Jyotish Krishna Bhardwaj

Jyotish Krishna Bhardwaj The reactions to life's actions are inescapable by everyone except those who are completely devoted to God (via Bhakti-yoga).

परशुराम जयंती भगवान परशुराम के जन्मदिन के रूप में मनाई जाती है, जो भगवान विष्णु के छठे अवतार माने जाते हैं। यह पर्व विशे...
20/04/2026

परशुराम जयंती भगवान परशुराम के जन्मदिन के रूप में मनाई जाती है, जो भगवान विष्णु के छठे अवतार माने जाते हैं। यह पर्व विशेष रूप से हिंदू धर्म में अत्यंत श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जाता है। इस दिन लोग व्रत रखते हैं, पूजा-अर्चना करते हैं और भगवान परशुराम के साहस, धर्मनिष्ठा और न्यायप्रियता को याद करते हैं। माना जाता है कि उन्होंने अधर्म और अन्याय के विरुद्ध संघर्ष कर धर्म की स्थापना की थी। यह दिन हमें सत्य, धर्म और साहस के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है।

होलीका दहन होली से एक दिन पहले मनाया जाता है। यह पर्व बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक है। इस दिन लोग लकड़ियाँ और उपले ...
02/03/2026

होलीका दहन होली से एक दिन पहले मनाया जाता है। यह पर्व बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक है। इस दिन लोग लकड़ियाँ और उपले एकत्र कर अग्नि प्रज्वलित करते हैं और विधि-विधान से उसकी पूजा करते हैं।

पौराणिक कथा के अनुसार, दैत्यराज हिरण्यकश्यप अपने पुत्र प्रह्लाद से क्रोधित था क्योंकि वह भगवान विष्णु का परम भक्त था। उसने अपनी बहन होलिका की सहायता से प्रह्लाद को अग्नि में जलाने का प्रयास किया। होलिका को वरदान था कि वह अग्नि से नहीं जलेगी, परंतु भगवान की कृपा से प्रह्लाद सुरक्षित बच गए और होलिका जलकर भस्म हो गई। तभी से होलीका दहन की परंपरा प्रारंभ हुई।
होलीका दहन के समय यह मंत्र बोला जाता है—
मंत्र:
“अहकूटा भयत्रस्ते भूतानां भीतिवर्धिनी।
तव नाशाय होलिके दह्यसे पापनाशिनी॥”

तथा प्रचलित मंत्र—

“होलिकायै नमः।
प्रह्लादाय नमः।”

यह पर्व हमें सिखाता है कि सत्य, भक्ति और धर्म की सदैव विजय होती है। होलीका दहन के अवसर पर लोग अपनी बुराइयों को त्यागकर नए उत्साह और सकारात्मकता के साथ जीवन में आगे बढ़ने का संकल्प लेते हैं।

या कुन्देन्दुतुषारहारधवला या शुभ्रवस्त्रावृताया वीणावरदण्डमण्डितकरा या श्वेतपद्मासना।या ब्रह्माच्युत शंकरप्रभृतिभिर्देवै...
23/01/2026

या कुन्देन्दुतुषारहारधवला या शुभ्रवस्त्रावृता
या वीणावरदण्डमण्डितकरा या श्वेतपद्मासना।
या ब्रह्माच्युत शंकरप्रभृतिभिर्देवैः सदा वन्दिता
सा मां पातु सरस्वती भगवती निःशेषजाड्यापहा ॥1॥

शुक्लां ब्रह्मविचार सार परमामाद्यां जगद्व्यापिनीं
वीणा-पुस्तक-धारिणीमभयदां जाड्यान्धकारापहाम्‌।
हस्ते स्फटिकमालिकां विदधतीं पद्मासने संस्थिताम्‌
वन्दे तां परमेश्वरीं भगवतीं बुद्धिप्रदां शारदाम्‌॥2॥

