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21/04/2026

पान ( Betel Leaf ) एक बारहमासी औषधीय बेल वाला पौधा है, इस बेल के कई स्वास्थ्य लाभ भी हैं क्योंकि इसके पत्तों में एंटीसेप्टिक, एंटीफंगल और एंटी इन्फ्लेमेटरी गुण पाए जाते हैं जो सांस संबंधी समस्याओं में राहत देने, जोड़ों के दर्द को कम करने और शरीर डिटॉक्स करने में सहायक होते हैं और इसके अलावा पान को पूजा पाठ में भी इस्तेमाल किया जाता है।

✅ गमले में पान उगने का सही तरीका
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पान का पौधा लगाने के लिए वसंत और बरसात का मौसम सबसे अच्छा होता है क्योंकि इस समय मिट्टी में नमी और गर्मी का संतुलन पौधे की तेज वृद्धि में मदद करता है इसे लगाने के लिए 12–15 इंच गहराई वाला चौड़ा गमला चुने जिसमें जल निकासी छेद हो।

मिट्टी तैयार करने के लिए –
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50% गार्डन की मिट्टी
30% गोबर की खाद या वर्मी कंपोस्ट
20% रेत ( बालू )

पान की बेल को आसानी से कटिंग के माध्यम से लगाया जा सकता है कटिंग में चार से पांच घंटे होनी चाहिए और इसे मिट्टी में काम से कम 2 से 3 इंची गहराई तक मिट्टी में दबा दें, फिर इसको शुरुआती दिनों में किसी बड़े पेड़ की छायादार वाली जगह पर रखें और रोज हल्का पानी दे जिससे पौधा जल्दी जड़ पकड़ ले।

✅ पान के पौधे की देखभाल का आसान तरीका–

◾पान को हमेशा इनडायरेक्ट सनलाइट में रखें सीधी धूप से हमेशा बचाए सीधी धूप इसके पत्ते को जला देती है।

◾मिट्टी में हल्की नमी बनाए रखें लेकिन ओवर-वाटरिंग से बचे।

◾पत्तियों पर हर 15 से 20 दिन में पानी का छिड़काव करें ताकि पत्ते चमकदार बने रहे।

◾बेल को सहारा देने के लिए लकड़ी या जाल लगाए जिससे की पौधा ऊपर की ओर तेजी से ग्रोथ कर सके।

◾हर महीने गोबर की खाद या वर्मी कंपोस्ट डालें और समय-समय पर मिट्टी की गुड़ाई करते रहें।

◾कीट पतंग से पौधे को बचाने के लिए नीम की खली का गोल महीने में एक बार डालें।

◾सर्दियों में बेल को घर के अंदर रखें ताकि ठंडी हवा से नुकसान ना हो और पौधा मुरझाए ना।

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19/04/2026

मकोय एक जंगली लेकिन बेहद गुणकारी औषधीय पौधा है। संस्कृत में इसे काकमाची और कई जगहों पर भटकोइया कहा जाता है। यह भारत के लगभग हर क्षेत्र में अपने-आप उग जाता है — खेतों की मेड़ों, बगीचों, खाली प्लॉट और सड़क किनारे भी आसानी से दिखाई दे जाता है। इसे विशेष देखभाल की जरूरत नहीं होती, फिर भी यह औषधीय गुणों से भरपूर होता है।

🌱 मकोय के प्रमुख लाभ👇

1️⃣ दिल की सेहत के लिए सहायक
मकोय में प्राकृतिक एंटीऑक्सीडेंट और पोषक तत्व पाए जाते हैं, जो हृदय को स्वस्थ रखने में मदद करते हैं। यह रक्त प्रवाह को संतुलित रखने में सहायक माना जाता है।

2️⃣ इम्यूनिटी को मजबूत बनाए
इसके पौष्टिक तत्व शरीर की रोगों से लड़ने की क्षमता को बढ़ाते हैं। बदलते मौसम में होने वाली सामान्य समस्याओं से बचाव में यह उपयोगी माना जाता है।

3️⃣ बुखार व त्वचा समस्याओं में उपयोगी
पारंपरिक रूप से इसके पत्तों और फलों का उपयोग बुखार तथा त्वचा से जुड़ी परेशानियों में किया जाता रहा है। इसका लेप त्वचा को ठंडक देने में सहायक होता है।

4️⃣ पाचन तंत्र को दे मजबूती
मकोय पाचन क्रिया को संतुलित रखने में मदद करता है। गैस, कब्ज और अपच जैसी दिक्कतों में आयुर्वेद में इसका उल्लेख मिलता है।

