Dr.Rajesh Gupta Ayurvedaacharya Sirsa

Dr.Rajesh Gupta Ayurvedaacharya Sirsa All Heath Problems Are Treated Through Ayurveda Pathy

28/06/2025

लगभग 50% आबादी में पाए जाने वाला बवासीर नामक यह रोग बहुत ही कष्टसाध्य है l

बवासीर के लक्षण :-

1) गुदा में खुजली, लाली या सूजन ।
2) गुदा में कैंची काटने जैसी वेदना अर्थात दर्द का अनुभव होना ।
3) गुदा में गांठ का अनुभव होना ।
4) बैठने पर गुदा पर दवाब पढ़ना तथा दर्द होना ‌।
5) शौच के वक्त रक्त निकालना ।
6) हर समय मल त्याग की अनुभूति रहना।
7) गुदा मार्ग से संक्रमित तरल अर्थात पस निकलना ।

बवासीर के प्रकार :-
बवासीर दो प्रकार की होती है

1 खूनी बवासीर :-
जिसमें मल त्याग के बाद गाढ़ा रक्त गुदा मार्ग से गिरता है ।
2 वादी बवासीर :-
इसमें मांस के छोटे-छोटे मस्से अंगूरों की तरह गुदा मार्ग से बाहर निकल आते हैं ।

इसकी चिकित्सा में निम्नलिखित बिंदु सहायक हो सकते हैं :-
1) कब्ज न रहने दे इसके लिए सुबह त्रिफला चूर्ण आधा चम्मच गुनगुने पानी में लें या फिर एक बड़ा चम्मच गुलकंद खाएं ।
2) रात्रि में सोते समय 10 ml से 15 ml एरंड तेल दूध के साथ लें ।
3) भोजन से पहले छोटी हरड़ का चूर्ण 6 ग्राम, 10 ग्राम गुड़ के साथ मिलाकर खाएं ।
4) लवण भास्कर चूर्ण 2 ग्राम सुबह 2 ग्राम शाम को मट्ठे के साथ लें ।

यह सभी उपाय अपनी प्रकृति (वात -पित्त- कफ) को भलीभांति जानकर करें ।
अगर फिर भी रोग ठीक नहीं हो रहा तो हमसे संपर्क करें

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16/07/2022

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06/01/2019

*डर लगता है*

*आमाशय* को डर लगता है जब आप सुबह का नाश्ता नहीं करते हैं।

*किडनी* को डर लगता है जब आप 24 घण्टों में 10 गिलास पानी भी नहीं पीते।

*गाल ब्लेडर* को डर लगता है जब आप 10 बजे रात तक भी सोते नहीं और सूर्योदय तक उठते नहीं हैं।

*छोटी आँत* को डर लगता है जब आप ठंडा और बासी भोजन खाते हैं।

*बड़ी आँतों* को डर लगता है जब आप तैलीय मसालेदार मांसाहारी भोजन करते हैं।

*फेफड़ों* को डर लगता है जब आप सिगरेट और बीड़ी के धुएं, गंदगी और प्रदूषित वातावरण में सांस लेते है।

*लीवर* को डर लगता है जब आप भारी तला भोजन, जंक और फ़ास्ट फ़ूड खाते है।

*हृदय* को डर लगता है जब आप ज्यादा नमक और केलोस्ट्रोल वाला भोजन करते है।

*पैनक्रियाज* को डर लगता है जब आप स्वाद और फ्री के चक्कर में अधिक मीठा खाते हैं।

*आँखों* को डर लगता है जब आप अंधेरे में मोबाइल और कंप्यूटर के स्क्रीन की लाइट में काम करते है।

और

*मस्तिष्क* को डर लगता है जब आप नकारात्मक चिन्तन करते हैं।

आप अपने तन के कलपुर्जों का पूरा- पूरा ख्याल रखें और इन्हें मत डरायें ।

ये सभी कलपुर्जे बाजार में उपलब्ध नहीं हैं। जो उपलब्ध हैं वे बहुत महँगे हैं और शायद आपके शरीर में एडजस्ट भी न हो सकें। इसलिए अपने शरीर के कलपुर्जों को स्वस्थ रखे।

