04/01/2022
*जीवन का भय*
डर इंसान को मारता है और आत्मा विश्वास (जिजीविषा) इंसान को संघर्ष करने के लिए प्रेरित करते हैं। माइकल जैकसन के अंदर मरने बूढ़े होने का डर था। इसलिए उसने अपने आसपास इतने डॉक्टर और हेल्थ प्रोफेशनलिस्ट रखें। यह 50 वर्ष की उम्र में दुनिया को अलविदा कर गया जो औसत आयु से भी कम है।
कल एक व्यक्ति से मेरी बात हुई और वह अपने पास बीपी , कोलेस्ट्रॉल, पेन किलर जैसी कई दवाइयां रखते हैं, जबकि उसे वह बीमारी नहीं है। उसके जीवन के प्रति डर का फायदा उसके अपने साथी रिश्तेदार उठाते हैं।
किसी बीमारी या हानि का अनुचित भय है। वह इंसान को कमजोर कर देता है। मृत्यु से पहले मृत्यु का भय ज्यादा खौफनाक होता है। हमारी संस्कृति तो मृत्यु महोत्सव की मृत्यु के बाद अमर होने की है। जीवन को जिस आनंद से जीते हैं उतने ही आनंद से मृत्यु को भी जिया जाता है। भीष्मपितामह को मृत्यु शैया पर मृत्यु का इंतजार करते हुए देखा जा सकता है वैसे ही विभिन्न धर्मों के साधू सन्यासियों द्वारा संथारा ( समाधि, सल्लेखना) मृत्यु महोत्सव के रूप में लेते हैं। हमारा पूरा जीवन मृत्यु के आनंद का एक प्रयास ही तो है। जब जीवन में यथोचित कर्म को पूरा इमानदारी से नहीं कर पाते हैं तो हमें हमारा मोह , लालसा मृत्यु से भयभीत करती है। जीवन को भी मृत्यु के भय से नष्ट कर देते हैं। गुलामी का सफर चलता रहता है।
Payal jain
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