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Amar Homeopathic अमर होम्योपैथिक स्टोर 🌿 | इंसानों के साथ-साथ पशुओं (गाय, भैंस, कुत्ते आदि) के लिए भी असरदार होम्योपैथिक दवाएं उपलब्ध हैं ।

"क्या आपके पशुओं का थनैला रोग (Mastitis) ठीक नहीं हो रहा? 🐄पशुओं की बीमारियों के लिए अब होम्योपैथी है सबसे सुरक्षित और प...
27/08/2026

"क्या आपके पशुओं का थनैला रोग (Mastitis) ठीक नहीं हो रहा? 🐄

पशुओं की बीमारियों के लिए अब होम्योपैथी है सबसे सुरक्षित और पक्का समाधान!

✅ थनैला रोग (Mastitis) का प्रभावी उपचार
✅ दूध की गुणवत्ता और मात्रा में सुधार
✅ बिना किसी साइड इफेक्ट के प्राकृतिक इलाज

महंगी दवाओं और बार-बार होने वाली बीमारियों से अपने पशुओं को बचाएं। अपनी समस्या का समाधान पाने के लिए अभी नीचे दिए गए 'Send Message' बटन पर क्लिक करें और परामर्श लें। 🌿

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25/08/2026

क्या आप जानते हैं कि आयुर्वेद 🌿 की प्रसिद्ध जड़ी-बूटियाँ अब होम्योपैथी में और भी अधिक सुरक्षित और असरदार रूप में उपलब्ध हैं? पूरा वीडियो देखिये 🙏


👉 𝗤𝘂𝗲𝘀𝘁𝗶𝗼𝗻: क्या आप भी बालों के झड़ने से परेशान हैं? 😣आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी, प्रदूषण और गलत खान-पान के कारण बाल झड़...
24/08/2026

👉 𝗤𝘂𝗲𝘀𝘁𝗶𝗼𝗻: क्या आप भी बालों के झड़ने से परेशान हैं? 😣

आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी, प्रदूषण और गलत खान-पान के कारण बाल झड़ना एक आम समस्या बन चुका है। लोग महंगे शैम्पू और तेल बदलते रहते हैं, लेकिन आराम नहीं मिलता।

👉 बाल झड़ने के मुख्य कारण

❌ शरीर में पोषण (Vitamins) की कमी
❌ अत्यधिक मानसिक तनाव (Stress)
❌ पेट की खराबी या गैस की समस्या
❌ डैंड्रफ (रूसी) या स्कैल्प इंफेक्शन

होम्योपैथी क्यों है सबसे बेहतर? 🌿

अंग्रेजी दवाओं के विपरीत, होम्योपैथिक दवाएं बिना किसी साइड इफेक्ट के बाल झड़ने के असली कारण (Root Cause) को ठीक करती हैं। यह आपके बालों को जड़ों से मजबूत बनाती हैं और नए बाल उगाने में मदद करती हैं।

यदि आप भी इस समस्या का स्थाई और सुरक्षित समाधान चाहते हैं, तो आज ही परामर्श करें।

23/08/2026

संस्कृत में “चिरायता” को किराततिक्त (Kiratatikta) कहा गया है। प्राचीन काल में हिमालयी क्षेत्रों में रहने वाली पराक्रमी 'किरात' जनजाति (जिनका उल्लेख महाभारत और पुराणों में आता है) इसका उपयोग औषधीय रूप से करती थी। किरात देश (हिमालय) में उत्पन्न होने और अत्यधिक तिक्त (कड़वा) होने के कारण इसका नाम किराततिक्त पड़ा।

महर्षि चरक और महर्षि सुश्रुत ने चिरायता को तिक्तस्कन्ध (कड़वे द्रव्यों का समूह) और स्तन्यशोधन (स्तन दुग्ध को शुद्ध करने वाले द्रव्य) में रखा।

आयुर्वेद के सुप्रसिद्ध सुदर्शन चूर्ण का यह एक मुख्य घटक है। प्राचीन काल से ही जब भी असाध्य, जीर्ण या विषम ज्वर (बार-बार लौटने वाला बुखार) होता था, चिरायता का काढ़ा मुख्य औषधि माना जाता था।

18वीं और 19वीं सदी में जब ब्रिटिश भारत में आए, तो उन्हें मलेरिया और उष्णकटिबंधीय बुखारों से निपटने के लिए सिनकोना (Cinchona) की कमी महसूस हुई। भारतीय पारंपरिक वैद्यों के ज्ञान से उन्होंने चिरायता को मलेरिया-रोधी और लिवर टॉनिक के रूप में अपनाया।

