषधीय गुण और उपयोग के बारे में बहुत कम लोगों को जानकारी होगी। यह पौधा...
02/08/2025

🌲🌲 नागदोन🌲🌲का पौधा ज्यादातर लोग देखे होंगे,पर इसके औषधीय गुण और उपयोग के बारे में बहुत कम लोगों को जानकारी होगी। यह पौधा घरों के आसपास,गार्डन बागीचे में देखने को मिल जाता है । इस पौधे के पत्ते को तोड़ने से दूध निकलता है।
यह पौधा खूनी बवासीर में पीरियड्स के समस्या में,स्वास संबंधी समस्या में,पेशाब के जलन में और त्वचारोग, घाव फोड़ा, फुंसी में बहुत ही गुणकारी और लाभदायक होता है।

🌲नागदोन के फायदे:-

♦️ खूनी बवासीर
बवासीर होने पर मलद्वार के आसपास की नसों में सूजन आ जाती है। जिससे मलत्याग के समय खून आने लगता है। बावासीर की समस्या से राहत पाने में नागदोन का पौधा मदद कर सकता है। आयुर्वेद के अनुसार नागदोन का पौधा सूजन, दर्द और अन्य त्वचा संबंधित समस्याओं के उपचार में काफी फायदेमंद होता है। बवासीर के उपचार के लिए इसकी पत्तियों का रस निकालकर उसे सीधे प्रभावित स्थान पर लगाने से सूजन और दर्द में राहत मिलती है।
इसके पत्ते को खाया भी जाता है नीचे सेवन विधि बताया गया है।

♦️ पीरियड्स की समस्या
मासिक धर्म की समस्या किसी भी महिला के लिए काफी पीड़ादायक रहता है ऐसे स्थिति में नागदोन के पौधे में एनाल्जेसिक गुड होने के कारण पीरियड्स के दौरान होने वाले दर्द से राहत देता दिलाता है और हैवी ब्लीडिंग को कंट्रोल करता है

♦️पेशाब में जलन का होना
अगर बार बार पेशाब आता हो या फिर पेशाब करते समय पेशाब के रास्ते में पीड़ा और जलन रहता हो या फिर पेशाब में खून आता हो तो आप नागदोन के पौधे का इस्तेमाल कर सकते हैं।

♦️ त्वचा रोग
नागदोन का पौधा ब्लड प्यूरीफायर के रूप में काम करता इसके सेवन से खून साफ होता है और जलन को शांत करता है इसके पत्ते का पेस्ट बनाकर चेहरे पर लगाया जा सकता है जिससे चेहरे पर निखार आता है और त्वचा के सभी रोग दूर होते हैं।

♦️ फोड़े फुंसी में लाभदायक:-

नागदोन का पत्ता ब्लड प्यूरिफायर के रूप में जाना जाता है यह खून को साफ करके फोड़े फुंसी से राहत दिलाता है।
इसके पत्ते पर थोड़ा सा घी लगा कर हल्का गर्म करके फोड़े पर बांधने से फोड़े के दर्द से तुरंत राहत मिलता है और इसी तरह 𝟑/𝟒 दिन लगातार करते रहने से फोड़े से भी छुटकारा मिल जाता है ।

♦️कीड़े या सांप के काटने पर:
इसके पत्तों से निकलने वाला दूध काटे हुए स्थान पर लगाने से सूजन और जहर का प्रभाव कम होता है। यह किसानों के लिए विशेष रूप से उपयोगी है।

♦️कैंसर रोधी गुण:
कुछ शोधों में पाया गया है कि नागदोन में कैंसर रोधी गुण होते हैं, जो कैंसर कोशिकाओं के विकास को रोक सकते हैं।

♦️अस्थमा:
नागदोन के पत्तों का काढ़ा या बीजों का उपयोग अस्थमा के लक्षणों जैसे सीने में भारीपन, सूजन, और ऐंठन में राहत दे सकता है।

🌲🌲🌲सेवन विधि:- 🌲🌲🌲
𝟑 से 𝟒(पत्ते बड़े हों तो 𝟐/𝟑 कर दें) पत्ता नागदोन का और 𝟐/𝟑 दाना कालीमिर्च सुबह खालीपेट चबा चबाकर खाएं या फिर इतनी ही मात्रा में लेकर काढ़ा बना कर सुबह खाली पेट लिया जा सकता है इसका सेवन करने के 𝟏 घंटा बाद बाद खाना पीना शुरू करें।

आजमाया हुआ नुस्खा है
खूनी बवासीर में पहले दिन से ही रिजल्ट आना शुरू हो जाता है।

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इस चित्र में एक्यूप्रेशर (Acupressure) या रिफ्लेक्सोलॉजी के अनुसार हथेली के विभिन्न भागों का शरीर के अंगों से संबंध दिखा...
12/07/2025

इस चित्र में एक्यूप्रेशर (Acupressure) या रिफ्लेक्सोलॉजी के अनुसार हथेली के विभिन्न भागों का शरीर के अंगों से संबंध दिखाया गया है। डायबिटीज (शुगर) के लिए मुख्य रूप से जिन अंगों पर ध्यान देना होता है, वे हैं:

डायबिटीज के लिए मुख्य पॉइंट्स:
1. पैंक्रियास (Pancreas) –
चित्र में यह बाईं ओर हथेली के बीच के थोड़ा ऊपर वाले हिस्से में दिखाया गया है।
👉 इस बिंदु को रोजाना 1-2 मिनट तक धीरे-धीरे दबाएं।
2. किडनी (Kidney) –
हथेली के नीचे के हिस्से के दाईं ओर किडनी का पॉइंट दिखाया गया है।
👉 इसे भी रोजाना दबाना लाभकारी होता है।
3. लिवर (Liver) और गॉल ब्लैडर (Gall Bladder) –
ये दोनों पॉइंट भी ब्लड शुगर कंट्रोल में सहायक होते हैं।
👉 बाएं हिस्से में स्थित हैं, इन पर भी नियमित दबाव दें।
4. थायरॉइड एवं पिट्यूटरी ग्लैंड –
ये हार्मोनल बैलेंस से जुड़े हैं। पिट्यूटरी ग्लैंड का पॉइंट अंगूठे के नीचे है, थायरॉइड हथेली के किनारे।
👉 इन्हें भी हल्के से 1-1 मिनट दबाना फायदेमंद होता है।



सुझाव:
• आप इन पॉइंट्स को एक्यूप्रेशर रिंग या अपनी अंगुलियों से हल्के से दबाएं।
• रोजाना सुबह-शाम 5-10 मिनट इन पॉइंट्स पर दबाव देने से ब्लड शुगर कंट्रोल में मदद मिल सकती है।
• यह एक वैकल्पिक चिकित्सा है, दवाओं को न छोड़ें बिना डॉक्टर की सलाह के।✍🏻

07/07/2025

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