*क्लींज़िंग करो और स्वस्थ रहो।*
*प्राकृतिक खाओ पियो-मस्त रहो।।*

डा. राजेश गुप्ता

23/12/2018

ॐ कैसे है स्वास्थ्यवर्द्धक
आईए जाने:-

1. ॐ और थायराॅयडः-
ॐ का उच्‍चारण करने से गले में कंपन पैदा होती है जो थायरायड ग्रंथि पर सकारात्मक प्रभाव डालता है।

2. ॐ और घबराहटः-
अगर आपको घबराहट या अधीरता होती है तो ॐ के उच्चारण से उत्तम कुछ भी नहीं।

3. ॐ और तनावः-
यह शरीर के विषैले तत्त्वों को दूर करता है, अर्थात तनाव के कारण पैदा होने वाले द्रव्यों पर नियंत्रण करता है।

4. ॐ और खून का प्रवाहः-
यह हृदय और ख़ून के प्रवाह को संतुलित रखता है।

5. ॐ और पाचनः-
ॐ के उच्चारण से पाचन शक्ति तेज़ होती है।

6. ॐ लाए स्फूर्तिः-
इससे शरीर में फिर से युवावस्था वाली स्फूर्ति का संचार होता है।

7. ॐ और थकान:-
थकान से बचाने के लिए इससे उत्तम उपाय कुछ और नहीं।

8. ॐ और नींदः-
नींद न आने की समस्या इससे कुछ ही समय में दूर हो जाती है। रात को सोते समय नींद आने तक मन में इसको करने से निश्चिंत नींद आएगी।

9. ॐ और फेफड़े:-
कुछ विशेष प्राणायाम के साथ इसे करने से फेफड़ों में मज़बूती आती है।

10. ॐ और रीढ़ की हड्डी:-
ॐ के पहले शब्‍द का उच्‍चारण करने से कंपन पैदा होती है। इन कंपन से रीढ़ की हड्डी प्रभावित होती है और इसकी क्षमता बढ़ जाती है।

11. ॐ दूर करे तनावः-
ॐ का उच्चारण करने से पूरा शरीर तनाव-रहित हो जाता है।

15/04/2018

*नाभी कुदरत की एक अद्भुत देन है*

एक 62 वर्ष के बुजुर्ग को अचानक बांई आँख से कम दिखना शुरू हो गया। खासकर रात को नजर न के बराबर होने लगी।जाँच करने से यह निष्कर्ष निकला कि उनकी आँखे ठीक है परंतु बांई आँख की रक्त नलीयाँ सूख रही પરંતુ है। रिपोर्ट में यह सामने आया कि अब वो जीवन भर देख नहीं पायेंगे।.... मित्रो यह सम्भव नहीं है..

मित्रों हमारा शरीर परमात्मा की अद्भुत देन है...गर्भ की उत्पत्ति नाभी के पीछे होती है और उसको माता के साथ जुडी हुई नाडी से पोषण मिलता है અને और इसलिए मृत्यु के तीन घंटे तक नाभी गर्म रहती है।

गर्भधारण के नौ महीनों अर्थात 270 दिन बाद एक सम्पूर्ण बाल स्वरूप बनता है। नाभी के द्वारा सभी नसों का जुडाव गर्भ के साथ होता है। इसलिए नाभी एक अद्भुत भाग है।

नाभी के पीछे की ओर पेचूटी या navel button होता है।जिसमें 72000 से भी अधिक रक्त धमनियां स्थित होती है।अगर सारी धमनियों को जोड़ा जाए तो उनकी लम्बाई इतनी हो जायेगी कि पृथ्वी के गोलाई पर दो बार लपेटा जा सके।

नाभी में गाय का शुध्द घी या तेल लगाने से बहुत सारी शारीरिक दुर्बलता का उपाय हो सकता है।

1. आँखों का शुष्क हो जाना, नजर कमजोर हो जाना, चमकदार त्वचा और बालों के लिये उपाय...

