09/06/2026
खाने में तेल का उपयोग हमारी सेहत पर सीधे प्रभाव डालता है। विशेषज्ञों का कहना है कि तेल का सेवन सोच-समझकर और संतुलित मात्रा में ही करना चाहिए। खासकर भारतीय भोजन में जहां रोज दाल और सब्जी बनती हैं, वहां सब्जी बनाने में इस्तेमाल होने वाले तेल का चुनाव स्वास्थ्य के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण होता है।
खाद्य तेल मुख्य रूप से वसा अम्ल (Fatty Acids) से बने होते हैं, जो तीन प्रकार के होते हैं—
संतृप्त वसा (Saturated Fatty Acids - SFA): अधिक मात्रा में सेवन करने से यह हृदय रोगों का खतरा बढ़ा सकते हैं।
असंतृप्त वसा (Unsaturated Fatty Acids): संतृप्त वसा की तुलना में हृदय-स्वास्थ्य के लिए अधिक अनुकूल मानी जाती हैं। इसमें दो प्रकार आते हैं:
•मोनो-अनसैचुरेटेड फैट (MUFA)
• पॉली-अनसैचुरेटेड फैट (PUFA)
ट्रांस फैट (Trans Fatty Acids): यह अत्यंत हानिकारक होता है और हृदय रोग, कोलेस्ट्रॉल बढ़ने, मोटापा आदि का कारण बन सकता है।
सामान्यतः असंतृप्त वसा (Unsaturated Fat), संतृप्त वसा (Saturated Fat) की तुलना में स्वास्थ्य के लिए बेहतर मानी जाती है। इन दोनों का तुलनात्मक प्रभाव देखें तो संतृप्त वसा LDL (खराब कोलेस्ट्रॉल) बढ़ा सकती है जबकि असंतृप्त इसे
कम करने में मदद कर सकती है। HDL (अच्छा कोलेस्ट्रॉल) को संतृप्त वसा थोड़ा बढ़ा सकती है जबकि असंतृप्त इसे सामान्यतः बनाए रखती है। हृदय रोग जोखिम संतृप्त वसा से अधिक मात्रा में बढ़ सकता है जबकि असंतृप्त वसा हृदय जोखिम कम करने से जुड़ी मानी जाती है। संतृप्त वसा से सूजन (Inflammation) कुछ स्थितियों में बढ़ सकती है जबकि कई असंतृप्त वसाएं सूजन कम करने से जुड़ी हैं। इसलिए संतृप्त वसा को आहार में प्राथमिकता सीमित मात्रा में देनी चाहिए और असंतृप्त वसा प्राथमिक स्रोत के रूप में बेहतर होती है।
इसका मतलब यह भी नहीं है कि संतृप्त वसा खराब है। संतृप्त वसा अपने-आप में आवश्यक पोषक तत्व नहीं है, क्योंकि शरीर इसे बना सकता है। फिर भी घी, दूध और दही जैसे खाद्य पदार्थ अन्य उपयोगी पोषक तत्व भी प्रदान करते हैं। समस्या तब होती है जब इसका सेवन बहुत अधिक हो और असंतृप्त वसा की जगह ले ले।
संतृप्त वसा के स्रोत हैं घी, मक्खन, पनीर, नारियल तेल, लाल मांस और फुल-फैट डेयरी उत्पाद। जबकि जैतून का तेल (Olive oil), मूंगफली का तेल, सरसों का तेल, तिल का तेल, अलसी (Flaxseed), अखरोट, बादाम और वसायुक्त मछलियाँ असंतृप्त वसा के स्रोत हैं।
मोनो-अनसेचुरेटूड फैट (Monounsaturated Fat, MUFA) वह है जिसमें एक डबल बॉन्ड होता है। उदाहरण के लिए जैतून तेल, मूंगफली तेल, एवोकाडो। जबकि पॉली-अनसैचुरेटेड फैट (Polyunsaturated Fat PUFA) में कई डबल बांड होते हैं। उदाहरण के लिए ओमेगा-3 और ओमेगा-6। ओमेगा-3 के प्रमुख स्रोत अलसी (Flaxseed), चिया सीड्स, अखरोट और वसायुक्त मछलियाँ (सैल्मन, सार्डिन, मैकेरल) हैं जबकि
ओमेगा-6 के प्रमुख स्रोत सूरजमुखी तेल, सोयाबीन तेल, मक्का (Corn) तेल, तिल और कई बीज हैं।
स्वास्थ्य केवल तेल के प्रकार पर निर्भर नहीं करता। निम्न कारक अक्सर अधिक महत्वपूर्ण होते हैं-
•कुल कैलोरी सेवन
•अल्ट्रा-प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों का सेवन
•फाइबर की मात्रा
•फल और सब्जियों का सेवन
•धूम्रपान
•शारीरिक गतिविधि
•शरीर का वजन
कई बार लोग "स्वस्थ तेल" चुन लेते हैं लेकिन अत्यधिक मात्रा में उपयोग करके कुल कैलोरी बहुत बढ़ा देते हैं जो सही नहीं है।
निष्कर्ष यह निकलता है कि
•अधिकांश वयस्कों में कुल वसा का सेवन दैनिक कैलोरी का लगभग 20–35% होना चाहिए। 2000 कैलोरी के आहार में यह लगभग 44–78 ग्राम प्रतिदिन के बराबर है।
•वसा की आवश्यकता आयु, लिंग, वजन और कुल कैलोरी पर निर्भर करती है।
•तेल को बार-बार गर्म करके पुनःउपयोग न करें, इससे विषैले यौगिक बन सकते हैं।
•कोल्ड-प्रेस्ड और कच्चे (unrefined) तेल स्वास्थ्य के लिए अधिक उपयोगी हो सकते हैं, क्योंकि कोल्ड-प्रेस्ड और अनरिफाइंड तेलों में कुछ प्राकृतिक एंटीऑक्सीडेंट और सूक्ष्म पोषक तत्व अधिक बचे रह सकते हैं।
•यदि आहार विविध है और उसमें पर्याप्त MUFA तथा ओमेगा-3 शामिल हैं, तो तेल बदलना अनिवार्य नहीं है। हालांकि विभिन्न तेलों का उपयोग करने से विभिन्न प्रकार के फैटी एसिड प्राप्त हो सकते हैं।
इस बारे में किसी तरह की शंका या प्रश्न या फिर कोई नई जानकारी हो तो बिना संकोच कमेंट करें। परामर्श/इलाज के इच्छुक व्यक्तिगत व्हाट्सएप पर संपर्क (फोन न करें) करें। फेसबुक पर इलाज असंभव है।
🩺💊🧬🦠🩸💉🩸🦠🧬💊🩺