5️⃣ लीवर के लिए लाभकारी
आयुर्वेदिक ग्रंथों में मकोय को यकृत के लिए हितकारी बताया गया है। यह लीवर की कार्यप्रणाली को समर्थन देने में सहायक माना जाता है।

6️⃣ सूजन व मूत्र संबंधी समस्याओं में सहायक
इसमें हल्के मूत्रवर्धक गुण पाए जाते हैं, जो शरीर से अतिरिक्त द्रव बाहर निकालने में मदद कर सकते हैं।

7️⃣ गले और श्वसन तंत्र के लिए उपयोगी
परंपरागत चिकित्सा में मकोय का काढ़ा खांसी और गले की खराश में लाभदायक माना गया है।

🌿 मकोय का पारंपरिक उपयोग
🔹 पके फल – पूरी तरह पके काले फलों का सीमित मात्रा में सेवन किया जाता है।
🔹 काढ़ा – पत्तियों या फलों को पानी में उबालकर बनाया गया काढ़ा पारंपरिक उपचार में प्रयोग होता है।
🔹 चूर्ण – सूखे पत्तों का पाउडर बनाकर गुनगुने पानी के साथ लिया जाता है।
🔹 तेल – बीजों से प्राप्त तेल का उपयोग बालों की देखभाल में किया जाता है।

🌿 मकोय सचमुच प्रकृति की एक खास देन है। दिखने में साधारण, लेकिन आयुर्वेद में इसका महत्वपूर्ण स्थान है। अगर आप अपने गार्डन में औषधीय पौधों का संग्रह बढ़ा रहे हैं, तो मकोय को भी जगह दे सकते हैं।

⚠️ नोट: किसी भी औषधीय पौधे का उपयोग करने से पहले आयुर्वेदिक विशेषज्ञ या चिकित्सक की सलाह अवश्य लें, क्योंकि कच्चे या अधिक मात्रा में सेवन से हानि भी हो सकती है

17/04/2026

निरंजन फल (Niranjan Phal), जिसे मालवा नट (Malva Nut) या चाइना फ्रूट भी कहा जाता है, का वानस्पतिक नाम Sterculia lychnophora है। यह आयुर्वेद और पारंपरिक चीनी/वियतनामी चिकित्सा में एक महत्वपूर्ण जड़ी-बूटी/फल के रूप में इस्तेमाल होता है। यह प्राकृतिक रूप से शीतलक (cooling), सूजन कम करने वाला, कसैला (astringent), एंटी-इंफ्लेमेटरी और डिटॉक्सिफाइंग गुणों से भरपूर होता है। फल पानी में भिगोने पर फूल जाता है और जेल जैसा गूदा बन जाता है, जो पेट और गले को आराम देता है।

निरंजन फल के मुख्य औषधीय उपयोग
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यह मुख्य रूप से पित्त दोष को संतुलित करने और शरीर की आंतरिक गर्मी कम करने के लिए जाना जाता है। इसके प्रमुख फायदे निम्न हैं:

♦️बवासीर (Piles/Hemorrhoids): खून आने, सूजन और दर्द में रामबाण। यह आंतों की सूजन कम करता है और मल को नरम बनाता है।

♦️अत्यधिक रक्तस्राव (Excessive Bleeding): गर्भाशय से होने वाले भारी मासिक धर्म (heavy periods), अल्सर या अन्य रक्तस्राव को रोकने में मदद करता है।

♦️पाचन संबंधी समस्याएं: कब्ज, अपच, गैस, एसिडिटी, अल्सर, कोलाइटिस (ulcerative colitis) और IBS में राहत। यह आंतों को आराम देता है और detox करता है।

♦️गले की समस्याएं: गले में खराश, सूजन, टॉन्सिलाइटिस, खांसी, कफ और गले के संक्रमण में सुखदायक। जेल जैसा पानी धीरे-धीरे पीने से राहत मिलती है।

♦️त्वचा संबंधी फायदे: शरीर से विषाक्त पदार्थ निकालकर मुंहासे, फोड़े-फुंसी, एक्जिमा, चकत्ते और सोरायसिस जैसी समस्याओं में सुधार।

♦️अन्य फायदे: बुखार, साइनस, दमा, वजन नियंत्रण, ब्लड शुगर और ब्लड प्रेशर में सहायक। यह इम्यूनिटी बढ़ाता है, नींद सुधारता है और शरीर को ठंडक प्रदान करता है।