सोने से पहले 3 से 7 बूँदें शुध्द घी और नारियल के तेल नाभी में डालें और नाभी के आसपास डेढ ईंच गोलाई में फैला देवें।

2. घुटने के दर्द में उपाय

सोने से पहले तीन से सात बूंद इरंडी का तेल नाभी में डालें और उसके आसपास डेढ ईंच में फैला देवें।

3. शरीर में कमपन्न तथा जोड़ोँ में दर्द और शुष्क त्वचा के लिए उपाय :-
रात को सोने से पहले तीन से सात बूंद राई या सरसों कि तेल नाभी में डालें और उसके
चारों ओर डेढ ईंच में फैला देवें।

4. मुँह और गाल पर होने वाले पिम्पल के लिए उपाय:-

नीम का तेल तीन से सात बूंद नाभी में उपरोक्त तरीके से डालें।

*नाभी में तेल डालने का कारण*

हमारी नाभी को मालूम रहता है कि हमारी कौनसी रक्तवाहिनी सूख रही है,इसलिए वो उसी धमनी में तेल का प्रवाह कर देती है।

जब बालक छोटा होता है और उसका पेट दुखता है तब हम हिंग और पानी या तैल का मिश्रण उसके पेट और नाभी के आसपास लगाते थे और उसका दर्द तुरंत गायब हो जाता था।बस यही काम है तेल का।

*घी और तेल नाभी में डालते समय ड्रापर का प्रयोग करें,

13/03/2018

🕉शरीर को अल्कलाइन बनाये 👍

मधुमेह जाग्रति अभियान याने जीवनशैली में परिवर्तन और उसी सन्दर्भ में शरीर की एसिडिक कंडीशन को अल्कलाइन में बदलने से अनेक रोग से मुक्ति मिल जाती है आज उसी सन्दर्भ में महत्चपूर्ण जानकारी शेयर कर रहे है जो सभी को अपनाना चाहिए
🍓 *शरीर को कर लो Alkaline हार्ट कैंसर किडनी थाइरोइड शुगर आर्थराइटिस सोरायसिस भी पास नहीं फटकेगा।*

💬 कोई भी रोग हो चाहे के कैंसर भी Alkaline वातावरण में पनप नहीं सकता – *डॉक्टर Otto Warburg,* नोबेल पुरस्कार विजेता, 1931.

💬 *“No Disease including cancer, can exist in an alkaline envioronment” Dr. Otto Warburg – Noble Prize Winner 1931*

➡ *_दोस्तों कई दिनों से हम सोच रहे थे के हम आपको एक ऐसी चीज बताएं जिस से के आपके शरीर के सभी रोग स्वतः ही समाप्त हो जाए,_*--- जैसे :

डायबिटीज, कैंसर, हार्ट, ब्लड प्रेशर, जोड़ों का दर्द, UTI – पेशाब के रोग, Osteoporosis, सोरायसिस, यूरिक एसिड का बढ़ना, गठिया – Gout, थाइरोइड, गैस, बदहजमी, दस्त, हैजा, थकान, किडनी के रोग, पेशाब सम्बंधित रोग, पत्थरी और अन्य कई प्रकार के जटिल रोग। इन सबको सही करने का सबसे सही और सस्ता उपयोग है शरीर को एल्कलाइन कर लेना।

🌿 *पहले तो जानिए पी एच लेवल क्या है?*

इसको समझने के लिए सबसे पहले आपको PH को समझना होगा, हमारे शरीर में अलग अलग तरह के द्रव्य पाए जाते हैं, उन सबकी PH अलग अलग होती है,

हमारे शरीर की सामान्य *Ph 7.35 से 7.41* तक होती है,

PH पैमाने में PH 1 से 14 तक होती है, 7 PH न्यूट्रल मानी जाती है, यानी ना एसिडिक और ना ही एल्कलाइन। 7 से 1 की तरफ ये जाती है तो समझो *एसिडिटी* यानी *अम्लता* बढ़ रही है, और 7 से 14 की तरफ जाएगी तो *Alkalinity* यानी *क्षारीयता* बढ़ रही है।

अगर हम अपने शरीर के अन्दर पाए जाने वाले विभिन्न द्रव्यों की PH को Alkaline की तरफ लेकर जाते हैं। तो हम बहुत सारी बीमारियों के मूल कारण को हटा सकते हैं, और उनको हमेशा के लिए Cure कर सकते हैं।

📍 *Cancer and PH – कैंसर*

*उदहारण के तौर पर सभी तरह के कैंसर सिर्फ Acidic Environment में ही पनपते हैं।*
क्यूंकि कैंसर की कोशिका में शुगर का ऑक्सीजन की अनुपस्थिति में Fermentation होता है जिससे अंतिम उत्पाद के रूप में लैक्टिक एसिड बनता है और यही लैक्टिक एसिड Acidic Environment पैदा करता है जिस से वहां पर एसिडिटी बढती जाती है और कैंसर की ग्रोथ बढती जाती है। और ये हम सभी जानते हैं के कैंसर होने का मूल कारण यही है के कोशिकाओं में ऑक्सीजन बहुत कम मात्रा में और ना के बराबर पहुँचता है। और वहां पर मौजूद ग्लूकोस लैक्टिक एसिड में बदलना शुरू हो जाता है।

