Rao.asgar unani physician hakeem

Rao.asgar unani physician hakeem सामान्य रोग, पेट, गैस, ताक़त पेशाब रोग माहिर

Happy International Youth Day 🌿युवाओं की सेहत सिर्फ़ आज की ज़रूरत नहीं,बल्कि आने वाले कल की बुनियाद है।हमदर्द ने बरसों स...
12/08/2026

Happy International Youth Day 🌿

युवाओं की सेहत सिर्फ़ आज की ज़रूरत नहीं,
बल्कि आने वाले कल की बुनियाद है।
हमदर्द ने बरसों से यूनानी तिब्ब की उस रवायत को ज़िंदा रखा है, जहाँ दवा महज़ एक प्रोडक्ट नहीं, बल्कि इल्म, तजुर्बे और दवा-साज़ी की एक पूरी तहज़ीब होती है।
यूनानी दवाओं की असल खूबसूरती यही है कि इनके पीछे सदियों का तजुर्बा, जड़ी-बूटियों का इल्म और इंसानी जिस्म के मिज़ाज को समझने की एक मुकम्मल सोच मौजूद है।
हमदर्द के प्रोडक्ट्स इसी विरासत की आधुनिक पेशकश हैं—
जहाँ पुरानी हिकमत, आज की ज़रूरत और दवा-साज़ी के आधुनिक उसूल एक-दूसरे से मिलते हैं।
इस International Youth Day पर संदेश बस इतना—
युवा स्वस्थ होंगे, तो समाज मज़बूत होगा;
और अपनी विरासत को समझेंगे, तो भविष्य और भी समृद्ध होगा।
🌿 यूनानी तिब्ब की रवायत — इल्म से दवा तक, दवा से सेहत तक।

Rao Asgar saharanpur Unani physician

12/08/2026

Happy International Youth Day 🌿
युवाओं की सेहत सिर्फ़ आज की ज़रूरत नहीं,
बल्कि आने वाले कल की बुनियाद है।
हमदर्द ने बरसों से यूनानी तिब्ब की उस रवायत को ज़िंदा रखा है, जहाँ दवा महज़ एक प्रोडक्ट नहीं, बल्कि इल्म, तजुर्बे और दवा-साज़ी की एक पूरी तहज़ीब होती है।
यूनानी दवाओं की असल खूबसूरती यही है कि इनके पीछे सदियों का तजुर्बा, जड़ी-बूटियों का इल्म और इंसानी जिस्म के मिज़ाज को समझने की एक मुकम्मल सोच मौजूद है।
हमदर्द के प्रोडक्ट्स इसी विरासत की आधुनिक पेशकश हैं—
जहाँ पुरानी हिकमत, आज की ज़रूरत और दवा-साज़ी के आधुनिक उसूल एक-दूसरे से मिलते हैं।
इस International Youth Day पर संदेश बस इतना—
युवा स्वस्थ होंगे, तो समाज मज़बूत होगा;
और अपनी विरासत को समझेंगे, तो भविष्य और भी समृद्ध होगा।
🌿 यूनानी तिब्ब की रवायत — इल्म से दवा तक, दवा से सेहत तक।

Rao Asgar saharanpur Unani physician

🌿 सेक्स के बाद बदन में टूट-फूट, थकान और दर्द — कमज़ोरी या किसी बीमारी का इशारा?50 प्लस उम्र के मर्दों में यह कैफ़ियत अक्...
08/08/2026

🌿 सेक्स के बाद बदन में टूट-फूट, थकान और दर्द —

कमज़ोरी या किसी बीमारी का इशारा?
50 प्लस उम्र के मर्दों में यह कैफ़ियत अक्सर महसूस हो सकती है। हमबिस्तरी के बाद कुछ वक़्त की थकान फ़ितरी है, लेकिन अगर शदीद कमज़ोरी, बदन-दर्द, बेचैनी, बेदिली या देर तक थकान बरक़रार रहे तो इसे सिर्फ़ मनी के ज़्यादा इख़राज से जोड़ना दुरुस्त नहीं।
यूनानी नज़रिए से इसे ज़ोफ़-ए-बाह, फ़ुतूर-ए-क़ुव्वत और मिज़ाज के असंतुलन से ताबीर किया जा सकता है। वहीं आधुनिक तिब्बी इल्म में उम्र, नींद की कमी, ज़ेहनी दबाव, डिप्रेशन, पानी की कमी, डायबिटीज़, हाई ब्लड प्रेशर, थायरॉयड, ख़ून की कमी, विटामिन की कमी और हार्मोन्स के असंतुलन जैसे असबाब भी अहम हो सकते हैं।
🌿 असल उसूल — एहतियात, एतिदाल, ग़िज़ा औeesर आराम।
बादाम, अख़रोट, खजूर, दूध, अंडा, दालें और मुनासिब मात्रा में गोश्त जैसी मुतवाज़िन ग़िज़ा लें। पानी पर्याप्त पिएँ, नींद पूरी करें और हल्की कसरत को मामूल बनाएँ।
⚠️ किसी भी माजून, ख़मीरा या हर्बल दवा का इस्तेमाल माहिर हकीम या मुसद्दक़ डॉक्टर के मशवरे के बग़ैर न करें।
याद रखिए—उम्र बढ़ना कमज़ोरी की सज़ा नहीं; बदन के इशारों को समझना और वक़्त पर तश्ख़ीस कराना ही असल दानाई है।
🌿 एतिदाल रखिए, सेहत सँवारिए—क्योंकि क़ुव्वत सिर्फ़ जिस्म में नहीं, सही रवैये में भी होती है।
#हेल्थ_वेलनेस_सब्जियों #हिकमत

