Dr. Rakesh Patel

Dr. Rakesh Patel MBBS, MD MEDICINE
DIABETOLOGIST

झारखण्ड मे बच्चों ने फिर आन्दोलन  छेडा  है , आखिर परीक्षाओं मे पारदर्शिता  कब होगी ....कब मेहनती  बच्चे को ए यकीन  होगा ...
10/08/2026

झारखण्ड मे बच्चों ने फिर आन्दोलन छेडा है , आखिर परीक्षाओं मे पारदर्शिता कब होगी ....कब मेहनती बच्चे को ए यकीन होगा की उसकी किश्मत बदलने का रास्ता अगर किताबों को बताया गया है तो वो सही है ....
सरकारों से अपील है बच्चों के हाथों मे किताबें रहने दीजिए ...क्यूकी कुछ और इन्होने थामा , तो मुश्किल होगी ।

खामोश लाबो की चिंगारी को आवाज ना दो आगाज ना दो ..
जलने पे जो आ गये तो , बेपरवाह जामाने तेरा क्या होगा ....

10/08/2026

क्या छिपकिलियां ज़हरीली होती हैं ,
य़ा उनकी पूँछ ज़हरीली होती है ????

08/08/2026

अगर किसी ने जहर खा लिया तो क्या करें ? और अच्छा तो ए होगा ..
ज़िन्दगी बहुत कीमती है , इसको शान से जीजिये , परेशान से नही ...

06/08/2026

रीवा मे बिच्छुओं के प्रकार और काटने पर प्रभाव ...
क्या इलाज ज़रूरी है ???

31 जुलाई  मुंसी प्रेंचन्द जी का जन्मदिन था । हिन्दी  साहित्य  मुंसी जी के बिना ना सिर्फ  अधूरा है बल्की अकल्पनीय है ।   ...
02/08/2026

31 जुलाई मुंसी प्रेंचन्द जी का जन्मदिन था । हिन्दी साहित्य मुंसी जी के बिना ना सिर्फ अधूरा है बल्की अकल्पनीय है ।

मुंसी जी के उपन्यास गोदान , गबन , कर्बला , सेवासदन , निर्मला, प्रेमाश्रय , कर्मभूमि , रंगभूमी आदि हिन्दी जनमानस के हृदय और शरीर का प्रतिबिंब है ।

उनकी कहानी पंच पर्मेश्वर की वो लाइन आज भी मानव हृदय को झकझोर देती है

" क्या बिगाड के डर से ईमान की बात नही कहोगे "

आज भी "ईदगाह "मे हामिद का किरदार मानव स्वाभाव के उच्चतम शिखर को छूता है ।

मुंसी जी की ऐसी कितनी ही कहानियां हमारे मानस पटल पर ऊकेरी हुई हैं ...
ऐसे महान सहित्यकार को नमन ..

उनके सबसे चर्चित उपन्यास ...गोदान की कुछ पंक्तियां

आज अपने परिवार और स्टाफ  के साथ 50 पेड लगाये ....       यूँ तो मुझे पेड लगाना  बहुत पसंद  है और उससे  भी  अधिक पसंद है उ...
01/08/2026

आज अपने परिवार और स्टाफ के साथ 50 पेड लगाये ....
यूँ तो मुझे पेड लगाना बहुत पसंद है और उससे भी अधिक पसंद है उन्हे पालना , और बडे होते हुए देखना ।
पुराने लगाये हुए पेडों मे आज जब फल देखता हूँ तो कुछ हद तक जीवन की सार्थकता लगती है ।
आप सब भी पेड लगायें और ऊंहे पालें भी .......

जब आपके साथ कोई अप्रत्याशित  और  अनापेक्षित  दुखद  घडी आ जाती है , तो उस समय आप को पारदर्शी  रूप  से पता चलता  है की आपक...
28/07/2026

जब आपके साथ कोई अप्रत्याशित और अनापेक्षित दुखद घडी आ जाती है , तो उस समय आप को पारदर्शी रूप से पता चलता है की आपके इतने सारे शुभ चिन्तकों मे कौन वास्तविक है और कौन आवस्तविक |
मै समझता हूँ , मानव जीवन मे ए बहुत ही ज़रूरी है ...