🔺 *Gout and PH – गठिया*

*दूसरा उदहारण है*-- Gout जिसको गठिया भी कहते हैं, इसमें रक्त में *यूरिक एसिड* की मात्रा बढ़ जाती है, जिससे रक्त एसिडिक होना शुरू हो जाता है, जितना ब्लड अधिक एसिडिक होगा उतना ही यूरिक एसिड उसमे ज्यादा जमा होना शुरू हो जायेगा। अगर हम ऐसी डाइट खाएं जिससे हमारा पेशाब Alkaline हो जाए तो ये बढ़ा हुआ यूरिक एसिड Alkaline Urine में आसानी से बाहर निकल जायेगा।

🔹 *UTI and PH – पेशाब का संक्रमण*

*तीसरा उदहारण है* -- UTI जिसको Urinary tract infection कहते हैं, इसमें मुख्य रोग कारक जो बैक्टीरिया है वो E.Coli है, ये बैक्टीरिया एसिडिक वातावरण में ही ज्यादा पनपता है। इसके अलावा Candida Albicanes नामक फंगस भी एसिडिक वातावरण में ही ज्यादा पनपता है। इसीलिए UTI तभी होते हैं जब पेशाब की PH अधिक एसिडिक हो।

🔸 *Kidney and PH – किडनी*

*चौथी एक और उदाहरण देते हैं*--- किडनी की समस्या मुख्यतः एसिडिक वातावरण में ही होती है, अगर किडनी का PH हम एल्कलाइन कर देंगे तो किडनी से सम्बंधित कोई भी रोग नहीं होगा। मसलन क्रिएटिनिन, यूरिक एसिड, पत्थरी इत्यादि समस्याएँ जो भी किडनी से सम्बंधित हैं वो नहीं होंगी।

*वर्तमान स्थिति*
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आजकल हम जो भी भोजन कर रहें हैं वो *90 प्रतिशत* तक एसिडिक ही है, और फिर हमारा सवाल होता है कि हम सही क्यों नहीं हो रहे ? या फिर कहते हैं कि हमने ढेरों इलाज करवाए मगर आराम अभी तक नहीं आया। बहुत दवा खायी मगर फिर भी आराम नहीं हो रहा। तो उन सबका मुख्यः कारण यही है के उनका PH लेवल कम हो जाना अर्थात एसिडिक हो जाना।

*_आज हम इसी विषय पर बात करेंगे कि कैसे हम अपना PH level बढ़ाएं और इन बिमारियों से मुक्ति पायें।_*

*कैसे बढ़ाएं PH level ? --*

इन सभी Alkaline क्षारीय खाद्य पदार्थो का सेवन नित्य करिये...

🍎फल –* सेब, खुबानी, ऐवोकैडो, केले, जामुन, चेरी, खजूर, अंजीर, अंगूर, अमरुद, नींबू, आम, जैतून, नारंगी, संतरा, पपीता, आड़ू, नाशपाती, अनानास, अनार, खरबूजे, किशमिश, इमली, टमाटर इत्यादि फल।

🌿- इसके अलावा तुलसी, सेंधा नमक, अजवायन, दालचीनी, बाजरा इत्यादि।

*मुख्य बात --:* आज सभी घरों में कंपनियों का पैकेट वाला आयोडीन सफेद नमक प्रयोग हो रहा है, ये धीमा ज़हर है, यह अम्लीय(acidic) होता है और इसमें सामान्य से आयोडीन की अधिक मात्रा भी होती है, जो अत्यंत घातक है शरीर के लिए। इस नमक से हृदय रोग, थाइरोइड, कैंसर, लकवा, नपुंसकता, मोटापा, एसिडिटी, मधुमेह, किडनी रोग, लिवर रोग,बाल झड़ना, दृष्टि कम होना जैसे अनेको रोग काम आयु से बड़े आयु तक के सभी घर के सदस्यों को हो रहे हैं। जो पैकेट नमक के प्रयोग से पूर्व कभी नही होते थे। इसलिए आयोडीन की कमी का झूठ फैलाकर बीमारी का सामान हर घर तक पहुंचाया गया, जिसने दवाइयों के कारोबार को अरबो, खरबो का लाभ पहुंचाया है।
इसके विकल्प के रूप में आज से ही *सेंधा नमक* का प्रयोग शुरू कर दीजिए। यह पूरी तरह से प्राकृतिक और क्षारीय (Alkaline) होता है और आयोडीन भी सामान्य मात्रा में होता है। अन्यथा आपके सारे उपचार असफल सिद्ध होते रहेंगे, क्योंकि हर भोजन को सफेद नमक ज़हरीला बना देगा, चाहे कितनी अच्छी सब्जी क्यों न बनाएं आप।