अर्थ है क‍ि जो विद्या की देवी भगवती सरस्वती कुन्द के फूल, चंद्रमा, हिमराशि और मोती के हार की तरह धवल वर्ण की हैं और जो श्वेत वस्त्र धारण करती हैं, जिनके हाथ में वीणा-दण्ड शोभायमान है, जिन्होंने श्वेत कमलों पर आसन ग्रहण किया है तथा ब्रह्मा, विष्णु एवं शंकर आदि देवताओं द्वारा जो सदा पूजित हैं, वही संपूर्ण जड़ता और अज्ञान को दूर कर देने वाली मां सरस्वती हमारी रक्षा करें
शुक्लवर्ण वाली, संपूर्ण चराचर जगत्‌ में व्याप्त, आदिशक्ति, परब्रह्म के विषय में किए गए विचार एवं चिंतन के सार रूप परम उत्कर्ष को धारण करने वाली, सभी भयों से भयदान देने वाली, अज्ञान के अंधेरे को मिटाने वाली, हाथों में वीणा, पुस्तक और स्फटिक की माला धारण करने वाली और पद्मासन पर विराजमान बुद्धि प्रदान करने वाली, सर्वोच्च ऐश्वर्य से अलंकृत, भगवती शारदा (सरस्वती देवी) की मैं वंदना करता या करती हूं।

मकर संक्रांति भारत का एक प्रमुख त्योहार है, जो हर वर्ष सूर्य के मकर राशि में प्रवेश करने पर मनाया जाता है। यह पर्व सामान...
14/01/2026

मकर संक्रांति भारत का एक प्रमुख त्योहार है, जो हर वर्ष सूर्य के मकर राशि में प्रवेश करने पर मनाया जाता है। यह पर्व सामान्यतः 14 जनवरी को आता है और शीत ऋतु के अंत तथा उत्तरायण की शुरुआत का प्रतीक माना जाता है। इस दिन से सूर्य की गति उत्तर दिशा की ओर हो जाती है, जिसे शुभ माना जाता है।
मकर संक्रांति का विशेष महत्व कृषि से जुड़ा है। नई फसल के आगमन की खुशी में किसान इस पर्व को उत्साहपूर्वक मनाते हैं। तिल और गुड़ से बने व्यंजन खाने की परंपरा है, जो आपसी प्रेम, मधुरता और स्वास्थ्य का प्रतीक माने जाते हैं। कई स्थानों पर लोग पवित्र नदियों में स्नान कर दान-पुण्य करते हैं।
भारत के विभिन्न क्षेत्रों में यह पर्व अलग-अलग नामों से मनाया जाता है, जैसे पंजाब में लोहड़ी, तमिलनाडु में पोंगल और असम में भोगाली बिहू। इस प्रकार मकर संक्रांति सामाजिक एकता, प्रकृति के प्रति कृतज्ञता और नई शुरुआत का संदेश देने वाला महत्वपूर्ण त्योहार है।

संकट चतुर्थी भगवान गणेश को समर्पित एक महत्वपूर्ण व्रत है, जो प्रत्येक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को मनाया जाता है...
06/01/2026

संकट चतुर्थी भगवान गणेश को समर्पित एक महत्वपूर्ण व्रत है, जो प्रत्येक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को मनाया जाता है। इस दिन भक्त गणेश जी की पूजा कर अपने जीवन के संकटों, बाधाओं और कष्टों से मुक्ति की कामना करते हैं। व्रत रखने वाले श्रद्धालु दिनभर उपवास रखते हैं और रात्रि में चंद्र दर्शन के बाद व्रत का पारण करते हैं।
मान्यता है कि संकट चतुर्थी का व्रत करने से बुद्धि, समृद्धि और सौभाग्य की प्राप्ति होती है। यह व्रत विशेष रूप से मानसिक शांति और आत्मबल को बढ़ाने वाला माना जाता है। भगवान गणेश को विघ्नहर्ता कहा जाता है, इसलिए यह व्रत जीवन की कठिनाइयों को दूर करने का प्रतीक है।

शाकंभरी देवी का हिंदू धर्म में विशेष महत्व है। उन्हें माँ दुर्गा का करुणामयी रूप माना जाता है, जिन्होंने अकाल के समय पृथ...
03/01/2026

शाकंभरी देवी का हिंदू धर्म में विशेष महत्व है। उन्हें माँ दुर्गा का करुणामयी रूप माना जाता है, जिन्होंने अकाल के समय पृथ्वी पर उत्पन्न संकट को दूर किया। पुराणों के अनुसार, जब लंबे समय तक वर्षा न होने से संसार में भयंकर अकाल पड़ा, तब माँ शाकंभरी ने अपने शरीर से शाक-सब्जियों और फलों को उत्पन्न कर जीवों का पालन किया। इसी कारण वे अन्न, वनस्पति और जीवन की पोषक देवी कही जाती हैं।
माँ शाकंभरी देवी हमें प्रकृति के संरक्षण, अन्न के सम्मान और करुणा का संदेश देती हैं। उनकी आराधना से समृद्धि, स्वास्थ्य और जीवन में संतुलन की प्राप्ति होती है।

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