आंदोलन क्यूँ  होते हैं ?     क्यूं  होने चाहिए ?           मुझे सटीक नही पता ....पर ऐसा लगता है कि  कई बार वो ज़रूरी होते...
25/07/2026

आंदोलन क्यूँ होते हैं ?
क्यूं होने चाहिए ?
मुझे सटीक नही पता ....पर ऐसा लगता है कि कई बार वो ज़रूरी होते हैं

मेरे कालेज के दिनों मे जब मै स्नाकोत्तर का छात्र था , सरकार के साथ हमारी कुछ मांगो को लेकर असहमति हो गई| सरकार किसी कीमत पर राजी होने को तैयार नही थी | मध्यप्रदेश के पांचों मेडिकल कालेजों मे पहले चरण मे काली पट्टी बांधकर विरोध किया गया | करीब महीना भर गुजरा पर सरकार को कोई फर्क नही पडा|
दूसरे चरण मे हमने सामान्य सेवायें बन्द कर दीं , केवल आपातकालीन सेवायें चालू रहीं , सरकार फिर भी नही मानी |
तीसरे चरण मे मजबूरन हमे सारी सेवायें बन्द करनी पडीं और सभी लोग भोपाल मे प्रोटेस्ट के लिये आ गये ।
सरकार ने बहुत डराया , धमकाया , घर बालों को फोन किया की इसकी डिग्री खत्म हो जायेगी , राजिस्ट्रेसन रदद हो जायेगा , पर लड़के नही माने ।
सरकार ने आखिरी दांव अपनाया , पुलिस प्रशाशन को उतारा और कई लोगों को प्रदेशभर से गिरफ्तार कर जेलों मे डिटेन कर लिया गया , हालाकी पुलिस का व्यवहार हम लोगों के साथ काफी सभ्य और शांत था , दिल्ली जैसा कुछ नही हुआ ।
सरकार भी आखिर अस्पताल के बेहाली और हमारी शांतपूर्ण नीति के आगे झुकी और उसने सारी मांगे मान ली ।
तब से नियमित styfund pramotion का नियम बन गया , उसके बाद उस काम के लिये आंदोलान की ज़रूरत नही हुई कभी .....

अमेरिका मे स्कूल की छत  गिरने  से कई बच्चे परेशान  थे | उन्होने   हेड  मास्टर , से लेकर  ज़िले के शिक्षा अधिकारी तक शिकाय...
21/07/2026

अमेरिका मे स्कूल की छत गिरने से कई बच्चे परेशान थे | उन्होने हेड मास्टर , से लेकर ज़िले के शिक्षा अधिकारी तक शिकायत की , पर बात नही बनी | सरकार के पास इससे भी कई ज़रूरी काम थे ....
लिहाजा बच्चों ने प्रोटेस्ट करने की ठानी | स्कूल के हजारों बच्चे सड़क पर आ गये | सरकार की प्रतिष्ठा की बात थी ; कानून के रक्षको को आगे किया गया , लाठी चार्ज के लिये |

कांस्टेबल ने जैसे ही लाठी उठाई , लड़का हाथ जोडकर बोल पडा - अपना बच्चा कहां पढाओगे ??
कांस्टेबल - ठिठका !!
लड़का फिर बोला - पढा भी लोगे तो कांस्टेबल की परीक्षा पास कैसे हो पयेगा ? पेपर लीक हो जाएगा !
कांस्टेबल - थोडा और सहमा ...

तभी जोर से सारजेंट की आवाज आई - chaaaargge ....
बस फिर क्या , तडातड़ लाठियां बरस पडीं लोकतंत्र भारत की पीठ पर ....(उस लड़के का नाम लोकतंत्र भारत था , आप कनफ्यूस ना हों )

तुम्हारे पास ताकत है, हुकूमत  है ,                         अदालत है तो क्या ?         हवाओं की चिरागों से पुरानी ,      ...
20/07/2026

तुम्हारे पास ताकत है, हुकूमत है ,
अदालत है तो क्या ?
हवाओं की चिरागों से पुरानी ,
अदावत है तो क्या ?
दिये की फितरत है, अंधेरों से
लड़ते रहने की
तुम्हारी नजर मे ये
बगावत है तो क्या ????


डॉ. राकेश

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