🗑 *AlkaLine Water बनाने की विधि*

रोगी हो या स्वस्थ उसको यहाँ बताया गया ये *Alkaline Water* ज़रूर पीना है।

*इसके लिए ज़रूरी क्षारीय सामान –―*

1 निम्बू,
25 ग्राम खीरा,
5 ग्राम अदरक,
21 पोदीने की पत्तियां,
21 पत्ते तुलसी,
आधा चम्मच सेंधा नमक,
चुटकी भर मीठा सोडा।

अभी इन सभी चीजों को लेकर पहले छोटे छोटे टुकड़ों में काट लीजिये, निम्बू छिलके सहित काटने की कोशिश करें। एक कांच के बर्तन में इन सब चीजों को डाल दीजिये और इसमें डेढ़ गिलास पानी डाल दीजिये, पूरी रात इस पानी को ढक कर पड़ा रहने दें। और सुबह उठ कर शौच वगैरह जाने के बाद खाली पेट सब से पहले इसी को छान कर पीना है। छानने से पहले इन सभी चीजों को हाथों से अच्छे से मसल लीजिये और फिर इसको छान कर पीजिये। फिर चमत्कार होते देखिए।

🥛 *Alkaline के लिए दूसरी विधि*

1 लौकी जिसे दूधी भी कहा जाता हैं का जूस एक गिलास इसमें 5-5 पत्ते तुलसी और पोदीने के डालिए इसमें सेंधा नमक या काला नमक डाल कर पियें।

👁‍🗨 *ध्यान रहे* --- कि इनको सुबह खाली पेट ही पीना है, अर्थात इनसे पहले कुछ भी खाना पीना नहीं है और इनको पीने के बाद एक घंटे तक कुछ भी खाना पीना नहीं है।

*सावधानी---* चाय, कॉफ़ी, चीनी , पैकेट वाला सफेद नमक ये सब ज़हर के समान है, अगर आप किसी रोग से ग्रस्त हैं तो सबसे पहले आपको इनको छोड़ना होगा, और इसके साथ ऊपर बताये गए फल सब्जियां कच्चे ही सेवन करें।