🍽️ बाज़ार सिर्फ़ भूख से नहीं, समाज की बनावट से भी बनते हैंअक्सर देखने में आता है कि कुछ इलाकों में होटल, ढाबे, मिठाई, स्...
03/08/2026

🍽️ बाज़ार सिर्फ़ भूख से नहीं, समाज की बनावट से भी बनते हैं
अक्सर देखने में आता है कि कुछ इलाकों में होटल, ढाबे, मिठाई, स्नैक्स और स्ट्रीट फूड की भरमार होती है, जबकि कुछ रिहायशी क्षेत्रों में ऐसी दुकानें बहुत कम दिखाई देती हैं। इसका कारण केवल धर्म नहीं, बल्कि आर्थिक, सांस्कृतिक और शहरी नियोजन भी होता है।
जहाँ बाज़ार, किरायेदार, छात्र, यात्री और देर रात तक आवाजाही होती है, वहाँ खाने-पीने का कारोबार स्वाभाविक रूप से अधिक फलता-फूलता है। वहीं जिन इलाकों में बड़े प्लॉट, कम व्यावसायिक गतिविधि, सख़्त रिहायशी नियम और घर पर भोजन की परंपरा अधिक होती है, वहाँ ऐसी दुकानें कम विकसित होती हैं।
व्यापारी भी वहीं निवेश करता है जहाँ ग्राहक, आवाजाही और कमाई की संभावना अधिक हो। इसलिए किसी क्षेत्र की बाज़ार संस्कृति को केवल धर्म या जाति से जोड़कर नहीं देखा जा सकता।
बाज़ार की असली भाषा जाति या मज़हब नहीं, बल्कि माँग, पहुँच और अवसर होती है। ✍️ राव असगर

जरूरी नहीं ब्रांडेड दवाएं ही काम करती हो।                 इलाज की दुनिया में “फाइनल सच” नहीं, सिर्फ़ “बेहतर फैसला”  बेहत...
02/08/2026

जरूरी नहीं ब्रांडेड दवाएं ही काम करती हो। इलाज की दुनिया में “फाइनल सच” नहीं, सिर्फ़ “बेहतर फैसला” बेहतर रिज़ल्ट शुमार होता है।
हर मरीज अलग, हर बॉडी अलग, हर रिस्पॉन्स अलग — इसलिए बात सच में अंतहीन लगती है।
लेकिन एक छोटी सी workable लाइन रख लीजिए 👇
👉 जहाँ शक हो — patient का response ही असली कसौटी है। जी हकीम साहब आपकी दवा से मुझे आराम है यह जुमला आपने में बहुत कुछ कह जाता है।
👉 जहाँ stability जरूरी हो — consistency को तरजीह दें।
👉 जहाँ affordability issue हो — reliable generic काफी है। जरूरी नहीं ब्रेडेड दवाएं ही काम करती है, यूनानी, आयुर्वेदिक दवाओं की मैनिफेचरिंग में मझोली दवासाज कंपनियों की दवाओ के रीजल्ट भी बेहतर रहते है। उनका क्लीनिकल उपयोग भी बेहतर है।
बस… यही तीन उसूल 90% confusion खत्म कर देते हैं।

इल्म का दरिया सच में गहरा है — और हकीम वही जो तैरना सीख जाए, गहराई नापने में न उलझे। 💯

18/07/2026

नमस्ते, आदाब दोस्तों

🌿 इंटीग्रेटेड हेल्थ केयर सिस्टम : स्वस्थ भारत की सशक्त आधारशिला।"दवा की ताक़त अपनी जगह, परहेज़ की अहमियत अपनी जगह। जो इल...
18/07/2026

