18/07/2026
गोरखपुर की शहरी जनता अपने विधायक-मुख्यमंत्री के ‘लोकल डबल इंजन’ से पूछ रही है कि तथाकथित स्मार्ट सिटी बनाने के नाम पर अरबों के जिस फ़ंड का ख़र्चा काग़ज़ों में दिखाया गया है, वो कौन डकार गया।
दूसरों को आँख बंद करके ‘शासन-प्रशासन’ के नाम पर कोसनेवालों ने अब क्या अपनी आँखें बंद कर ली हैं? माननीय को चिराग तले का अंधेरा नहीं दिखता है तो कम-से-कम चिराग़ तले का पानी ही देख लें।
अब क्या वो अपने क्षेत्र के शिकायत करनेवालों पर भी अपने कटु वचनों की भड़ास निकालेंगे। इनकी कड़वाहट देखकर तो करेला भी शर्मा जाता है।
सबसे पहले जल भराव के पीड़ितों के लिए भोजन-पानी, दैनिक ज़रूरतों के सामानों, दवाइयों व रैन बसेरे का इंतज़ाम किया जाए। हम जलमग्न क्षेत्रों में हुई जनता की हानि की भरपाई की माँग करते है। महंगाई व बेरोज़गारीजन्य *‘मंदी, भ्रष्ट जीएसटी तंत्र तथा भाजपाई वसूली’* से जूझते व्यापारियों की हालत वैसे ही बहुत जर्जर है, अब जलभराव के कारण वो अपने माल की हानि बर्दाश्त करने की स्थिति में नहीं है। कारोबारियों को बिना किसी भेदभाव के, ईमानदारी से मुआवज़ा दिया जाए। सरकार के भ्रष्टाचार का ख़ामियाज़ा जनता या दुकानदार भाई क्यों भुगतें? साथ ही हमारी माँग ये भी है कि जलभराव के बाद आनेवाली बीमारियों से भी बचाव के उपाय किये जाएं व सफ़ाई अभियान युद्ध स्तर पर चलाया जाए।
अब क्या वो गोरखपुर का नाम भी बदलकर ‘जलनगरी’ रखनेवाले हैं? अब तो साबित हो गया है कि माननीय जापान किसी और की ख़ोज में गये थे न कि सिटी प्लानिंग जैसा कोई अनुभव लेने, नहीं तो गोरखपुर की ये दुर्गति न होती।
*इस बार भाजपा के हाथ से गोरखपुर भी गया!*