13/11/2017

किस रोग में कौन सा आसन करे
👉🏻 पेट की बिमारियों में- उत्तानपादासन, पवनमुक्तासन, वज्रासन, योगमुद्रासन, भुजंगासन, मत्स्यासन।
👉🏻 सिर की बिमारियों में- सर्वांगासन, शीर्षासन, चन्द्रासन।
👉🏻 मधुमेह- पश्चिमोत्तानासन, नौकासन, वज्रासन, भुजंगासन, हलासन, शीर्षासन।
👉🏻 वीर्यदोष– सर्वांगासन, वज्रासन, योगमुद्रा।
👉🏻 गला- सुप्तवज्रासन, भुजंगासन, चन्द्रासन।
👉🏻 आंखें- सर्वांगासन, शीर्षासन, भुजंगासन।
👉🏻 गठिया– पवनमुक्तासन, पद्ïमासन, सुप्तवज्रासन, मत्स्यासन, उष्ट्रासन।
👉🏻 नाभि- धनुरासन, नाभि-आसन, भुजंगासन।
👉🏻 गर्भाशय– उत्तानपादासन, भुजंगासन, सर्वांगासन, ताड़ासन, चन्द्रानमस्कारासन।
👉🏻 कमर दर्द – हलासन, चक्रासन, धनुरासन, भुजंगासन।
👉🏻 फेफड़े- वज्रासन, मत्स्यासन, सर्वांगासन।
👉🏻 यकृत- लतासन, पवनमुक्तासन, यानासन।
👉🏻 गुदा,बवासीर,भंगदर आदि में- उत्तानपादासन, सर्वांगासन, जानुशिरासन, यानासन।
👉🏻 दमा- सुप्तवज्रासन, मत्स्यासन, भुजंगासन।
👉🏻 अनिद्रा- शीर्षासन, सर्वांगासन, हलासन, योगमुद्रासन।
👉🏻 गैस– पवनमुक्तासन, जानुशिरासन, योगमुद्रा, वज्रासन।
👉🏻 जुकाम– सर्वांगासन, हलासन, शीर्षासन।
👉🏻 मानसिक शांति के लिए– सिद्धासन, योगासन, शतुरमुर्गासन, खगासन योगमुद्रासन।
👉🏻 रीढ़ की हड्डी के लिए- सर्पासन, पवनमुक्तासन, सर्वांगासन, शतुरमुर्गासन करें।
👉🏻 गठिया के लिए- पवनमुक्तासन, साइकिल संचालन, ताड़ासन किया करें।
👉🏻 गुर्दे की बीमारी में– सर्वांगासन, हलासन, वज्रासन, पवनमुक्तासन करें।
👉🏻 गले के लिए- सर्पासन, सर्वांगासन, हलासन, योगमुद्रा करें।
👉🏻 हृदय रोग के लिए- शवासन, साइकिल संचालन, सिद्धासन किया करें।
👉🏻 दमा के लिए- सुप्तवज्रासन, सर्पासन, सर्वांगासन, पवनतुक्तासन, उष्ट्रासन करें।
👉🏻 रक्तचाप के लिए– योगमुद्रासन, सिद्धासन, शवासन, शक्तिसंचालन क्रिया करें।
👉🏻 सिर दर्द के लिए- सर्वांगासन, सर्पासन, वज्रासन, धनुरासन, शतुरमुर्गासन करें।
👉🏻 पाचन शक्ति बढ़ाने के लिए- यानासन, नाभि आसन, सर्वांगासन, वज्रासन करें।
👉🏻 मधुमेह के लिए- मत्स्यासन, सुप्तवज्रासन, योगमुद्रासन, हलासन, सर्वांगासन, उत्तानपादासन करें।
👉🏻 मोटापा घटाने के लिए– पवनमुक्तासन, सर्वांगासन, सर्पासन, वज्रासन, नाभि आसन करें।
👉🏻 आंखों के लिए- सर्वांगासन, सर्पासन, वज्रासन, धनुरासन, चक्रासन करें।
👉🏻 बालों के लिए– सर्वांगासन, सर्पासन, शतुरमुर्गासन, वज्रासन करें।
👉🏻 प्लीहा के लिए- सर्वांगासन, हलासन, नाभि आसन, यानासन करें।
👉🏻 कमर के लिए– सर्पासन, पवनमुक्तासन, सर्वांगासन, वज्रासन, योगमुद्रासन करें।
👉🏻 कद बड़ा करने के लिए- ताड़ासन, शक्ति संचालन, धनुरासन, चक्रासन, नाभि आसन करें।
👉🏻 कानों के लिए– सर्वांगासन, सर्पासन, धनुरासन, चक्रासन करें।
👉🏻 नींद के लिए– सर्वांगासन, सर्पासन, सुप्तवज्रासन, योगमुद्रासन, नाभि आसन करें।

05/11/2017
26/10/2017

*15 FACTS ABOUT VITAMIN D*

Vitamin D prevents Osteoporosis,
Depression,
Prostate cancer,
Breast cancer
and even effects -
Dabetes & Obesity..

Vitamin D is perhaps the single most *underrated nutrient* in the world of nutrition.

That's probably because it's free....
Your body makes it when sunlight touches your skin !!

Drug companies can't sell you sunlight, so there's no promotion of its health benefits..

The truth is, most people don't know the real story on
*vitamin D and health.*
So here's an overview taken from an interview between Mike Adams and *Dr.Michael Holick*.

◆ 1. Vitamin D is *produced by your skin* in response to exposure to ultraviolet radiation *from natural sunlight*.

◆ 2. The healing rays of natural sunlight (that generate vitamin D in your skin) *cannot pe*****te glass*.
So you don't generate vitamin D when sitting in your car or home.

◆ 3. It is nearly impossible to get adequate amounts of vitamin D from your diet. *Sunlight exposure is the only reliable way* to generate vitamin D in your own body.

◆ 4. A person would have to drink *ten tall glasses* of vitamin D fortified milk each day just to get minimum levels of vitamin D into their diet.