✍️सावधानी: यह शीतलक है, इसलिए ठंडे प्रकृति वाले लोग कम मात्रा में लें। अधिक मात्रा से दस्त या पेट दर्द हो सकता है। गर्भवती महिलाएं, स्तनपान कराने वाली माताएं या कोई गंभीर बीमारी वाले डॉक्टर/आयुर्वेदिक वैद्य से सलाह लेकर ही इस्तेमाल करें।

निरंजन फल के सरल घरेलू नुस्खे
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🕳️बवासीर और कब्ज के लिए:
रात को 1 निरंजन फल को आधे गिलास पानी में भिगोकर रखें।
सुबह खाली पेट उसी पानी में फल को अच्छे से मसलें (यह फूलकर जेल जैसा हो जाता है), बीज निकालकर पानी पी लें।
2-3 सप्ताह तक रोज करें। खून आना और सूजन कम होती है।

🕳️अत्यधिक मासिक रक्तस्राव या गर्भाशय ब्लीडिंग के लिए:
रात को 1 फल 1 कप पानी में भिगोएं।
सुबह खाली पेट मसलकर पानी पीएं। यह रक्तस्राव को नियंत्रित करता है।

🕳️गले की खराश, खांसी या टॉन्सिल के लिए:
1 फल पानी में भिगोकर उसका जेल जैसा पानी धीरे-धीरे चुस्कियों में पिएं।
दिन में 1-2 बार। यह गले को ठंडक और नमी देता है।
एसिडिटी, अल्सर या पेट की गर्मी के लिए:
1 फल भिगोकर सुबह का पानी पिएं। या फल को उबालकर काढ़ा बनाकर पिएं।

🕳️त्वचा के लिए (बाहरी उपयोग):
भिगोए हुए फल के गूदे को मुल्तानी मिट्टी या गुलाबजल के साथ मिलाकर फेस पैक बनाएं। 10 मिनट लगाकर धो लें। मुंहासे और चकत्तों में फायदा।

अन्य जड़ी-बूटियों के साथ संयुक्त नुस्खे
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निरंजन फल को अन्य जड़ी-बूटियों के साथ मिलाकर प्रभाव बढ़ाया जा सकता है। ये पारंपरिक आयुर्वेदिक संयोजन हैं

🌹बवासीर और पाचन के लिए हल्दी के साथ:
1 निरंजन फल भिगोएं। सुबह मसलकर पानी में आधा चम्मच हल्दी मिलाकर पिएं।
हल्दी की एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटीसेप्टिक गुण सूजन और संक्रमण कम करते हैं। रोज 7-10 दिन।

🌹गले की समस्या और खांसी के लिए अदरक या मुलेठी के साथ:
निरंजन फल का भिगोया पानी + थोड़ा अदरक का रस या मुलेठी का काढ़ा मिलाकर पिएं।
यह कफ निकालने और गले को शांत करने में बेहतर काम करता है। दिन में 2 बार।

🌹मासिक धर्म अनियमितता या भारी ब्लीडिंग के लिए अशोका या शतावरी के साथ:
निरंजन फल का पानी + अशोका छाल या शतावरी पाउडर (1/4 चम्मच) मिलाकर पिएं।
यह महिलाओं की समस्याओं में हार्मोनल बैलेंस और रक्तस्राव नियंत्रण में मदद करता है।

🌹अल्सर और कोलाइटिस के लिए एलोवेरा या आमला के साथ:
भिगोए फल का जेल + एलोवेरा जेल (1 चम्मच) या आमला पाउडर मिलाकर लें।
यह पेट की आंतरिक सूजन और अल्सर को ठीक करने में सहायक है।

🌹डिटॉक्स और त्वचा के लिए नीम या त्रिफला के साथ:
निरंजन फल का पानी + थोड़ा नीम पत्ती का काढ़ा या त्रिफला चूर्ण मिलाकर पिएं।
शरीर से गर्मी और विष निकालकर त्वचा साफ करता है।

🌹सामान्य शीतलक पेय (गर्मी में):
निरंजन फल का जेल + गुलाबजल या सौंफ मिलाकर ठंडा करके पिएं। यह शरीर को ठंडक देता है और पाचन सुधारता है।

🌹उपयोग की विधि सामान्य:
फल को अच्छे से धोकर एयरटाइट डिब्बे में रखें।
हमेशा साफ पानी में भिगोएं। पाउडर या काढ़ा रूप में भी उपलब्ध होता है।
सामान्य डोज: 1 फल रोज (भिगोकर) या वैद्य के अनुसार 1-2 ग्राम पाउडर।

स्वस्थ रहने की कामना 🙏
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धन्यवाद!

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