🌿 इंटीग्रेटेड हेल्थ केयर सिस्टम : स्वस्थ भारत की सशक्त आधारशिला।

"दवा की ताक़त अपनी जगह, परहेज़ की अहमियत अपनी जगह। जो इलाज़ इंसान को बीमार होने से बचा ले, वही सबसे बड़ा इलाज़ है। हस्पताल बढ़ाना ज़रूरी है, मगर उससे भी ज़्यादा ज़रूरी है स्वस्थ समाज बनाना। 🌿
"
Writing
🌿
जब हम यूनानी, आयुर्वेद और आधुनिक चिकित्सा पद्धति के समन्वित (Integrated) स्वास्थ्य मॉडल का अध्ययन करते हैं, तो स्पष्ट होता है कि प्रत्येक प्रणाली की अपनी विशिष्ट उपयोगिता है। स्वस्थ समाज के निर्माण के लिए रोगों की रोकथाम, समय पर उपचार, संतुलित जीवनशैली और वैज्ञानिक दृष्टिकोण—सभी का संतुलित समन्वय आवश्यक है।
अच्छे स्वास्थ्य की नींव स्वच्छ एवं प्रदूषण-मुक्त वातावरण, संतुलित एवं पौष्टिक आहार, नियमित व्यायाम, स्वास्थ्य शिक्षा और आवश्यक परहेज़ पर आधारित होती है। जब बच्चों को पर्याप्त पोषण नहीं मिलता, तो कुपोषण केवल स्वास्थ्य की समस्या नहीं रह जाता, बल्कि सामाजिक और आर्थिक विकास की चुनौती भी बन जाता है।
भारत जैसे विशाल देश की बड़ी आबादी को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएँ उपलब्ध कराना सरकार की संवैधानिक और सामाजिक ज़िम्मेदारी है। विकसित भारत का सपना तभी साकार होगा, जब स्वास्थ्य शिक्षा और जन-जागरूकता को प्राथमिकता दी जाएगी।
आयुर्वेद और यूनानी चिकित्सा पद्धतियों के विकास के लिए आधुनिक वैज्ञानिक अनुसंधान, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और साक्ष्य-आधारित अध्ययन को प्रोत्साहन देना होगा। साथ ही औषधीय पौधों की खेती करने वाले किसानों को प्रशिक्षण, उचित मूल्य, आसान ऋण और सुरक्षित भंडारण की सुविधाएँ उपलब्ध करानी होंगी।
स्थानीय स्तर पर प्रशिक्षित वैद्य, हकीम, अत्तार, फार्मासिस्ट और वैज्ञानिकों के सहयोग से लघु एवं कुटीर औषधीय उद्योगों को बढ़ावा दिया जा सकता है। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नई ऊर्जा मिलेगी और औषधीय जड़ी बूटियों के उत्पादन व इनसे बने उत्पादों की गुणवत्ता में भी सुधार होगा।
आयुष संस्थानों में आधुनिक प्रयोगशालाएँ, अद्यतन पाठ्यक्रम, अनुसंधान सुविधाएँ तथा उच्च स्तरीय शिक्षण एवं प्रशिक्षण की व्यवस्था समय की आवश्यकता है। आयुष और आधुनिक चिकित्सा के बीच समन्वय, परस्पर सम्मान और वैज्ञानिक सहयोग से स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है।
स्वास्थ्य जागरूकता के लिए पोस्टर, चार्ट, स्वास्थ्य मेले, संगोष्ठियाँ, विद्यालयी प्रतियोगिताएँ, जन-जागरूकता रैलियाँ तथा डिजिटल माध्यमों का व्यापक उपयोग किया जाना चाहिए। स्वच्छता, पोषण, टीकाकरण, जीवनशैली और रोग-निवारण संबंधी जानकारी प्रत्येक नागरिक तक पहुँचना आवश्यक है।
स्वस्थ भारत का निर्माण किसी एक चिकित्सा पद्धति से नहीं, बल्कि वैज्ञानिक सोच, जन-जागरूकता और सभी उपयोगी स्वास्थ्य प्रणालियों के संतुलित समन्वय से होगा।
"इलाज से बेहतर परहेज़, और परहेज़ से बेहतर स्वास्थ्य-जागरूकता।"
— राव असगर
(यूनानी चिकित्सक)

17/07/2026

🔥 चिरपरिचित अंदाज़ का कैप्शन:
"दवा की ताक़त अपनी जगह, परहेज़ की अहमियत अपनी जगह। जो इलाज़ इंसान को बीमार होने से बचा ले, वही सबसे बड़ा इलाज़ है। हस्पताल बढ़ाना ज़रूरी है, मगर उससे भी ज़्यादा ज़रूरी है स्वस्थ समाज बनाना। 🌿
"

 #हेल्थ_वेलनेस_सब्जियों का  #बरसात में प्रयोग बरसात में सब्जियों का सावधानी से प्रयोगतासीर के हिसाब से कुछ सब्जियां जल्द...
10/07/2026

#हेल्थ_वेलनेस_सब्जियों का #बरसात में प्रयोग
बरसात में सब्जियों का सावधानी से प्रयोग
तासीर के हिसाब से कुछ सब्जियां जल्दी और कुछ देर से हजम होती है। निम्न कुछ प्रमुख सब्जियों को अच्छी तरह से धोकर और साफ कर, साथ ही उबाल कर, पेस्टाइज से कीचड़_मिट्टी, के साथ आए कीटाणुओं से पाक साफ कर इस्तिमाल करे।
प्रचलित मुख्य सब्जियों में परवल, मशरूम, बैगन, बथुआ, भिंडी, मूली, पालक, चने,बथवे का साग गोभी व पत्ता गोभी आदि सब्जियां प्राय हर रोज इस्तेमाल की जाती है।
Rao Asgar Unani physician saharanpur

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