◆ 5. The further you live from the equator, the longer exposure you need to the sun in order to generate vitamin D. Canada, the UK and most U.S. States are far from the equator.

◆ 6. People with dark skin pigmentation may need 20 - 30 times as much exposure to sunlight as fair-skinned people to generate the same amount of vitamin D.
That's why prostate cancer is epidemic among black men -- it's a simple, but widespread, sunlight deficiency.

◆ 7. Sufficient levels of vitamin D are *crucial for calcium absorption* in your intestines. Without sufficient vitamin D, your body cannot absorb calcium, rendering calcium supplements useless.

◆ 8. Chronic vitamin D *deficiency cannot be reversed overnight*: it takes months of vitamin D supplementation and sunlight exposure to rebuild the body's bones and nervous system.

◆ 9. Even weak *sunscreens (SPF=8) block* your body's ability to generate vitamin D by 95%. This is how sunscreen products actually cause disease -by creating a critical vitamin deficiency in the body.

◆ 10. It is impossible to generate too much vitamin D in your body from sunlight exposure: your body will self-regulate and only generate what it needs.

◆ 11. If it hurts to press firmly on your sternum(chest/breast bone), you may be suffering from chronic vitamin D deficiency right now.

◆ 12. Vitamin D is "activated" in your body by your *kidneys and liver* before it can be used.

◆ 13. Having kidney disease or liver damage can greatly impair your body's ability to activate circulating vitamin D.

◆ 14. The sunscreen industry doesn't want you to know that your body actually needs sunlight exposure because that realization would mean lower sales of sunscreen products.

◆ 15. Even though vitamin D is one of the *most powerful healing chemicals in your body*, your body makes it absolutely free. No prescription required.

~ Other powerful *antioxidants* with this ability include the
super fruits like Pomegranates (POM Wonderful juice),
Acai, Blueberries, etc.

~ Diseases and conditions cause by vitamin D deficiency:

● Osteoporosis is commonly caused by a lack of vitamin D, which greatly impairs calcium absorption.

● Sufficient vitamin D prevents
prostate cancer,
breast cancer,
ovarian cancer,
depression,
colon cancer and
schizophrenia..

● "Rickets" is the name of a bone-wasting disease caused by vitamin D deficiency.

● Vitamin D deficiency may *exacerbate* type 2 diabetes and impair insulin production in the pancreas.

● Obesity impairs vitamin D utilization in the body, meaning obese people *need twice* as much vitamin D.

● Vitamin D is used around the world to treat *Psoriasis*(a chronic skin disease).

● Vitamin D deficiency can cause ~
schizophrenia.

● Seasonal Affective Disorder is caused by a melatonin imbalance initiated by lack of exposure to sunlight.

● Chronic vitamin D deficiency is often misdiagnosed as *fibromyalgia* because its symptoms are so similar: *muscle weakness, aches and pains*.

● Your risk of developing serious diseases like diabetes and cancer is *reduced 50% - 80%* through simple, sensible exposure to natural *sunlight 2-3 times each week*.

● Infants who receive vitamin D supplementation (2000 units daily) have an *80% reduced risk* of developing *type 1 diabetes* over the next twenty years.


💥 Shocking Vitamin D deficiency statistics:

¶ 32% of doctors and med school students are vitamin D deficient.
¶ 40% of the U.S. population is vitamin D deficient.
¶ 42% of African American women of childbearing age are deficient in vitamin D.
¶ 48% of young girls (9-11 years old) are vitamin D deficient.
¶ Up to 60% of all hospital patients are vitamin D deficient.
¶ 76% of pregnant mothers are severely vitamin D deficient, causing widespread vitamin D deficiencies in their unborn children, which predisposes them to type 1 diabetes, arthritis, multiple sclerosis and schizophrenia later in life. 81% of the children born to these mothers were deficient.
¶ Up to 80% of nursing home patients are
vitamin D deficient❗❗

