25/07/2026
आंदोलन क्यूँ होते हैं ?
क्यूं होने चाहिए ?
मुझे सटीक नही पता ....पर ऐसा लगता है कि कई बार वो ज़रूरी होते हैं
मेरे कालेज के दिनों मे जब मै स्नाकोत्तर का छात्र था , सरकार के साथ हमारी कुछ मांगो को लेकर असहमति हो गई| सरकार किसी कीमत पर राजी होने को तैयार नही थी | मध्यप्रदेश के पांचों मेडिकल कालेजों मे पहले चरण मे काली पट्टी बांधकर विरोध किया गया | करीब महीना भर गुजरा पर सरकार को कोई फर्क नही पडा|
दूसरे चरण मे हमने सामान्य सेवायें बन्द कर दीं , केवल आपातकालीन सेवायें चालू रहीं , सरकार फिर भी नही मानी |
तीसरे चरण मे मजबूरन हमे सारी सेवायें बन्द करनी पडीं और सभी लोग भोपाल मे प्रोटेस्ट के लिये आ गये ।
सरकार ने बहुत डराया , धमकाया , घर बालों को फोन किया की इसकी डिग्री खत्म हो जायेगी , राजिस्ट्रेसन रदद हो जायेगा , पर लड़के नही माने ।
सरकार ने आखिरी दांव अपनाया , पुलिस प्रशाशन को उतारा और कई लोगों को प्रदेशभर से गिरफ्तार कर जेलों मे डिटेन कर लिया गया , हालाकी पुलिस का व्यवहार हम लोगों के साथ काफी सभ्य और शांत था , दिल्ली जैसा कुछ नही हुआ ।
सरकार भी आखिर अस्पताल के बेहाली और हमारी शांतपूर्ण नीति के आगे झुकी और उसने सारी मांगे मान ली ।
तब से नियमित styfund pramotion का नियम बन गया , उसके बाद उस काम के लिये आंदोलान की ज़रूरत नही हुई कभी .....