1839 के आसपास इसे आधिकारिक रूप से पश्चिमी औषधि संहिताओं में शामिल किया गया।

होम्योपैथी में इसे भारतीय वनस्पतियों के औषधीय गुणों के आधार पर मदर टिंचर और डायल्यूशन के रूप में स्थान दिया गया, जहाँ यह यकृत विकारों, मंदाग्नि और दुर्बलता के लिए एक अचूक औषधि बनी।

प्राचीन काल में ग्रामीण और पर्वतीय क्षेत्रों में यह परंपरा रही है कि मौसमी बदलाव और संक्रामक बीमारियों के समय चिरायता की डंडियों को रातभर मिट्टी के कुल्हड़ में भिगोकर सुबह उसका पानी पिया जाता था, जिससे पूरे परिवार की रोग-प्रतिरोधक क्षमता (Immunity) बनी रहती थी और त्वचा रोग नहीं होते थे।

#किराततिक्त #चिरायता

22/08/2026

क्या आप जानते हैं कि प्राचीन लोककथाओं में एकोनाइट (Aconite napellus) को 'जहरों की रानी' कहा जाता था? ☠️

यूनानी पौराणिक कथाओं के अनुसार, यह पौधा पाताल लोक के तीन सिरों वाले कुत्ते 'सर्बेरस' की लार से उत्पन्न हुआ था। सदियों तक इसे युद्ध में तीरों की नोक पर लगाया जाता था। लेकिन डॉ. हैनिमैन ने इसकी असली शक्ति को पहचाना और 'समानता के नियम' के तहत इसे एक जीवन रक्षक औषधि में बदल दिया।

आज होम्योपैथी में एकोनाइट को उन स्थितियों के लिए सबसे भरोसेमंद माना जाता है जो 'तूफान' की तरह अचानक आती हैं—जैसे अचानक ठंड लगना या डर महसूस होना। इतिहास से लेकर उपचार तक, एकोनाइट का सफर वाकई रोमांचक है! 🌿

20/08/2026

🔥 “क्या आपने कभी ऐसी वनस्पति के बारे में सुना है, जिसका बेहद महीन पाउडर आग के संपर्क में आते ही अचानक चमक उठता था?”

“इसी रहस्यमयी गुण के कारण Lycopodium के spores को यूरोप में कभी-कभी ‘Witch’s Flour’ यानी चुड़ैल का आटा जैसे नामों से पुकारा जाता था…”

ये spores इतने महीन और सूखे होते हैं कि हवा में फैलने पर ज्वाला के संपर्क में तेजी से जलते हैं और एक चमकदार flash पैदा करते हैं। 🔥

होम्योपैथी में Lycopodium clavatum का अपना विशिष्ट स्थान है और इसके लक्षणों का वर्णन पुराने होम्योपैथिक साहित्य में विस्तार से मिलता है। विशेष रूप से गैस, पेट फूलना, पाचन संबंधी शिकायतों और थोड़ी मात्रा में भोजन से ही पेट भरने जैसी symptom picture के संदर्भ में इसे जाना जाता है। लेकिन होम्योपैथी में दवा का चुनाव केवल बीमारी के नाम से नहीं, बल्कि व्यक्ति के समग्र लक्षण-समूह के आधार पर किया जाता है।

इसलिए Lycopodium की असली पहचान सिर्फ इसकी कहानी में नहीं, बल्कि इसके विशिष्ट Materia Medica picture में छिपी है। 🌿

इतिहास, लोकविश्वास और होम्योपैथी—Lycopodium की कहानी वास्तव में बेहद दिलचस्प है।

18/08/2026

"लाखों कोशिशों और महंगी क्रीमों के बाद भी चेहरे के दाग-धब्बे नहीं जा रहे? तो यह पोस्ट सिर्फ आपके लिए है!"

Berberis aquifolium का पौधा मूल रूप से उत्तरी अमेरिका के जंगलों में पाया जाता है। इसे वहां Oregon Grape कहा जाता है। सदियों पहले वहां के मूल निवासी इस पौधे की छड़ और जड़ों का इस्तेमाल त्वचा की समस्याओं, पेट की खराबी और खून को साफ करने के लिए करते थे।

जब आधुनिक वनस्पतिशास्त्री और चिकित्सक उत्तरी अमेरिका पहुंचे, तो उन्होंने वहां के आदिवासियों को इस पौधे के चमत्कारी गुणों का इस्तेमाल करते देखा। इसके बाद होम्योपैथी के विकास के दौरान इस पर वैज्ञानिक अध्ययन किए गए।

होम्योपैथी में जब इसके क्लिनिकल परीक्षण किए गए, तो यह पाया गया कि यह त्वचा के नीचे जमे टॉक्सिन्स को बाहर निकालकर ब्लड को प्यूरीफाई करता है। तभी से इसे होम्योपैथी में चेहरे के रंग-रूप को निखारने, दाग-धब्बे और मुँहासों (Acne & Pimples) को ठीक करने वाली सबसे बेहतरीन मदर टिंचर (Q) दवा के रूप में स्थापित किया गया।

"यह पोस्ट उन दोस्तों के साथ जरूर Share करें जो पिंपल्स या डल स्किन से परेशान हैं, और ऐसे ही नेचुरल टिप्स के लिए पेज को Follow करना न भूलें!"