Great Information with No cost

24/10/2017

*✍🏻प्रश्न :- क्या हवन के माध्यम से बीमारियों की रोकथाम की जा सकती है ?*
*🙏🏻✅उत्तर :- हाँ ! हवन में विशेष प्रकार के पदार्थों की आहुति देने से कई प्रकार के रोग नष्ट होते हैं, इसे आधुनिक विज्ञान की भाषा में यज्ञ चिकित्सा कहते हैं। विश्व के कई देशों में रोगों को दूर करने के लिए यज्ञ चिकित्सा का प्रचलन बढ़ रहा है।*
👉🏻कुछ रोगों के सन्दर्भ में नीचे दिए उपायों को पढ़ें –
✅ *टाइफाईड* – नीम, चिरायता, पितपापडा, त्रिफला सम्भाग शुद्ध गौ घृत मिश्रित आहुति दें
✅ *ज्वरनाशक* – अजवाइन की आहुति हवन में दें
*✅नजला, जुकाम, सिरदर्द* – मुनक्का की आहुति हवन में दें
✅ *नेत्रज्योति वर्धक* – शहद की आहुति हवन में दें
*✅मस्तिष्क बलवर्धक* – शहद व सफ़ेद चन्दन की आहुति दें
*✅वातरोग नाशक* – पिप्पली की आहुति दें
*✅मनोविकार नाशक* – गुग्गल और अपामार्ग की आहुति दें
*✅मानसिक उन्माद नाशक* – सीताफल के बीज एवं जटामासी चूर्ण की आहुति दें
*✅पीलिया नाशक* – देवदारु, चिरायत, नागरमोथा, कुटकी और वायविडग्ग की आहुति दें
*✅मधुमेह नाशक* – गुग्गल, लोभान, जामुन के वृक्ष की छाल और करेला के डंठल संभाग की आहुति दें
✅ *चित्त भ्रम नाशक* – कचूर, खस, नागरमोथा महुआ, सफ़ेद चन्दन, गुग्गल, अगर, बड़ी इलायची, नरवी और शहद की आहुति दें
✅ *क्षय नाशक(टी.बी)* – गुग्गल, सफ़ेद चन्दन, गिलोय बांसा का चूर्ण और कपूर की आहुति दें
*✅मलेरिया नाशक* – गुग्गल, लोभान, कपूर, कचूर, हल्दी, दारुहल्दी, अगर, वायविडग्ग, जटामासी, वच, देवदारु, कठु, अजवाइन, नीम पत्ते, समभागचूर्ण, की आहुति दें
✅ *सर्वरोग नाशिनी* – गुग्गल, वच, गंध, नीम पत्ते, आक पत्ते, अगर, राल, देवदारु, छिलका सहित मसूर की आहुति दें
✅ *जोड़ों का दर्द* – निर्गुन्डी के पत्ते, गुग्गल, सफ़ेद सरसों, नीम पत्ते और राल संभाग चूर्ण की आहुति दें
*✅निमोनिया नाशक* – पोहकर मूल, वच, लोभान, गुग्गल और अडूसा संभाग चूर्ण की आहुति दें
✅ *जुकाम नाशक* – खुरासानी अजवाइन, जटामासी, पशमीना कागज, लाल बूरा और संभाग चूर्ण की आहुति दें
*✅पीनस* – बरगद पत्ते, तुलसी पत्ते, नीम पत्ते, वायविडग्ग, सहजने की छाल संभाग चूर्ण में धूप का चूरा मिलाकर आहुति दें
*✅कफ नाशक* – बरगद पत्ते, तुलसी पत्ते, वच, पोहकर मूल, अडूसा पत्र सम्भाग चूर्ण की आहुति दें
✅ *सिर दर्द नाशक* – काले तिल और वायविडग्ग चूर्ण की आहुति दें
*✅चेचक, खसरा नाशक* – गुग्गल, लोभान, नीम पत्ते, गंधक, कपूर, काले तिल और वायविडग्ग चूर्ण की आहुति दें
*✅जिव्हा तालू रोग नाशक* – मुलहटी, देवदारु, गंधाविरोजा, राल, गुग्गल, पीपल, कुलंजन, कपूर और लोभान की आहुति दें
*✅कैंसर नाशक* – गूलर फूल, अशोक छाल, अर्जन छाल, लोध्र, माजूफल, दारुहल्दी, हल्दी, खोपरा, तिल, जौ चिकनी सुपारी, शतावर, काकजंघा, मोचरस, खस, मंजीष्ठ, अनारदाना, सफ़ेद चन्दन, लाल चन्दन, गंधा, विरोजा, नरवी, जामुन पत्ते, धाय के पत्ते सम्भाग चूर्ण में दस गुना शक्कर औ एक गुना केसर से दिन में तीन बार हवन करें !

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