क्या आप जानते हैं कि बॉलीवुड के शोमैन राज कपूर का होम्योपैथी से एक खास रिश्ता था ?कहा जाता है कि एक समय वे अस्थमा और एलर...
17/08/2026

क्या आप जानते हैं कि बॉलीवुड के शोमैन राज कपूर का होम्योपैथी से एक खास रिश्ता था ?

कहा जाता है कि एक समय वे अस्थमा और एलर्जी से इतने परेशान थे कि कई तरह के उपचार के बाद भी उन्हें राहत नहीं मिल रही थी। लगातार बिगड़ती तबीयत ने उनकी चिंता बढ़ा दी थी।

इसी दौरान उनकी मुलाकात प्रसिद्ध होम्योपैथ डॉ. जुगल किशोर से हुई।

शुरुआत में राज कपूर को भरोसा नहीं था कि छोटी-सी मीठी गोलियाँ उनकी मदद कर सकती हैं। लेकिन परिस्थितियों ने उन्हें यह उपचार अपनाने के लिए प्रेरित किया।

इसके बाद उनकी सेहत में धीरे-धीरे सुधार होने लगा। कहा जाता है कि इस अनुभव ने उन्हें होम्योपैथी के प्रति सकारात्मक बना दिया।

क्या आपने यह कहानी पहले सुनी थी? अपनी राय कमेंट में ज़रूर बताइए।

17/08/2026

क्या आपने कभी सोचा है कि परियों के दस्ताने पहनने वाले फूलों से 'दिल' की धड़कनें संभल सकती हैं? 🧚❤️

जी हाँ, हम बात कर रहे हैं दिल के मरीजों के लिए वरदान साबित होने वाली रहस्यमयी होम्योपैथिक दवा 'डिजिटेलिस' (Digitalis) की! आइए, इसके जादुई पौराणिक सफर से लेकर डॉ. हैनिमैन की क्रांतिकारी खोज तक का रोमांचक सफर जानते हैं:

🧚 यूरोपीय लोककथाओं में इस पौधे के घंटानुमा खूबसूरत फूलों को 'फेयरिज ग्लोव' यानी परियों के दस्ताने कहा जाता था। लोग मानते थे कि इनमें जादुई शक्तियां छिपी हैं!

☠️ सदियों पहले इस पौधे का उपयोग हृदय रोगों में होता था, लेकिन इसकी भयंकर विषैली (Toxic) प्रकृति के कारण लोग इसके नाम से भी थर-थर कांपते थे।

🌿 18वीं शताब्दी में ब्रिटिश डॉक्टर विलियम विदरिंग ने इसकी खुराक का हिसाब लगाकर इसे पहली बार दुनिया के सामने वैज्ञानिक पहचान दिलाई।

🔬 होम्योपैथी के मसीहा डॉ. सैमुअल हैनिमैन ने इस खतरनाक जहर को चुनौती दी और 'समानता के नियम' (Like Cures Like) के तहत इसका गहन अध्ययन किया।

⚗️ हैनिमैन साहब ने अपनी खास 'पोटेंशिएटिंग' (सूक्ष्मानीकरण) विधि से इसके सारे विषैले प्रभाव खत्म कर दिए और इसे मरीजों के लिए एक अचूक अमृत बना डाला!

💓 होम्योपैथी में आज Digitalis कमजोर नाड़ी, अनियमित दिल की धड़कन और गंभीर सूजन (ड्रॉप्सी) जैसी समस्याओं में सीधा जीवन बचाने का काम करती है।

प्रकृति के एक जहरीले पौधे को होम्योपैथी ने कैसे इंसान के लिए जीवनरक्षक बना दिया—यही है होम्योपैथिक विज्ञान का असली जादू! ✨

दिलचस्प कहानियों और सेहत के ऐसे ही अनोखे सफर से जुड़े रहने के लिए हमारे पेज को Like और Follow करना न भूलें!

15/08/2026

बच्चों के दाँत निकलने के समय होने वाली परेशानियों से राहत पाने के लिए भरोसेमंद होम्योपैथिक दवा— BC 21

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Semari Road Kurebhar
Sultanpur
228151

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Wednesday 10am - 7pm
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